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  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम


    धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के पीछे बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 612 की भूमि पर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने जुमे की नमाज अदा की। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और जिला प्रशासन व मुस्लिम पक्ष के बीच बनी सहमति के बाद की गई।

    नमाज से पहले प्रशासन ने बारिश के कारण गीली जमीन पर तिरपाल बिछवाए और पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौजूद रहे।

    निजी जमीन बताकर हिंदू पक्ष ने जताई आपत्ति
    नमाज शुरू होने से पहले स्थानीय हिंदू समाज के कुछ लोगों ने संबंधित भूमि को निजी बताते हुए वहां नमाज की अनुमति का विरोध किया। उनका कहना था कि वे लंबे समय से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और यदि आवश्यकता पड़ी तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का रुख करेंगे।

    सूचना मिलने पर एसडीएम राजकुमार हलदर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों से चर्चा कर आश्वासन दिया कि उनकी आपत्तियों पर नियमानुसार सुनवाई की जाएगी। इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई।

    मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही
    कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने बताया कि खसरा नंबर 611 और 612 से कमाल मौला मस्जिद सीधे दिखाई देती है, इसलिए इस स्थान पर नमाज पढ़ने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि यदि अगले शुक्रवार तक अदालत का कोई नया अंतरिम या अंतिम आदेश आता है, तो उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी व्यवस्था
    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े अपने अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समाज के लिए भोजशाला के समीप दरगाह परिसर की निर्धारित भूमि पर प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए थे।

    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।
    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।

    100 से अधिक नमाजी पहुंचे
    शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे से निर्धारित स्थल पर नमाजी पहुंचने लगे। शुरुआत में 10 से 15 लोग मौजूद थे, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़कर 100 से अधिक हो गई। इस दौरान कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारी और याचिकाकर्ता भी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।

  • MP: धार में भोजशाला परिसर के सटी जमीन पर आज होगी जुमे की नमाज…. SC ने तय की जगह

    MP: धार में भोजशाला परिसर के सटी जमीन पर आज होगी जुमे की नमाज…. SC ने तय की जगह


    धार।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार स्थित भोजशाला (Bhojshala)-कमाल मौला मस्जिद (Kamal Maula Mosque) विवाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है।


    भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले दिए गए अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समाज के लोगों के लिए नमाज अदा करने का स्थान तय कर दिया। अब शुक्रवार को जुमे की नमाज भोजशाला परिसर से सटी दरगाह की जमीन पर अदा की जाएगी। यहां हर शुक्रवार दोपहर के समय दो घंटे तक नमाज पढ़ी जा सकेगी।


    मुस्लिम पक्ष की शिकायत पर कोर्ट ने क्या कहा?

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश मुस्लिम पक्ष की उस शिकायत पर दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रशासन भोजशाला के निकट स्थित वैकल्पिक स्थलों पर नमाज की अनुमति नहीं दे रहा है। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि राज्य किसी भी पक्ष के अधिकारों की प्रतिस्पर्धा में नहीं पड़ना चाहता और उसकी प्राथमिकता केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि धार्मिक अधिकारों की रक्षा करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना, दोनों राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी हैं।


    प्रशासन ने क्या तैयारियां की हैं?

    जिला प्रशासन ने तय स्थान पर सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। शुक्रवार को एएसपी, सीएसपी, डीएसपी और एसडीओपी स्तर के अधिकारियों सहित करीब 350 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। नगर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मोबाइल बाइक टीमें लगातार गश्त करेंगी।

  • भोजशाला विवाद: चालीस पीर वाले प्रस्ताव पर आपत्ति के बाद प्रशासन ने तलाशे दो नए स्थान, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम

    भोजशाला विवाद: चालीस पीर वाले प्रस्ताव पर आपत्ति के बाद प्रशासन ने तलाशे दो नए स्थान, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम


    धार । धार स्थित भोजशाला परिसर में जुम्मे की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान तय करने को लेकर प्रशासन ने अपनी कवायद तेज कर दी है। मुस्लिम समाज की ओर से पहले प्रस्तावित स्थान पर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद अब जिला प्रशासन ने नए विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है। इसी क्रम में सोमवार को अधिकारियों ने डिसलरी रोड क्षेत्र में दो अलग-अलग भूखंडों का निरीक्षण किया, जिन्हें संभावित वैकल्पिक स्थल के रूप में देखा जा रहा है।

