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  • MP: लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित महिलाओं के लिए खुशखबरी, खुलेगा पोर्टल… मंत्री ने दिए संकेत

    MP: लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित महिलाओं के लिए खुशखबरी, खुलेगा पोर्टल… मंत्री ने दिए संकेत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (Chief Minister’s Ladli Behna Yojana) का लाभ पाने से वंचित रह गई महिलाओं (Women) के लिए राहत की उम्मीद जगी है. राज्य सरकार योजना से छूटी हुई महिलाओं के नाम जोड़ने के लिए पोर्टल दोबारा खोलने पर विचार कर सकती है. स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस संबंध में संकेत दिए हैं।

    बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल (Minister Narendra Shivaji Patel) ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने निकट भविष्य में लाड़ली बहना योजना से छूटी हुई महिलाओं के नाम जोड़ने की बात कही है. इसके लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजना के दायरे से बाहर रह गई महिलाओं की संख्या का आकलन करने के निर्देश दिए हैं. मंत्री के इस बयान के बाद उन महिलाओं को उम्मीद बंधी है, जो पात्र होने के बावजूद अब तक योजना में अपना नाम नहीं जुड़वा सकी हैं. हालांकि, अभी पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।


    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए आकलन के निर्देश

    मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह नहीं बताया जा सकता कि लाड़ली बहना योजना का पोर्टल कब खोला जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पहले यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि योजना के लाभ से कितनी महिलाएं बाहर रह गई हैं. सरकार की ओर से इस आकलन के बाद आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जा सकता है. यदि पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला होता है, तो योजना से वंचित रह गई महिलाओं को आवेदन करने का अवसर मिल सकता है।

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नए आवेदन कब से लिए जाएंगे, आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी और पात्रता की शर्तों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं. इन सभी बातों पर सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है. 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में आई 41वीं किस्त लाड़ली बहना योजना को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है, जब बुधवार, 14 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उमरिया जिले के गुरुवाही ग्राम में आयोजित राज्य स्तरीय लाड़ली बहना सम्मेलन में योजना की 41वीं किस्त जारी की।

    मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए योजना की 1.25 करोड़ पात्र महिलाओं के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर की. इस दौरान करीब 1834 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई. इस कार्यक्रम के साथ ही योजना से जुड़ी महिलाओं के खातों में किस्त पहुंचने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. वहीं, अब योजना से बाहर रह गई महिलाओं के नाम जोड़ने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।


    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट

    मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है. योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है. अब सरकार की ओर से योजना के दायरे से बाहर रह गई महिलाओं की संख्या का आकलन कराया जा रहा है. इस प्रक्रिया के बाद पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर फैसला लिए जाने की संभावना है. फिलहाल महिलाओं को आवेदन शुरू होने की तारीख और पात्रता से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा. मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के बयान से पोर्टल दोबारा खुलने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अभी इसे लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

  • शुक्र की वक्री चाल से 42 दिनों तक इन 5 राशियों को मिल सकता है धन लाभ, जानें सभी 12 राशियों पर प्रभाव

    शुक्र की वक्री चाल से 42 दिनों तक इन 5 राशियों को मिल सकता है धन लाभ, जानें सभी 12 राशियों पर प्रभाव


    उज्जैन।
    ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रेम, वैवाहिक जीवन, सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य और भौतिक संपन्नता का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 3 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:45 बजे शुक्र वक्री होंगे। यह स्थिति 14 नवंबर 2026 की सुबह करीब 5:57 बजे तक रहने की बात कही गई है। इस तरह शुक्र की वक्री अवस्था की अवधि लगभग 42 दिन होगी।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र की चाल में बदलाव का असर प्रेम संबंधों, पारिवारिक जीवन और आर्थिक मामलों पर पड़ सकता है। इस दौरान कुछ राशियों के लिए पुराने मामलों की समीक्षा करने और आर्थिक योजनाओं को व्यवस्थित करने का समय माना जा रहा है। हालांकि, ग्रहों की चाल के आधार पर धन लाभ या नुकसान की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों के लिए क्या संकेत बताए जा रहे हैं।

    प्रेम संबंधों में आ सकते हैं बदलाव

    शुक्र को प्रेम और आकर्षण का कारक ग्रह माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र के वक्री होने की अवधि में पुराने रिश्तों और भावनात्मक मुद्दों पर दोबारा विचार करने की स्थिति बन सकती है।

