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  • देश में नक्सलवाद के अंत का दावा: बस्तर में सुरक्षा और विकास के नए युग की शुरुआत का संदेश

    देश में नक्सलवाद के अंत का दावा: बस्तर में सुरक्षा और विकास के नए युग की शुरुआत का संदेश

    नई दिल्ली /छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में दिए गए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संबोधन में देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का दावा किया गया है, जिसे सुरक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर यह कहा गया कि वर्षों से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और भय, असुरक्षा तथा हिंसा के वातावरण की जगह शांति, विश्वास और विकास की नई धारा ने स्थान ले लिया है। संबोधन में यह भी स्पष्ट किया गया कि निर्धारित समय सीमा से पहले ही नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौती को समाप्त करने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया, जो सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों और समन्वित कार्रवाई का परिणाम माना जा रहा है।

    इस दौरान सुरक्षा बलों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया और कहा गया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, घने जंगलों और जोखिम भरे इलाकों के बावजूद जवानों ने लगातार साहस और धैर्य के साथ अभियान को आगे बढ़ाया। यह भी उल्लेख किया गया कि अभियान के दौरान कई स्तरों पर रणनीतिक कार्रवाई की गई, जिसके चलते नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ा और धीरे-धीरे इसका प्रभाव समाप्त होने की दिशा में बढ़ा। इस पूरे अभियान को एक लंबी और जटिल प्रक्रिया बताया गया, जिसमें सुरक्षा बलों की तत्परता और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

    संबोधन में यह भी कहा गया कि कुछ राजनीतिक परिस्थितियों में इस अभियान को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका, लेकिन इसके बावजूद प्रयासों को लगातार जारी रखा गया और परिणामस्वरूप स्थिति में निर्णायक बदलाव देखने को मिला। बस्तर क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए कहा गया कि यह इलाका कभी नक्सल गतिविधियों के कारण अत्यधिक प्रभावित माना जाता था, लेकिन अब वहां सामान्य जीवन की बहाली स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। स्थानीय लोगों के बीच बढ़ता आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना इस परिवर्तन का प्रमुख संकेत माना जा रहा है।

    इसके साथ ही यह भी बताया गया कि अब क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति देने पर जोर दिया जाएगा, जिसमें सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े ढांचे को मजबूत करने की दिशा में योजनाएं आगे बढ़ाई जाएंगी। प्रशासनिक स्तर पर यह प्रयास किया जाएगा कि शांति और स्थिरता को लंबे समय तक बनाए रखा जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा के विकास से पूरी तरह जोड़ा जा सके। लोगों के जीवन में आए बदलाव को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां भय के स्थान पर अवसरों की नई संभावनाएं उभर रही हैं।

    अंत में यह संदेश दिया गया कि यह उपलब्धि केवल सुरक्षा व्यवस्था की सफलता नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का संकेत भी है, जिसमें समाज, प्रशासन और सुरक्षा बलों की संयुक्त भूमिका ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बस्तर सहित प्रभावित क्षेत्रों में अब एक नए युग की शुरुआत का दावा किया जा रहा है, जहां स्थायी शांति, विकास और विश्वास को प्राथमिकता दी जाएगी और आगे की दिशा इन्हीं मूल्यों के आधार पर तय होगी।

  • बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 5 लाख का इनामी माओवादी ढेर

    बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 5 लाख का इनामी माओवादी ढेर


    बीजापुर ।छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शुक्रवार को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच एक बड़ी मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में एक 5 लाख रुपये का इनामी माओवादी फागनू माडवी मारा गया। मुठभेड़ सुबह भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के आडवाड़ा-कोटमेटा वन क्षेत्र में शुरू हुई जब जिला रिजर्व गार्ड डीआरजी की एक टीम को माओवादियों की उपस्थिति की सूचना मिली और उन्होंने ऑपरेशन चलाया।

    मारे गए नक्सली की पहचान 35 वर्षीय फागनू माडवी के रूप में हुई है। वह भैरमगढ़ क्षेत्र समिति का सक्रिय सदस्य था। मुठभेड़ के बाद उसका शव घटनास्थल पर पाया गया। मौके से एक .303 राइफल एक 9 मिमी पिस्टल दो स्कैनर सेट एक रेडियो और एक मेडिकल किट बरामद किया गया। इस घटना को लेकर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के कारण बस्तर में माओवादी नेटवर्क काफी कमजोर हो चुका है। उन्होंने बाकी माओवादी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हिंसा छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करें।