    प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार डिसलरी रोड स्थित सर्वे नंबर 509 और सर्वे नंबर 639 की लगभग एक-एक एकड़ जमीन का निरीक्षण किया गया है। इन स्थानों को इसलिए देखा जा रहा है ताकि भविष्य में जुम्मे की नमाज के लिए एक उपयुक्त और व्यवस्थित वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। दोनों स्थल भोजशाला परिसर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर बताए जा रहे हैं।

    इससे पहले चालीस पीर के समीप प्रस्तावित स्थान को लेकर मुस्लिम समाज ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया और अब इस संबंध में दायर याचिका पर 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि शीर्ष अदालत के निर्देशों के बाद ही जुम्मे की नमाज के लिए अंतिम वैकल्पिक स्थान तय किया जाएगा।

    कमाल मौलाना सोसायटी के सदर अब्दुल समद का कहना है कि प्रशासन द्वारा जिन नए स्थानों का निरीक्षण किया गया है, उनकी जानकारी अभी समाज को औपचारिक रूप से नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए अदालत के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

    वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि संभावित विकल्पों का निरीक्षण केवल वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारियों के तहत किया गया है। अधिकारियों के अनुसार डिसलरी रोड स्थित सर्वे नंबर 509 और 639 की जमीन का मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन के पास उपयुक्त विकल्प उपलब्ध रहे।

    अब पूरे मामले में 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है। अदालत के निर्देशों के बाद ही आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और जुम्मे की नमाज के लिए अंतिम स्थान को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

  • भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अहम पहल, मध्य प्रदेश सरकार को अंतरिम व्यवस्था बनाने का निर्देश, सभी पक्षों के अधिकारों के संतुलन पर जोर

    भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अहम पहल, मध्य प्रदेश सरकार को अंतरिम व्यवस्था बनाने का निर्देश, सभी पक्षों के अधिकारों के संतुलन पर जोर

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने राज्य सरकार से ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है, जिससे अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष को असुविधा न हो और धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो सकें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम प्रकृति की होगी और इससे किसी भी पक्ष के कानूनी अधिकारों या दावों पर कोई अंतिम प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संवेदनशील मामलों में शांति, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करे, जिससे सभी संबंधित पक्षों की आवश्यकताओं का संतुलित समाधान हो सके। अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम व्यवस्था को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। एक पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में मान्यता देने की मांग करता है। इसी विवाद से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है और मामला अभी अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा में है।

    सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि पूर्व की व्यवस्था में बदलाव के कारण धार्मिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है। वहीं दूसरे पक्ष ने अपने ऐतिहासिक और धार्मिक दावों को दोहराते हुए संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखा। दोनों पक्षों ने विस्तृत कानूनी तर्क प्रस्तुत किए, जिन पर अदालत ने गंभीरता से विचार किया।

    कार्यवाही के दौरान सर्वोच्च अदालत ने सभी पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को भी संयम बरतने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील विषय है और बहस के दौरान प्रयुक्त भाषा तथा शब्दों का चयन अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

    अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले की अंतिम सुनवाई विस्तृत रूप से की जाएगी। इसके लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त तिथि निर्धारित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर पूरे दिन सुनवाई कर सभी पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

    इस बीच मध्य प्रदेश सरकार पर अंतरिम व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी रहेगी। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक परिसर में शांति, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बना रहे तथा किसी भी समुदाय के अधिकारों पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े।

    भोजशाला विवाद देश के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहा है। सर्वोच्च अदालत के ताजा निर्देशों के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार द्वारा बनाई जाने वाली अंतरिम व्यवस्था और आगामी विस्तृत सुनवाई पर टिकी हैं। अंतिम फैसला आने तक न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार सभी पक्षों के दावों और अधिकारों पर विधिक परीक्षण जारी रहेगा।

  • MP: धार भोजशाला परिसर के नीचे दबी है हनुमान प्रतिमा….! जाने क्या उठी नई मांग?

    MP: धार भोजशाला परिसर के नीचे दबी है हनुमान प्रतिमा….! जाने क्या उठी नई मांग?


