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  • गर्मियों में बीयर और कोल्ड ड्रिंक्स की सप्लाई सुधारने की तैयारी, सरकार ने एल्युमिनियम कैन के सर्टिफिकेशन की समयसीमा बढ़ाई

    गर्मियों में बीयर और कोल्ड ड्रिंक्स की सप्लाई सुधारने की तैयारी, सरकार ने एल्युमिनियम कैन के सर्टिफिकेशन की समयसीमा बढ़ाई

    नई दिल्ली । गर्मियों में बीयर और कोल्ड ड्रिंक्स की बढ़ती मांग के बीच एल्युमिनियम कैन की संभावित कमी दूर करने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पेय पदार्थों के लिए इस्तेमाल होने वाले एल्युमिनियम कैन पर अनिवार्य भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) सर्टिफिकेशन लागू करने की समयसीमा छह महीने तक बढ़ाई गई है। इस कदम से पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों और कैन निर्माताओं को उत्पादन, आयात तथा पैकेजिंग की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

    पहले कंपनियों को 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित प्रमाणन हासिल करना था। अब अलग-अलग श्रेणियों की कंपनियों के लिए नियमों के अनुपालन की समयसीमा अलग-अलग रखी गई है। बड़ी कंपनियों को 1 अप्रैल 2027, छोटी कंपनियों को 1 जुलाई 2027 और सूक्ष्म कंपनियों को 1 अक्टूबर 2027 से संबंधित नियमों का पालन करना होगा। इस बदलाव से कंपनियों को प्रमाणन प्रक्रिया पूरी करने और बाजार की जरूरतों के अनुसार कैन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    भारत में बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक्स की बिक्री में एल्युमिनियम कैन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इन पेय पदार्थों की कुल सालाना बिक्री में अब कैन की हिस्सेदारी एक चौथाई से अधिक हो गई है। बीते दो वर्षों के दौरान मांग में तेजी आई है, लेकिन घरेलू निर्माताओं का उत्पादन उसी गति से नहीं बढ़ पाया। इसके चलते कंपनियों को पैकेजिंग सामग्री की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

    उद्योग से जुड़े अनुमान के मुताबिक, भारतीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल लगभग 60 करोड़ अतिरिक्त कैन के उत्पादन की उम्मीद थी। हालांकि, अब तक इस अतिरिक्त क्षमता का करीब आधा हिस्सा ही हासिल हो सका है। ऐसे में सरकार की ओर से समयसीमा बढ़ाने से कंपनियों को आगामी गर्मियों के सीजन के लिए पहले से स्टॉक तैयार करने और सप्लाई की बेहतर योजना बनाने का अवसर मिलेगा।

    कैन की कमी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी एक कारण हैं। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। विदेशों में स्थित जिन निर्माताओं को भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणन मिला हुआ है, वे भी भारत की बढ़ती मांग पूरी करने में पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। इस वजह से पेय पदार्थ कंपनियों को वैकल्पिक स्रोतों से पैकेजिंग सामग्री जुटानी पड़ रही है।

    कमी को पूरा करने के लिए कंपनियां संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे बाजारों से एल्युमिनियम कैन आयात कर रही हैं। हालांकि, आयातित कैन घरेलू स्तर पर उपलब्ध कैन की तुलना में लगभग 25 से 30 प्रतिशत महंगे पड़ते हैं। इससे कंपनियों की लागत बढ़ रही है और पैकेजिंग की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

    घरेलू उत्पादन बढ़ाने में भी समय लग रहा है। कैन निर्माता अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए अतिरिक्त मांग पूरी करने के लिए नई उत्पादन लाइनें स्थापित करना जरूरी है। लेकिन नई लाइन लगाने और उसे चालू करने में एक साल तक का समय लग सकता है। इस कारण तत्काल उत्पादन बढ़ाकर मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर खत्म करना आसान नहीं है।

    सरकार ने अप्रैल 2025 में एल्युमिनियम पेय कैन को अनिवार्य बीआईएस प्रमाणन के दायरे में लाने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किया था। इसका उद्देश्य कैन की सुरक्षा, उत्पादों की ताजगी और रीसाइक्लिंग की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। इन मानकों में कैन की सामग्री, आकार, ढक्कन की सील, दबाव सहने की क्षमता, रिसाव रोकने की व्यवस्था और सुरक्षा परत शामिल हैं। विदेशी कारखानों के निरीक्षण की जरूरत पड़ने पर प्रमाणन प्रक्रिया में अतिरिक्त समय भी लग सकता है। ऐसे में समयसीमा बढ़ने से कंपनियों को नियमों का पालन करने के साथ आगामी गर्मियों के लिए सप्लाई तैयार करने में राहत मिल सकती है।