    • पुरानी गलतफहमियां: लंबे समय से चल रहे मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने का अवसर मिल सकता है।
    • पुराने रिश्तों की याद: कुछ लोगों का संपर्क पुराने मित्रों या प्रेम संबंधों से दोबारा हो सकता है।
    • नए रिश्तों में सावधानी: भावनाओं में बहकर कोई बड़ा निर्णय लेने के बजाय परिस्थितियों को समझने की सलाह दी जाती है।

    वैवाहिक जीवन में समझदारी जरूरी

    इस अवधि को दांपत्य जीवन में आत्ममंथन और आपसी तालमेल बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। कुछ जोड़े अपने रिश्ते को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं, जबकि कुछ को मतभेदों का सामना करना पड़ सकता है।

    ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी करने के बजाय संवाद और आपसी समझ को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    आर्थिक मामलों में बरतें सावधानी

    शुक्र का संबंध ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं से जोड़ा जाता है। इसलिए शुक्र की वक्री चाल के दौरान आर्थिक योजनाओं की समीक्षा करने की सलाह दी जाती है।

    • खरीदारी से पहले बजट का आकलन करें।
    • बिना पर्याप्त जानकारी के निवेश करने से बचें।
    • गैरजरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखें।
    • बड़े आर्थिक फैसले लेते समय जोखिम और संभावित लाभ का आकलन करें।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में कुछ राशियों के लिए धन संबंधी अवसरों के संकेत बताए जाते हैं, लेकिन वास्तविक आर्थिक परिणाम आय, खर्च, बाजार की परिस्थितियों और व्यक्तिगत फैसलों पर निर्भर करते हैं।

    सभी 12 राशियों पर शुक्र की वक्री चाल का प्रभाव

    1. मेष राशि

    रिश्तों और साझेदारी से जुड़े पुराने मुद्दे सामने आ सकते हैं। कारोबार या वैवाहिक जीवन में लंबित मामलों को सुलझाने पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा। महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लें।

    2. वृषभ राशि

    दैनिक दिनचर्या, कामकाज और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें और अपने काम व्यवस्थित ढंग से करें।

    3. मिथुन राशि

    प्रेम संबंधों और संतान से जुड़े मामलों में धैर्य रखना जरूरी हो सकता है। पुरानी गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश करें। विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।

    4. कर्क राशि

    घरेलू मामलों और पारिवारिक संबंधों पर ध्यान देना पड़ सकता है। संपत्ति या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अपने बजट और जरूरतों की अच्छी तरह समीक्षा करनी चाहिए।

    5. सिंह राशि

    संवाद, छोटे भाई-बहनों और करीबी लोगों के साथ संबंध महत्वपूर्ण रह सकते हैं। बातचीत में संयम रखें और किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी शर्तें ध्यान से पढ़ें।

    6. कन्या राशि

    आय, बचत और पारिवारिक बातचीत से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें और विवादों को बढ़ने से रोकें।

    7. तुला राशि

    शुक्र की वक्री चाल तुला राशि में होने की ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस अवधि को आत्मविश्लेषण से जोड़कर देखा जा रहा है। व्यक्तित्व, रिश्तों और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करने का अवसर मिल सकता है। अहंकार से बचने और दूसरों की बात सुनने पर ध्यान दें।

    8. वृश्चिक राशि

    अचानक होने वाले खर्चों और यात्रा की योजनाओं पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। आर्थिक फैसले लेते समय जोखिम का आकलन करें। मानसिक शांति के लिए योग और ध्यान उपयोगी हो सकते हैं।

    9. धनु राशि

    सामाजिक संपर्कों और आय के स्रोतों से जुड़े मामलों की समीक्षा करने का समय माना जा रहा है। पुराने मित्रों से संपर्क दोबारा बन सकता है। कम समय में अधिक लाभ पाने के लालच में जोखिम न लें।

    10. मकर राशि

    करियर और कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत में संयम रखें। नौकरी बदलने या नया काम शुरू करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें।

    11. कुंभ राशि

    आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ने की संभावना ज्योतिषीय मान्यताओं में बताई गई है। लंबी यात्रा की योजना बनाते समय तैयारी और जरूरी सामान पर ध्यान दें। विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई जारी रखनी चाहिए।

    12. मीन राशि

    स्वास्थ्य, साझा आर्थिक मामलों और पारिवारिक संबंधों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। ससुराल पक्ष के साथ मतभेद होने पर बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश करें। जोखिम वाले निवेश में बिना जानकारी के पैसा लगाने से बचें।

    शुक्र की वक्री चाल के दौरान क्या उपाय करें?

