Tag: beautification

  • मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने रचना टॉवर परिसर का दौरा किया, सौंदर्यीकरण और पार्क बनाने के दिए निर्देश

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने रचना टॉवर परिसर का दौरा किया, सौंदर्यीकरण और पार्क बनाने के दिए निर्देश

    भोपाल । भोपाल सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत स्थित रचना टॉवर परिसर का दौरा कर क्षेत्र की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों से मिलकर क्षेत्र की समस्याओं और आवश्यकताओं पर चर्चा की।

    नागरिकों द्वारा बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं और परिसर के सौंदर्यीकरण की मांग उठाए जाने पर मंत्री श्री सारंग ने अधिकारियों को रचना टॉवर के सामने स्थित पेविंग के पास सौंदर्यीकरण कार्य तत्काल कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को व्यवस्थित और आकर्षक रूप देने के लिए पार्क का विकास किया जाएगा। इसका उद्देश्य नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण उपलब्ध कराना है और क्षेत्र की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाना है।

    मंत्री ने पार्क के साथ ही ओपन जिम की स्थापना करने के भी आदेश दिए ताकि नागरिक नियमित रूप से व्यायाम कर सकें और स्वस्थ जीवनशैली अपना सकें। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की बढ़ती आबादी को देखते हुए इस प्रकार की सुविधाओं का होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पार्क और ओपन जिम की फेंसिंग कर उसे सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए।

    सुरक्षा और सुविधा के मद्देनजर मंत्री श्री सारंग ने रचना टॉवर परिसर के सामने पोल लाइट लगाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रकाश व्यवस्था से न केवल परिसर आकर्षक बनेगा बल्कि सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सौंदर्यीकरण और पार्क निर्माण के सभी कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर शीघ्रता से क्रियान्वयन किया जाए ताकि नागरिक जल्द से जल्द इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

    इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी और स्थानीय नागरिक भी मौजूद थे। नागरिकों ने क्षेत्र में विकास के लिए मंत्री श्री सारंग का आभार व्यक्त किया और उनकी पहल की सराहना की। मंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे परियोजना के दौरान अपनी सुझाव और आवश्यकताओं से उन्हें अवगत कराते रहें ताकि कार्य अधिक प्रभावी और सभी के लिए लाभकारी हो।

    रचना टॉवर परिसर का यह सौंदर्यीकरण और पार्क निर्माण केवल एक जगह को सुंदर बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे क्षेत्र के जीवन स्तर को सुधारने और नागरिकों के लिए बेहतर सामाजिक और मनोरंजन सुविधाओं की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    मंत्री की इस पहल से स्थानीय जनता को स्वच्छता सुरक्षा और स्वस्थ जीवनशैली की सुविधा मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने भी आश्वासन दिया कि निर्देशानुसार सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूर्ण किए जाएंगे और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।

  • काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर, इंदौर राज परिवार ने दोहराया संकल्प

    काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर, इंदौर राज परिवार ने दोहराया संकल्प

    काशी। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर चलाने, अहिल्याबाई समेत कई ऐतिहासिक मूर्तियों को तोड़कर खंडित करने और गंगा में डाल देने का मामला देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। इंदौर से खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष और राजपरिवार के प्रतिनिधि यशवंत होल्कर भी दो दिन पहले काशी पहुंचे। अपनी नाराजगी जताई। वापस जाने से पहले उन्होंने मणिकर्णिका घाट की पवित्र माटी माथे लगाई। घाट पर तोड़ी गई मढ़ी के निकट उन्होंने पुन: क्षमायाचना की और काशी में महारानी की विरासत संरक्षित और सुरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया।

    जिला प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा आश्वस्त किए जाने के बाद वह यहां से रवानगी के लिए तैयार हुए। उन्हें विश्वास दिलाया गया है कि खंडित मूर्तियों के अवशेष जल्द खोज लिए जाएंगे। उनके मणिकर्णिका घाट पहुंचने से पहले ही काफी संख्या में पीएसी के जवानों को तैनात कर दिया गया था। इस बात पर कड़ी नजर रखी गई कि कोई दूर से भी मोबाइल से फोटो या वीडियो न बना सके।

    मणिकर्णिका घाट की मौजूदा स्थिति देखने के बाद वह निकट स्थित ताड़केश्वर मंदिर भी गए। प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि रानी मां की चारों मूर्तियां यही रखी जाएंगी। जो दो साबूत मूर्तियां हैं उन्हें यथाशीघ्र इस मंदिर में भेजवाया जाए। अधिकारियों ने जल्द से जल्द मूर्तियां ताड़केश्वर मंदिर भेजने पर सहमति जता दी है। वहीं ट्रस्ट के स्थानीय प्रबंधक रमेश उपाध्याय ने बताया कि गुरुवार को अवकाश का दिन होने से मूर्तियां नहीं लाई जा सकी हैं। उम्मीद है कि 16 जनवरी को शाम तक मूर्तियां गुरुधाम मंदिर से मणिकर्णिका स्थित ताड़केश्वर मंदिर पहुंचा दी जाएं।

