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  • भोपाल के मास्टर प्लान पर किसानों और व्यापारियों ने उठाए सवाल, कृषि जमीन का लैंडयूज बदलने और 45 मीटर सड़क के प्रस्ताव का विरोध

    भोपाल के मास्टर प्लान पर किसानों और व्यापारियों ने उठाए सवाल, कृषि जमीन का लैंडयूज बदलने और 45 मीटर सड़क के प्रस्ताव का विरोध


    भोपाल । भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर विरोध और आपत्तियों का सिलसिला तेज हो गया है। अब तक योजना के प्रस्तावों पर 5000 से ज्यादा आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। इन आपत्तियों की छंटनी करने में करीब 15 दिन लगने का अनुमान है। इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से सुनवाई का शेड्यूल जारी किया जाएगा। बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में बदलाव कृषि भूमि के उपयोग में परिवर्तन अवैध निर्माण और चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव को लेकर लोगों ने सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं। शनिवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा बताई गई है। अंतिम समय में आवेदन करने वाले लोगों को तकनीकी परेशानी या समयसीमा को लेकर असमंजस का सामना न करना पड़े इसे लेकर भी मांग उठाई गई है।

    शाहपुरा स्थित टाउन एंड कंट्री प्लानिंग यानी टीएंडसीपी कार्यालय में पिछले दो दिनों से आपत्तियां दर्ज कराने के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ी हुई है। शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के साथ व्यापारी और स्थानीय रहवासी भी कार्यालय पहुंचे। लोगों ने मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में प्रस्तावित बदलावों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। कई लोगों की चिंता निर्माण और जमीन के उपयोग से जुड़े प्रावधानों को लेकर है। किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रहना चाहिए जबकि कुछ स्थानीय रहवासी प्रस्तावित चौड़ी सड़कों और अन्य नियोजन प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं।

    मास्टर प्लान पर आपत्ति और सुझाव देने की समयसीमा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने संयुक्त संचालक टीएंडसीपी को आवेदन भेजकर अंतिम तारीख और समय को लेकर स्पष्ट जानकारी देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि विभिन्न संस्थाएं और नागरिक समूह योजना पर आपत्तियां और सुझाव जुटा रहे हैं। ऐसे में अंतिम दिनों में कार्यालय बंद रहने या ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी परेशानी आने से किसी नागरिक की आपत्ति दर्ज होने से छूट सकती है। आवेदन में काउंटर चालू रखने स्टाफ की उपलब्धता और संपर्क अधिकारी की जानकारी वेबसाइट तथा नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करने की मांग भी की गई है। साथ ही आवेदन की रसीद पर तारीख समय आवक नंबर और जमा किए गए दस्तावेजों का विवरण दर्ज करने का सुझाव दिया गया है।

    क्रेडाई की ओर से भेजे गए आवेदन में मध्य प्रदेश राजपत्र में 25 सितंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट के संदर्भ में आपत्ति और सुझाव देने की समयसीमा का उल्लेख किया गया है। आवेदन के मुताबिक प्रकाशन का दिन छोड़कर 30 दिनों की गणना करने पर अंतिम दिन 25 अक्टूबर पड़ता है। इसी कारण विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि काउंटर ईमेल और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन किस तारीख और समय तक स्वीकार किए जाएंगे। अंतिम समयसीमा को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना इसलिए जरूरी है ताकि लोगों को आवेदन जमा करने में परेशानी न हो।

    मास्टर प्लान को लेकर किसानों की सबसे बड़ी चिंता बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि और उसके भू-उपयोग में प्रस्तावित बदलाव हैं। किसानों का आरोप है कि नए ड्राफ्ट में कुछ कृषि भूमि को दूसरी श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव है जिससे भविष्य में खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। किसान प्रतिनिधि अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक खेती ही कई परिवारों की आय का प्रमुख साधन है। इसी वजह से किसान भोजताल संरक्षण जोन एक यानी BIZ-1 और जोन दो यानी BIZ-2 को हटाने तथा कृषि भूमि का लैंडयूज कृषि ही बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।

    इसके अलावा बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में बदलाव को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि तालाब के जलग्रहण क्षेत्र और आसपास की जमीन के उपयोग से जुड़े फैसलों पर पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वहीं मिसरोद के रहवासियों की ओर से 45 मीटर चौड़ी सड़क के प्रस्ताव को हटाने की मांग भी उठाई गई है। किसानों और स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों में कृषि भूमि को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं।

