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  • MP: दमोह में भाईदूज पर बहन के घर जा रहे नाबालिग का हथौड़े से सिर फोड़ा….फिर खून पीया और मांस खाया

    MP: दमोह में भाईदूज पर बहन के घर जा रहे नाबालिग का हथौड़े से सिर फोड़ा….फिर खून पीया और मांस खाया

    दमोह। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के दमोह जिले (Damoh district) से हत्या की

    Damoh

    खौफनाक वारदात का मामला सामने आया है, यहां एक शख्स ने हथौड़े से 15-20 वार कर नाबालिग (Minor) का सिर फोड़ दिया और उसकी नृशंस हत्या कर दी। आरोप है कि सिर फोड़ने के बाद आरोपी शख्स ने ना केवल नाबालिग का खून पिया, बल्कि उसका भेजा निकालकर भी खाया। इस वारदात का एक वीडियो भी सामने आया है। वारदात की सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है, और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। आरोपी अपनी पत्नी की हत्या के मामले में जेल की सजा भी काट चुका है

    यह वारदात दमोह जिले में देहात थाना क्षेत्र में भाई दूज पर बहन के घर जा रहे एक नाबालिग के साथ हुई। इमलिया चौकी क्षेत्र के अर्थखेड़ा गांव का रहने वाला 16 वर्षीय भरत विश्वकर्मा भाईदूज पर अपनी बहन के पास समन्ना गांव आ रहा था, लेकिन बहन के घर पहुंचने से पहले ही यहां गांव में रहने वाले गुड्डा पटेल ने अचानक उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने भरत के सिर पर पहले रॉड से हमला किया, फिर इसके बाद करीब 15-20 बार हथौड़े से वार किए। गंभीर चोट लगने के कारण भरत की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लिया है।


    कजिन बोला- उसने मेरे सामने भाई का भेजा खाया

    इस दौरान भरत के साथ मौजूद मृतक के चचेरे भाई विजय विश्वकर्मा ने बताया कि हम रास्ते में पहुंचे ही थे कि आरोपी ने लोहे की रॉड से हमला कर दिया, मैं तो किसी तरह बच गया, लेकिन आरोपी ने मेरे सामने भरत की हत्या कर दी और उसका मांस (भेजा) खाया। वह नरभक्षी की तरह बर्ताव कर रहा था। गांव वाले उसकी क्रूरता से डर गए। भाई ने मेरे सामने दम तोड़ दिया।


    वारदात के बाद आरोपी भागकर खेतों में छुपा

    प्राप्त जानकारी के अनुसार वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी गुड्डा पटेल हाथ में हथौड़ा लेकर खेतों की ओर भागा और जाकर खेतों में छिप गया। ग्रामीणों ने उसका पीछा किया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर उसकी घेराबंदी करते हुए उसे दबोचा। हालांकि आरोपी ने हाथ में हथियार लेकर पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों को डराने की कोशिश की, जिसके चलते कुछ देर के लिए लोग पीछे हट गए। हालांकि बाद में जब आरोपी के हाथ से हथियार छूट गया, तब ग्रामीणों ने उस पर पथराव कर उसे काबू में कर लिया। आरोपी की पहचान गुड्डा पटेल के रूप में हुई है।


    आरोपी ने 20 साल पहले की थी पत्नी की हत्या

    ग्रामीणों ने बताया कि आरोपी गांव में ही घूमता रहता था और 20 साल पहले उसने अपनी पत्नी की हत्या की थी। इस मामले में वह जेल की सजा काट चुका है और 2 साल पहले ही उसकी सजा पूरी हुई थी। आरोपी के घर में एक बेटा और दो बेटियां हैं। तीनों की शादी हो चुकी है, और उसका बेटा उससे अलग रहकर खेती करता है।

    मामले में सीएसपी एचआर पांडे ने बताया कि शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है और गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ कर वारदात की वजह जानने की कोशिश की जा रही है।

  • ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का उल्लास, एक हजार से अधिक बहनों ने बंदी भाइयों को किया मंगल तिलक

    ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का उल्लास, एक हजार से अधिक बहनों ने बंदी भाइयों को किया मंगल तिलक



    ग्वालियर। होली की दूज पर ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का विशेष पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर जेल में बंद अपने भाईयों से मिलने के लिए एक हजार से अधिक बहनें जेल पहुंचीं। जेल प्रशासन ने इस आयोजन को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष तैयारियां की थीं। जेल के बाहर सुबह से ही काउंटर लगाकर बहनों का पूरी तरह से सत्यापन (वैरिफिकेशन) किया गया। केवल सत्यापित बहनों को ही जेल के अंदर प्रवेश की अनुमति दी गई।

    जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की।जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की। हालांकि जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि बाहर से कोई भी पूजन सामग्री लाई नहीं जा सकती। इसके चलते बहनों ने जेल परिसर में ही शुल्क देकर लड्डू और अन्य पूजन सामग्री खरीदी। जेल प्रशासन ने सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की पूरी मॉनीटरिंग की।

    भाईदूज का यह पर्व उन कैदियों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो संगीन मामलों में जेल में बंद हैं और लंबे समय से अपने परिवार से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इस अवसर ने जेल में बंद भाइयों के चेहरे पर मुस्कान और खुशी की लहर दौड़ा दी। जेल अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन से कैदियों और उनके परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है। यह न केवल भाई-बहन के रिश्तों को सशक्त बनाता है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

    जेल के अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम को व्यवस्थित करने के लिए सुबह से ही विशेष काउंटर लगाए गए थे। बहनों का नाम, पहचान पत्र और संबंध की पुष्टि करने के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया गया। जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अनुचित घटना न हो और कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो। जेल में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने पूरे आयोजन पर नजर रखी और आवश्यकतानुसार बहनों और कैदियों की मदद भी की।

    कार्यक्रम में कई बहनों ने बताया कि यह उनके भाईयों से मिलने का एक दुर्लभ अवसर होता है। लॉकडाउन और अन्य सुरक्षा कारणों से पिछले साल या महीनों में कई बार मिलने का अवसर नहीं मिला। इसलिए आज का दिन उनके लिए बेहद खास और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण था। बहनों ने अपने भाईयों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की कामना करते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक तिलक किया।

    जेल प्रशासन ने बताया कि इस आयोजन में हिस्सा लेने वाली बहनों की संख्या पहली बार इतनी बड़ी रही है। इससे पहले के वर्षों में इस कार्यक्रम में कुछ सौ बहनें ही शामिल होती थीं। इस बार बड़ी संख्या में बहनों की भागीदारी ने भाईदूज के पर्व की गरिमा और उल्लास को और बढ़ा दिया।

    भाईदूज पर जेल में आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम से यह संदेश जाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी परिवार का महत्व और पारंपरिक रीति-रिवाजों की गरिमा कायम रहनी चाहिए। जेल प्रशासन ने भी इस अवसर को शांति और अनुशासन के साथ सफल बनाने का प्रयास किया।

    इस आयोजन ने साबित कर दिया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, भाई-बहन का स्नेह और त्यौहारों का महत्व कभी कम नहीं होता। जेल में बंद कैदियों के लिए यह एक सुखद और यादगार अनुभव बन गया, जिसने उनके और उनके परिवार के बीच भावनात्मक दूरी को कम किया।