    धार।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार (Dhar) स्थित भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में श्रद्धालुओं के निःशुल्क प्रवेश की मांग को लेकर एक याचिकाकर्ता ने बुधवार को ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) को आवेदन भेजा। वहीं, दूसरे याचिकाकर्ता ने अलग अर्जी में दावा किया कि इस मध्यकालीन स्मारक की जमीन के नीचे भगवान हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां दबी हो सकती हैं। ये ताजा आवेदन उन दो याचिकाकर्ताओं ने भेजे हैं, जिनकी ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ ने इस ASI संरक्षित परिसर को 15 मई को वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर घोषित किया था।

    सामाजिक संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ से जुड़े याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने ASI को भेजे आवेदन में कहा कि श्रद्धालुओं को उपासना के अधिकार के तहत भोजशाला में निःशुल्क प्रवेश दिया जाना चाहिए। आवेदन में कहा गया कि ASI द्वारा श्रद्धालुओं से वर्तमान में लिया जा रहा एक रुपए का प्रवेश शुल्क बंद किया जाए क्योंकि इस वसूली से उच्च न्यायालय के आदेश की ‘अवहेलना’ हो रही है।


    भोजशाला में लगे इस्लामी प्रतीकों को हटाने की मांग

    आवेदन में भोजशाला परिसर की दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित बंद कमरे को तत्काल खोलने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह कमरा मूल मंदिर परिसर का हिस्सा है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि चूंकि उच्च न्यायालय ने भोजशाला को वाग्देवी मंदिर घोषित कर दिया है, इसलिए परिसर में ‘अनाधिकृत रूप से लगाए गए’ इस्लामी प्रतीकों को हटाया जाना चाहिए।


    मुस्लिम प्रतीकों को किसी अन्य कमरे में रखने की मांग

    भोजशाला मामले के एक अन्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी ने भी केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और ASI को भेजे अलग आवेदन में ऐसी ही मांग की और कहा कि इस्लामी प्रतीकों को मुस्लिम समुदाय के किसी भवन में सुरक्षित तौर पर रखा जाना चाहिए।


    याचिकाकर्ता का दावा- भोजशाला में दबी है हनुमान जी की मूर्ति

    तिवारी ने अपने आवेदन में दावा किया कि धार के लोगों की मान्यता है कि भोजशाला परिसर की जमीन के नीचे भगवान हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में सच का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खुदाई करके इन मूर्तियों को बाहर निकाला जाना चाहिए और इन्हें परिसर में धार्मिक विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाना चाहिए।


    पिछले शुक्रवार को आया था भोजशाला को लेकर ऐतिहासिक फैसला

    उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने 15 मई को अपने फैसले में भोजशाला परिसर की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर के रूप में निर्धारित की थी। साथ ही अदालत ने ASI के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था जिसमें मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार इस परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। इस आदेश में हिंदुओं को केवल मंगलवार को स्मारक में पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई थी।

  • भोजशाला फैसले पर सियासी बयानबाज़ी तेज, ‘न्यायपालिका के जरिए सनातनियों की जीत’ पर गरमाई बहस

    भोजशाला फैसले पर सियासी बयानबाज़ी तेज, ‘न्यायपालिका के जरिए सनातनियों की जीत’ पर गरमाई बहस

    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर दिए गए फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। अदालत के इस निर्णय के बाद विभिन्न पक्षों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

    फैसले के बाद कुछ जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने इसे सत्य की विजय बताया और कहा कि लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब स्थिति स्पष्ट हुई है। उनके अनुसार, यह निर्णय आस्था और परंपरा से जुड़े मुद्दे पर न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि वर्षों से जिस स्थान को लेकर विवाद था, अब उस पर न्यायिक दृष्टिकोण से स्पष्टता आ गई है, जिससे स्थानीय लोगों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है।

    इसी क्रम में कुछ जनप्रतिनिधियों ने बयान दिया कि यह निर्णय समाज में आस्था से जुड़े विषयों पर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता को समाप्त करता है। उनके अनुसार, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों को लेकर जो विवाद थे, वे अब न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से एक दिशा में आगे बढ़े हैं। उन्होंने इसे सामाजिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया।

    वहीं याचिकाकर्ताओं और पक्षकारों ने भी फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे उनके लंबे संघर्ष को न्याय मिला है। उन्होंने यह दावा किया कि भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत पुराना है और इससे जुड़े कई साक्ष्य पहले से मौजूद हैं। उनके अनुसार, अब इस स्थल के संरक्षण और पुनर्स्थापना को लेकर आगे की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाएगा।

    कुछ याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर इस स्थान की वास्तविक पहचान को लेकर उनकी ओर से अदालत में दलीलें पेश की गई थीं। अब फैसले के बाद वे आगे की योजना पर काम करेंगे, जिसमें धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं से जुड़े पहलुओं को पुनर्स्थापित करने की बात कही गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में चर्चा और बहस का माहौल बना हुआ है। अलग-अलग पक्ष अपने-अपने नजरिए से इस निर्णय की व्याख्या कर रहे हैं। जहां एक ओर इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

  • भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट

    भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आज हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का अहम फैसला आ सकता है। वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया गया है।

    फैसले को देखते हुए इंदौर और धार जिले में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। खास बात यह है कि आज शुक्रवार का दिन है और इसी दिन भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा की जाती है, जिससे स्थिति की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

    धार शहर में करीब 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को 12 लेयर में बांटा गया है, जिसमें रिजर्व पुलिस फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी शामिल किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात है।

    भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कलेक्टर और एसपी ने खुद सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह को फैलने से रोका जा सके।

    यह विवाद 2022 में दायर याचिकाओं के बाद और अधिक चर्चा में आया था, जिसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर अदालत में मांगें रखी गई थीं। हिंदू पक्ष ने इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताते हुए नियमित पूजा का अधिकार मांगा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे लंबे समय से उपयोग में रही मस्जिद बताता है।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी इस मामले में 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग दावे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कुछ व्यवस्थाओं को लेकर अनुमति दी थी, जिसके बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया।

    फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं।

  • भोजशाला के प्राचीन पत्थरों पर अंकित हैं कई मंत्र, सर्वे में मिले ऐतिहासिक तांबे के सिक्के और शिलालेख

    भोजशाला के प्राचीन पत्थरों पर अंकित हैं कई मंत्र, सर्वे में मिले ऐतिहासिक तांबे के सिक्के और शिलालेख


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में चल रही नियमित सुनवाई के दौरान मंगलवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दावा किया ऐतिहासिक भोजशाला के प्राचीन पत्थरों पर कई मंत्र अंकित हैं, जिन्हें मिटाने के सबूत भी मौजूद हैं। वहीं, सर्वे के दौरान ऐतिहासिक तांबे के सिक्के और शिलालेख भी मिले हैं।

    भोजशाला मामले में मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने विस्तृत सर्वे रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया कि इस बार भोजशाला का सर्वे पूर्व की तुलना में अधिक व्यापक और वैज्ञानिक तरीके से किया गया है।

    एएसआई की ओर से बताया गया कि पूर्व में केवल तीन अधिकारियों द्वारा सीमित स्तर पर सर्वे किया गया था, जबकि इस बार 22 अप्रैल 2024 से 98 दिनों तक संरक्षित स्मारक के सभी हिस्सों का विस्तृत अध्ययन किया गया। इस सर्वे में सात एक्सपर्ट्स अधिकारी, पुरातत्वविद और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल रहे, जिन्होंने दोनों पक्षों की उपस्थिति में प्रतिदिन सुबह से शाम तक कार्य किया। सर्वे के दौरान विशेष सावधानी बरती गई कि खुदाई से भोजशाला की मूल संरचना को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। सर्वे की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि प्रत्येक प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट 10 वॉल्यूम में तैयार की गई है, जिसमें कुल 2189 पृष्ठ शामिल हैं। रिपोर्ट में सर्वे के दौरान मिले विभिन्न पुरातात्विक साक्ष्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।

    एएसआई की ओर से सर्वे का विवरण बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने कहा कि ऐतिहासिक भोजशाला में प्राचीन पत्थरों पर ऊं नम: शिवाय समेत कई मंत्र अंकित पाए गए। गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह, भैरव सहित कई देवी-देवताओं की आकृतियां मिलीं। धार्मिक और स्थापत्य महत्व को दर्शातीं 94 कलाकृतियां भी पाई गईं। ये सिद्ध करते हैं कि भोजशाला प्राचीन मंदिर ही थी। इसके साथ ही कई पत्थरों पर अंकित संस्कृत-प्राकृत अक्षरों को मिटाने के साक्ष्य भी मिले हैं। उन पर अरबी-फारसी शब्द स्याही से लिखे होने से छेड़छाड़ के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।

    राजा भोज के काल में बनी भोजशाला

    अधिवक्ता जैन ने यह भी कहा कि अत्याधुनिक तकनीक से किए गए सर्वे से पता चला है कि भोजशाला का निर्माण 10वीं-11वीं सदी के बीच परमार राजा भोज के काल में किया गया था। यहां पाई गईं मिट्टी की ईंटों से बनीं काफी चौड़ी दीवारों की बनावट वैसी ही पाई गई, जैसा उल्लेख राजा भोज की पुस्तकों में मिलता है।