    अब विभाग के सामने हजारों आपत्तियों की जांच और उनकी श्रेणीवार छंटनी करने की चुनौती है। छंटनी पूरी होने के बाद सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया जाएगा। इसके बाद संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलने की उम्मीद है। भोपाल मास्टर प्लान 2047 शहर के भविष्य के विकास और भूमि उपयोग से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसलिए किसानों व्यापारियों और रहवासियों की आपत्तियों पर सुनवाई और प्रस्तावों के प्रभावों का आकलन आने वाले समय में इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा रहेगा।

  • भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर व्यापारियों का मोर्चा, कन्वर्जन फीस 5% करने और सीलिंग रोकने की मांग, अब किसान भी उठाएंगे आवाज

    भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर व्यापारियों का मोर्चा, कन्वर्जन फीस 5% करने और सीलिंग रोकने की मांग, अब किसान भी उठाएंगे आवाज


    भोपाल । भोपाल मास्टर प्लान-2047 के नए ड्राफ्ट को लेकर विरोध तेज होने लगा है। योजना पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए शुक्रवार को सबसे पहले व्यापारी शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश यानी टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचे। व्यापारियों ने व्यावसायिक भू-उपयोग कन्वर्जन फीस फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर और सीलिंग की कार्रवाई से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए। दूसरी ओर भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान भी अपनी जमीन और खेती से जुड़े मुद्दों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी में हैं। इससे मास्टर प्लान के प्रस्तावों पर व्यापारियों और किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

    व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि कन्वर्जन फीस एकमुश्त और कुल पांच प्रतिशत तय की जाए। उनका कहना है कि निर्धारित फीस जमा करने के बाद उन्हें पूरा कमर्शियल एफएआर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही पुराने बाजारों को राहत देने और सीलिंग की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है। व्यापारियों का मानना है कि व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े नियम स्पष्ट और व्यावहारिक होने चाहिए ताकि कारोबारियों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

    व्यापारियों के बाद अब किसानों की आपत्तियां भी मास्टर प्लान के लिए अहम होने वाली हैं। भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान शाहपुरा स्थित टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचकर अपनी चिंताएं अधिकारियों के सामने रखेंगे। इससे पहले गुरुवार को नीलबड़ में किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया था। किसानों का आरोप है कि नए ड्राफ्ट में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने के प्रस्ताव से उनकी निजी जमीन खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है।

    किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि रखा गया था। वर्ष 2031 के लिए तैयार किए गए पहले के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान होने की बात कही जा रही है। अब नए ड्राफ्ट में बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान चाहते हैं कि जमीन का उपयोग बदलने से पहले उनकी आपत्तियों और अधिकारों पर गंभीरता से विचार किया जाए। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने भी किसानों की ओर से कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की बात कही है।

    मास्टर प्लान में बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण की सीमा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ इलाकों में आम लोगों के मकानों पर निर्माण संबंधी पाबंदियों की आशंका है जबकि एलडीआर में शामिल कुछ क्षेत्रों में निर्माण की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। आलोचकों का दावा है कि इससे प्रभावशाली लोगों के बंगलों और फार्म हाउस वाले इलाकों को फायदा मिल सकता है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित नियमों निर्माण अनुमतियों और जमीन के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

    किसानों ने मेंडोरा मेंडोरी सेवनिया गौंड और केरवा वुड्स जैसे क्षेत्रों में भू-उपयोग और जमीन की सरकारी गाइडलाइन में बदलाव पर भी चिंता जताई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मेंडोरी के केरवा वुड्स क्षेत्र में कृषि भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन वर्ष 2025-26 में एक करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर थी जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर तीन करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर हो गई। हालांकि सरकारी गाइडलाइन में बढ़ोतरी का अर्थ यह नहीं है कि वास्तविक बाजार मूल्य भी उसी अनुपात में बढ़ गया है।

    किसानों की मांग है कि भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए और कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है इसलिए जमीन के भविष्य से जुड़े फैसले लेते समय किसानों की सहमति और समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    टीएंडसीपी की संयुक्त संचालक इंदू त्रिपाठी के मुताबिक नियमानुसार 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटाइज किया जाएगा और इसके बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यापारियों और किसानों की मांगों पर सुनवाई के दौरान क्या निर्णय सामने आते हैं और भोपाल के विकास की प्रस्तावित योजना में किन बदलावों पर विचार किया जाता है।