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  • मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर संबोधन दिया। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन से जुड़े इस कार्यक्रम में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता, स्वदेशी, नई पीढ़ी के सामने मौजूद चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने नागरिकों से एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने तथा व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपने कर्तव्यों का पालन करने की अपील की।

    भागवत ने स्वदेशी अपनाने और अपने देश की पहचान को समझने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संविधान में निहित ‘हम भारत के लोग’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि विविधताओं के बावजूद भारतीय समाज भावनात्मक रूप से एकजुट है। इस संबंध को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, देश की सांस्कृतिक चेतना और नागरिकों के बीच परस्पर जुड़ाव राष्ट्रीय जीवन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने संत रविदास की 650वीं जयंती, स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के कार्यों का भी स्मरण किया। उन्होंने इन महापुरुषों के जीवन और योगदान से प्रेरणा लेने की बात कही। इसके साथ ही बंगाल के राज नारायण बसु के जन्म के 200वें वर्ष का उल्लेख करते हुए स्वदेशी मेलों के माध्यम से आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने के प्रयासों की चर्चा की।

    नेपाल में आई त्रासदी पर चिंता जताते हुए भागवत ने हिमालयी क्षेत्र में विकास के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। उन्होंने भारत, तिब्बत, भूटान और चीन में हुए एकांगी विकास को क्षेत्रीय संकट के संदर्भ में रेखांकित किया। उनके अनुसार, हिमालयी क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास की समग्र और संतुलित दृष्टि अपनाने की जरूरत है।

    भारत की विविधता और सांस्कृतिक परंपरा पर बात करते हुए उन्होंने सनातन संस्कृति को राष्ट्रीय एकता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टि विभिन्न पंथों, जातियों और समुदायों के प्रति सम्मान का भाव रखती है। सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने सामाजिक समरसता, परिवारों में संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध और नागरिक अनुशासन को महत्वपूर्ण बताया।

    नई पीढ़ी पर डिजिटल माध्यमों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए भागवत ने उचित और अनुचित के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विशेष रूप से ओटीटी मंचों पर नियंत्रण और अनुशासन की जरूरत का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि परिवार, विद्यालय और सामाजिक वातावरण से मिलने वाले संस्कारों की भूमिका कम होने के कारण बच्चों और युवाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। उन्होंने नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या पर भी चिंता जताई और इसके समाधान के लिए शासन-प्रशासन तथा समाज को मिलकर देशव्यापी प्रयास करने की जरूरत बताई।

    भागवत ने हिंदू भाव को किसी एक पूजा पद्धति, भाषा, खानपान या रहन-सहन तक सीमित मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे आध्यात्मिकता, मानवता और विश्वबंधुत्व से जुड़ी व्यापक दृष्टि के रूप में प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने भारत और हिंदू समाज को कमजोर करने की कोशिश करने वाली विभाजनकारी ताकतों के प्रति सतर्क रहने की बात कही। उनके भाषण में विदेशी शक्तियों और उनके कथित सहयोगियों द्वारा भारत में आंतरिक मतभेद बढ़ाने की आशंका भी शामिल रही।

    आंदोलनों के संबंध में भागवत ने कहा कि सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था में कमियों के कारण विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों, शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेताओं से संविधान, कानून और शालीन व्यवहार की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उनके अनुसार, राजनीतिक लाभ, वोट और लोकप्रियता की इच्छा सामाजिक सद्भाव को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

    अंत में उन्होंने नागरिकों से व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु और समृद्ध राष्ट्र बनाने का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक के प्रयास, जिम्मेदारी और कर्तव्यपालन से ही हासिल किया जा सकता है।

  • MP में 17 से 20 सितंबर तक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, नितिन नवीन, राहुल गांधी, मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले रहेंगे मौजूद

    MP में 17 से 20 सितंबर तक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, नितिन नवीन, राहुल गांधी, मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले रहेंगे मौजूद

     मध्यप्रदेश । अगले चार दिन मध्यप्रदेश की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं। 17 से 20 सितंबर के बीच प्रदेश में देश के कई बड़े चेहरे नजर आएंगे। एक तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का दौरा होगा, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी युवाओं के बीच पहुंचेंगे। इसी दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले भी प्रदेश में मौजूद रहेंगे। ऐसे में इन चार दिनों के दौरान मध्यप्रदेश का राजनीतिक और सामाजिक माहौल काफी सक्रिय रहने वाला है और इन सभी कार्यक्रमों पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

    17 सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मध्यप्रदेश के दौरे पर पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उनका मंदसौर, इंदौर और उज्जैन में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है। बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। नितिन नवीन मध्यप्रदेश में इससे जुड़े आयोजनों में हिस्सा लेंगे।

    नितिन नवीन मंदसौर में SVAMITVA योजना से जुड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति और आवासीय जमीन से जुड़े अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार कर लोगों को दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। उनके दौरे में गांधी सागर अभयारण्य भी महत्वपूर्ण रहेगा। यहां चीता पुनर्वास योजना के तहत कार्यक्रम होना है। कूनो के बाद गांधी सागर को भी चीतों के लिए विकसित किया जा रहा है।