    उपाध्याय ने बताया कि हम लोग अपने स्तर से भी मूर्तियों के अवशेष खोजने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। वहां से उठाया गया मलबा कहां फेंका गया है, इसकी जानकारी भी नहीं दी जा रही है। यदि यही बता दिए जाए कि मलबा कहां फेंका गया है तो मूर्तियों के अवशेष खोजने की राह आसान हो सकती है।
    सिविल में मुकदमा दर्ज फिर भी सूचना नहीं दी

    ट्रस्ट के स्थानीय प्रबंधक रमेश उपाध्याय ने बताया कि मणिकर्णिका घाट से सटा हिस्सा जो जनाना घाट के नाम से जाना जाता है, यहां लगी मूर्तियों को संरक्षित करने को लेकर ट्रस्ट की ओर से सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। उसमें नगर निगम को पार्टी बनाया गया है। मुकदमे से संबंधित नोटिस तक दिया जा चुका है। वह मुकदमा ही इस बात के लिए किया गया है कि जनाना घाट की मूर्तियों को न तोड़ा जाए। घाट पर बने धार्मिक प्रतीक सुरक्षित रहें। बावजूद इसके ट्रस्ट को बिना सूचित किए तोड़फोड़ की गई। हमारी अब भी इतनी ही मांग है कि मूर्तियां हमें लौटाई जाएं। घाट पर कोई भी निर्माण ट्रस्ट की सहमति के बिना न कराया जाए। मणिकर्णिका घाट ट्रस्ट के अधीन आने वाली धर्मार्थ संपत्ति है।
    प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री से अनुरोध

    इससे पहले मणिकर्णिका घाट पर रानी अहिल्याबाई की मूर्तियां तोड़े जाने की जांच तथा उन्हें खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट ने अपनी सुपुर्दगी में देने का अनुरोध प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से किया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर ने मंडलायुक्त की मौजूदगी में नगर आयुक्त को दोनों पत्र गुरुधाम मंदिर में सौंपे।

    यशवंत होल्कर महारानी की तोड़ी गई मूर्तियों के समक्ष क्षमायाचना और शुद्धि पूजन के लिए गुरुधाम मंदिर पहुंचे थे। दो खंडित और दो साबुत मूर्तियां यहीं रखी हैं। उन्होंने कहा कि काशी में रानी अहिल्याबाई की मूर्ति का अपमान अक्षम्य है। काशी में उनकी स्मृतियों के साथ ऐसे आचरण की कल्पना भी इंदौर राजपरिवार को नहीं थी। ट्रस्ट और इंदौर राजपरिवार इसकी कटु शब्दों में भर्त्सना करता है। मणिकर्णिका घाट की मढ़ी के चार किनारों पर बनीं रानी मां की चार मूर्तियां तोड़ी गईं। इनमें से दो खंडित नहीं हैं लेकिन अन्य दो का निचला हिस्सा ही मिला है। उनका शेष हिस्सा सात दिन में हमें उपलब्ध कराया जाए।

    उन्होंने कहा कि हम पुरातात्विक पद्धति से उसका पुनर्निर्माण कराने में सक्षम हैं। जब तक मणिकर्णिका घाट का नवनिर्माण पूरा नहीं हो जाता तब तक मूर्तियों को छोटे विश्वनाथ मंदिर (अहिल्याबाई घाट) के गर्भगृह में रखेंगे और पूजा के लिए पुजारी नियुक्त करेंगे। देशभर की तमाम संपत्तियों की भांति ही मणिकर्णिका घाट के संरक्षण-संवर्द्धन का दायित्व ट्रस्ट का ही है और यह अधिकार सुप्रीम कोर्ट से मिला है।
    लगा मर्डर मिस्ट्री सुलझा रहे अधिकारी

    मणिकर्णिका घाट पर तोड़ी गईं रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्तियों का गुरुधाम मंदिर में दोपहर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ऐसे अवलोकन कर रहे थे मानो वह कोई मर्डर मिस्ट्री सुलझाने में लगे हों। खंडित और साबूत मूर्तियों को नीचे से ऊपर तक निहारते हुए फोन पर किसी को यथास्थिति से अवगत कराते जा रहे थे।

    यह काम करते हुए उन्हें अहसास हुआ कि मातहतों और सुरक्षाकर्मियों के अतिरिक्त कुछ अन्य लोग भी परिसर में हैं तो उन्होंने सभी को अनुरोध पूर्वक परिसर से बाहर कर दिया। गेट पर तैनात सिपाही को आदेश दिया कि कोई भी आए गेट नहीं खुलना चाहिए। इसके बाद फिर मूर्तियों की गहन जांच पड़ताल में जुट गए। कुछ सफाई कर्मचारियों से वह साबूत और खंडित मूर्तियां कपड़े में लपेटकर अंदर रखने की तैयारी कर रहे थे।

    इसी बीच होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर पहुंच गए। उनके लिए भी द्वार नहीं खोला गया। करीब दस मिनट बाद मंडलायुक्त एस.राजलिंगम को आता देख सिपाही ने दरवाजा खोला। तब ट्रस्ट के अध्यक्ष और कुछ कर्मचारी परिसर में दाखिल हुए। पूजन सामग्री लेकर पहुंचे कर्मचारियों, पूजा कराने पहुंचे ट्रस्ट के पुजारियों को भी बाहर ही रोक दिया गया।