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  • ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग

    ईरान-US संघर्ष खतरनाक मोड़ पर….. इस बार हॉर्मुज में तेल नहीं, पानी के लिए छिड़ी भीषण जंग


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच चल रहा सैन्य टकराव (Military confrontation) अब तेल के कुओं और सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच जून में हुआ इस्लामाबाद समझौता (Islamabad Agreement) पूरी तरह से टूट चुका है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में फिर से भीषण जंग छिड़ गई है।

    इस बार दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को घुटनों पर लाने के लिए पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे यानी पानी के सप्लाई सिस्टम को अपना मुख्य निशाना बनाया है। पारंपरिक हवाई हमलों के साथ-साथ अब पानी साफ करने वाले प्लांटों को नष्ट करने की होड़ मची है, जिसने सीधे तौर पर आम नागरिकों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है।


    पानी को क्यों बनाया जा रहा है युद्ध का नया मैदान?

    फारस की खाड़ी दुनिया के उन चुनिंदा हिस्सों में से है, जहां प्राकृतिक रूप से पीने का पानी न के बराबर है। ऐसे में पानी का उत्पादन और उसका वितरण सिस्टम किसी भी देश के वजूद के लिए सबसे संवेदनशील नस है।

    तेल रिफाइनरी या कच्चे तेल के जहाजों पर हमला करने से वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। लेकिन जब समंदर के खारे पानी को पीने लायक बनाने वाले डिसेलिनेशन प्लांट को तबाह किया जाता है, तो सीधे तौर पर आम जनता के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता है।

    ईरान ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इनमें से एक बड़ा हमला कुवैत के मुख्य बिजली उत्पादन और डिसेलिनेशन प्लांट पर हुआ। इस हमले से बिजली की कई इकाइयां ठप हो गईं और भयंकर आग लग गई। कुवैत सरकार को आपातकालीन योजनाएं लागू करनी पड़ीं और नागरिकों से पानी व बिजली का इस्तेमाल कम करने की अपील करनी पड़ी है।

    कुवैत अपनी जरूरत का 90 फीसदी पीने का पानी समंदर के पानी को साफ करके हासिल करता है। ऐसे में इन प्लांट्स पर होने वाले हमले देश की पूरी घरेलू जल आपूर्ति को पंगु बना सकते हैं। यह हमला दिखाता है कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देश कितने संवेदनशील हैं, क्योंकि उनके ज्यादातर बड़े वॉटर प्लांट समुद्र तटों पर हैं, जो ईरानी मिसाइलों की सीधी जद में आते हैं।


    अमेरिका का पलटवार: ईरान के बुंजी गांव में प्लांट तबाह

    कुवैत पर हमले के लगभग साथ ही, अमेरिकी सेना ने भी अपनी रणनीति बदलते हुए सैन्य ठिकानों के अलावा नागरिक और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिका ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी होर्मोजगान प्रांत के बुंजी गांव में स्थित एक प्रमुख डिसेलिनेशन प्लांट पर हवाई हमला किया।

    होर्मोजगान वॉटर एंड वेस्टवॉटर कंपनी के मुताबिक, अमेरिकी हमले में प्लांट का पूरा फिल्ट्रेशन इक्विपमेंट (पानी छानने वाले उपकरण) और पंपिंग सिस्टम पूरी तरह तबाह हो गया है। इसके कारण भीषण गर्मी के इस मौसम में 20 से ज्यादा गांवों के लगभग 10,000 लोग बिना पीने के पानी के रहने को मजबूर हो गए हैं, जिससे इलाके में बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है।

    इससे पहले भी युद्ध के दौरान कुवैत के ‘दोहा वेस्ट’ डिसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचा था। वहीं ईरान ने अमेरिका पर 8 मार्च को ‘केशम द्वीप’ के वॉटर प्लांट पर भी हमला करने का आरोप लगाया था, जिससे 30 गांवों की पानी सप्लाई रुकी थी। हालांकि, वाशिंगटन ने इसकी पुष्टि नहीं की थी।

