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  • ICC वनडे रैंकिंग में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, टॉप-5 में भारत के तीन बल्लेबाज बरकरार

    ICC वनडे रैंकिंग में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, टॉप-5 में भारत के तीन बल्लेबाज बरकरार

    नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई वनडे सीरीज के बाद जारी ताजा ICC ODI बल्लेबाजी रैंकिंग में भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा कायम है। कप्तान शुभमन गिल नंबर-1 बल्लेबाज बनने से सिर्फ एक रेटिंग अंक दूर हैं, जबकि विराट कोहली और रोहित शर्मा टॉप-5 में बने हुए हैं।

    बल्लेबाजी रैंकिंग: मुख्य बातें
    शुभमन गिल: इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में 188 रन बनाने के बाद गिल के खाते में 801 रेटिंग अंक हो गए हैं। वह शीर्ष पर मौजूद न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल (802 अंक) से सिर्फ एक अंक पीछे हैं।

    विराट कोहली: 767 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर बने हुए हैं।

    रोहित शर्मा: 758 अंकों के साथ चौथे स्थान पर काबिज हैं।

    श्रेयस अय्यर: दो स्थान की छलांग लगाकर 13वें नंबर पर पहुंच गए हैं।

    इंग्लैंड के खिलाड़ियों को फायदा

    जो रूट: भारत के खिलाफ सीरीज में 249 रन बनाकर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुने गए जो रूट ने चार स्थान की छलांग लगाई है और अब आठवें नंबर पर पहुंच गए हैं।

    बेन डकेट: 11 पायदान चढ़कर संयुक्त रूप से 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

    जैकब बेथेल: पांच स्थान के सुधार के साथ 64वें नंबर पर आ गए हैं।

    गेंदबाजी रैंकिंग का हाल
    कुलदीप यादव: भारत के स्टार स्पिनर को नुकसान हुआ है और वह टॉप-10 से बाहर होकर 11वें स्थान पर खिसक गए हैं।

    राशिद खान: अफगानिस्तान के राशिद खान गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं।

    जोफ्रा आर्चर: भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में 5 विकेट लेने के बाद इंग्लैंड के जोफ्रा आर्चर एक स्थान ऊपर चढ़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। पाकिस्तान के अबरार अहमद उनसे ऊपर दूसरे स्थान पर हैं।

  • ऋतुराज गायकवाड़ के बल्ले से निकला दम तो युवा वैभव सूर्यवंशी रहे फ्लॉप: जानिए क्यों तिलक वर्मा की धीमी बल्लेबाजी पर उठ रहे हैं तीखे सवाल

    ऋतुराज गायकवाड़ के बल्ले से निकला दम तो युवा वैभव सूर्यवंशी रहे फ्लॉप: जानिए क्यों तिलक वर्मा की धीमी बल्लेबाजी पर उठ रहे हैं तीखे सवाल

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य के सितारों से सजी इंडिया ‘ए’ ने दांबुला के मैदान पर मेजबान श्रीलंका ‘ए’ को 8 विकेट के बड़े अंतर से मात देकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन तो किया, लेकिन इस एकतरफा जीत के बाद भी टीम मैनेजमेंट और सेलेक्टर्स के चेहरे पर पूरी तरह से संतुष्टि के भाव नजर नहीं आ रहे हैं। इस मुकाबले में मिली शानदार कामयाबी के बावजूद कुछ ऐसी तकनीकी और रणनीतिक कमियां उजागर हुई हैं, जिसके कारण इस जीत के मायने क्रिकेट पंडितों को थोड़े अधूरे और चिंताजनक लग रहे हैं। टीम का शीर्ष क्रम और मध्यक्रम आगामी बड़े दौरों के लिहाज से अभी भी पूरी तरह लय में नजर नहीं आ रहा है।

    मैच के सकारात्मक पहलुओं की बात करें तो कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने एक बार फिर अपनी क्लास और बेहतरीन फॉर्म का परिचय दिया। उन्होंने श्रीलंका के गेंदबाजी आक्रमण के सामने सूझबूझ और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन बनाते हुए टीम की जीत की मजबूत नींव रखी और दमदार बल्लेबाजी की। ऋतुराज की इस कप्तानी पारी के दम पर ही भारत ने मेजबान टीम द्वारा दिए गए लक्ष्य को बेहद आसानी से महज दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। ऋतुराज का यह प्रदर्शन उन्हें मुख्य राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खटखटाने के लिए एक बार फिर सबसे मजबूत दावेदार के रूप में पेश करता है।

    हालांकि, इस चमकीली पारी के दूसरी तरफ युवा और होनहार सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का फ्लॉप होना टीम के लिए एक बड़ा झटका रहा। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर इंडिया ‘ए’ की जर्सी पहनने वाले वैभव इस महत्वपूर्ण मुकाबले में पूरी तरह से असहज नजर आए और बिना कोई बड़ा योगदान दिए बेहद सस्ते में पवेलियन लौट गए। उनके जल्दी आउट होने के कारण पावरप्ले में टीम को जो आक्रामक शुरुआत मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल सकी। वैभव की इस असफलता ने आगामी मैचों के लिए ओपनिंग स्लॉट की स्थिरता पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है।

    जीत के रास्ते में सबसे ज्यादा हैरान करने वाला पहलू मध्यक्रम के बल्लेबाज तिलक वर्मा की बल्लेबाजी शैली रही। टी20 और आधुनिक सीमित ओवरों के क्रिकेट के इस दौर में जहां बल्लेबाज पहली ही गेंद से कड़ा प्रहार करने की कोशिश करते हैं, वहीं तिलक वर्मा ने मैदान पर कछुआ गति से बल्लेबाजी की। उनके बल्ले से रनों की गति इतनी धीमी थी कि एक समय पर मजबूत स्थिति में दिख रही भारतीय टीम पर भी अनावश्यक दबाव बनता हुआ दिखने लगा था। तिलक की इस अत्यधिक रक्षात्मक और धीमी अप्रोच को देखकर कमेंटेटर्स और क्रिकेट विश्लेषक भी हैरान रह गए, क्योंकि वे अपनी आक्रामक और बेखौफ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं।

    यही कारण है कि दांबुला में मिली इस 8 विकेट की बड़ी जीत के बाद भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और जानकारों को यह सफलता पूरी तरह से संपूर्ण नहीं लग रही है। आगामी समय में होने वाली मुख्य अंतरराष्ट्रीय श्रृंखलाओं और टीम इंडिया के कड़े शेड्यूल को देखते हुए ‘ए’ टीम के खिलाड़ियों से केवल मैच जीतने की ही नहीं, बल्कि आधुनिक क्रिकेट के मापदंडों के अनुरूप प्रभावी खेल दिखाने की उम्मीद की जाती है। यदि वैभव सूर्यवंशी की निरंतरता और तिलक वर्मा के स्ट्राइक रेट की समस्या का जल्द समाधान नहीं तलाशा गया, तो आने वाले मैचों में टीम को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।