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  • पश्चिम एशिया संकट पर राहत के संकेत, कच्चा तेल 1 प्रतिशत से अधिक फिसला; वैश्विक बाजारों में फिर भी बनी रही अनिश्चितता

    पश्चिम एशिया संकट पर राहत के संकेत, कच्चा तेल 1 प्रतिशत से अधिक फिसला; वैश्विक बाजारों में फिर भी बनी रही अनिश्चितता

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावनाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत दी है। इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच यह घटनाक्रम निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है और इससे व्यापक कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दोनों प्रमुख तेल बेंचमार्क में गिरावट देखी गई। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं की आशंका के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि युद्धविराम की दिशा में बढ़ते कदमों ने बाजार की चिंताओं को कुछ हद तक कम कर दिया है, जिससे कीमतों पर दबाव देखने को मिला।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार तेल की कीमतें केवल मांग और आपूर्ति के आधार पर नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से भी गहराई से प्रभावित होती हैं। पश्चिम एशिया विश्व ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष या अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजारों में तुरंत असर डालती है। हालिया गिरावट इसी धारणा को दर्शाती है कि निवेशक अब स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान की संभावना को महत्व दे रहे हैं।

    इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक संपर्कों पर भी वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है। अमेरिकी नेतृत्व की ओर से बातचीत में प्रगति के संकेत दिए गए हैं, जबकि ईरान की तरफ से भी संवाद पूरी तरह समाप्त न होने की बात कही गई है। हालांकि दोनों पक्षों ने अभी तक किसी ठोस समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बातचीत जारी रहने को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    इसके विपरीत खाड़ी क्षेत्र में कुछ घटनाओं ने अनिश्चितता को पूरी तरह समाप्त नहीं होने दिया है। हालिया सैन्य गतिविधियों और हमलों के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव फिर से बढ़ता है तो तेल बाजार में उतार-चढ़ाव दोबारा तेज हो सकता है। इसलिए निवेशक फिलहाल हर कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

    तेल बाजार की नरमी का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी देखने को मिला। एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजार दबाव में रहे और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाए रखी। जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे वैश्विक निवेश भावना पर असर पड़ा।

    घरेलू बाजार भी इस वैश्विक माहौल से अछूते नहीं रहे। भारतीय शेयर बाजारों में कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। निवेशकों का ध्यान अब पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक कूटनीतिक प्रयासों और ऊर्जा बाजार की आगामी दिशा पर केंद्रित है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्धविराम स्थायी रूप लेता है और क्षेत्रीय तनाव में और कमी आती है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार अभी भी सतर्क है और किसी भी नए घटनाक्रम का प्रभाव तेल तथा वैश्विक वित्तीय बाजारों पर तुरंत दिखाई दे सकता है।

  • वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में दिखाई दिए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से 400 अंकों से अधिक टूटकर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी में भी शुरुआती कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही कारोबार करते रहे। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 227 अंक और निफ्टी लगभग 80 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, रियल्टी, मेटल और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया। प्रमुख आईटी कंपनियों और निजी बैंकों में बिकवाली का माहौल रहा, जबकि कुछ चुनिंदा उपभोक्ता वस्तु, तेल एवं गैस तथा एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सीमित बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि व्यापक बाजार में निवेशकों की रुचि पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

    विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रही है। विदेशी निवेशक हाल के सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकालते दिखाई दिए हैं, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।

    घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। शुक्रवार को आने वाले फैसले से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर नई दिशा मिल सकती है। ऐसे में बड़े निवेशक फिलहाल आक्रामक दांव लगाने से बचते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती शॉर्ट पोजिशन भी निकट भविष्य में कमजोरी की आशंका को मजबूत करती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार की धारणा तेजी से बदल सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक ट्रेडिंग जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी प्रदान कर सकता है। बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी सेक्टर के कई मजबूत शेयर हालिया गिरावट के कारण आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं, जो भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।