मौत के अगले दिन CCTV फुटेज जुटाने का दावा
CBI के अनुसार 13 मई 2026 को गिरिबाला सिंह ने एक CCTV तकनीशियन से संपर्क किया था। उन्होंने घटना के समय की रिकॉर्डिंग की कॉपी हासिल करने का प्रयास किया। इसी दिन उन्होंने एक्सप्रेशन ब्यूटी पार्लर की संचालिका से भी ट्विशा के 12 मई को वहां आने-जाने की जानकारी मांगी थी। इसके बाद कुछ लोगों को पार्लर भेजकर वहां के CCTV फुटेज भी हासिल किए गए। जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि घटना के तुरंत बाद इस तरह फुटेज जुटाने की गतिविधियां मामले में महत्वपूर्ण हैं। हालांकि इन गतिविधियों के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था यह अदालत में जांच और साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।
रिटायर्ड जिला जज हैं आरोपी सास
CBI ने अपने जवाब में बताया कि गिरिबाला सिंह रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। घटना के समय वह भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अध्यक्ष थीं। उनके बेटे समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों आरोपियों का सामाजिक और पेशेवर प्रभाव भोपाल में चल रहे ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। गवाहों को डराने या उन पर दबाव डालने की आशंका भी जताई गई है। इसी आधार पर CBI ने मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर अपनी चिंता सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी है।
17 अगस्त को दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
इस मामले में CBI ने 17 अगस्त 2026 को गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 108 और 3(5) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। भोपाल की अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया चल रही है और दहेज मृत्यु समेत अन्य पहलुओं की जांच जारी है। ट्विशा के पिता नवनीधि शर्मा ने भोपाल में चल रहे सेशन ट्रायल को दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसी याचिका के जवाब में CBI ने अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल किया है। एजेंसी ने आरोपियों के प्रभाव और गवाहों की सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं का उल्लेख किया है।
12 मई को ससुराल में संदिग्ध हालत में मिली थीं ट्विशा
ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। उनकी शादी 25 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया था। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली एम्स को दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 24 मई को दिल्ली एम्स के मेडिकल बोर्ड ने उनका दूसरा पोस्टमॉर्टम किया था।
फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है। CBI के खुलासों के बाद मुकदमे को भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग और गवाहों की सुरक्षा का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और अदालत के फैसले पर सबकी नजर रहेगी।