    खाड़ी देश पानी के लिए डिसेलिनेशन पर इतने निर्भर क्यों हैं?
    संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानकों के अनुसार, अगर किसी देश में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 500 क्यूबिक मीटर से कम रिन्यूएबल ताजा पानी उपलब्ध है, तो उसे ‘पूर्ण जल कमी’ की श्रेणी में रखा जाता है। खाड़ी (GCC) देशों में यह आंकड़ा 100 क्यूबिक मीटर से भी कम है।

    प्राकृतिक संसाधनों की इस कमी के बावजूद, इस क्षेत्र में पिछले कुछ दशकों में तेजी से शहरीकरण, औद्योगिक विकास और आबादी बढ़ी है। इस चकाचौंध को जिंदा रखने के लिए प्राकृतिक स्रोतों के बजाय पूरी तरह आर्टिफिशयल वाटर सप्लाई का जाल बिछाया गया।

    अगर ये प्लांट काम करना बंद कर दें, तो क्या होगा?
    किसी तेल रिफाइनरी के बंद होने से केवल व्यावसायिक गतिविधियां रुकती हैं, लेकिन वॉटर प्लांट बंद होने का असर अस्पतालों, आपातकालीन सेवाओं और घरों पर हर सेकंड पड़ता है। अगर युद्ध के कारण ये प्लांट लंबे समय के लिए बंद हो जाएं, तो संकट का टाइमलाइन कुछ इस तरह बदल सकता है:

    बहरीन और कतर जैसे बहुत ज्यादा निर्भर देशों को तुरंत पानी की सख्त लिमिट लागू करनी होगी। उद्योगों और कमर्शियल इलाकों का पानी रोककर केवल घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।

    अगर हफ्ते भर में मरम्मत न हुई, तो आबादी का एक बड़ा हिस्सा बूंद-बूंद पानी को तरस जाएगा। खाड़ी की 45°C से ज्यादा की झुलसाने वाली गर्मी में पानी न मिलना बड़े पैमाने पर डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी को जन्म दे देगा।


    पानी की सुरक्षा और ऊर्जा का आपस में क्या कनेक्शन है?

    खाड़ी देशों में बिजली और पानी के प्लांट अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े हुए ‘कोग्नरेशन सिस्टम’ के तहत काम करते हैं। थर्मल डिसेलिनेशन प्लांट पानी साफ करने के लिए पास के तेल या गैस से चलने वाले बिजलीघरों से निकलने वाली गर्म भाप का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, वे बिजलीघर अपने बॉयलरों को ठंडा रखने और सुरक्षित संचालन के लिए इसी साफ किए गए पानी पर निर्भर होते हैं।

    अगर किसी वॉटर प्लांट के इनटेक पंप या फिल्टर को निशाना बनाया जाता है, तो थर्मल डैमेज से बचने के लिए बिजलीघर को भी अपनी क्षमता कम करनी पड़ती है या उसे बंद करना पड़ता है। यानी पानी पर हमला सीधे तौर पर बिजली ग्रिड को ठप कर देता है।

    आधुनिक वॉटर प्लांट ‘रिवर्स ऑस्मोसिस’ (RO) तकनीक पर चलते हैं, जिसमें बेहद बारीक पॉलीमर मेम्ब्रेन के जरिए नमक को अलग किया जाता है। ये मेम्ब्रेन बेहद नाजुक और महंगी होती हैं। अगर युद्ध के कारण समुद्र में कच्चे तेल का रिसाव होता है और वह दूषित पानी इनटेक पॉइंट तक पहुंच जाता है, तो ये मेम्ब्रेन हमेशा के लिए खराब हो जाती हैं। इन्हें बदलने में महीनों का समय लग सकता है।


    साइबर वॉरफेयर का नया खतरा

    फिजिकल मिसाइल हमलों के अलावा अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ईरानी साइबर हैकर्स अमेरिकी पानी और वेस्टवॉटर सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। इसके लिए FBI, NSA और CISA ने अलर्ट जारी किया है।