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में कुछ सामान्य उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।

    • रिश्तों में संवाद: मतभेद होने पर खुलकर बातचीत करें और अहंकार को बीच में न आने दें।
    • भावनात्मक संतुलन: किसी बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत होकर विचार करें।
    • आर्थिक अनुशासन: आय और खर्च का हिसाब रखें तथा अनावश्यक खरीदारी से बचें।
    • व्यक्तिगत कुंडली का आकलन: ज्योतिषीय दृष्टि से किसी विशेष उपाय या निर्णय के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श लिया जा सकता है।

    ध्यान दें: ग्रहों की चाल और राशियों पर उनके प्रभाव से जुड़ी बातें ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। धन लाभ, करियर या रिश्तों में होने वाले बदलावों की वैज्ञानिक रूप से निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। आर्थिक फैसले वास्तविक परिस्थितियों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ही लें।

  • अनंत चतुर्दशी पर 18 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: 4 राशियों के लिए धन और तरक्की के योग

    अनंत चतुर्दशी पर 18 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: 4 राशियों के लिए धन और तरक्की के योग


    नई दिल्ली। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी यानी अनंत चतुर्दशी को सनातन धर्म में बेहद पवित्र माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा कर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण किया जाता है और गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है। इस बार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ पंचक भी रहेगा और ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा।

    ज्योतिष गणना के मुताबिक इस दिन कुंभ राशि में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग बनने की बात कही जा रही है। चंद्रमा के कुंभ राशि में रहने के कारण पंचक का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस संयोग का असर सभी राशियों पर अलग-अलग हो सकता है, लेकिन चार राशियों के लिए आर्थिक लाभ, करियर और सफलता के विशेष योग बताए जा रहे हैं।

    18 साल बाद कुंभ राशि में चंद्र-राहु का संयोग

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार राहु किसी एक राशि में करीब 18 महीने यानी डेढ़ साल तक रहते हैं, जबकि चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में राशि बदलते हैं। ऐसे में राहु के कुंभ राशि में गोचर के दौरान चंद्रमा का भी इसी राशि में आना अपेक्षाकृत दुर्लभ संयोग माना जाता है।

    इसी आधार पर अनंत चतुर्दशी के दिन कुंभ राशि में चंद्रमा और राहु की युति को करीब 18 साल बाद बनने वाला संयोग बताया जा रहा है। वहीं, पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा और शतभिषा नक्षत्र के बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इस दिन पंचक भी दर्ज है।

    मेष राशि: आय के नए रास्ते खुलने के योग

    मेष राशि वालों के लिए यह युति 11वें भाव यानी आय और लाभ के भाव में बनने की बात कही गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका सकारात्मक प्रभाव आर्थिक मामलों में देखने को मिल सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए किसी बड़ी डील के फाइनल होने के योग बन सकते हैं।

    मिथुन राशि: भाग्य का साथ, विदेश से जुड़े काम में अवसर

    मिथुन राशि के जातकों के लिए चंद्रमा और राहु का संयोग 9वें भाव यानी भाग्य और धर्म के भाव में बनने की बात कही गई है।

    इसके प्रभाव से अटके हुए काम गति पकड़ सकते हैं। उच्च शिक्षा, विदेश व्यापार और ऑनलाइन बिजनेस से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। धार्मिक यात्रा के योग भी बन सकते हैं। भाग्य का साथ मिलने से कई महत्वपूर्ण काम पूरे होने की संभावना जताई जा रही है।

    तुला राशि: निवेश से लाभ और रचनात्मक क्षेत्र में पहचान

    तुला राशि के लिए यह युति 5वें भाव यानी बुद्धि, संतान और लाभ से जुड़े भाव में बनने की बात कही गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक शेयर मार्केट या पुराने निवेश से अचानक आर्थिक लाभ मिल सकता है। रचनात्मक और मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों के काम को पहचान मिल सकती है। इस दौरान अन्य शुभ ग्रहों के प्रभाव को भी तुला राशि के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

    धनु राशि: आत्मविश्वास बढ़ेगा, करियर में बदलाव के संकेत

    धनु राशि के जातकों के लिए चंद्रमा और राहु का संयोग तीसरे भाव यानी पराक्रम और छोटे भाई-बहनों से संबंधित भाव में बनने की बात कही गई है।

