Tag: BBC

  • IPL से जुड़ी फ्रेंचाइजी का संकेत, The Hundred में पाक खिलाड़ियों की राह मुश्किल?

    IPL से जुड़ी फ्रेंचाइजी का संकेत, The Hundred में पाक खिलाड़ियों की राह मुश्किल?


    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के तनावपूर्ण कूटनीतिक रिश्तों की छाया अब वैश्विक फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर भी पड़ती नजर आ रही है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक इंग्लैंड की 100 गेंदों की लीग द हंड्रेड के आगामी सत्र में उन टीमों द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर विचार नहीं किया जा सकता जिनका स्वामित्व आंशिक रूप से Indian Premier League से जुड़ी फ्रेंचाइजियों के पास है। अगले महीने प्रस्तावित खिलाड़ी नीलामी से पहले यह संकेत क्रिकेट जगत में हलचल पैदा कर रहा है।

    21 जुलाई से 16 अगस्त तक खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट के नए सीजन में निजी निवेश बढ़ने के कारण खिलाड़ियों की सैलरी में उल्लेखनीय इजाफा होने की संभावना है। ऐसे में अगर आईपीएल से जुड़ी फ्रेंचाइजियां पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज करती हैं तो वे संभावित आर्थिक लाभ से वंचित रह सकते हैं। हालांकि इसे किसी आधिकारिक प्रतिबंध के रूप में घोषित नहीं किया गया है लेकिन मौजूदा भारत-पाक संबंधों की पृष्ठभूमि में इसे रणनीतिक रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

    ब्रिटिश मीडिया संस्थान BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कथित तौर पर एक खिलाड़ी एजेंट को संकेत दिया कि उसके पाकिस्तानी खिलाड़ियों में रुचि केवल उन्हीं टीमों तक सीमित रह सकती है जिनका आईपीएल से कोई संबंध नहीं है। हालांकि इस मुद्दे पर न तो बोर्ड और न ही किसी फ्रेंचाइजी की ओर से आधिकारिक पुष्टि की गई है जिससे स्थिति अभी अटकलों के दायरे में है।

    द हंड्रेड में कुल आठ टीमें हिस्सा लेती हैं और इनमें से कई में आईपीएल से जुड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी है। उदाहरण के तौर पर मैनचेस्टर ओरिजिनल्स ओवल इनविंसिबल्स सदर्न ब्रेव और नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स जैसी टीमों में भारतीय निवेशकों की भागीदारी बताई जाती है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इन टीमों की चयन नीति पर आईपीएल की कारोबारी प्राथमिकताओं और राजनीतिक संवेदनशीलताओं का असर पड़ सकता है।

    गौरतलब है कि 2008 के बाद से पाकिस्तानी खिलाड़ी आईपीएल का हिस्सा नहीं रहे हैं। यदि इसी तरह का रुख आईपीएल से जुड़ी विदेशी फ्रेंचाइजियों में भी अपनाया जाता है तो अंतरराष्ट्रीय टी20 बाजार में पाक खिलाड़ियों के अवसर सीमित हो सकते हैं। एक अन्य एजेंट ने इसे भारतीय निवेश वाली टी20 लीगों में अनलिखा नियम तक करार दिया है हालांकि औपचारिक रूप से ऐसा कोई नियम सार्वजनिक नहीं है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक फ्रेंचाइजी क्रिकेट अब केवल खेल तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह बहु-अरब डॉलर का वैश्विक व्यावसायिक मॉडल बन चुका है। निवेशकों के हित ब्रांड छवि राजनीतिक समीकरण और बाजार रणनीति ये सभी कारक टीम चयन को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर नीलामी के दौरान ही साफ होगी लेकिन फिलहाल संकेत यही हैं कि द हंड्रेड के आगामी सत्र में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए राह पहले जितनी सहज नहीं दिख रही।

  • US: ट्रंप ने BBC पर ठोका मानहानि का केस… 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग

    US: ट्रंप ने BBC पर ठोका मानहानि का केस… 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग


    वाशिंगटन।
    एक भाषण को एडिट करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने मीडिया हाउस बीबीसी (BBC) पर मुकदमा ठोक दिया है। उन्होंने बीबीसी से 10 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग भी की है। उन्होंने ब्रिटिश प्रसारक पर मानहानि के साथ-साथ भ्रामक और अनुचित तरीके से व्यापार करने का आरोप लगाया। दरअसल 6 जनवरी 2021 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समर्थकों को संबोधित किया था। इसके बाद उनके समर्थक कैपिटल हिल पर पहुंच गए और हिंसक हो गए।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक बीबीसी ने ट्रंप के भाषण के वीडियो में ‘फाइट लाइक हेल’ दिखाया लेकिन उनके दूसरे पार्ट को काट दिया जिसमें वह शांतिपूर्ण प्रदर्श की बात कर रहे थे। बीबीसी पर 33 पन्नों के इस मुकदमे में ट्रंप का ‘‘झूठा, मानहानिकारक, भ्रामक, अपमानजनक, भड़काऊ और दुर्भावनापूर्ण चित्रण’’ करने का आरोप लगाया गया है और इसे 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ‘‘हस्तक्षेप करने तथा उसे प्रभावित करने की निर्लज्ज कोशिश’’ बताया गया है।

    इसमें बीसीसी पर ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप के छह जनवरी, 2021 के भाषण के दो पूरी तरह से अलग-अलग अंशों को एक साथ जोड़ने’’ का आरोप लगाया गया ताकि ‘‘ट्रंप द्वारा कही गई बातों के अर्थ को जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।’’ बता दें कि बीबीसी की फंडिंग उसके दर्शकों से होती है। डोनाल्ड ट्रंप की लीगल टीम का कहना है कि बीबीसी लेफ्ट अजेंडा चलाता है और इसलिए डोनाल्ड ट्रंप को बदनाम करने की कोशिश में लगा रहता है।

    बीबीसी की तरफ इस मुकदमे को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले डॉक्युमेंट्री प्रकाशित करने को लेकर बीबीसी पहले से ही संकट का सामना कर रहा है। कई सीनियर अधिकारी इस्तीा दे चुके हैं। इससे बीबीसी की छवि भी खराब हुई है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। इस डॉक्युमेंट्री को अमेरिका में नहीं प्रसारित किया गया था। अब अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी वाले कानून से अपने मुद्दे को अलग करने के लिए ट्रंप को साबित करना होगा कि बीबीसी ने जो कुछ भी एडिट किया वह अपमानजनक था और दर्शकों में भ्रम फैलाने के लिए ही ऐसा किया गया था।

    बीबीसी कोर्ट में दावा कर सकता है कि उसने जो कुछ दिखाया वह सच था और जो कुछ भी ए़डिट किया गया है उससे जनता में कोई गलत संदेश नहीं गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ भी केस किया था। हालांकि दोनों ने किसी भी गलती से इनकार किया है।