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  • आयुष्मान क्लेम में बड़ा खेल सामने आया, कहीं ओवर डायग्नोसिस तो कहीं टेलीफोन पर इलाज; भोपाल के 3 अस्पतालों पर कार्रवाई

    आयुष्मान क्लेम में बड़ा खेल सामने आया, कहीं ओवर डायग्नोसिस तो कहीं टेलीफोन पर इलाज; भोपाल के 3 अस्पतालों पर कार्रवाई


    भोपाल भोपाल में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में कथित गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। आयुष्मान योजना की टीम ने शहर के तीन निजी अस्पतालों में औचक निरीक्षण कर कई अनियमितताएं पकड़ी हैं। जांच के बाद तीनों अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से आयुष्मान योजना से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। अब इन अस्पतालों में पहले इलाज करा चुके मरीजों के रिकॉर्ड और आयुष्मान क्लेम की भी जांच की जाएगी।

    आयुष्मान भारत के अधिकारियों और विभागीय टीम ने यश्वी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल सूर्यांश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और मारुति मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान सबसे गंभीर मामला मरीजों को दूसरे जिलों से बड़ी संख्या में भोपाल बुलाकर भर्ती करने का सामने आया। यश्वी अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि सिंगरौली और दूसरे जिलों के गांवों से मरीजों को एक साथ बड़ी संख्या में भोपाल लाया गया था। उन्हें मुफ्त इलाज का भरोसा देकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच टीम ने 30 मरीजों के रिकॉर्ड खंगाले जिनमें करीब 20 मरीज दूसरे जिलों के पाए गए।

    आयुष्मान योजना के अधिकारियों ने माना कि मामले की पूरी तस्वीर पुराने रिकॉर्ड की जांच के बाद ही साफ होगी। इसी वजह से तीनों अस्पतालों के पहले के आयुष्मान क्लेम का डेस्क ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। पुराने मरीजों से भी संपर्क कर यह पता लगाया जाएगा कि उन्हें किस बीमारी के लिए भर्ती किया गया था उनका वास्तविक इलाज क्या हुआ और अस्पताल में कितने दिन रखा गया। मरीजों के बयान और अस्पताल के दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।

    जांच के दौरान एक मरीज के मामले ने भी सवाल खड़े किए। ब्रजनारायण नाम के मरीज को पेट में दर्द की शिकायत थी। अस्पताल की फाइल में उन्हें गंभीर संक्रमण ब्लड प्रेशर गिरने और अंगों पर असर जैसी स्थिति बताते हुए 8 से 11 अगस्त तक आईसीयू में भर्ती दिखाया गया। लेकिन 11 अगस्त की सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर उन्हें अस्पताल के बाहर देखा गया। बाद में रात 9 बजकर 36 मिनट पर वह आईसीयू वार्ड में दूसरे मरीजों के साथ बातचीत करते नजर आए। इस मामले ने आईसीयू में भर्ती दिखाकर किए गए क्लेम की वास्तविकता पर सवाल खड़े किए हैं।

    मारुति मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जांच में भी आईसीयू में भर्ती मरीजों के मामलों में ओवर डायग्नोसिस की आशंका सामने आई। जांच टीम को वहां मरीजों का इलाज करते हुए BAMS डॉक्टर भी मिले। अधिकारियों ने ऐसे मामलों के रिकॉर्ड की जांच करने और यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि मरीजों को जिस गंभीर स्थिति में भर्ती दिखाया गया था वह चिकित्सकीय रूप से वास्तव में सही थी या नहीं।

    सूर्यांश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जांच में भी गंभीर अनियमितता सामने आई। रिकॉर्ड में जिन डॉक्टरों के नाम मरीजों के इलाज से जुड़े थे वे मौके पर मरीजों का इलाज करते नहीं मिले। जांच के दौरान टेलीफोन पर इलाज किए जाने की बात भी सामने आई। अब अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज डॉक्टरों की भूमिका और मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी।