    इससे आत्मविश्वास और काम करने की क्षमता बढ़ने के योग बताए जा रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है या पदोन्नति के अवसर बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी कार्यशैली की सराहना हो सकती है। विरोधियों पर प्रभाव बढ़ने के भी संकेत बताए गए हैं।

  • सब्सिडी का लाभ लेने वाले LPG ग्राहकों के लिए 1 अक्टूबर से बदलेगा ये नियम…

    सब्सिडी का लाभ लेने वाले LPG ग्राहकों के लिए 1 अक्टूबर से बदलेगा ये नियम…


    नई दिल्ली।
    घरेलू एलपीजी सिलेंडर (Domestic LPG cylinder) पर सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर है। दरअसल, 1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी के साथ विनियमित खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) पर घरेलू LPG रिफिल बुक कराने के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (Biometric Aadhaar Authentication- BAA) पूरा करना अनिवार्य होगा। अगर ऐसा नहीं कराया तो सब्सिडी का लाभ मिलने में दिक्कत हो सकती है।


    क्या है इसका मकसद?

    बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण से यह सुनिश्चित होता है कि सब्सिडी वाली एलपीजी केवल वास्‍तविक और योग्‍य परिवारों तक पहुंचे। प्रत्‍येक कनेक्शन को आधार-प्रमाणित उपभोक्‍ता से जोड़ने से सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों का कॉमर्शियल और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए डायवर्जन रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा, डुप्लीकेट और अयोग्य कनेक्शन हटते हैं। वहीं, सब्सिडी पहुंचाने का तरीका पारदर्शी और सही लोगों तक पहुंचने वाला बनता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्‍य किसी भी वास्‍तविक परिवार को एलपीजी से वंचित करना नहीं है और प्रत्‍येक योग्य उपभोक्‍ता इसे कई आसान तरीकों से पूरा कर सकते हैं।


    कितने लोग कर चुके बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि 19 सितंबर तक देश के 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ता यानी 89.9 प्रतिशत अपना बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा कर चुके हैं। इन उपभोक्ताओं को दोबारा प्रमाणीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी और उन्हें रिफिल पहले की तरह मिलता रहेगा।


    एक अक्टूबर से पहले करना जरूरी

    जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा नहीं किया है, वे एक अक्टूबर से पहले इसे पूरा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के समय भी पूरी की जा सकती है। डिलीवरी कर्मचारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) के मोबाइल ऐप के माध्यम से मौके पर ही प्रमाणीकरण करा सकता है। इसके अलावा उपभोक्ता अपने एलपीजी वितरक की दुकान पर जाकर भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। उपभोक्ताओं के लिए घर बैठे मोबाइल ऐप से स्वयं ई-केवाईसी पूरा करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

    इंडेन के ग्राहक इंडेनऑइलवन, भारत गैस के ग्राहक हेलोबीपीसीएल और एचपी गैस के ग्राहक एचपी पे ऐप के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। स्वयं ई-केवाईसी करने के संबंध में वीडियो ट्यूटोरियल पीएमयूवाई पोर्टल पर उपलब्ध है।

    जिन उपभोक्ताओं ने बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा नहीं किया है, उनके लिए प्रमाणीकरण पूरा होने के बाद सब्सिडी के साथ खुदरा बिक्री मूल्य पर रिफिल बुकिंग शुरू हो जाएगी। हालांकि, जो उपभोक्ता बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराना चाहते या किसी कारण से इसे पूरा करने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए भी एलपीजी प्राप्त करने का विकल्प रहेगा।


    LPG पर करीब ₹210 की सब्सिडी

    सरकार घरेलू LPG को उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनाए रखने के लिए वित्तीय सहायता भी दे रही है। सितंबर 2026 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू LPG सिलेंडर पर निहित सब्सिडी करीब ₹210 प्रति सिलेंडर बताई गई है।

  • अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर सशस्त्र बलों के जवानों और उनके परिवारों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं तथा कल्याणकारी योजनाओं को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक नई और व्यापक बहस छिड़ गई है। हाल ही में एक भारतीय मूल की महिला और उनके अमेरिकी सैन्यकर्मी पति द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए विवरणों के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस विवरण में अमेरिकी सशस्त्र बलों से जुड़े कर्मियों को मिलने वाले विभिन्न दीर्घकालिक और तात्कालिक लाभों का उल्लेख किया गया है, जिसके बाद इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच विभिन्न देशों की रक्षा कल्याण नीतियों और उनकी प्रभावशीलता को लेकर तुलनात्मक समीक्षाएं शुरू हो गई हैं।