    हैकर्स किसी वायरस या मालवेयर का इस्तेमाल करने के बजाय सिस्टम के प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स में सेंध लगाते हैं, जो पंपों और फिल्टरेशन को ऑटोमैटिक कंट्रोल करते हैं। हैकर्स प्रोग्रामिंग टूल्स का इस्तेमाल करके सामान्य मेंटेनेंस स्टाफ की तरह नेटवर्क में छिप जाते हैं।

    वे उन फाइलों को डिलीट कर देते हैं जो तय करती हैं कि पंप कब चालू या बंद होना है। साथ ही, वे ह्यूमन-मशीन इंटरफेस यानी ऑपरेटर की डिजिटल स्क्रीन पर झूठा डेटा दिखा देते हैं, जिससे अधिकारियों को लगता है कि सब ठीक चल रहा है, जबकि अंदर ही अंदर सिस्टम फेल हो चुका होता है। इससे पहले इजरायल के वॉटर सिस्टम पर भी ऐसा ही हमला हुआ था, जहां पानी में क्लोरीन की मात्रा को चुपके से बढ़ाने की कोशिश की गई थी।


    इंटरनेशनल कानून और CIA की पुरानी चेतावनी

    पेंटागन और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को सालों से इस कमजोरी का अंदाजा था। साल 2010 में CIA की एक गोपनीय रिपोर्ट में आगाह किया गया था कि खाड़ी के 90% से ज्यादा पानी का उत्पादन केवल 56 संवेदनशील प्लांट्स में केंद्रित है। इन पर किया गया कोई भी बड़ा हमला पूरे क्षेत्र में राष्ट्रीय आपातकाल ला सकता है।

    जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन, अनुच्छेद 54 (पैराग्राफ 2) के तहत इंटरनेशनल मानवीय कानून साफ तौर पर कहता है कि- नागरिक आबादी के जिंदा रहने के लिए अपरिहार्य वस्तुओं, जैसे कि भोजन, कृषि क्षेत्र… और पीने के पानी के प्रतिष्ठानों और सप्लाई को नष्ट करना, हटाना या बेकार करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।”

  • लंबी कानूनी जंग खत्म, 61 मामलों का निपटारा कर दंपती को अलग होने की अनुमति

    लंबी कानूनी जंग खत्म, 61 मामलों का निपटारा कर दंपती को अलग होने की अनुमति


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश में 1994 से चल रहे वैवाहिक विवाद को समाप्त करते हुए दंपती को तलाक की मंजूरी दे दी। कोर्ट ने देशभर की विभिन्न अदालतों में लंबित 61 मुकदमों को एक साथ खत्म कर दिया।

    जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने अनुच्छेद 142 के विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी के विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया। मामला अवमानना याचिका के रूप में शीर्ष अदालत पहुंचा था, लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने इसे स्थायी समाधान तक पहुंचाने का फैसला किया।

    आपसी सहमति से हुआ निपटारा

    सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित किया। इसके बाद आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया तय की गई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि एलिमनी पर सहमति बन चुकी है और पति पत्नी को एकमुश्त 1 करोड़ रुपये देगा। इसके साथ ही लोनावला स्थित संपत्ति में पत्नी को हिस्सा देने पर भी सहमति बनी।

    अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के खाते में संपत्ति हिस्सेदारी के रूप में 90 लाख रुपये जमा किए जाएं। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद समाप्त माने जाएंगे।

    61 केस एक साथ खत्म

    शीर्ष अदालत ने विभिन्न अदालतों—ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट—में चल रहे कुल 61 मामलों को रद्द कर दिया। इनमें घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और अन्य आपराधिक व दीवानी मुकदमे शामिल थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इसी विवाद से जुड़े किसी भी नए मामले की सुनवाई नहीं होगी।

    अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल

    अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष आदेश देने का अधिकार है। इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए अदालत ने कहा कि इस लंबे विवाद का स्थायी समाधान जरूरी है और अब किसी भी तरह की कानूनी बाधा नहीं रहनी चाहिए।

