Tag: Basant Panchami

  • ब्रज होली 2026: 40 दिन तक रंगों का महासंग्राम, बरसाना-वृंदावन में शुरू हुई भक्ति की होली

    ब्रज होली 2026: 40 दिन तक रंगों का महासंग्राम, बरसाना-वृंदावन में शुरू हुई भक्ति की होली


    नई दिल्ली। ब्रज में 23 जनवरी से 40 दिनों तक होली का भव्य उत्सव शुरू हो चुका है, जिसमें लड्डू मार, लठमार, फूलों वाली होली, होलिका दहन और धुलंडी जैसी प्रमुख रस्में होंगी। बरसाना, वृंदावन, नंदगांव और मथुरा में राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी परंपरागत होली का रंग और भक्ति का अनुभव मिलेगा।
    ब्रज की पवित्र भूमि पर 23 जनवरी 2026 से बसंत पंचमी के साथ 40 दिवसीय होली उत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यह रंगोत्सव बरसाना, वृंदावन, नंदगांव, गोकुल और मथुरा में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है और इसमें लड्डू मार होली, लठमार होली, फूलों वाली होली, होलिका दहन, धुलंडी जैसे प्रमुख कार्यक्रम शामिल हैं।

    ब्रज की होली राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी है और यह 40 दिनों तक चलने वाली सबसे लंबी होली मानी जाती है। इस दौरान मंदिरों में फूलों से बनी होली, गुलाल और भक्ति गीतों के साथ उत्सव मनाया जाता है।

    खास तौर पर ब्रज में होली का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह एक दिन की होली के बजाय लंबे समय तक चलने वाला रंगोत्सव है, जो भक्तों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव देता है।

    ब्रज होली 2026 की मुख्य तारीखें (सही जानकारी के साथ):

    23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) – बसंत पंचमी, होली की शुरुआत (बांके बिहारी जी मंदिर और सभी ब्रज मंदिर)

    24 फरवरी 2026 (मंगलवार) – लड्डू मार होली (श्री जी मंदिर, बरसाना)

    25 फरवरी 2026 (बुधवार) – लठमार होली (रंगिली गली, बरसाना)

    26 फरवरी 2026 (गुरुवार) – लठमार होली (नंद भवन, नंदगांव)

    27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) – रंगभरनी एकादशी/फूलों वाली होली (बांकेबिहारी मंदिर, वृंदावन)

    1 मार्च 2026 (रविवार) – छड़िमर होली (गोकुल)

    2 मार्च 2026 (सोमवार) – रमन रेती होली/विधवा होली (गोकुल और वृंदावन)

    3 मार्च 2026 (मंगलवार) – होलिका दहन (द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा और अन्य मंदिर)

    4 मार्च 2026 (बुधवार) – धुलंडी (मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और गोकुल)

    5 मार्च 2026 (गुरुवार) – दाऊजी का हुरंगा (मथुरा में दाऊ जी मंदिर)

  • आज का पंचांग: बसंत पंचमी पर सरस्वती वंदना का शुभ संयोग..

    आज का पंचांग: बसंत पंचमी पर सरस्वती वंदना का शुभ संयोग..


    नई दिल्ली :आज शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान विद्या संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ऋतुओं के परिवर्तन की शुरुआत होती है और जीवन में नई ऊर्जा सृजनशीलता और सकारात्मकता का प्रवेश होता है। सूर्य उत्तरायण में स्थित है और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है जिससे आज के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    तिथि वार और संवत
    आज माघ शुक्ल पंचमी तिथि रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।
    वार शुक्रवार है।
    विक्रम संवत 2082
    शक संवत 1947
    राष्ट्रीय मिति माघ 03
    हिजरी तारीख शब्बन 03 1447
    सौर मास माघ मास प्रविष्टे 10

    नक्षत्र योग और करण
    दिन की शुरुआत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होगी जो दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा।
    योग की बात करें तो परिधि योग अपराह्न 3 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इसके पश्चात शिव योग का शुभ संयोग बनेगा।
    करण बव करण दोपहर 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा इसके बाद कौलव करण प्रभावी होगा।