    17 और 18 सितंबर को RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उज्जैन में रहेंगे। उज्जैन पहुंचने के बाद वे संघ के स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वे मध्यप्रदेश की पहली ‘युवा धर्म संसद’ में युवाओं से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में स्वामी अवधेशानंद गिरि, गीतकार मनोज मुंतशिर और IIM इंदौर के निदेशक हिमांशु राय समेत कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रहेगी।

    मोहन भागवत उज्जैन में आयोजित बड़े दीप प्रज्वलन कार्यक्रम का भी हिस्सा बनेंगे। उनके दौरे को लेकर संघ के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया है। पुलिस और प्रशासन भी सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियों में जुटा है।

    19 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंदौर पहुंचेंगे। यहां ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए वे युवाओं और Gen Z से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही गई है। राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस संगठन की तैयारियां तेज हो गई हैं।

    चार दिनों के इस सिलसिले का अंतिम बड़ा कार्यक्रम 20 सितंबर को भोपाल में होगा। RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले लाल परेड मैदान में आयोजित ‘शाखा संगम’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के शामिल होने की तैयारी है। इनमें 30 हजार से ज्यादा Gen-Z स्वयंसेवक शामिल होंगे, जबकि कुल उपस्थिति करीब 50 हजार बताई जा रही है।

    संघ के अनुसार भोपाल विभाग के पांच जिलों और छह नगरों की करीब 800 शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों की ओर से शारीरिक अभ्यास और दंड प्रदर्शन भी किया जाएगा। दत्तात्रेय होसबाले अपने संबोधन में समाज के सामने मौजूद चुनौतियों, भविष्य के लक्ष्यों और इतिहास से मिलने वाली सीख पर बात करेंगे।

  • मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध पर मैरी मिलबेन ने जोहरान ममदानी को मोदी और बीजेपी विरोधी बताया

    मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध पर मैरी मिलबेन ने जोहरान ममदानी को मोदी और बीजेपी विरोधी बताया

    नई दिल्ली ।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने सार्वजनिक रूप से अपना विरोध जताया है। इसके बाद अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन ने ममदानी और कार्यक्रम के अन्य आलोचकों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    ममदानी ने कहा है कि वह भागवत के कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि यह एक निजी कार्यक्रम है और इसे रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। उनका विरोध आरएसएस की विचारधारा और भारत को लेकर उसके दृष्टिकोण से जुड़ी चिंताओं पर आधारित है।

    भागवत का यह कार्यक्रम आरएसएस के शताब्दी वर्ष में चल रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। कार्यक्रम को यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारतीय प्रवासी समुदाय के करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने की संभावना बताई गई है।

    ममदानी ने आरएसएस की विचारधारा को लेकर कहा है कि वह ऐसी सोच के विरोध में हैं जिसे वह किसी देश के लिए बहिष्कारी दृष्टिकोण मानते हैं। उनका कहना है कि न्यूयॉर्क ऐसा शहर है जो रंग, धर्म, आस्था और मूल स्थान की परवाह किए बिना सभी लोगों के साथ समान व्यवहार की भावना में विश्वास करता है।

    ममदानी के बयान के बाद कार्यक्रम के समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पर ममदानी और अन्य आलोचकों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत के कार्यक्रम का विरोध करने वाले लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के विरोध के कारण ऐसा कर रहे हैं।

    मिलबेन ने अपने बयान में ममदानी और उनके साथ कार्यक्रम का विरोध करने वालों की राजनीतिक विचारधारा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन व्यावसायिक नियमों के आधार पर काम करता है और इसलिए राजनीतिक विरोध के आधार पर कार्यक्रम को रोका नहीं जाना चाहिए।

    इस विवाद के बीच कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है। न्यूयॉर्क में कुछ नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों ने भागवत की मौजूदगी का विरोध किया तथा कार्यक्रम को रद्द करने की मांग उठाई है। इससे यह मुद्दा केवल भारतीय प्रवासी समुदाय तक सीमित न रहकर अमेरिकी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया है।

    मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। उनका अमेरिका दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष से जुड़े वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। अमेरिका के बाद उनके कनाडा और ब्रिटेन जाने का कार्यक्रम भी बताया गया है।

    मैरी मिलबेन इससे पहले भी भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ चुकी हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी के एक कार्यक्रम से पहले भारत का राष्ट्रगान प्रस्तुत किया था। इसके कारण भारतीय समुदाय के बीच भी उनकी पहचान बनी है।

    फिलहाल भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के रुख स्पष्ट हैं। एक ओर ममदानी और कुछ संगठन आरएसएस की विचारधारा को लेकर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं मिलबेन सहित कार्यक्रम के समर्थक इसे भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़ा आयोजन मानते हैं। 29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम पर अब सभी की नजर बनी हुई है और इससे पहले राजनीतिक बहस के और तेज होने की संभावना है।