    सशस्त्र बलों के कल्याणकारी ढांचे के तहत मिलने वाले मुख्य लाभों में शिक्षा, चिकित्सा और आवास संबंधी नीतियां सर्वोपरि होती हैं। साझा किए गए विवरणों में दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य व्यवस्था के अंतर्गत कर्मियों को जीवनभर के लिए मुफ्त शिक्षा सहायता, उच्च शिक्षा के दौरान मासिक भत्ता तथा ‘डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स’ के माध्यम से संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, गृह निर्माण या खरीद प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक न्यूनतम प्रशासनिक शुल्क पर आवास आवंटन की प्रक्रिया को भी मुख्य लाभ के रूप में रेखांकित किया गया है। इन जानकारियों के सार्वजनिक होते ही दुनिया भर के सैन्य परिवारों और आम नागरिकों ने अपने-अपने देशों के सैन्य सेवा नियमों से इसकी तुलना करना शुरू कर दिया है।

    भारतीय परिप्रेक्ष्य में इस बहस ने एक नया मोड़ ले लिया है, जहां अनेक पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और रक्षा विशेषज्ञों ने भारतीय सशस्त्र बलों की कल्याणकारी नीतियों को भी उतना ही सुदृढ़ और व्यापक बताया है। चर्चा के दौरान यह तथ्य प्रमुखता से उभरा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में कार्यरत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को भी अत्यंत सुव्यवस्थित स्वास्थ्य योजनाएं, रियायती दरों पर राशन, सैन्य छावनियों में आवास सुविधाएं और विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। भारतीय रक्षा कल्याण तंत्र के तहत पूर्व सैनिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य योजना जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जो देश भर में विस्तृत अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से मुफ्त चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करती हैं।

    आवास और पारिश्रमिक के अतिरिक्त, विदेशी रक्षा कर्मियों के परिवारों को मिलने वाली आव्रजन संबंधी सुलभता भी इस वैश्विक चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गई है। सैन्य सेवा में कार्यरत कर्मियों के विदेशी जीवनसाथियों के लिए वीजा और स्थायी निवास संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में प्राथमिकता दिए जाने के मामलों को लेकर भी विशेषज्ञ अपनी राय रख रहे हैं। विभिन्न विश्लेषकों का मानना है कि रणनीतिक और सुरक्षा कारणों से सैन्य कर्मियों के परिवारों को प्रशासनिक स्तर पर शीघ्रता से नागरिक सुविधाएं प्रदान करना कई देशों की आधिकारिक नीति का हिस्सा होता है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल आम नागरिकों के बीच रक्षा बलों के प्रति आकर्षण और जागरूकता को बढ़ाया है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया है कि आधुनिक युग में रक्षा बल केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की एक व्यापक गारंटी प्रदान करते हैं। सोशल मीडिया पर जारी यह बहस अब केवल सुविधाओं के आंकड़ों तक सीमित न रहकर इस बात का विश्लेषण बन चुकी है कि विभिन्न विकसित और विकासशील देश अपने सैनिकों के जीवन स्तर को सुरक्षित करने के लिए किस प्रकार की नीतियां अपनाते हैं।

  • आयकर स्लैब से कम है सालाना कमाई तो भी भरें ITR… इसके फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

    आयकर स्लैब से कम है सालाना कमाई तो भी भरें ITR… इसके फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान


    नई दिल्ली।
    एक अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष (New Financial Year) शुरू हो चुका है और टैक्सपेयर (Taxpayer.) आयकर रिटर्न (Income Tax Return.-ITR) दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन, बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनकी सालाना इनकम कमाई टैक्स स्लैब (Annual Income Tax Slab.) से कम है या कटौती के बाद उनकी टैक्स की देनदारी शून्य हो जाती है। ऐसे में उन्हें लगता है कि उन्हें अब आईटीआर दाखिल करने की जरूरत नहीं है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसे मामलों में ‘शून्य आईटीआर’ दाखिल की जा सकती है, जिसके अपने कई फायदे हैं।

    सभी के लिए आईटीआर भरना जरूरी
    इनकम टैक्स रूल्स के मुताबिक, उन सभी लोगों को आईटीआर जमा करना जरूरी है, जिनकी कुल इनकम मूल टैक्स छूट की सीमा से अधिक है। कई लोगों को गलतफहमी रहती है कि यदि उनकी सालाना आय ओल्ड टैक्स रिजीम में पांच लाख रुपये और नए टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये से कम है तो ITR भरना जरूरी नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है।

    टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस सीमा से कम आय होने पर टैक्स इसलिए नहीं देना पड़ता क्योंकि धारा 87ए के तहत ओल्ड टैक्स रिजीम में 12,500 रुपये और नए टैक्स रिजीम में 60 हजार रुपये तक की रिबेट मिलती है, लेकिन पुरानी व्यवस्था में छूट की वास्तविक सीमा अब सिर्फ 2.5 लाख रुपये है। वहीं, नई कर व्यवस्था में यह सीमा चार लाख रुपये है। अगर इससे एक रुपये भी अधिक आय है तो टैक्सपेयर के लिए आईटीआर दाखिल करना जरूरी है, भले ही उनका टैक्स शून्य हो। इसे जीरो आईटीआर भी कहते हैं।

    इन मामलों में जरूर भरें आईटीआर
    1. भारी-भरकम बिजली बिल का भुगतान

    नियमों के अनुसार, अगर टैक्सपेयर ने एक वित्त वर्ष के दौरान कुल मिलाकर एक लाख रुपये या उससे अधिक का बिजली बिल चुकाया है, तो आपके लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है। भले ही उसकी कुल सालाना टैक्स स्लैब से कम हो। विभाग यह मानकर चलता है कि आपकी जीवनशैली और खर्च घोषित आय से मेल नहीं खा रहे हैं।

    2. विदेश यात्रा पर बड़ा खर्च
    अगर टैक्सपेयर ने विदेश यात्रा पर दो लाख या उससे ज्यादा खर्च किए हैं, तो आईटीआर भरना होगा। इस मामले में नियम बहुत स्पष्ट हैं। इसके अनुसार, विदेश यात्रा पर दो लाख से अधिक का खर्च उच्च श्रेणी के लेनदेन में शामिल होता है। इसलिए इस खर्च के कारण विभाग को सूचित करना अनिवार्य हो जाता है।


    3. बैंक खातों में बड़ी रकम जमा करना

    यदि व्यक्ति ने अपने बचत खाते में 50 लाख या उससे ज्यादा की नकद राशि जमा की है, तो आईटीआर भरना जरूरी है। ‘करेंट अकाउंट’ के मामले में यह सीमा एक करोड़ रुपये या इससे अधिक है। कई बार संपत्ति बेचने या निवेश की रकम प्राप्त होने पर इतनी बड़ी रकम खाते में प्राप्त होती है। बैंक इसकी जानकारी आयकर विभाग को देता है। ऐसे में टैक्सपेयर के लिए भी रिटर्न भरना अनिवार्य हो जाता है।


    4. इसके लिए भी जरूरी

    अगर किसी व्यक्ति का टीडीएस या टीसीएस 25,000 रुपये या उससे अधिक कटा है (बुजुर्गों के लिए ₹50,000), तो रिफंड लेने या न लेने, दोनों ही स्थितियों में रिकॉर्ड के लिए आईटीआर दाखिल करना होता है। इसके अलावा अगर अगर कुल व्यावसायिक बिक्री 60 लाख रुपये से अधिक है या पेशेवर आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तब भी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।


    जीरो आईटीआर भरने के फायदे
    1. लोन लेना आसान

    होम लोन या व्यक्तिगत कर्ज देने से पहले बैंक या वित्तीय संस्थान पिछलने तीन वर्षों का आयकर रिटर्न मांगते हैं। इससे कर्ज मिलने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।


    2. विदेश जाने के लिए भी मददगार

    विदेश यात्रा के लिए वीजा आवेदन करते समय संबंधित देश के दूतावास वित्तीय स्थिति जांचने करते हैं। इसके लिए भी आईटीआर मांगते हैं। इससे वीजा मिलना आसान हो जाता है।


    3. शेयर बाजार में निवेश पर बचा सकते हैं टैक्स

    शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में अगर घाटा हुआ है, तो उस हानि को अगले कुछ सालों के लिए समायोजित (कैरी फॉरवर्ड) करने की सुविधा तभी मिलती है, जब आप समय पर आईटीआर दाखिल करते हैं।


    4. बिना आईटीआर टीडीएस रिफंड नहीं मिलेगा

    कई बार बैंक टैक्स दायरे में नहीं आने के बावजूद फिक्स डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर टीडीएस काट लेते हैं। इसका रिफंड बिना आईटीआर दाखिल किए नहीं मिलेगा।