    चंद्रमा की स्थिति
    चंद्रमा सुबह 8 बजकर 34 मिनट तक कुंभ राशि में रहेगा इसके बाद गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा। इससे भावनात्मक संतुलन आध्यात्मिक झुकाव और रचनात्मक सोच में वृद्धि देखी जा सकती है। बसंत पंचमी पर चंद्रमा का मीन राशि में गोचर सरस्वती आराधना के लिए विशेष शुभ माना गया है।

    सूर्य समय
    सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट
    सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट

    आज के पर्व
    बसंत पंचमी
    श्री पंचमी
    सरस्वती पूजा
    लक्ष्मी पूजन
    आज विद्यारंभ पुस्तक पूजन और पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा विशेष रूप से मानी जाती है।

    शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04
    विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:52
    गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:08
    निशीथ काल रात्रि 11:54 से 12:47

    अशुभ समय
    राहुकाल सुबह 10:30 से 12:00
    गुलिक काल सुबह 7:30 से 9:00
    यमगंड दोपहर 3:30 से 4:30
    दुर्मुहूर्त सुबह 9:06 से 9:50
    पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

    अमृत काल
    सुबह 9:53 से 11:13 तक

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन पूजा साधना और शुभ संकल्प के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना से बुद्धि विवेक स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होने का विश्वास किया जाता है।

    आज शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान विद्या संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ऋतुओं के परिवर्तन की शुरुआत होती है और जीवन में नई ऊर्जा सृजनशीलता और सकारात्मकता का प्रवेश होता है। सूर्य उत्तरायण में स्थित है और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है जिससे आज के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    तिथि वार और संवत
    आज माघ शुक्ल पंचमी तिथि रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।
    वार शुक्रवार है।
    विक्रम संवत 2082
    शक संवत 1947
    राष्ट्रीय मिति माघ 03
    हिजरी तारीख शब्बन 03 1447
    सौर मास माघ मास प्रविष्टे 10

    नक्षत्र योग और करण
    दिन की शुरुआत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होगी जो दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा।
    योग की बात करें तो परिधि योग अपराह्न 3 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इसके पश्चात शिव योग का शुभ संयोग बनेगा।
    करण बव करण दोपहर 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा इसके बाद कौलव करण प्रभावी होगा।

    चंद्रमा की स्थिति
    चंद्रमा सुबह 8 बजकर 34 मिनट तक कुंभ राशि में रहेगा इसके बाद गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा। इससे भावनात्मक संतुलन आध्यात्मिक झुकाव और रचनात्मक सोच में वृद्धि देखी जा सकती है। बसंत पंचमी पर चंद्रमा का मीन राशि में गोचर सरस्वती आराधना के लिए विशेष शुभ माना गया है।

    सूर्य समय
    सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट
    सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट

    आज के पर्व
    बसंत पंचमी
    श्री पंचमी
    सरस्वती पूजा
    लक्ष्मी पूजन
    आज विद्यारंभ पुस्तक पूजन और पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा विशेष रूप से मानी जाती है।

    शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04
    विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:52
    गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:08
    निशीथ काल रात्रि 11:54 से 12:47

    अशुभ समय
    राहुकाल सुबह 10:30 से 12:00
    गुलिक काल सुबह 7:30 से 9:00
    यमगंड दोपहर 3:30 से 4:30
    दुर्मुहूर्त सुबह 9:06 से 9:50
    पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

    अमृत काल
    सुबह 9:53 से 11:13 तक

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन पूजा साधना और शुभ संकल्प के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना से बुद्धि विवेक स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होने का विश्वास किया जाता है।

  • बसंत पंचमी पर विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की आराधना

    बसंत पंचमी पर विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की आराधना


    नई दिल्ली :आज देशभर में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व विद्या ज्ञान वाणी और विवेक की देवी मां सरस्वती की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को मां सरस्वती का पृथ्वी पर प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन की गई पूजा आराधना और दान को अत्यंत फलदायी बताया गया है।

