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  • विद्या की देवी का आशीष: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बसंत पंचमी पर प्रदेशवासियों को दीं मंगलकामनाएं

    विद्या की देवी का आशीष: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बसंत पंचमी पर प्रदेशवासियों को दीं मंगलकामनाएं


    भोपाल। ऋतुराज बसंत के आगमन और ज्ञान, कला एवं संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना के महापर्व ‘बसंत पंचमी’ के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस पावन पर्व पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और नागरिकों के बौद्धिक उत्कर्ष की मंगलकामना की है।

    अपने शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसंत पंचमी का यह उत्सव हमारे जीवन में नवीन ऊर्जा और नई चेतना का संचार करता है। उन्होंने विशेष रूप से प्रार्थना की कि अक्षर, स्वर और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की असीम कृपा हम सभी पर बनी रहे। मुख्यमंत्री ने कामना की कि मां शारदे का आशीर्वाद सभी के जीवन को अगाध ज्ञान, अद्भुत सृजनशीलता, अपार सुख और स्थायी समृद्धि से परिपूर्ण करे।

    मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ज्ञान ही वह प्रकाश है जो समाज को उन्नति के मार्ग पर ले जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि बसंत पंचमी का दिन हमें विद्या और शिक्षा के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देता है। मध्यप्रदेश की धरती, जो सदा से ही ज्ञान और अध्यात्म का केंद्र रही है वहां यह पर्व नई ऊंचाइयों को छूने का संकल्प लेने का अवसर है।

    राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश के शिक्षण संस्थानों और घरों में आज सुबह से ही उल्लास का माहौल है। बसंती परिधानों और पीले फूलों के साथ मां सरस्वती का पूजन अर्चन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की इन शुभकामनाओं ने उत्सव के आनंद को और बढ़ा दिया है जो प्रदेश की सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान करती हैं।

  • बसंत पंचमी पर मीन राशि में प्रवेश करेगा चंद्रमा, तीन राशियों पर बरसेगी मां सरस्वती की कृपा

    बसंत पंचमी पर मीन राशि में प्रवेश करेगा चंद्रमा, तीन राशियों पर बरसेगी मां सरस्वती की कृपा


    नई दिल्ली :ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन भावनाओं और बुद्धि का कारक ग्रह माना गया है। इसकी चाल भले ही तेज हो लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा और त्वरित होता है। इस वर्ष बसंत पंचमी के पावन अवसर पर चंद्रमा एक महत्वपूर्ण राशि परिवर्तन करने जा रहा है। 23 जनवरी 2026 की सुबह 8 बजकर 34 मिनट पर चंद्रमा शनि की राशि कुंभ से निकलकर गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा।

    ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर बेहद शुभ माना जा रहा है क्योंकि मीन राशि ज्ञान आध्यात्म और रचनात्मकता की प्रतीक मानी जाती है। बसंत पंचमी स्वयं विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित पर्व है और ऐसे में चंद्रमा का मीन राशि में प्रवेश विशेष फलदायी माना जा रहा है। इस गोचर का प्रभाव खासतौर पर शिक्षा कला लेखन संगीत शोध और करियर से जुड़े लोगों पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा।ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस चंद्र गोचर से तीन राशियों पर मां सरस्वती की विशेष कृपा बनी रहेगी। इन राशियों के जातकों को मानसिक स्पष्टता नई सोच और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि के जातकों के लिए चंद्रमा का यह गोचर लाभ भाव में होगा। इससे आय में वृद्धि और करियर में सकारात्मक बदलाव के योग बन रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है और कुछ लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी भी मिल सकती है। व्यापार से जुड़े जातकों के लिए यह समय नए सौदे और लाभ के अवसर लेकर आ सकता है। विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ेगी और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को नई पहचान मिल सकती है।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए चंद्रमा पंचम भाव में गोचर करेगा जो शिक्षा बुद्धि और प्रेम का भाव माना जाता है। इस दौरान मानसिक स्पष्टता बढ़ेगी और लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। करियर में भी स्थितियां अनुकूल रहेंगी और यात्रा से लाभ के योग बनेंगे।

