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  • पीलीभीत में कृषि इतिहास का नया अध्याय: देश का पहला बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र तैयार होगा

    पीलीभीत में कृषि इतिहास का नया अध्याय: देश का पहला बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र तैयार होगा

    नई दिल्ली । पीलीभीत की धरती अब कृषि नवाचार के एक नए अध्याय की गवाह बनने जा रही है, जहां बासमती और जैविक खेती के लिए देश का पहला समर्पित प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जाएगा। यह पहल न केवल क्षेत्रीय किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि पूरे देश के कृषि क्षेत्र में आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखी जा रही है।

    इस परियोजना के लिए लगभग 7 एकड़ भूमि का चयन किया गया है, जिसे लंबे समय के लिए उपयोग में लेने की अनुमति दी गई है। इस केंद्र को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह केवल एक प्रशिक्षण स्थल न होकर कृषि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का एक व्यापक केंद्र बन सके। यहां किसानों को बासमती धान की पारंपरिक खेती से लेकर जैविक और उन्नत तकनीकों तक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    इस प्रस्तावित केंद्र में आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षण कक्ष, प्रयोगशालाएं, सम्मेलन स्थल, प्रदर्शन गैलरी और एक विशेष संग्रहालय शामिल होंगे। यहां बासमती की विभिन्न किस्मों और जैविक खेती के तरीकों को वैज्ञानिक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे किसानों और विद्यार्थियों को वास्तविक अनुभव प्राप्त हो सकेगा।

    इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भारत का पहला ऐसा संस्थान होगा जहां पारंपरिक और जैविक दोनों प्रकार की बासमती खेती को एक साथ सिखाया और समझाया जाएगा। इससे किसानों को न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि वे पर्यावरण के अनुकूल खेती की ओर भी प्रेरित होंगे।

    इसके अलावा, इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान नेटवर्क से भी जोड़ा जा रहा है, जहां बासमती धान की नई किस्मों का परीक्षण और उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभिन्न कृषि क्षेत्रों के अनुसार सर्वोत्तम बीजों का विकास किया जा सके, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो।

    कृषि क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बासमती धान सर्वे परियोजना भी शुरू की गई है। इस परियोजना के जरिए बड़े पैमाने पर कृषि भूमि का अध्ययन किया जाएगा और लाखों किसानों से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर फसल की स्थिति और उत्पादन क्षमता का आकलन किया जाएगा। इससे कृषि योजना और निर्यात रणनीति को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

    यह पूरी योजना भारतीय बासमती को वैश्विक बाजार में और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। वर्तमान में बासमती चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी खास पहचान रखता है और इसका निर्यात लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह प्रशिक्षण केंद्र किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर न केवल उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।

  • दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग

    दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग


    भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने महिला दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव होता रहा है और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती चावल को एपीडा से जीआई टैग नहीं दिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार जीआई टैग नहीं दिलाती है तो वे अनशन पर बैठने को भी तैयार हैं।

    दिग्विजय सिंह ने किसानों के हित में केंद्र सरकार को पत्र लिखने और संसद में उठाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर असंतोष जताया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों में किसान उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन जीआई टैग न मिलने के कारण उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित मूल्य नहीं पा रहा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन 2016 में वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। अब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के किसानों को वंचित रखा गया।

    इस अवसर पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान पर भी बात की। उन्होंने फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा बैंक से रिटायरमेंट लेने के बाद कार को घर बनाकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले हैं। दिग्विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह देखकर प्रेरणा मिली और रिटायरमेंट के बाद की योजना पर भी सोचा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा के सेकंड टर्म के बाद तीसरे टर्म के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी का काम जीवन के अंतिम क्षण तक करेंगे, लेकिन आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती किसानों को उचित मूल्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग बेहद जरूरी है, ताकि उनका उत्पाद पाकिस्तान और अन्य देशों के बासमती चावल के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को अब तक किसानों के हित में ठोस कदम नहीं उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और मंत्री मंडल से अपील की कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जल्द से जल्द जीआई टैग दिलवाया जाए और किसानों के आर्थिक नुकसान को रोका जाए।