    इस वर्ष बसंत पंचमी पर ज्योतिषीय दृष्टि से भी शुभ संयोग बना हुआ है। पंचमी तिथि पूरे दिन प्रभावी है और चंद्रमा का संचार गुरु की राशि मीन में हो रहा है। ऐसे में ज्ञान और बुद्धि के कारक ग्रहों का यह योग सरस्वती साधना के लिए विशेष फल प्रदान करने वाला माना जा रहा है। मान्यता है कि इस योग में मां सरस्वती की आराधना करने से स्मरण शक्ति तेज होती है और शिक्षा कला लेखन व संगीत जैसे क्षेत्रों में प्रगति के मार्ग खुलते हैं।देशभर के विद्यालयों शिक्षण संस्थानों मंदिरों और घरों में सरस्वती पूजन का आयोजन किया गया है। विद्यार्थी अपने अध्ययन उपकरण पुस्तकों और वाद्य यंत्रों को मां सरस्वती के चरणों में समर्पित कर विद्या में सफलता की कामना कर रहे हैं। कलाकार और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोग भी इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की उपासना करते हैं।

    प्रयागराज में माघ मेले का प्रमुख स्नान पर्व
    तीर्थराज प्रयागराज में बसंत पंचमी माघ मेले का प्रमुख स्नान पर्व माना जाता है। गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। साधु संतों के सान्निध्य में वेद पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर ज्ञान और सद्बुद्धि की कामना की। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

    पूजन की परंपरा और धार्मिक महत्व
    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ और पीले वस्त्र धारण कर पूजा करना शुभ माना जाता है। पीला रंग बसंत ऋतु उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। पूजा में पीले पुष्प अक्षत धूप दीप और पीले मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण राधा के पूजन की भी परंपरा है।

    शिक्षा संस्कृति और चेतना का पर्व
    बसंत पंचमी को बच्चों के विद्यारंभ संस्कार से भी जोड़ा जाता है। इस दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार शुद्ध मन सात्त्विक आचरण और संयम के साथ की गई आराधना से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि बसंत पंचमी को केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि शिक्षा संस्कृति और चेतना के जागरण का दिन माना जाता है।

  • बसंत पंचमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएँ, माँ सरस्वती से किया आशीर्वाद की कामना

    बसंत पंचमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएँ, माँ सरस्वती से किया आशीर्वाद की कामना


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बसंत पंचमी के पावन और उल्लासपूर्ण अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने इस पर्व को प्रकृति की सुंदरता, दिव्यता और नवचेतना से जुड़ा हुआ बताते हुए इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने ज्ञान, विद्या और कला की देवी माँ सरस्वती से समस्त नागरिकों पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बसंत पंचमी का पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा नवीन आरंभ और बौद्धिक चेतना का प्रतीक है। यह दिन विद्या विवेक और सृजनशीलता के महत्व को स्मरण कराने वाला होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि माँ सरस्वती के आशीर्वाद से प्रत्येक नागरिक का जीवन ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो और समाज में विवेक, सद्भाव तथा रचनात्मकता का विस्तार हो।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि बसंत पंचमी न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है, बल्कि यह मन, विचार और कर्म में नई ऊर्जा का संचार करती है। यह पर्व हमें शिक्षा, कला और संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव विकसित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कामना की कि देवी सरस्वती की कृपा से देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और युवा पीढ़ी ज्ञान व बुद्धि के बल पर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी बसंत पंचमी के अवसर पर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा आप सभी को प्रकृति की सुंदरता और दिव्यता को समर्पित पावन पर्व बसंत पंचमी की अनेकानेक शुभकामनाएं। ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का आशीर्वाद हर किसी को प्राप्त हो। उनकी कृपा से सबका जीवन विद्या, विवेक और बुद्धि से सदैव आलोकित रहे, यही कामना है।

    प्रधानमंत्री के इस संदेश को देशभर में लोगों ने सराहा और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी एक-दूसरे को बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ दीं। शैक्षणिक संस्थानों सांस्कृतिक संगठनों और धार्मिक स्थलों पर माँ सरस्वती की आराधना की गई और ज्ञान कला व संस्कृति के महत्व को स्मरण किया गया। प्रधानमंत्री का यह संदेश बसंत पंचमी के अवसर पर जनमानस में उत्साह, आस्था और सकारात्मकता का संचार करता नजर आया।

  • जहाँ देवी का मंदिर है, वहाँ इबादत कैसे स्वीकार होगी? भोजशाला विवाद पर विधायक रामेश्वर शर्मा का बड़ा बयान