    धनु राशि
    धनु राशि के जातकों के लिए चंद्रमा चतुर्थ भाव में प्रवेश करेगा जो सुख परिवार और मानसिक शांति का कारक है। पारिवारिक जीवन में सौहार्द बना रहेगा और माता पिता का सहयोग मिलेगा। करियर में भी सकारात्मक बदलाव संभव हैं। शिक्षा कला और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को मान सम्मान मिलने के योग हैं। मां सरस्वती की कृपा से सीखने की क्षमता और एकाग्रता में वृद्धि होगी।कुल मिलाकर बसंत पंचमी पर होने वाला यह चंद्र गोचर ज्ञान बुद्धि और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने वाला सिद्ध हो सकता है।

  • रायपुर में शब्दों का महाकुंभ: 'आदि से अनादि तक' थीम के साथ रायपुर साहित्य उत्सव 2026 शुरू

    रायपुर में शब्दों का महाकुंभ: 'आदि से अनादि तक' थीम के साथ रायपुर साहित्य उत्सव 2026 शुरू

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर आज से देश भर के जाने-माने शब्द-साधकों और बुद्धिजीवियों के जमावड़े का केंद्र बन गई है। शुक्रवार को बसंत पंचमी के पावन और शुभ अवसर पर रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य आगाज हुआ। आदि से अनादि तक की बेहद गहरी और प्रासंगिक केंद्रीय थीम पर आधारित इस तीन दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ का शुभारंभ अतिथियों द्वारा ज्ञान की देवी मां सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

    नया रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन के खुले और कलात्मक वातावरण में आयोजित यह महोत्सव अपनी ऐतिहासिकता और आधुनिकता के संगम के कारण पहले ही दिन चर्चा में आ गया है। 23 जनवरी से शुरू होकर 25 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और देश की व्यापक साहित्यिक परंपराओं का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है। आयोजन स्थल की सजावट और साहित्यिक सत्रों की रूपरेखा ने राजधानी के साहित्यिक प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित किया है।

    इस तीन दिवसीय उत्सव की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देशभर से 120 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिग्गज कवि, मर्मज्ञ लेखक अनुभवी पत्रकार, प्रखर शिक्षाविद और चिंतक सहभागिता कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान वक्ताओं ने आदि से अनादि तक विषय की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि साहित्य ही वह सेतु है जो हमारी आदिम जड़ों को अनंत भविष्य से जोड़ता है।

    अगले दो दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन के विभिन्न मंचों पर कविता पाठ, कहानी चर्चा, वैचारिक विमर्श छत्तीसगढ़ी साहित्य का भविष्य और पत्रकारिता की चुनौतियों जैसे विषयों पर गहन संवाद होगा। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के मंच न केवल स्थापित लेखकों को जगह देते हैं, बल्कि नए उभरते रचनाकारों को भी एक नई दृष्टि प्रदान करते हैं। वसंत की बयार के बीच शुरू हुए इस उत्सव ने रायपुर को साहित्यिक चेतना से सराबोर कर दिया है।

  • धार की भोजशाला में आस्था का संगम: बसंत पंचमी पर अखंड पूजन और जुमे की नमाज के बीच सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम

    धार की भोजशाला में आस्था का संगम: बसंत पंचमी पर अखंड पूजन और जुमे की नमाज के बीच सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम


    धार । मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले धार जिले में आज बसंत पंचमी के पावन पर्व पर एक अनूठा और संवेदनशील दृश्य देखने को मिल रहा है। मां वाग्देवी (सरस्वती) की आराधना और धार्मिक सद्भाव की चुनौती के बीच, भोजशाला परिसर में सूर्योदय के साथ ही हिंदू पक्ष द्वारा अखंड पूजा का अनुष्ठान प्रारंभ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के पालन में प्रशासन ने एक ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की है, जहां एक ओर मंत्रोच्चार की गूंज है, तो दूसरी ओर नमाज की शांतिपूर्ण अदायगी के लिए समय निर्धारित किया गया है।

    सूर्योदय की पहली किरण के साथ ही हिंदू समुदाय के श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष शीश नवाया। गुरुवार रात से ही भोजशाला में उत्सव का माहौल बन गया था, जब पूरी श्रद्धा के साथ मां वाग्देवी के चित्र को परिसर के भीतर स्थापित किया गया। आज सुबह से ही यहां महाआरती, धर्मसभा और भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जा रहा है, जो सूर्यास्त तक अनवरत जारी रहेगा। श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है और पूरा क्षेत्र ‘जय सरस्वती माता’ के उद्घोष से गुंजायमान है।