    अब्दुल शाह चंगेज ने बना दिया था मंदिरों को नमाज की जगह

    एएसआई के अधिवक्ता सुनील जैन ने प्राचीन साहित्य का उल्लेख करते हुए कोर्ट को अवगत कराया कि खिलजी शासन के दौरान अब्दुल शाह चंगेज ने फौज के साथ मालवा की राजधानी धार में प्रवेश किया था और ताकत के बल पर कई मंदिरों को नमाज पढ़ने की जगह के रूप में परिवर्तित कर दिया था।

    सर्वे में क्या-क्या मिला, एएसआई ने बताया

    एएसआई के अनुसार, सर्वे में भोजशाला में संस्कृत और प्राकृत भाषा में 150 से अधिक शब्द और शिलालेख मिले। इनमें प्राचीन लेखन स्पष्ट दिखाई देता है। ऊं नम: शिवाय और ऊं सरस्वतैय: नम: जैसे मंत्र पत्थरों पर उकेरे हुए पाए गए। गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह, भैरव सहित कई देव आकृतियां मिलीं। कुल 94 प्राचीन कलाकृतियां पाई गईं, जो धार्मिक और स्थापत्य महत्व दर्शाती हैं। स्तंभों और दीवारों पर शेर, बंदर, सांप और कीर्तिमुख की आकृतियां मिलीं। सीलिंग और पत्थरों पर कमल के डिजाइन मिले, जो मंदिर वास्तुशैली की पहचान माने जाते हैं। संस्कृत-प्राकृत अक्षरों वाले पत्थरों को मिटाकर दोबारा उपयोग के संकेत मिले। ईंट, बेसाल्ट, चूना पत्थर और मार्बल का उपयोग पाया। इससे विभिन्न कालखंडों में निर्माण के संकेत हैं। दक्षिणी हिस्से की मेहराब बाद में जोड़ी गई, जिसका मटेरियल बाकी ढांचे से अलग है। पत्थरों पर स्याही से लिखे गए शब्द भी मिले, जो बाद में जोड़े जाने का संकेत देते हैं।

    मंगलवार को एएसआई के तर्क पूरे हो गए। अगली सुनवाई 6 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें मध्य प्रदेश शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सलेक चंद जैन की ओर से एडवोकेट दिनेश राजभर अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे।

  • मुस्लिम पक्ष का तर्क… भोजशाला राजस्व रिकॉर्ड में मस्जिद के रूप में दर्ज… मंदिर होने का कोई प्रमाण नहीं

    मुस्लिम पक्ष का तर्क… भोजशाला राजस्व रिकॉर्ड में मस्जिद के रूप में दर्ज… मंदिर होने का कोई प्रमाण नहीं


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में बुधवार को भोजशाला विवाद (Bhojshala controversy) पर सुनवाई हुई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष ने अपनी बात रखते हुए दावा किया कि पुराने सरकारी कागजों यानी राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) में यह जगह हमेशा से एक मस्जिद के रूप में दर्ज रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूद इतिहास के स्रोतों में ऐसा कोई साफ जिक्र नहीं मिलता कि राजा भोज ने यहां सरस्वती मंदिर बनवाया था। बता दें कि हिंदू समाज इस जगह को देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। इस पूरी जगह की देखरेख ISI कर रहा है।

    खुद को सूफी संत मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती के वंशज और सज्जादानशीन (किसी सूफी दरगाह, खानकाह या धार्मिक स्थल का आध्यात्मिक प्रमुख, गुरु या उत्तराधिकारी) बताने वाले काजी मोइनुद्दीन की ओर से उनके वकील नूर अहमद शेख ने इंदौर पीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के सामने विस्तृत दलीलें पेश कीं।

    मोइनुद्दीन ने भोजशाला मामले में ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ नामक संगठन और कुलदीप तिवारी एवं एक अन्य व्यक्ति की ओर से दायर दो जनहित याचिकाओं पर हस्तक्षेपकर्ता के रूप में सवाल उठाए हैं। इन याचिकाओं में कहा गया है कि भोजशाला सरस्वती मंदिर है। परिसर में केवल हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार दिया जाना चाहिए।


    मस्जिद के रूप में दर्ज है स्थान

    मोइनुद्दीन के वकील शेख ने अदालत में दावा किया कि मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती की वंशावली से जुड़े उनके मुवक्किल के पुरखों के पास विवादित परिसर की सनदें (अधिकार पत्र) ऐतिहासिक तौर पर रही हैं। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में भी यह स्थान मस्जिद के रूप में दर्ज रहा है। भोजशाला परिसर में स्थित कमाल मौला मस्जिद के प्रबंधन से जुड़े लोगों का इस स्थान पर लंबे समय से ‘सतत और शांतिपूर्ण कब्जा’ रहा है।

