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  • अयोध्या में राम दरबार की पहली वर्षगांठ पर भक्ति का महासागर, मंगला आरती से गूंजा मंदिर परिसर

    अयोध्या में राम दरबार की पहली वर्षगांठ पर भक्ति का महासागर, मंगला आरती से गूंजा मंदिर परिसर

    नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर परिसर स्थित राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाई जा रही है। सुबह मंगला आरती के साथ शुरू हुए कार्यक्रमों का सिलसिला देर रात तक जारी रहेगा। पूरे मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है और देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं, संतों और धर्माचार्यों की मौजूदगी से अयोध्या पूरी तरह राममय नजर आ रही है।

    सुबह 4 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी का विशेष अभिषेक किया गया। शंख, घंटों और घड़ियाल की गूंज के बीच मंदिर परिसर “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। संत-महंत और श्रद्धालु हाथ जोड़कर पूजा-अर्चना में शामिल हुए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

    अभिषेक के बाद भगवान को पीतांबर वस्त्र धारण कराए गए और विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और राम नाम संकीर्तन का दौर लगातार जारी है। श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए। दोपहर में भगवान श्रीराम को 56 भोग अर्पित किया जाएगा, जिसमें देशभर के पारंपरिक व्यंजन शामिल रहेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान कथा व्यास सत्यनारायण दास और शिवम पांडेय भगवान श्रीराम की लीलाओं का वर्णन करेंगे। वहीं दक्षिण भारत से आए कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए रामभक्ति का रंग और गहरा करेंगे।

    शाम को मां सरयू की 5051 बत्तियों से भव्य महाआरती होगी, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सरयू तट पर फूल बंगला झांकी भी सजाई जाएगी, जो आकर्षण का केंद्र रहेगी। शाम 5 बजे से 7 बजे तक भजन संध्या का आयोजन भी किया जाएगा।

    इसके अलावा राम मंदिर परिसर स्थित मां दुर्गा मंदिर के शिखर पर 29 मई को ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में साध्वी ऋतम्भरा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। दुर्गा वाहिनी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से जुड़ी पदाधिकारी भी आयोजन में मौजूद रहेंगी।

    राम दरबार की पहली वर्षगांठ पर अयोध्या में श्रद्धा, संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

  • उज्जैन में प्रदीप पांडे चिंटू ने किए महाकाल दर्शन, बोले-जीवन का सबसे दिव्य पल

    उज्जैन में प्रदीप पांडे चिंटू ने किए महाकाल दर्शन, बोले-जीवन का सबसे दिव्य पल

    नई दिल्ली । आस्था और भक्ति के पवित्र संगम के रूप में प्रसिद्ध उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एक बार फिर सुर्खियों में रहा, जहां भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता Pradeep Pandey Chintuने बाबा महाकाल के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभव साझा किया। अपनी फिल्मों में रोमांस, एक्शन और भावनात्मक किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले चिंटू इस बार पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए।

    उज्जैन पहुंचने के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना की और बाबा महाकाल के दरबार में शीश नवाया। इस दौरान उन्होंने भस्म आरती में भी भाग लिया, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत दिव्य और दुर्लभ माना जाता है। सुबह के समय होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

    दर्शन के बाद अपने अनुभव को साझा करते हुए अभिनेता ने कहा कि यह उनकी पहली महाकाल यात्रा थी और यह पल उनके जीवन में हमेशा याद रहने वाला है। उन्होंने बताया कि भस्म आरती का दृश्य इतना अद्भुत और आध्यात्मिक था कि उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। पूरे वातावरण में गूंजते मंत्रोच्चार, भक्तों की आस्था और दिव्यता ने उनके मन को गहराई तक प्रभावित किया।

    उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में मौजूद ऊर्जा और शांति ने उन्हें एक अलग ही अनुभूति कराई, जिसे वह जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। उनके अनुसार, यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुभव नहीं बल्कि आत्मिक शांति का भी माध्यम बनी।

    महाकाल मंदिर की भस्म आरती को लेकर यह मान्यता है कि यह आरती भगवान शिव को समर्पित सबसे विशेष अनुष्ठानों में से एक है। इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालु इसे जीवन का सौभाग्य मानते हैं। यही कारण है कि यहां हर साल लाखों भक्त देश और विदेश से पहुंचते हैं।

    इस पवित्र स्थल पर केवल आम श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि फिल्म और मनोरंजन जगत की कई प्रसिद्ध हस्तियां भी समय-समय पर दर्शन के लिए आती रहती हैं। हाल के वर्षों में कई कलाकार यहां आकर महाकाल के दर्शन कर चुके हैं और अपने अनुभव साझा कर चुके हैं, जिससे इस मंदिर की लोकप्रियता और भी बढ़ी है।

    अगर अभिनेता के करियर की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2009 में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। शुरुआती सफलता के बाद उन्होंने लगातार कई लोकप्रिय फिल्मों में काम किया और भोजपुरी सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनकी फिल्मों ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई है और वह आज इंडस्ट्री के प्रमुख कलाकारों में गिने जाते हैं।