    दोनों पक्षों ने लिखित रूप में अदालत के फैसले को स्वीकार किया और आगे कोई मुकदमा न लड़ने पर सहमति जताई। अदालत ने इस मामले में पहले से जारी विभिन्न न्यायिक आदेशों को भी निरस्त कर दिया, जिससे 32 साल पुराना विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया।
  • सलमान खान के लिए आदित्य चोपड़ा ने छोड़ी रिलीज डेट, ‘बैटल ऑफ गलवान’ के सामने नहीं लाई आलिया भट्ट की फिल्म

    सलमान खान के लिए आदित्य चोपड़ा ने छोड़ी रिलीज डेट, ‘बैटल ऑफ गलवान’ के सामने नहीं लाई आलिया भट्ट की फिल्म


    नई दिल्ली:बॉलीवुड में जब भी दो बड़ी फिल्मों की रिलीज एक ही तारीख पर तय होती हैतो बॉक्स ऑफिस पर टकराव तय माना जाता है। साल 2026 में भी ऐसा ही एक बड़ा क्लैश देखने को मिल सकता थालेकिन अब यह टल गया है। वजह हैं सलमान खान और उनके लिए दिखाई गई आदित्य चोपड़ा की दोस्ती और सम्मान।

    सलमान खान के 60वें जन्मदिन के खास मौके पर उनकी आने वाली फिल्मबैटल ऑफ गलवान का टीजर रिलीज कर दिया गया है। इस टीजर के साथ ही मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया है। यह फिल्म 17 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। पहले इसी तारीख पर आलिया भट्ट और शरवरी स्टारर स्पाई यूनिवर्स फिल्मअल्फा रिलीज होने वाली थी।अगर दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज होतींतो यह साल 2026 का सबसे बड़ा बॉक्स ऑफिस क्लैश बन सकता था। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक,अल्फा के निर्माता आदित्य चोपड़ा ने सलमान खान के साथ अपने पुराने रिश्ते और आपसी सम्मान के चलते यह तारीख छोड़ने का फैसला किया।

    सूत्रों के अनुसारआदित्य चोपड़ा पहले पूरी प्लानिंग के साथअल्फा को 17 अप्रैल 2026 को रिलीज करने वाले थे। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि सलमान खान अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्मबैटल ऑफ गलवान इसी दिन लाने वाले हैंउन्होंने अपनी फिल्म की रिलीज डेट बदल दी। इंडस्ट्री में इसे एक बड़ा और सम्मानजनक कदम माना जा रहा है।अब सलमान खान 17 अप्रैल 2026 को पूरी तरह से सोलो रिलीज के साथ सिनेमाघरों में नजर आएंगे। उनके 60वें जन्मदिन पर रिलीज हुआबैटल ऑफ गलवान का टीजर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। टीजर में सलमान एक आर्मी ऑफिसर के रूप में नजर आते हैंजिनके चेहरे पर देशभक्ति का जोश और आंखों में गुस्सा साफ झलकता है।

    टीजर में दमदार डायलॉग्सऊंचे लेवल का बैकग्राउंड म्यूजिक और युद्ध जैसे माहौल की झलक दिखाई गई है। सलमान की भारी आवाज और गंभीर अंदाज दर्शकों को पहली ही झलक में बांध लेता है। यह फिल्म साल 2020 में भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुए संघर्ष से प्रेरित बताई जा रही है।‘बैटल ऑफ गलवान में उस ऐतिहासिक टकराव को पर्दे पर दिखाया जाएगाजिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। सलमान खान इस फिल्म में एक भारतीय सेना अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। उनके लिए यह फिल्म बेहद खास मानी जा रही हैक्योंकि हाल के वर्षों में उनकी कुछ फिल्में दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई थीं।

    ऐसे मेंबैटल ऑफ गलवान को सलमान खान के करियर का अहम मोड़ माना जा रहा है। फिल्म से दर्शकों और ट्रेड दोनों को काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करेगीबल्कि सलमान की इमेज को भी मजबूती देगी।इसके अलावा खबरें यह भी हैं किबैटल ऑफ गलवान की शूटिंग पूरी होते ही सलमान खान नए प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करेंगे। फिलहाल वह कई स्क्रिप्ट्स सुन रहे हैं और जल्द ही अपने अगले प्रोजेक्ट्स का ऐलान कर सकते हैं।