    विभाग के पास हर वित्तीय गतिविधि की जानकारी

    मौजूदा समय में आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा एनालिटिक्स का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है। वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (टीआईए,) जैसे टूल्स के जरिए विभाग के पास आपके बैंक ब्याज, शेयर बाजार के निवेश, डिविडेंड और हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन की पूरी डिटेल मौजूद रहती है। ऐसी में अगर आप अपनी कमाई का ब्यौरा नहीं देते हैं, तो डाटा में विसंगति होने पर विभाग की ओर से नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है।


    ITR Slab (नई व्यवस्था)

    ₹0 से ₹4 लाख: शून्य
    ₹4 लाख से ₹8 लाख: 5%
    ₹8 लाख से ₹12 लाख: 10%
    ₹12 लाख से ₹16 लाख: 15%
    ₹16 लाख से ₹20 लाख: 20%
    ₹20 लाख से ₹24 लाख: 25%
    ₹24 लाख से अधिक: 30%


    पुरानी टैक्स व्यवस्था के स्लैब

    ₹0 से ₹2.5 लाख : शून्य
    ₹2.5 लाख से ₹5 लाख: 5%
    ₹5 लाख से ₹10 लाख : 20%
    ₹10 लाख से अधिक: 30%

  • भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहने का मंत्र ये योगासन देंगे सेहत संतुलन और सुकून

    भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहने का मंत्र ये योगासन देंगे सेहत संतुलन और सुकून


    नई दिल्ली । हर साल 7 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें यह याद दिलाता है कि स्वस्थ जीवन ही सबसे बड़ी पूंजी है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां तनाव और अनियमित दिनचर्या आम हो चुकी है वहीं दिल और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में योग एक ऐसा सरल और प्रभावी उपाय है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में मदद करता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित योगाभ्यास न केवल हृदय को मजबूत बनाता है बल्कि पाचन क्रिया को भी बेहतर करता है। साथ ही यह मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। कुछ ऐसे खास योगासन हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं।

    सबसे पहले बात करें सूर्य नमस्कार की जिसे सभी योगासनों का राजा कहा जाता है। यह पूरे शरीर का व्यायाम है जो पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और हृदय की धड़कन को संतुलित बनाए रखता है। सुबह खाली पेट इसका अभ्यास करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है और यह तनाव को कम करने में भी मदद करता है।

    इसके बाद भुजंगासन आता है जो रीढ़ और हृदय के लिए बेहद फायदेमंद है। इस आसन में शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाने से पीठ और पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है। हालांकि इसे करते समय शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना चाहिए।

    वृक्षासन संतुलन और मानसिक शांति के लिए एक बेहतरीन आसन है। एक पैर पर खड़े होकर किया जाने वाला यह अभ्यास न केवल शरीर को स्थिरता देता है बल्कि मन को भी शांत और एकाग्र बनाता है। यह जोड़ों की मजबूती के लिए भी लाभकारी है।

    पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए अर्ध मत्स्येन्द्रासन बेहद उपयोगी माना जाता है। यह पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करता है जिससे भोजन का पाचन बेहतर होता है। इसे भोजन के कुछ समय बाद करना चाहिए ताकि शरीर को अधिक लाभ मिल सके।

    अंत में मार्जार्यासन उन लोगों के लिए खास है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और पीठ तथा गर्दन के दर्द को कम करने में मदद करता है। साथ ही शरीर के पोश्चर को सुधारने में भी यह काफी कारगर है।

    कुल मिलाकर ये पांच योगासन न केवल आपके दिल और पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करते हैं। यदि इन्हें नियमित रूप से सही तरीके से किया जाए तो यह आपको स्वस्थ जीवन के साथ लंबी उम्र का भी वरदान दे सकते हैं।

  • हनुमान जी को प्रसन्न करने का आसान उपाय मंगलवार व्रत के नियम और पूजन विधि जरूर जानें

    हनुमान जी को प्रसन्न करने का आसान उपाय मंगलवार व्रत के नियम और पूजन विधि जरूर जानें


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन अत्यंत पवित्र और विशेष माना जाता है। यह दिन हनुमान जी को समर्पित होता है जिन्हें संकट मोचन और भक्तों के कष्ट हरने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ मंगलवार का व्रत रखकर बजरंगबली की आराधना करता है उसके जीवन के सभी दुख और बाधाएं धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    मंगलवार व्रत की महिमा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाता है मानसिक शक्ति प्रदान करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। विशेष रूप से जिन लोगों के जीवन में बार बार बाधाएं आती हैं उन्हें यह व्रत करने की सलाह दी जाती है।