    उनकी हालिया आध्यात्मिक यात्रा ने एक बार फिर यह दिखाया कि व्यस्त फिल्मी जीवन के बीच भी कलाकार आस्था और संस्कृति से जुड़े रहते हैं। उज्जैन की यह यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक पड़ाव नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आत्मिक अनुभव बनकर सामने आई।

  • बड़ा मंगल: भक्ति, सेवा और आस्था का पावन पर्व

    बड़ा मंगल: भक्ति, सेवा और आस्था का पावन पर्व



    नई दिल्ली। बड़ा मंगल हिंदू धर्म में भगवान हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय पर्व है। यह विशेष रूप से ज्येष्ठ माह के मंगलवारों को मनाया जाता है। उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में इस पर्व को बड़े उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिलता है और जगह-जगह भंडारों का आयोजन होता है।

    बड़ा मंगल क्यों मनाया जाता है?
    बड़ा मंगल मनाने का मुख्य उद्देश्य भगवान Hanuman जी की आराधना करना और उनके आशीर्वाद से जीवन में शक्ति, साहस और संकटों से मुक्ति प्राप्त करना है।

    मान्यता है कि हनुमान जी संकटमोचक हैं और उनकी पूजा करने से:

    जीवन के कष्ट दूर होते हैं

    भय और नकारात्मकता समाप्त होती है

    आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है

    मंगल ग्रह से जुड़े दोषों का प्रभाव कम होता है

    जीवन में सुख, शांति और सफलता मिलती है

    बड़ा मंगल की शुरुआत और इतिहास
    बड़ा मंगल की परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है, हालांकि इसका कोई एक निश्चित ऐतिहासिक प्रमाणित आरंभ नहीं मिलता। यह परंपरा मुख्य रूप से अवध क्षेत्र से जुड़ी हुई है।

    ऐसा माना जाता है कि, यह परंपरा कई सौ वर्ष पुरानी हैमुगल काल और अवध के नवाबों के समय में यह परंपरा और अधिक लोकप्रिय हुईलखनऊ में हनुमान मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा का आयोजन शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे उत्तर भारत में फैल गई। समय के साथ यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सेवा का भी प्रतीक बन गया।

    बड़ा मंगल की परंपराएं और आयोजन
    बड़ा मंगल के दिन देशभर में विशेष धार्मिक और सामाजिक आयोजन किए जाते हैं:

    1. विशेष पूजा और आरती
    हनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगती है। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और आरती का पाठ किया जाता है।

    2. भंडारे और लंगर
    इस दिन सबसे खास परंपरा भंडारे की होती है, जिसमें हजारों लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है। यह सेवा भावना का प्रतीक है।

    3. सेवा कार्य
    भक्त गरीबों, जरूरतमंदों और राहगीरों की सेवा करते हैं, जो इस पर्व की सबसे सुंदर विशेषता है।

    4. भक्ति और जुलूस
    कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक जुलूस निकाले जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

    बड़ा मंगल का सामाजिक महत्व
    बड़ा मंगल केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा भावना का भी प्रतीक है। यह दिन लोगों को जोड़ने का कार्य करता है और समाज में दया, करुणा और सहयोग की भावना को बढ़ाता है।इस दिन अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है और सभी लोग एक साथ सेवा और भक्ति में शामिल होते हैं।

    बड़ा मंगल का आधुनिक महत्व
    आज के समय में भी बड़ा मंगल की परंपरा उतनी ही मजबूत है। बदलते समय के साथ डिजिटल माध्यमों से भी भक्ति कार्यक्रम साझा किए जाते हैंबड़े स्तर पर भंडारों का आयोजन होता हैयुवा पीढ़ी भी इस परंपरा से जुड़ रही हैयह पर्व आधुनिक समाज में भी आस्था और सेवा का संतुलन बनाए हुए है।बड़ा मंगल हमें यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और मानवता में निहित है। हनुमान जी की आराधना हमें जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मकता प्रदान करती है।यह पर्व हर साल भक्तों को यह याद दिलाता है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानवता की सेवा ही सच्ची पूजा है।

  • मंगलवार व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूरा फल

    मंगलवार व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूरा फल

    ई दिल्ली। हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन बेहद पवित्र माना गया है और यह दिन हनुमान जी को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने पर बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी संकट दूर कर देते हैं। लेकिन कई बार छोटी-छोटी गलतियां व्रत के पूरे फल को नष्ट कर सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि मंगलवार व्रत करते समय कुछ खास सावधानियों का ध्यान रखा जाए।

    मंगलवार व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से होती है। इसके बाद लाल वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर घी का दीपक जलाया जाता है और उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और पान के पत्तों की माला अर्पित की जाती है। भोग के रूप में बेसन के लड्डू या बूंदी चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान ‘राम’ नाम का जाप करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हनुमान जी Lord Rama के परम भक्त हैं।

    इन सावधानियों का रखें खास ध्यान

    मंगलवार व्रत के दौरान साधारण नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से पूरी तरह दूरी बनाए रखना जरूरी है। व्रत के समय मन और शरीर दोनों की पवित्रता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

