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  • महाशिवरात्रि पर सीएम डॉ. मोहन यादव का संदेश: भोलेनाथ की कृपा से प्रदेश में सुख-शांति और समृद्धि की कामना

    महाशिवरात्रि पर सीएम डॉ. मोहन यादव का संदेश: भोलेनाथ की कृपा से प्रदेश में सुख-शांति और समृद्धि की कामना


    भोपाल। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। भक्ति और आस्था के इस महापर्व पर मुख्यमंत्री ने भगवान भोलेनाथ से समस्त प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, त्याग और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देने वाला उत्सव है, जो समाज को आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में लिखा कि भगवान भोलेनाथ की भक्ति के महापर्व महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। देवाधिदेव महादेवजी से प्रार्थना है कि हम सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि शिव की आराधना जीवन में संयम, धैर्य और समर्पण की भावना को मजबूत करती है। यह पर्व हमें बुराइयों से दूर रहकर सदाचार और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    महाशिवरात्रि के अवसर पर राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में भक्ति का वातावरण छाया हुआ है। शिवालयों में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। कई स्थानों पर रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया है। उपवास रखकर श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव से भोलेनाथ की आराधना में लीन हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अवसर पर भोपाल के प्रसिद्ध बड़वाले महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। मंदिर परिसर में विशेष सजावट की गई है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि भक्तगण सुगमता से दर्शन कर सकें। मुख्यमंत्री की उपस्थिति को लेकर मंदिर परिसर में अतिरिक्त उत्साह और ऊर्जा का माहौल है।

    प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी महाशिवरात्रि को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित अनेक शहरों के प्रमुख शिव मंदिरों में आकर्षक सजावट और भव्य अनुष्ठानों का आयोजन हो रहा है। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सामाजिक समरसता और एकता का संदेश भी दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भगवान शिव का जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी संतुलित और करुणामय बने रहने की प्रेरणा देता है। उनका त्याग, तप और लोककल्याण की भावना समाज के लिए आदर्श है। महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व हम सभी के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आए, यही कामना है। महाशिवरात्रि के इस शुभ अवसर पर पूरा मध्य प्रदेश शिवमय हो गया है और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंज रहा है।

  • Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकते हैं भोलेनाथ!

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकते हैं भोलेनाथ!


    नई दिल्ली । महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन पर्वों में से एक है. इस दिन भक्त व्रत रखकर रात्रि जागरण कर और शिवलिंग पर जल-अभिषेक कर भोलेनाथ की विशेष कृपा पाने की कामना करते हैं. पंचांग के अनुसार साल 2026 में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं लेकिन अगर पूजा-व्रत में कुछ गलतियां हो जाएं तो इसका फल उल्टा भी हो सकता है. आइए जानते हैं महाशिवरात्रि के दिन कौन-सी गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए.

    महाशिवरात्रि के दिन न करें ये काम!

    केतकी के फूल: पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था. इसलिए भूलकर भी इसे शिवलिंग पर न अर्पित करें. सिंदूर या कुमकुम: शिवजी वैरागी हैं और सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है जिसे महादेव पर नहीं चढ़ाया जाता. उनकी पूजा में भस्म का उपयोग सही माना जाता है. तुलसी दल: भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है. इसकी जगह आप बेलपत्र का इस्तेमाल करें. हल्दी: हल्दी का संबंध स्त्री सौंदर्य से है जबकि शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है. इसलिए शिवजी को हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए.

    बेलपत्र चढ़ाते समय रखें ध्यान

    हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं. पत्तियां कहीं से कटी-फटी या सूखी नहीं होनी चाहिए. वहीं बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ होना चाहिए.

    शंख से जल अर्पित करना
    भगवान विष्णु की पूजा में शंख अनिवार्य है लेकिन शिवजी की पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित है. शास्त्रों के अनुसार महादेव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था इसलिए शिवलिंग का अभिषेक शंख से नहीं करना चाहिए. इसके लिए तांबे या पीतल के लोटे का उपयोग करें.

    खान-पान और व्यवहार की सावधानियां

    तामसिक भोजन: महाशिवरात्रि के दिन प्याज लहसुन मांस या मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें. काले कपड़े: पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए. इस दिन हरा सफेद या पीला रंग शुभ माना जाता है. अनुशासन: इस दिन किसी का अपमान न करें न ही घर में क्लेश करें. शिव भक्ति में मन को शांत रखें.

    शिवलिंग की आधी परिक्रमा न करें?

    अक्सर लोग जोश में आकर शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कर लेते हैं लेकिन नियम के अनुसार शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है (जिसे जलाधारी या निर्मली कहते हैं) उसे लांघना अशुभ माना जाता है. हमेशा वहीं से वापस मुड़ जाना चाहिए.