    जहाँ देवी का मंदिर है, वहाँ इबादत कैसे स्वीकार होगी? भोजशाला विवाद पर विधायक रामेश्वर शर्मा का बड़ा बयान


    भोपाल । मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में अब सियासी बयानबाजी ने तूल पकड़ लिया है। बसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूजा और नमाज दोनों की अनुमति दिए जाने के बाद, भाजपा के प्रखर विधायक रामेश्वर शर्मा ने एक बड़ा और तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय से सद्भावना की अपील करते हुए सवाल उठाया है कि जिस स्थान पर देवी का अधिष्ठान है, वहाँ की गई इबादत का क्या अर्थ है।

    विधायक रामेश्वर शर्मा ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि इबादत और आस्था के बीच एक स्पष्ट समझ होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मुसलमानों को स्वयं यह समझना चाहिए कि जहाँ मां वाग्देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, वहाँ आपकी इबादत कैसे स्वीकार हो सकती है? हमारे सनातनी समाज की यह मांग सदियों से रही है कि जहाँ विद्या की देवी माँ सरस्वती विराजमान हैं, उस पवित्र स्थल पर केवल पूजन और अर्चना ही होनी चाहिए।’ शर्मा ने आगे जोड़ा कि स्वयं मुस्लिम समाज के मान्यताओं में भी यह उल्लेख मिलता है कि मंदिर परिसर के भीतर की गई इबादत जायज नहीं होती, ऐसे में इस मुद्दे को राजनीति से प्रेरित करने के बजाय समझदारी से सुलझाना चाहिए।

    ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए विधायक ने याद दिलाया कि भोजशाला का निर्माण महान राजा भोज ने माँ सरस्वती की आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में किया था। उन्होंने कहा कि यह विद्या की देवी का मंदिर है और इसे अनावश्यक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। ‘माँ जगत जननी की निरंतर पूजा-अर्चना हमारा अधिकार है। हम इसके लिए लोकतंत्र की चौखट पर भी जाएंगे और सर्वोच्च न्यायालय से भी बार-बार प्रार्थना करेंगे कि यहाँ केवल सनातन परंपरा का निर्वहन हो,’ उन्होंने स्पष्ट किया।

    रामेश्वर शर्मा का यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब धार प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बसंत पंचमी पर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग समय और स्थान नियत किए हैं। जहाँ एक ओर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पूजा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर विधायक की इस अपील ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबको मिलकर माँ सरस्वती की आरती-पूजा होने देनी चाहिए ताकि धार्मिक सौहार्द बना रहे और इतिहास के साथ न्याय हो सके।

  • MP: भोजशाला में बसंत पंचमी की तैयारियां तेज…कमिश्नर-आईजी पहुंचे धार, दोनों पक्षों से की बात

    MP: भोजशाला में बसंत पंचमी की तैयारियां तेज…कमिश्नर-आईजी पहुंचे धार, दोनों पक्षों से की बात


    धार।
    आगामी बसंत पंचमी (Basant Panchami) को लेकर मध्य प्रदेश के धार के भोजशाला (Bhojshala, Dhar) क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इंदौर कमिश्नर और आईजी (Commissioner and IG) ने हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों के साथ बैठक की। बताया जाता है कि इंदौर कमिश्नर डॉ. सुदामा खंडे और आईजी इंदौर अनुराग सिंह सोमवार को धार पहुंचे और सर्किट हाउस में हिन्दू-मुस्लिम समाज (Hindu-Muslim society) के प्रतिनिधि मंडलों से अलग-अलग बंद कमरे में चर्चा की।


    दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ बात

    बताया जाता है कि बैठक में हिंदू समाज की ओर से गोपाल शर्मा और अशोक जैन मौजूद रहे जबकि मुस्लिम समाज की ओर से शहर काजी वकार सादिक, हाजी मुजीब कुरेशी, सोहेल निसार, जावेद अंजुम साहब एवं सदर अब्दुल समद समेत कुल 8 प्रतिनिधि मौजूद रहे।


    क्या बोला हिन्दू पक्ष?

    भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि प्रशासन के साथ उनकी बातचीत बेहद सकारात्मक रही। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि मां सरस्वती की पूजा सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड रूप से होगी। उनके पास पूर्व का आदेश मौजूद है जिसे ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को सौंप दिया गया है। बाद में जोड़े गए सप्लीमेंट्री आदेश से उनका कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूजा के समय मंदिर और परिसर पूरी तरह खाली रखा जाना चाहिए।


    मुस्लिम पक्ष ने क्या कहा?

    वहीं इस बैठक के बाद मुस्लिम समाज सदर अब्दुल समद ने संवाददाताओं से कहा कि पहले भी मुस्लिम समाज ने प्रशासन का सहयोग किया है। मुस्लिम समाज का रुख साफ है कि नमाज पढ़ी जाएगी लेकिन वह सांकेतिक और सीमित संख्या में होगी। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने शांति बनाए रखने और भ्रामक गतिविधियों पर रोक लगाने की अपील की।


    क्या बोले आईजी?

    आईजी अनुराग सिंह ने दोनों पक्षों के साथ बैठक के बाद कहा कि बातचीत बहुत शांतिपूर्ण और सुखद माहौल में हुई है। प्रशासन दोनों पक्षों द्वारा रखे गए सुझावों पर गंभीरता से विचार करके ही अगला कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि किसी भी हाल में शहर का माहौल बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और सुरक्षा के लिए हर जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। वर्तमान में प्रशासन और समाज के लोग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के आने वाले नए आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

  • बसंत पंचमी से होली का उत्सव: ऋतु और धर्म का अद्भुत संगम.

    बसंत पंचमी से होली का उत्सव: ऋतु और धर्म का अद्भुत संगम.


    नई दिल्ली। मकर संक्रांति के बाद जैसे-जैसे बसंत पंचमी का पर्व करीब आता है देशभर में उत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जिस दिन विद्या कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। लेकिन इसके साथ ही एक और रंगीन पर्व होली की तैयारी भी शुरू हो जाती है। सवाल यह है कि जब होली फाल्गुन मास में मनाई जाती है तो बसंत पंचमी पर इसकी तैयारी क्यों शुरू हो जाती है? इसका उत्तर ऋतु और धार्मिक विश्वासों में छिपा है।

    बसंत पंचमी का आगमन बसंत ऋतु के साथ होता है। बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस समय प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में दिखाई देती है। पेड़ों पर फूल खिलते हैं सरसों के खेत पीले रंग से लहलहा उठते हैं और वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि बसंत पंचमी को प्रकृति का उत्सव और नई खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इस दिन न केवल देवी सरस्वती की पूजा होती है बल्कि यह समय प्रकृति की सौंदर्य और रंगों का जश्न मनाने का भी है।

    धार्मिक दृष्टि से भी बसंत पंचमी और होली का संबंध गहरा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार बसंत ऋतु का आगमन ही होली के उत्सव का संकेत देता है। उत्तर भारत के विशेषकर ब्रज क्षेत्र में बसंत पंचमी से ही फाग गीत गाए जाने लगते हैं और होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। यह उत्सव लगभग 40 दिनों तक चलता है जिसमें हर दिन मंदिरों और घरों में रंगों और गुलाल के साथ भगवान की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी से होली तक का यह समय प्रकृति के 12 रंगों और नई ऊर्जा का उत्सव माना जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार बसंत पंचमी और होली के बीच का यह समय प्रेम उल्लास और आनंद का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि में रंग भरने और प्रेम बनाए रखने के लिए कामदेव और रति ने भगवान शिव की तपस्या को भंग किया था। इसी घटना के बाद से बसंत पंचमी से लेकर होली तक का समय प्रेम और उत्साह के लिए पवित्र माना गया। इस अवधि में प्रकृति प्रेम और उल्लास सभी मिलकर मनुष्य और समाज में एक नई ऊर्जा का संचार करते हैं।

    इस प्रकार बसंत पंचमी न केवल ज्ञान और विद्या का पर्व है बल्कि यह होली के रंगीन उत्सव की शुरुआत का संकेत भी देता है। ऋतु और धर्म का यह अद्भुत संगम समाज में उत्साह प्रेम और रंगों का संदेश फैलाता है।