    शेख ने मुस्लिम कानूनों का जिक्र करते हुए बताया कि यदि कोई धार्मिक संपत्ति हैए जैसे कि मस्जिद या उससे जुड़ी जमीन तो उसके देख-रेख करने वाले लोगों जैसे सज्जादानशीन और मुतवल्ली को खास हक मिलते हैं। इन पदों पर बैठे लोगों और उनके परिवार वालों को ना सिर्फ उस संपत्ति के कार्यों में दखल देने का अधिकार है वरन उसका इस्तेमाल करने का पूरा हक भी कानूनन उनके पास होता है।

    मुस्लिम पक्ष के वकील ने प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1904 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून में ‘संपत्ति के प्रभारी’ की शब्दावली का प्रयोग किया गया है जिससे स्पष्ट होता है कि जो व्यक्ति या पक्ष लंबे समय से किसी संपत्ति के प्रभार में है, उसे उस संपत्ति के संबंध में अधिकार प्राप्त होते हैं।


    सरस्वती मंदिर के अस्तित्व का स्पष्ट उल्लेख नहीं

    सुनवाई के दौरान धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने दावा किया कि दोनों जनहित याचिकाओं में हिन्दू पक्षकारों की ओर से हाई कोर्ट के समक्ष ऐतिहासिक तथ्यों के संबंध में ‘भ्रामक प्रस्तुतीकरण’ किया गया है। उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों में धार में परमार राजवंश के राजा भोज की ओर से स्थापित किसी सरस्वती मंदिर के अस्तित्व का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है।


    न्यायिक परीक्षण पर गंभीर सवाल

    धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने यह भी कहा कि एएसआई ने भोजशाला विवाद को लेकर दायर मुकदमों में समय-समय पर अपने उत्तरों में परिवर्तन करते हुए तीन अलग-अलग रुख अपनाए हैं। ऐसी स्थिति न्यायिक परीक्षण को लेकर गंभीर सवाल उत्पन्न करती है।


    सर्वेक्षण प्रक्रिया पर जताई आपत्तियां

    वारसी ने एएसआई की ओर से भोजशाला परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने इसकी वीडियोग्राफी के तरीके के बारे में भी आपत्तियां जताईं। उनकी ओर से अदालत से अनुरोध किया कि इन आपत्तियों का परीक्षण किया जाए। भोजशाला मामले में सुनवाई बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी। हाई कोर्ट इस स्मारक के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर 4 याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है।

  • भोजशाला में गूंजा हनुमान चालीसा पाठ धार में सत्याग्रह के बीच पहुंचे प्रवीण तोगड़िया

    भोजशाला में गूंजा हनुमान चालीसा पाठ धार में सत्याग्रह के बीच पहुंचे प्रवीण तोगड़िया


    धार । मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर एक बार फिर धार्मिक गतिविधियों और सत्याग्रह के कारण चर्चा में आ गया है। यहां हिंदू समाज के लोगों ने एकत्र होकर शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ तथा पूजन किया। पूरे परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं की मौजूदगी से वातावरण भक्तिमय हो गया।

    इस दौरान अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया भी भोजशाला पहुंचे और परिसर का अवलोकन किया। उनके आगमन को लेकर पहले से ही तैयारी की गई थी और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी।

    अवलोकन के दौरान भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा ने तोगड़िया को भोजशाला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने परिसर के महत्व और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखा जिससे तोगड़िया ने भी गंभीरता से पूरे स्थल का निरीक्षण किया।

    मीडिया से बातचीत करते हुए प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि वह लंबे समय से इस स्थल से जुड़े रहे हैं और वर्षों पहले यहां ताला खुलवाने के आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह एक बार फिर यहां दर्शन करने के उद्देश्य से आए हैं और इस स्थान के प्रति उनकी आस्था और जुड़ाव बना हुआ है।

    सत्याग्रह के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन किया। आयोजन के दौरान अनुशासन बनाए रखा गया और किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति सामने नहीं आई।

    भोजशाला का यह आयोजन एक बार फिर इस ऐतिहासिक स्थल को चर्चा के केंद्र में ले आया है जहां धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां समय समय पर लोगों का ध्यान आकर्षित करती रहती हैं। प्रशासन भी ऐसे आयोजनों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क नजर आ रहा है।