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  • Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    इस मानसून सत्र (Monsoon Session) में देश के लगभग आधे हिस्से, उत्तर और मध्य भारत (North and Central India) में भीषण सूखा पड़ने की आशंका है। जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश (Monsoon Rains) के भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इसका प्रमुख कारण प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में बन रहा शक्तिशाली अल नीनो है। इसकी वजह से दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में भीषण बाढ़ का खतरा भी है। कृषि प्रधान भारत के लिए मानसून की यह स्थिति बहुत भयावह है, जो बहुत हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है। भारत के लिए अल नीनो हमेशा से ही खराब रहा है। इस बार मजबूत अल नीनो बन रहा है, जिसका भयावह परिणाम हो सकता है। मजबूत अल नीनो दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है। इसका नतीजा यह होता है कि देश के अधिकांश हिस्से में बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाता हैं। इस बार उत्तर और मध्य भारत में कुछ ऐसी ही स्थिति की आशंका है। दूसरी तरफ, तमिनलाडु, आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में तबाही वाली बढ़ आ सकती है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार सामान्य तिथि से करीब चार दिन पहले, यानी 26 मई के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है। शनिवार को यह दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान- निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ा है। इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।


    यूपी, हरियाणा-पंजाब में सबसे ज्यादा असर

    शक्तिशाली अल नीनो का सबसे अधिक उत्तर और मध्य भारत पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर के लिए गर्मी और सूखे के दोहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    मानसूनी बारिश कम होने से प्रमुख फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी मानसून से आता है और लगभग आधी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कम बारिश वाला वर्ष भी व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है।


    आईओडी कम कर सकता है असर

    इस भयावह आशंका के बीच इंडियन ओशन डिपोल’ (आईओडी) के रूप में एक उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है। जलवायु मॉडल के अनुसार मानसून के आखिरी महीनों में आईओडी सकाकात्मक हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। मानसूनी हवाओं को थोड़ी मजबूती मिल सकती है जिससे कुछ इलाकों में बारिश की वापसी संभव है।


    लू घोषित करने के मापदंडों में बदलाव करेगा आईएमडी

    आईएमडी अपने विशेषज्ञों के साथ मिलकर जल्द ही देश में लू की स्थिति घोषित करने के मानदंडों में संशोधन करेगा। मौजूदा मापदंड भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं हैं। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस गर्मी के मौसम में लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा तथा पहली बार कर्नाटक-महाराष्ट्र तट के पास बने चक्रवाती तंत्र के आधार पर मौसम पूर्वानुमान जारी किए गए। इससे पहले कभी भी दक्षिण के इतने करीब कोई चक्रवाती तंत्र नहीं बना था और इस बार हमें इसी के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाना पड़ा।


    870 मिलीमीटर होनी चाहिए औसत बारिश

    आईएमडी के पूर्वानुमान एक अनुसार, इस साल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के केवल 92 फीसदी होने की संभावना है। एलपीए का यह स्तर सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है। साल 1971 से 2020 के डाटा के आधार पर भारत में औसत बारिश 870 मिलीमीटर होनी चाहिए, लेकिन इस बार इससे कम बारिश होने की आशंका है। आंकड़ों के मुताबिक इस बार सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35% है। यह सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। जून या जुलाई में अल नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।


    44.8 डिग्री पर तपा बांदा

    उत्तर प्रदेश में भी भीषण गर्मी पड़ रही है। शनिवार को राज्य में अधिकतम स्थानों पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर ही रहा। बांदा में सबसे अधिक तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, झांसी में 44.1 डिग्री, प्रयागराज में 44 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा। आगरा में 43 डिग्री सेल्सियस, गाजीपुर में 42 डिग्री सेल्सियस और वाराणसी हवाई अड्डे पर 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया।

  • देश में इस साल सामान्य से कम होगी मॉनसूनी बारिश….IMD ने जताई कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका

    देश में इस साल सामान्य से कम होगी मॉनसूनी बारिश….IMD ने जताई कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका


    नई दिल्ली।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department- IMD) ने कहा है कि इस साल सामान्य से भी कम मॉनसूनी बारिश (Monsoon Rain) होगी। वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) को लेकर लंबी अवधि का पूर्वानुमान जारी करते हुए मौसम विभाग ने कहा कि इस साल देश में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है, जिससे खेतीबाड़ी, पशुपालन और जल संसाधनों पर बुरा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम यानी 92% (±5%) रह सकती है। यह लंबी अवधि यानी 1971 से 2020 तक के औसत 87 सेंटीमीटर के अनुमान पर आधारित है। इसका मतलब है कि बारिश सामान्य से थोड़ी कम हो सकती है।

    मौसम विभाग ने पूर्वानुमानों में कहा है कि इस साल अल नीनो का प्रभाव रह सकता है, जिसकी वजह से न केवल प्रचंड गर्मी पड़ेगी बल्कि बारिश भी कम होगी। विभाग ने कहा है कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की तटस्थ स्थितियाँ रहने की सबसे अधिक संभावना है। इसके बाद, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम के दौरान अल नीनो की मजबूत स्थिति बनने की बहुत अधिक संभावना है। इस वजह से मॉनसून कमजोर रह सकता है और सामान्य से कम बारिश हो सकती है। IMD के मुताबिक, अप्रैल से जून तक स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन इसके बाद मॉनसून के दौरान अल-नीनो बनने की संभावना अधिक है।


    किन इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD ने देश भर के लिए जारी लंबी अवधि के पूर्वामुमानों में कहा है कि भौगोलिक रूप से, देश के कई हिस्सों में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रहने की अधिक संभावना है। हालांकि, IMD ने पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने ये भी बताया कि फिलहाल हिंद महासागर में तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की स्थितियाँ बनी हुई हैं। यानी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं और समयपर मॉनसून के दस्तक देने की संभावना है।


    कहां-कहां सूखे के आसार?

    IMD ने कहा कि जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध का हिम आवरण (Snow Cover) और साथ ही यूरेशिया का हिम आवरण भी सामान्य से थोड़ा ही कम रहा है, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के विकसित होने और मॉनसूनी मौसमी वर्षा के लिए अनुकूल है। IMD के दीर्घ अवधि वाले इस पूर्वानुमान के दस्तावेज में फिलहाल सूखा घोषित होने वाली जगहों की सूची नहीं दी गई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश/सूखे जैसे हालात बनने की आशंका ज्यादा बताई गई है, उनमें उत्तर भारत के कई हिस्से, खासकर गंगा के मैदानी और आसपास के पठारी क्षेत्र शामिल हैं।


    कुछ इलाकों में बेहतर बारिश की उम्मीद

    इसके अलावा मध्य भारत के बड़े हिस्से के सूखा से प्रभावित रहने की आशंका जताई गई है। ये वैसे इलाके हैं, जहां सामान्य से कम बारिश के अनुमान जताए गए हैं। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से और आंतरिक क्षेत्रों में भी कम बारिश के संकेत दिए गए हैं। IMD के मैप में दिखाया गया है कि देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जबकि पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्से और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्से जैसे कुछ इलाकों में बारिश इनके मुकाबले बेहतर स्थिति में रह सकता हैं।


    सामान्य से कम बारिश का क्या असर

    मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश होने की दशा में खेती पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि कम बारिश से बुवाई, फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है खेती की बढ़ सकती है। मॉनसूनी बारिश का खेतीबाड़ी पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करते हुए IMD के वैज्ञानिकों ने बताया कि कम बारिश की मार आम आदमी तक को परेशान कर सकता है। इसकी वजह से सब्जी-दाल महंगी हो सकती है और कमजोर मॉनसून का असर फूड सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।


    खेतीबाड़ी से लेकर ऑटो सेक्टर तक असर

    मौसम विज्ञानियों ने बताया कि खेतीबाड़ी बाधित होने की दशा में ग्रामीण आमदनी पर भी असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, खेती कमजोर होने से गांवों में नकदी कम आएगी, जिसका असर ग्रामीण खर्च और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कम बारिश से ट्रैक्टर और टू-व्हीलर की बिक्री भी प्रभावित हो सकती है और ग्रामीण मांग कमजोर होने से ऑटो कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।