    आयुष्मान योजना के सीईओ अरविंद कुमार शाह के मुताबिक तीनों अस्पतालों में तत्काल प्रभाव से नए आयुष्मान मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है। पुराने मरीजों के क्लेम का भी ऑडिट किया जाएगा। अस्पतालों से जवाब मिलने और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

    इस कार्रवाई के बाद आयुष्मान योजना से जुड़े दूसरे अस्पतालों पर भी जांच की नजर रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि कहीं मरीजों को अनावश्यक रूप से भर्ती करने फर्जी या बढ़े हुए क्लेम लगाने अथवा इलाज की स्थिति को गलत तरीके से दर्ज करने जैसी गड़बड़ी मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तीन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई ने आयुष्मान योजना के नाम पर होने वाले संभावित फर्जीवाड़े को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • भोपाल हॉस्पिटल कांड: युवक की मौत पर परिजनों का हंगामा, डॉक्टर नदारद, नर्स करती रही CPR

    भोपाल हॉस्पिटल कांड: युवक की मौत पर परिजनों का हंगामा, डॉक्टर नदारद, नर्स करती रही CPR




    भोपाल।
    भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र स्थित अक्षय अस्पताल में इलाज के दौरान 32 वर्षीय युवक की मौत के बाद शनिवार देर रात जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ की। इस बीच एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक नर्स मरीज को सीपीआर देकर रिवाइव करने की कोशिश करती दिख रही है, जबकि वार्ड में कोई डॉक्टर मौजूद नजर नहीं आ रहा। यही वीडियो परिजनों ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया है।

    जानकारी के अनुसार, बरखेड़ी निवासी विशाल जोगी को इलाज के लिए अक्षय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार शाम से ही उसकी हालत लगातार बिगड़ने लगी थी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अस्पताल स्टाफ से सीनियर डॉक्टर को बुलाने की मांग की, लेकिन लंबे समय तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा। देर रात विशाल की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।

    मृत्यु से पहले का जो वीडियो सामने आया है, उसमें साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल के बेड पर लेटे विशाल को एक नर्स सीपीआर देकर बचाने का प्रयास कर रही है। आसपास मौजूद परिजन रोते-बिलखते दिखाई दे रहे हैं और वीडियो बना रहा व्यक्ति अस्पताल में डॉक्टरों की गैरमौजूदगी का आरोप लगा रहा है। परिजनों का कहना है कि गंभीर स्थिति में भी अस्पताल में सिर्फ नर्स ही मौजूद थी, जबकि डॉक्टर और अन्य स्टाफ नजर नहीं आए।

    वहीं, अस्पताल स्टाफ की ओर से इस मामले में अलग ही दावा किया गया है। स्टाफ का कहना है कि विशाल की हालत पहले से ही बेहद गंभीर थी और इसकी जानकारी परिजनों को समय रहते दे दी गई थी। डॉक्टरों ने मरीज को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन हालत ज्यादा बिगड़ने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, मौत के बाद करीब 30 से ज्यादा लोग एक साथ अस्पताल में आ गए और हंगामा करने लगे।

    अस्पताल स्टाफ का यह भी कहना है कि परिजनों और उनके साथ आए लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की।

    गुस्साए लोगों ने अस्पताल के कांच, कुर्सियां, बोर्ड और अन्य सामान तोड़ दिए। हालात बेकाबू होते देख अस्पताल का स्टाफ और गार्ड अपनी जान बचाने के लिए मौके से निकल गए। स्टाफ के अनुसार, उस वक्त अस्पताल में सिर्फ नाइट ड्यूटी पर तैनात दो सफाई कर्मचारी ही मौजूद रह गए थे।

    हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस को बुलाया गया। हबीबगंज थाना पुलिस के अनुसार, मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सवाल यह उठ रहा है कि गंभीर मरीज की हालत में डॉक्टरों की मौजूदगी क्यों नहीं दिखी और क्या इलाज में वास्तव में लापरवाही बरती गई। अब पूरे मामले पर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।