    इस वर्ष छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ों में कुल 285 माओवादी मारे गए हैं जिनमें से 256 माओवादी बस्तर मंडल के सात जिलों में मारे गए जिनमें बीजापुर भी शामिल है। शेष माओवादी रायपुर मंडल के गरियाबंद जिले और दुर्ग मंडल के मोहला-मनपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में मारे गए। यह मुठभेड़ सुरक्षा बलों की लगातार कोशिशों का परिणाम है जो छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर में माओवादी गतिविधियों को नष्ट करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

  • अबूझमाड़ में डिजिटल क्रांति की शुरुआत: केंद्र ने 513 नए 4G मोबाइल टावरों को दी मंजूरी

    अबूझमाड़ में डिजिटल क्रांति की शुरुआत: केंद्र ने 513 नए 4G मोबाइल टावरों को दी मंजूरी


    रायपुर/ छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और बस्तर अंचल में लंबे समय तक माओवादी हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की रफ्तार धीमी रही। लेकिन बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और प्रशासनिक प्रयासों के चलते हालात तेजी से बदले हैं। अब जब बस्तर के करीब 400 गांव हिंसा मुक्त हो चुके हैं, तो केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

    513 नए 4G मोबाइल टावरों को मंजूरी
    केंद्र सरकार ने डिजिटल भारत निधि (Digital Bharat Nidhi) के तहत अबूझमाड़ क्षेत्र में बीएसएनएल के माध्यम से 513 नए 4G मोबाइल टावर लगाने की स्वीकृति दी है। इस फैसले से न केवल संचार व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यह माओवादी प्रभावित इलाकों में विकास की नई इबारत भी लिखेगा। राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला सुरक्षा और विकास—दोनों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

    सुरक्षा बलों को मिलेगी तकनीकी बढ़त

    अबूझमाड़ और आसपास के इलाकों में पहले से स्थापित 728 मोबाइल टावर बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी ताकत साबित हुए हैं। मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से सुरक्षा बलों को रियल टाइम कम्युनिकेशन, लोकेशन ट्रैकिंग और इंटेलिजेंस इनपुट साझा करने में मदद मिली है।अधिकारियों का कहना है कि अगस्त 2025 में रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद पड़ोसी राज्यों के साथ रियल टाइम सूचना साझा करने की प्रणाली लागू की गई थी। इसके बाद से माओवादियों की गतिविधियों पर नजर रखना और भी आसान हो गया है।

    माओवादियों पर कसा शिकंजा
    सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, माओवादी आमतौर पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि डिजिटल फुटप्रिंट के जरिए उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकती है। इसके बावजूद, नेटवर्क विस्तार के बाद किसी भी असामान्य सिग्नल पैटर्न या संदिग्ध गतिविधि को समय रहते पकड़ा जा रहा है।इससे माओवादी संगठनों की मूवमेंट की जानकारी पहले ही मिल जाती है और सुरक्षा बल उन्हें अपने रडार पर बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान
    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 513 मोबाइल टावरों को मिली मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला छत्तीसगढ़ को डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

    दुर्गम इलाकों में भी बजेगी मोबाइल की घंटी
    इन नए 4G मोबाइल टावरों की स्थापना से अबूझमाड़ जैसे सुदूर और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को पहली बार भरोसेमंद मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं मिल सकेंगी। इससे-ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर मिलेंगे आपातकालीन संचार व्यवस्था मजबूत होगी विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल विस्तार वित्तीय समावेशन को भी गति देगा।

    बैंकिंग और सरकारी सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
    मजबूत मोबाइल नेटवर्क के चलते ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में-बैंकिंग सेवाएं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) UPI और डिजिटल पेमेंट बीमा और पेंशन योजनाएं आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

    सुरक्षा और विकास की संयुक्त रणनीति
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। सरकार गठन के बाद अब तक-
    69 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए इनके आसपास के 403 गांवों में 9 विभागों की 18 सामुदायिक सेवाएं 11 विभागों की 25 व्यक्तिमूलक योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं यह पहली बार है जब इन दुर्गम इलाकों में सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हुई है।

    साझा प्रयासों का प्रतिफल
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मोबाइल टावरों की स्वीकृति माओवादी हिंसा उन्मूलन और क्षेत्रीय विकास के साझा प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में स्थायित्व स्थापित हुआ है, वहां अब डिजिटल कनेक्टिविटी और विकास को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।