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  • बसंत पंचमी पर इन 5 स्थानों पर जरूर जलाएं दीपक

    बसंत पंचमी पर इन 5 स्थानों पर जरूर जलाएं दीपक


    नई दिल्ली ।माँ सरस्वती के सम्मुख पूजा स्थानसबसे पहला दीपक अपने घर के मंदिर में माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने जलाएं। यह दीपक घी का होना चाहिए। दीपक जलाते समय अपनी करियर संबंधी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक स्पष्टता आती है।

    अध्ययन कक्ष या स्टडी टेबल विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह स्थान सबसे महत्वपूर्ण है। अपनी स्टडी टेबल या जिस स्थान पर आप बैठकर काम करते हैं, वहाँ एक छोटा दीपक जलाएं। वास्तु के अनुसार, इससे उस स्थान की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और पढ़ाई या काम में एकाग्रताबढ़ती है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा ईशान कोणवास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को देवताओं का स्थान माना गया है। बसंत पंचमी की शाम को इस कोने में एक शुद्ध घी का दीपक जलाने से करियर में नए अवसर प्राप्त होते हैं और अटके हुए काम बनने लगते हैं।

    तुलसी के पौधे के पास तुलसी को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है और माँ सरस्वती के पूजन वाले दिन तुलसी के पास दीपक जलाने से सुख-समृद्धि और ज्ञान का संगम होता है। शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाने से पारिवारिक शांति बनी रहती है और करियर में आने वाले उतार-चढ़ाव कम होते हैं मुख्य द्वार के दोनों ओर घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना ‘देहरी पूजन’ का हिस्सा है। मान्यता है कि बसंत पंचमी की शाम मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी का घर में आगमन होता है। यह आपके जीवन से अंधकार और असफलता को दूर कर सफलता के मार्ग प्रशस्त करता है।

    सफलता के लिए विशेष टिप
    दीपक जलाते समय उसमें थोड़ी सी हल्दी या केसर डालना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि पीला रंग माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय है और यह गुरु ग्रह बृहस्पति को मजबूत करता है, जो करियर और पद-प्रतिष्ठा का कारक है।

  • बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति

    बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति


    नई दिल्ली । बसंत पंचमी का दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि इस दिन कुछ विशेष वस्तुएं घर लाकर माँ सरस्वती को अर्पित की जाएं, तो साधक को ज्ञान, एकाग्रता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    बसंत पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 22 जनवरी को मनाया जाएगा। पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी 2026 को सुबह से। पूजा का शुभ समय: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक लगभग 5 घंटे 20 मिनट। शेष योग इस दिन रवि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो खरीदारी और नई शुरुआत के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है।

    इन वस्तुओं को घर लाना माना जाता है अत्यंत शुभ

    माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर यदि आप घर में नई ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं, तो इस दिन माँ सरस्वती की प्रतिमा घर लाएं। ध्यान रहे कि माँ सरस्वती शांत मुद्रा में हों और हंस या कमल पर विराजमान हों। इसे घर के ईशान कोण उत्तर-पूर्व में स्थापित करना करियर के लिए शुभ होता है।वीणा संगीत यंत्र वीणा माँ सरस्वती का सबसे प्रिय वाद्य यंत्र है। संगीत और कला से जुड़े लोगों के लिए बसंत पंचमी पर वीणा या कोई भी छोटा वाद्य यंत्र घर लाना सौभाग्य बढ़ाता है। इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और मानसिक शांति मिलती है।

    मोरपंख मोरपंख को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे बसंत पंचमी के दिन लाकर बच्चों के स्टडी रूम या उनकी किताबों में रखना चाहिए। माना जाता है कि इससे छात्रों की एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ाई में मन लगता है।नई किताबें और पेन कलम पेन को माँ सरस्वती का रूप माना जाता है। इस दिन नया पेन या नई किताबें खरीदकर उनकी पूजा करना और उन पर तिलक लगाना बहुत लाभकारी होता है। यह कार्य विशेष रूप से नई शिक्षा शुरू करने वाले बच्चों अक्षरारंभ के लिए श्रेष्ठ है। पीले वस्त्र या फूल पीला रंग माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय है क्योंकि यह शुद्धता और नई चेतना का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र खरीदना या गेंदे के पीले फूलों से घर को सजाना सुख-समृद्धि लेकर आता है।

    माँ सरस्वती की पूजा के लिए विशेष टिप

    पूजा के समय माँ सरस्वती को पीले रंग की मिठाई बेसन के लड्डू या केसरिया भात का भोग लगाएं और ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।