    व्रत रखने वाले भक्तों को पूरे दिन निराहार रहना चाहिए। हालांकि यदि यह संभव न हो, तो शाम की पूजा के बाद गेहूं और गुड़ से बना भोजन किया जा सकता है, लेकिन उसमें नमक का प्रयोग नहीं होना चाहिए।

    इसके अलावा क्रोध, झगड़ा, अपशब्द और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन मन की शुद्धता ही पूजा का सबसे बड़ा आधार होती है।

    दान-पुण्य का भी इस दिन विशेष महत्व होता है। जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

    क्यों जरूरी है नियमों का पालन?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत केवल भोजन त्यागने का नाम नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, संयम और श्रद्धा का प्रतीक है। अगर नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

    इसलिए अगर आप मंगलवार का व्रत रखते हैं, तो इन सावधानियों को जरूर अपनाएं। तभी Lord Hanuman की कृपा से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं।

  • क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग

    क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में मंगलवार का दिन विशेष रूप से शक्ति भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। गोस्वामी तुलसीदास की काव्य कृति श्रीरामचरितमानस के किष्किंधा कांड में एक ऐसा भावुक प्रसंग मिलता हैजो श्री राम और हनुमान जी के अटूट प्रेम को दर्शाता है। इस प्रसंग में श्री राम ने हनुमान जी को अपने छोटे भाई लक्ष्मण से भी दोगुना प्रिय बताया है। आइए जानेंआखिर क्यों हनुमान जी थे श्री राम के लिए लक्ष्मण से भी अधिक प्रिय।

    ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान जी से पहली मुलाकात

    जब श्री राम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थेतो वे किष्किंधा के ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे। वहां वानरराज सुग्रीवजो पहले ही बाली से भयभीत थेउन्हें देखकर डर गए। उन्हें संदेह हुआ कि कहीं ये दोनों प्रभु श्री राम के विरोधी तो नहीं हैं। इस कारण सुग्रीव ने हनुमान जी को ब्राह्मण का रूप धारण कर भेजाताकि वह यह पता कर सकें कि ये दोनों व्यक्ति कौन हैं।हनुमान जी ने ब्राह्मण का रूप अपनाया और श्री राम से उनका परिचय पूछा। जब श्री राम ने कहा कि वे दशरथ के पुत्र हैं और माता सीता की खोज में निकले हैंतब हनुमान जी ने तुरंत अपना असली रूप प्रकट किया और श्री राम के चरणों में गिर पड़े। इस घटना ने श्री राम और हनुमान जी के बीच के अटूट प्रेम की शुरुआत की।

    मम प्रिय लक्ष्मण ते दूना – जब श्री राम भावुक हुए

    हनुमान जीजो अपने प्रभु से मिलकर अत्यधिक भावुक हो गए थेउन्होंने अपनी भूल के लिए श्री राम से क्षमा मांगी। हनुमान जी ने कहाहे भगवान! मैं मूर्ख हूंलेकिन आपने मुझे क्यों नहीं पहचाना? इस पर श्री राम ने हनुमान जी को गले से लगा लिया और कहा:सुनु कपि जियँ मानसि जनि ऊना। तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना॥ समदरसी मोहि कह सब कोऊ। सेवक प्रिय अनन्य गति सोऊ॥अर्थ: श्री राम ने कहाहे हनुमान! अपने मन में कोई ग्लानि मत लाओ। तुम मुझे लक्ष्मण से भी दो गुने प्रिय हो। भले ही दुनिया मुझे समदर्शी कहेलेकिन मुझे वह सेवक सबसे प्रिय है जो पूरी तरह से मेरे शरण में रहता है और अनन्य भाव से समर्पित होता है।

    हनुमान जी क्यों थे श्री राम के लिए इतने प्रिय

    लक्ष्मण जीश्री राम के छोटे भाई थे और वे हमेशा उनके साथ रहते थेलेकिन हनुमान जी ने स्वयं को एक सेवक के रूप में पूरी तरह से समर्पित कर दिया था। शास्त्रों के अनुसारजो भक्त अपना अहंकार त्यागकर पूरी तरह से ईश्वर के शरण में रहता हैवह उनके लिए परिवार से भी बढ़कर होता है। यही कारण है कि हनुमान जी को श्री राम ने भरत सम भाई और लक्ष्मण से दूना प्रिय कहा।

    मंगलवार और हनुमान जी का विशेष संबंध

    यह मान्यता है कि हनुमान जी और श्री राम की पहली मुलाकात मंगलवार के दिन हुई थीइसलिए यह दिन हनुमान जी के साथ-साथ श्री राम की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल जैसे पर्व भी इसी दिन के साथ जुड़ी हुई हैंजो दर्शाते हैं कि प्रभु और भक्त का यह मिलन उसी समय हुआ था। इस प्रसंग से यह साफ होता है कि हनुमान जी का श्री राम के प्रति समर्पण और प्रेम अत्यधिक गहरा थाऔर इसीलिए श्री राम ने उन्हें अपने हृदय से लगाया और उन्हें लक्ष्मण से भी प्रिय माना।