  • मोहन भागवत बोले- पूरी जानकारी के बिना फैसला ठीक नहीं, प्रियंका गांधी ने जवाब देकर तेज किया सियासी विवाद

    मोहन भागवत बोले- पूरी जानकारी के बिना फैसला ठीक नहीं, प्रियंका गांधी ने जवाब देकर तेज किया सियासी विवाद

    नई दिल्ली । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। युवाओं से संवाद के दौरान भागवत ने उनके विचारों को सुनने के साथ कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने किसी भी मामले में पूरी जानकारी सामने आने से पहले जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कही। इसी दौरान उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताया, जिसके बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भागवत के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं को किसी तरह के प्रमाण या मंजूरी की जरूरत नहीं है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज हो गई है।

    मोहन भागवत ने युवाओं से बातचीत के दौरान कहा कि किसी भी घटना या विवाद के बारे में फैसला करने से पहले उसके सभी तथ्यों को समझना जरूरी है। उनका कहना था कि जब तक किसी मामले से जुड़े सभी तथ्य सामने नहीं आ जाते, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि सच्चाई सामने आने तक इंतजार किया जाना चाहिए। भागवत ने यह भी संकेत दिया कि कुछ रिपोर्टों में अन्य लोगों के शामिल होने की बातें सामने आई हैं, लेकिन बिना ठोस प्रमाण किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा। उनके इसी रुख को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं।

    प्रियंका गांधी ने भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं को किसी प्रमाण या मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। उनके बयान को कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों और उनकी चिंताओं से जोड़कर देखा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि वास्तव में छात्रों और युवाओं की चिंता है तो संबंधित घटनाओं और उनसे जुड़े सवालों पर स्पष्ट रूप से जवाब सामने आना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि युवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

    कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं और छात्रों की चिंता वास्तविक है तो केंद्र सरकार को संबंधित मामलों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने छात्रों के साथ हुई घटनाओं की जांच की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिन लोगों की भूमिका सामने आती है, उनसे जवाब मांगा जाना चाहिए।

    दरअसल, मोहन भागवत और प्रियंका गांधी के बयानों के बीच मुख्य अंतर किसी भी मामले में निष्कर्ष पर पहुंचने के तरीके को लेकर दिखाई दे रहा है। भागवत ने जहां पूरी जानकारी और प्रमाण सामने आने तक इंतजार करने पर जोर दिया, वहीं प्रियंका गांधी ने युवाओं के अधिकारों और उनकी आवाज को किसी बाहरी मंजूरी से अलग बताया। दोनों पक्षों की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं के साथ संवाद तथा उनके मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की ओर से और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

  • आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

    आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन अपने सामाजिक और वैचारिक संपर्क को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका और ब्रिटेन के प्रस्तावित दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगले दो महीनों के भीतर होने वाली इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और भारतीय मूल के लोगों से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।

    संघ इस समय अपने 100वें वर्ष के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। संगठन देशभर के साथ-साथ विदेशों में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने कार्य, विचार और सामाजिक अभियानों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में संघ प्रमुख की संभावित विदेश यात्रा को संगठन की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार अमेरिका और ब्रिटेन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है। इन आयोजनों में भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों, सामुदायिक सहयोग और प्रवासी भारतीयों की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। यात्रा का उद्देश्य विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना बताया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार अमेरिका के प्रमुख शहरों में कई कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। विशेष रूप से न्यूयॉर्क में एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम की संभावना व्यक्त की जा रही है, जहां भारतीय समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति हो सकती है। हालांकि कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा और आधिकारिक कार्यक्रम सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    इस प्रस्तावित यात्रा में हिंदू स्वयंसेवक संघ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है। यह संगठन विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति, योग, सेवा कार्यों और पारिवारिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार से जुड़ी गतिविधियां संचालित करता है। विदेशों में भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने के लिए यह संगठन लंबे समय से सक्रिय है।

    मोहन भागवत इससे पहले भी विदेश यात्राएं कर चुके हैं। पूर्व में ब्रिटेन में आयोजित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रही है, जहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया था। ऐसे अनुभवों के आधार पर इस बार के प्रस्तावित दौरे को भी व्यापक जनसंपर्क और सांस्कृतिक संवाद के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रवासी भारतीय समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विभिन्न देशों में बसे भारतीय मूल के लोग आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान दे रहे हैं। ऐसे में भारत से जुड़े संगठनों द्वारा उनके साथ नियमित संवाद स्थापित करना रणनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित हो रहे कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन के कार्यों, सेवा गतिविधियों और सामाजिक योगदान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना भी है। इसी कारण विदेशों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय के साथ संबंधों को मजबूत करने के एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    यदि यह यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है तो इससे प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद को नई गति मिल सकती है। साथ ही भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव तथा सामाजिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।