  • MP: बसंत पंचमी इस साल जुमे के दिन.. धार की ऐतिहासिक भोजशाला में टकराव की आशंका

    MP: बसंत पंचमी इस साल जुमे के दिन.. धार की ऐतिहासिक भोजशाला में टकराव की आशंका


    धार।
    इस साल बसंत पंचमी (Basant Panchami) का त्योहार शुक्रवार 23 जनवरी को पड़ रहा है। जिसके चलते मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के धार शहर (Dhar city ) में स्थानीय पुलिस-प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। दरअसल यहां पर स्थित ऐतिहासिक महत्व की भोजशाला (Historical Bhojshala) में हर शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते हैं, वहीं बसंत पंचमी के दिन हिंदू समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक माता सरस्वती के चित्र की पूजा-अर्चना करते हैं। अब इस बार बसंत पंचमी का पर्व शुक्रवार को होने की वजह से प्रशासन के लिए यहां पूजा व नमाज करवाना बेहद चुनौती पूर्ण कार्य बन गया है। ऐसे में दोनों समुदायों के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता भी बरत रहा है। इस बीच प्रशासन ने मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा की और लोगों से शांति व सौहार्द बनाए रखने की अपील की।


    हिंदू समाज करना चाहता है पूरे दिन पूजा-अर्चना

    दरअसल इस आशंका की वजह यह है कि भोज उत्सव समिति ने 23 जनवरी को पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति मांगी है, जबकि मुस्लिम समाज ने शुक्रवार होने के कारण दोपहर एक बजे से तीन बजे तक यहां कमाल मौला मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए ज्ञापन सौंपा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला में प्रत्येक मंगलवार व बसंत पंचमी के दिन हिंदुओं को पूजा-अर्चना और शुक्रवार को मुस्लिम समाज को नमाज अदा करने की अनुमति दी हुई है।


    बसंत पंचमी पर हो अखंड पूजा; भोज उत्सव समिति

    भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारा लक्ष्य स्पष्ट है। किसी भी सूरत में 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर अखंड पूजा का आयोजन किया जाएगा। सूर्योदय से अखंड पूजा होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम संघर्ष का रास्ता अपनाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘किसी भी हालत में भोजशाला खाली नहीं करेंगे। पहले भी नहीं किया था और अब भी नहीं करेंगे।’


    मुस्लिमों ने ज्ञापन सौंपकर मांगी नमाज की इजाजत

    इस बीच, मुस्लिम समाज ने भोजशाला चौकी पर ASI के महानिदेशक के नाम ज्ञापन सौंपकर 23 जनवरी को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति देने की मांग की है। मुस्लिम समाज ने ज्ञापन में कहा कि इस समयावधि में जुमे की नमाज अप्रभावित, निर्बाध एवं विधिसम्मत रूप से किया जाना अपेक्षित है।


    IG ने किया धार का दौरा, लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा

    इंदौर ग्रामीण रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) अनुराग ने मंगलवार को धार का दौरा किया और पुलिस नियंत्रण कक्ष में अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर का भी निरीक्षण किया।


    इतनी सख्त रहेगी सुरक्षा व्यवस्था, 8 हजार जवान रहेंगे तैनात

    अनुराग ने संवाददाताओं से कहा कि 23 जनवरी के मद्देनजर धार में भारी पुलिस बल तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा, ’23 जनवरी को बसंत पंचमी भी है और शुक्रवार भी। इसलिए लोग सौहार्द और शांति के साथ त्योहार मनाएं। बसंत पंचमी को लेकर लगभग 8,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे, जिनमें CRPF और त्वरित कार्रवाई बल सहित विभिन्न बल शामिल होंगे।’

    उन्होंने बताया कि इस दौरान नियमित गश्त की जाएगी और शहरभर में लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी जाएगी। संवेदनशील इलाकों और सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


    10 साल पहले भी शुक्रवार को पड़ी थी बसंत पंचमी

    इससे पहले वर्ष 2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन थी, जब भोजशाला में पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद हुआ था और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन तथा झड़पें हुई थीं। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है।

    ASI की सात अप्रैल 2003 को जारी व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को हर मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमान हर शुक्रवार यहां नमाज पढ़ सकते हैं। पिछले 23 सालों से यह व्यवस्था है।