    मंगलवार व्रत रखने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है। सबसे पहले साधक को प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के समय यदि संभव हो तो लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए क्योंकि यह रंग हनुमान जी को प्रिय माना जाता है।

    पूजा के लिए हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान का चयन करें और लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठकर साधना करें। पूजा करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए क्योंकि इसे शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 से 6 बजे के बीच पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा संध्या के समय प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है।

    व्रत के दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति फलाहार कर सकते हैं और दिनभर संयम और सात्विकता बनाए रखना आवश्यक होता है। धूम्रपान और नशे जैसी आदतों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

    कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं जिनका पालन करना जरूरी है। जैसे महिलाओं को हनुमान जी को चोला अर्पित नहीं करना चाहिए और पूजा के दौरान हनुमान जी को चरणामृत से स्नान नहीं कराया जाता है। यह परंपराएं शास्त्रों में वर्णित हैं और इनका पालन करना शुभ माना जाता है।

    मंगलवार व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि अनुशासन और श्रद्धा का प्रतीक है। जब व्यक्ति पूरे मन से इस व्रत का पालन करता है तो उसे न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी मंगलवार का व्रत रखते हैं तो इन नियमों का पालन जरूर करें ताकि आपका व्रत पूर्ण और फलदायी बन सके।

  • पपीता खाने के 7 अद्भुत फायदे: जानें सुबह के नाश्ते में क्यों शामिल करें पपीता

    पपीता खाने के 7 अद्भुत फायदे: जानें सुबह के नाश्ते में क्यों शामिल करें पपीता


    नई दिल्ली । पपीता एक पोषक तत्वों से भरपूर फल है जो न केवल शरीर को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि कई बीमारियों से भी बचाव करता है। विशेष रूप से सुबह नाश्ते में पपीता खाने से शरीर को जबरदस्त फायदे हो सकते हैं। अगर आप अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहते हैं, तो पपीता को नाश्ते में शामिल करना एक बेहतरीन आदत साबित हो सकता है। आइए जानते हैं नाश्ते में पपीता खाने के सात अद्भुत फायदे।

    पाचन तंत्र को दुरुस्त रखें

    पपीते में पाया जाने वाला एंजाइम पपेन पाचन को बेहतर बनाता है। यह कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। सुबह नाश्ते में पपीता खाने से पेट साफ और हल्का महसूस होता है।

    इम्यूनिटी को बढ़ावा

    पपीता विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। नियमित रूप से पपीता खाने से सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण का खतरा कम होता है।

    वजन घटाने में सहायक

    अगर आप वजन घटाने की योजना बना रहे हैं, तो पपीता आपके लिए आदर्श है। इसमें कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और ओवरईटिंग से बचाव होता है।

    दिल को स्वस्थ रखे

    पपीता खराब कोलेस्ट्रॉल LDL को कम करता है। इसमें पोटैशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं और हार्ट डिजीज का खतरा कम करते हैं।

    त्वचा को बनाए चमकदार

    पपीता आपकी त्वचा के लिए एक प्राकृतिक ब्यूटी ट्रीटमेंट है। इसमें मौजूद विटामिन A, C और E त्वचा को जवां और चमकदार बनाए रखते हैं, साथ ही यह दाग-धब्बों को भी दूर करने में मदद करता है।

    आंखों की रोशनी में सुधार

    पपीते में बीटा-कैरोटीन और विटामिन A होते हैं, जो आंखों की रोशनी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह उम्र के साथ होने वाली आंखों की समस्याओं को भी रोकता है।

    डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद

    पपीता मीठा होने के बावजूद इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है। सही मात्रा में सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों के लिए यह फायदेमंद हो सकता है।

    पपीता खाने का तरीका

    सुबह नाश्ते में ताजा पपीता खाएं। आप चाहें तो इसके ऊपर कुछ बूंदें नींबू की डाल सकते हैं लेकिन नमक या चीनी मिलाने से बचें। पीता सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है खासकर जब इसे सुबह नाश्ते में शामिल किया जाए। यह न केवल पाचन और इम्यूनिटी को मजबूत करता है, बल्कि दिल और त्वचा की सेहत के लिए भी लाभकारी है। रोजाना इस फल को अपनी डाइट में शामिल करें और इससे होने वाले फायदों का अनुभव करें।