    हालांकि, आज शुक्रवार होने के कारण स्थिति अधिक संवेदनशील है। न्यायिक निर्देशों के तहत, हिंदू समुदाय की अखंड पूजा के बीच ही दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मुस्लिम पक्ष को जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। इसके लिए प्रशासन ने परिसर के भीतर एक निश्चित स्थान और सीमित संख्या तय की है। नमाजियों और पूजा करने वालों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं, ताकि दोनों पक्षों के बीच किसी भी प्रकार का टकराव न हो और दोनों अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वाह बिना किसी व्यवधान के कर सकें।

    इस दोहरे आयोजन को देखते हुए धार शहर को पूरी तरह से एक अभेद्य छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा की कमान किसी किलेबंदी से कम नहीं है, जहां 8000 से अधिक पुलिसकर्मी चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं। सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 13 एसपी रेंज के अधिकारियों के साथ 25 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 67 एसडीओपी और 107 नगर निरीक्षकों की फौज तैनात है। इसके अतिरिक्त, आरएएफ की 8 प्लाटून और सीआरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है। महिला पुलिसकर्मियों की भी भारी तैनाती की गई है ताकि भीड़ नियंत्रण में कोई चूक न हो।

    प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अक्षरशः पालन करा रहे हैं। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। धार की यह धरा आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और आपसी समन्वय की एक बड़ी परीक्षा का केंद्र बनी हुई है। शाम तक चलने वाले इस अखंड पूजन और नमाज के शांतिपूर्ण समापन को लेकर पूरा प्रशासन मुस्तैद है, ताकि भोजशाला की ऐतिहासिक गरिमा और सामाजिक समरसता अक्षुण्ण बनी रहे।

  • बसंत पंचमी के दिन पीला क्यों पहनें: सरस्वती पूजा में रंग का महत्व और शुभ संकेत

    बसंत पंचमी के दिन पीला क्यों पहनें: सरस्वती पूजा में रंग का महत्व और शुभ संकेत

    नई दिल्ली। बसंत पंचमी का त्योहार हर साल ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होकर मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 23 जनवरी, 2026 को माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ रहा है। इस खास दिन पर लोग विधिवत पूजा अर्चना करते हैं और देवी सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। परंतु क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनने की परंपरा क्यों है और इसका महत्व क्या है? जानिए इस पवित्र दिन के पीछे के धार्मिक और सांस्कृतिक कारण।

    बसंत पंचमी का महत्व

    बसंत पंचमी वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है और इसे देवी सरस्वती की पूजा अर्चना के लिए मनाया जाता है। देवी सरस्वती ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मानी जाती हैं। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, उन्हें चार हाथों वाली देवी के रूप में दर्शाया गया है, जिनमें वेद, वीणा, सफेद कमल और माला होती है। देवी सरस्वती सृष्टि के मूल स्रोत और ब्रह्मांड की रचनात्मक शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस दिन उनके सामने पीले भोग और फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है।

    सरस्वती पूजा में पीले रंग का महत्व

    पीला रंग बसंत ऋतु और प्रकृति में बदलाव का प्रतीक है। यह ऊर्जा, प्रकाश और नई शुरुआत का रंग माना जाता है। इसलिए लोग इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं, पीले फूल चढ़ाते हैं और देवी को पीली साड़ी पहनाकर उनका पूजन करते हैं। पीले रंग का ज्ञान और शिक्षा से भी गहरा संबंध है, इसे गुरु बृहस्पति और अन्य ज्ञानदेवताओं के रंग के रूप में देखा जाता है। इस दिन पीला रंग पहनने से न केवल आध्यात्मिक लाभ होता है, बल्कि यह खुशी और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है।

    खुशी और आशीर्वाद का प्रतीक

    पीला रंग केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। यह उत्साह, आनंद और आशावाद का भी प्रतीक है। सरसों के खेतों की तरह खिले फूल, हल्दी से बनी मिठाइयाँ और भक्तों द्वारा पहने जाने वाले पीले कपड़े इस दिन की रौनक बढ़ाते हैं। इस दिन पीले रंग के माध्यम से मन में सकारात्मक ऊर्जा और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

    कैसे मनाएं बसंत पंचमी

    इस बसंत पंचमी पर अपने घर और मंदिरों को पीले फूलों से सजाएं, देवी को पीला भोग अर्पित करें और पीले रंग के कपड़े पहनें। इस अवसर पर माता सरस्वती से ज्ञान, संपन्नता और खुशहाली की प्रार्थना करें। नई किताबें पढ़ना, संगीत और कला में रुचि दिखाना भी इस दिन का महत्व बढ़ाता है। इस प्रकार, बसंत पंचमी सिर्फ पूजा का दिन नहीं, बल्कि ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है।

  • Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर ना करें ये गलतियां, सरस्वती मां को जरूर लगाएं ये भोग

    Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर ना करें ये गलतियां, सरस्वती मां को जरूर लगाएं ये भोग

    नई दिल्ली।  हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का त्योहार मां सरस्वती को समर्पित है। इस खास दिन पर मां को पूजा जता है। बता दें कि माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही इसे मनाते हैं। इस साल बसंत पचंमी 23 जनवरी के दिन मनाई जा रही है। शुक्रवार की वजह से इस बार बसंत पंचमी और भी खास होने वाली है। इस खास दिन पर अगर विधिवत रूप से मां सरस्वती की पूजा की गई तो वो ज्ञान और कला का वरदान देती हैं। इस दिन कुछ चीजों को करने की मनाही होती है। साथ ही बसंत पंचमी पर मां सरस्वती का भोग भी काफी मायने रखता है। ऐसे में इन चीजों के बारे में नीचे विस्तार से समझिए।

    बसंत पंचमी पर ना करें ये गलतियां
    बसंत पंचमी के दिन कुछ चीजों पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। इस दिन से ही बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। ऐसे में इस खास दिन पर कोई भी पेड़-पौधा कांटना-छाटना नहीं चाहिए। इस दिन फसल काटने को बेहद ही अशुभ माना जाता है। इस दिन लहसुन-प्याज हर तरह के तामसिक खाने से दूर रहना चाहिए। बसंत पंचमी पर सात्विक भोजन करना ही सही माना जाता है। कोशिश करें कि इस दिन मुंह से कुछ भी खराब ना कहें। इस दिन किसी से मत झगड़िए। इस दिन ध्यान रखें कि नहाने से पहले कुछ भी नहीं खाना है।

    मां सरस्वती को जरूर लगाएं ये भोग
    बसंच पंचमी के दिन मां सरस्वती का भोग ध्यान से लगाना चाहिए। इस खास दिन पर आप सरस्वती मां को पीले रंग के पकवान भोग में लगाना शुभ माना जाता है। भोग में घर का बना हुआ शुद्ध मालपुआ अर्पित कर सकते हैं। साथ में केसर खीर और बेसन लड्डू चढ़ाना भी काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि अगर सच्चे मन से मां को भोग लगाया जाए तो वो अपनी कृपा जरूर बरसाती हैं। पूजा के बाद भोग का वितरण जरूर करें।

  • Basant Panchami 2026: जानिए क्यों पहनते हैं पीला रंग और मां सरस्वती को समर्पित है यह त्योहार

    Basant Panchami 2026: जानिए क्यों पहनते हैं पीला रंग और मां सरस्वती को समर्पित है यह त्योहार


    नई दिल्ली। भारत को त्योहारों का देश कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। हर मौसम और महीने में कोई न कोई पर्व आता है। बसंत पंचमी जिसे श्री पंचमी या ज्ञान पंचमी भी कहते हैं बसंत ऋतु के स्वागत का पर्व है। यह दिन विद्या बुद्धि कला और वाणी की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस साल यह त्योहार 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के कपड़े पहनने की परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

    धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
    मां सरस्वती का प्रिय रंग पीला माना जाता है। यह रंग ज्ञान विवेक और सात्त्विकता का प्रतीक है। इसलिए इस दिन पीले वस्त्र धारण कर देवी को प्रसन्न किया जाता है। इसके अलावा पीला रंग समृद्धि और शुभता का संकेत भी माना जाता है। यह हल्दी सोना और सरसों के फूलों से जुड़ा है जो भारतीय संस्कृति में शुभ और पवित्र माने जाते हैं। मान्यता है कि पीले वस्त्र पहनने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का वास होता है।बसंत पंचमी बसंत ऋतु का स्वागत भी है। इस ऋतु में प्रकृति पीले फूलों जैसे सरसों और अमलतास से सजी होती है। पीले कपड़े पहनकर मनुष्य प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करता है और इस ऋतु की रौनक में शामिल होता है।

    सांस्कृतिक महत्व
    भारत में रंगों का गहरा सांस्कृतिक महत्व है। बसंत पंचमी पर पीले पकवान जैसे केसरिया खीर बूंदी और हलवा बनाए जाते हैं। पीला रंग उत्साह नवीनता और रचनात्मकता का प्रतीक माना जाता है। यह रंग शिक्षा और कला से सीधे जुड़ा होने के कारण विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

    वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक महत्व
    रंग विज्ञान या कलर साइकोलॉजी के अनुसार पीला रंग मस्तिष्क को सक्रिय करता है। यह एकाग्रता स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए छात्र और ज्ञानार्थी इस दिन पीले कपड़े पहनकर पढ़ाई और पूजा दोनों में लाभ महसूस कर सकते हैं।पीला रंग सूर्य से जुड़ा है और इसे देखने मात्र से खुशी आशावाद और उत्साह का संचार होता है। यह तनाव को कम करता है और मानसिक ऊर्जा को बढ़ाता है। साथ ही बसंत ऋतु में मौसम बदलने के कारण अक्सर आलस्य या सुस्ती महसूस होती है पीला रंग शरीर और मन को ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है।इस प्रकार बसंत पंचमी न केवल मां सरस्वती की पूजा का पर्व है बल्कि यह प्राकृतिक सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी हमारे जीवन में ऊर्जा सकारात्मकता और सौभाग्य लाने का अवसर है।

  • बसंत पंचमी 2026: 23 जनवरी को ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का होगा पूजन; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पीले रंग का महत्व

    बसंत पंचमी 2026: 23 जनवरी को ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का होगा पूजन; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पीले रंग का महत्व


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पावन पर्वों में से एक ‘बसंत पंचमी’ इस वर्ष 23 जनवरी 2026 को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, इसी दिन से ऋतुराज वसंत का आगमन होता है, जो प्रकृति में नवजीवन और उल्लास का संचार करता है।

    पूजा का शुभ मुहूर्त और तिथि श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन, अजमेर की निदेशिका एवं ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को अर्धरात्रि 02:28 बजे से प्रारंभ होगी और इसका समापन 24 जनवरी को अर्धरात्रि 01:46 बजे होगा। उदया तिथि की गणना के अनुसार, बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को ही मनाया जाएगा। माँ सरस्वती की पूजा के लिए प्रातः 06:43 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक का समय सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।

    धार्मिक मान्यता: जब सृष्टि को मिली वाणी पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने जब संसार की रचना की, तो उन्हें चारों ओर मौन और नीरसता महसूस हुई। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे श्वेत वस्त्रधारिणी माँ सरस्वती प्रकट हुईं। माँ ने अपनी वीणा का मधुर स्वर छेड़ा, जिससे समस्त संसार को वाणी, ध्वनि और चेतना प्राप्त हुई। इसी कारण बसंत पंचमी को ज्ञान और संगीत के उदय का पर्व माना जाता है।

    शुभ कार्यों के लिए ‘अबूझ मुहूर्त ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, यह दिन विद्या आरंभ, विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ (अबूझ मुहूर्त) माना जाता है। इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का लग्न भी लिखा गया था। छोटे बच्चों के ‘अक्षरारंभ’ और ‘अन्नप्राशन’ संस्कार के लिए भी यह तिथि सर्वश्रेष्ठ है। पीले रंग का विशेष महत्व बसंत पंचमी पर चारों ओर पीला रंग छाया रहता है। पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा, उल्लास और नवजीवन का प्रतीक है। इस दिन श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करते हैं और माँ सरस्वती को पीले पुष्प (विशेषकर गेंदा और सरसों के फूल), पीला चंदन, हल्दी और केसरिया मीठे चावल अर्पित करते हैं।

    पूजा विधि और मंत्र

    स्थापना: माँ सरस्वती की प्रतिमा को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। र्पण: रोली, हल्दी, केसर और श्वेत या पीले पुष्प चढ़ाएं। पूजा स्थल पर अपनी पुस्तकें और वाद्य यंत्र अवश्य रखें। वंदना: ‘कुंदेंदुतुषारहारधवला. वंदना का पाठ करें। मंत्र जाप: ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करने से बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि होती है। सकारात्मक ऊर्जा के उपाय घर में रचनात्मक माहौल के लिए वीणा रखना शुभ होता है। ज्योतिषाचार्या बताती हैं कि मंदिर में मोर पंख रखने से नकारात्मकता समाप्त होती है और हंस की तस्वीर मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ाती है। बसंत पंचमी से शुरू होने वाला यह वसंतोत्सव होलिका दहन तक जारी रहता है।