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  • भोपाल मेट्रो पर बढ़ा खर्च, कैबिनेट ने दी 10,033 करोड़ की संशोधित मंजूरी; मंडी शुल्क में भी बड़ा बदलाव

    भोपाल मेट्रो पर बढ़ा खर्च, कैबिनेट ने दी 10,033 करोड़ की संशोधित मंजूरी; मंडी शुल्क में भी बड़ा बदलाव

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की महत्वाकांक्षी भोपाल मेट्रो रेल परियोजना को लेकर बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी प्रदान कर दी गई। लागत में करीब 4 हजार करोड़ रुपए की वृद्धि के बाद अब भोपाल मेट्रो परियोजना की कुल लागत 10,033 करोड़ रुपए पहुंच गई है। इसके साथ ही सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेते हुए मंडी शुल्क व्यवस्था में भी बदलाव किया है।

    कैबिनेट बैठक के बाद एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि भोपाल मेट्रो परियोजना का प्रारंभिक स्वरूप वर्ष 2016 में तैयार किया गया था। उस समय इसकी अनुमानित लागत लगभग 6,241 करोड़ रुपए आंकी गई थी। हालांकि समय के साथ निर्माण सामग्री की कीमतों, तकनीकी आवश्यकताओं और अन्य कारणों से परियोजना की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब संशोधित लागत 10,033 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है, जिसे कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।

    सरकार का मानना है कि संशोधित बजट से परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आएगी और आगामी दो वर्षों में मेट्रो परियोजना का स्वरूप अधिक स्पष्ट रूप से सामने दिखाई देगा। भोपाल मेट्रो को राजधानी के सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने वाली प्रमुख परियोजना माना जा रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    बैठक में किसानों से जुड़ा एक अहम निर्णय भी लिया गया। सरकार ने कपास उत्पादक किसानों को राहत देते हुए कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को घटाकर 0.50 प्रतिशत कर दिया है। मंत्री काश्यप ने बताया कि पहले अधिक मंडी शुल्क के कारण किसानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था। महाराष्ट्र में भी कपास पर इसी दर से शुल्क लिया जाता है, इसलिए प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

    इसके विपरीत सरकार ने अन्य कृषि उपज पर मंडी शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। कुछ वर्ष पहले इसे डेढ़ प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत किया गया था, लेकिन अब फिर से इसे बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का अनुमान है कि इस निर्णय से राज्य को लगभग 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। यह राशि सड़क विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विस्तार और गौ-संवर्धन जैसी योजनाओं पर खर्च की जाएगी।

    कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में भी पहल की गई है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यशालाओं का आयोजन कर किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों और उसके लाभों के बारे में जागरूक किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे कृषि लागत में कमी आएगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन के 12 वर्ष पूर्ण होने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे देश के विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए 5 जून से 21 जून तक प्रदेशभर में जनकल्याण और विकास कार्यों से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी दी।

    इसके अलावा राज्य के लगभग एक लाख संविदा कर्मचारी-अधिकारियों को 4.5 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि दिए जाने के फैसले का भी स्वागत किया गया। कुल मिलाकर कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों को राज्य के बुनियादी ढांचे, कृषि क्षेत्र और कर्मचारी हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो गुजरने पर घमासान, मेट्रो प्रबंधन रखेगा अपना पक्ष

    कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो गुजरने पर घमासान, मेट्रो प्रबंधन रखेगा अपना पक्ष


    नई दिल्ली।  भोपाल में चल रहे बहुचर्चित मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। Bhopal Metro के अंडरग्राउंड रूट को लेकर उठे विवाद पर आज वक्फ ट्रिब्यूनल में अहम सुनवाई होनी है। इस सुनवाई में मेट्रो प्रबंधन अपना पक्ष पेश करेगा।

    मामला उस प्रस्तावित मार्ग से जुड़ा है, जिसके तहत मेट्रो लाइन को शहर के कुछ संवेदनशील इलाकों से होकर अंडरग्राउंड गुजारा जाना है। विवाद खासतौर पर उन क्षेत्रों को लेकर है जहां कब्रिस्तान और वक्फ संपत्तियां स्थित हैं। स्थानीय पक्ष का आरोप है कि निर्माण कार्य से धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

    वक्फ ट्रिब्यूनल में दायर याचिकाओं में कहा गया है कि इन क्षेत्रों के नीचे सुरंग बनाने से जमीन की संरचना प्रभावित हो सकती है और इससे कब्रों व धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसी आधार पर निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई है।

    वहीं दूसरी ओर, Bhopal Metro प्रबंधन का पक्ष है कि यह परियोजना अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार की जा रही है। उनका दावा है कि अंडरग्राउंड निर्माण के दौरान सतह पर मौजूद संरचनाओं को नुकसान नहीं होगा और सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।

    इस विवाद को लेकर पहले भी कई सुनवाई हो चुकी हैं, लेकिन आज की तारीख को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मेट्रो प्रबंधन पहली बार विस्तृत रूप से अपना तकनीकी और कानूनी पक्ष प्रस्तुत करेगा। ट्रिब्यूनल में दोनों पक्षों की दलीलों के बाद आगे की दिशा तय हो सकती है।

    शहर में यह मामला सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का नहीं, बल्कि धार्मिक और कानूनी संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। एक ओर जहां Bhopal Metro को शहर के विकास और ट्रैफिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समुदायों की चिंताओं ने इसे विवादित बना दिया है।

    आज की सुनवाई पर पूरे शहर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर मेट्रो प्रोजेक्ट की आगे की गति और डिजाइन पर पड़ सकता है।

  • अंडरग्राउंड भोपाल मेट्रो का बड़ा कदम दुर्गावती ने बनाई 10 मीटर सुरंग दूसरी मशीन भी तैयार

    अंडरग्राउंड भोपाल मेट्रो का बड़ा कदम दुर्गावती ने बनाई 10 मीटर सुरंग दूसरी मशीन भी तैयार


    भोपाल । भोपाल मेट्रो परियोजना अब जमीन के नीचे नए चरण में प्रवेश कर चुकी है जहां अत्याधुनिक तकनीक के साथ सुरंग निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है टनल बोरिंग मशीन दुर्गावती ने 24 मीटर की गहराई में उतरने के बाद 10 मीटर से अधिक सुरंग तैयार कर ली है जिसमें 7 मीटर अस्थायी और 3 दशमलव 3 मीटर स्थायी संरचना शामिल है इस उपलब्धि के साथ ही परियोजना को नई गति मिली है और अब दूसरी टीबीएम को भी जमीन के भीतर उतारने की तैयारी की जा रही है जिससे दोनों दिशाओं से खुदाई का काम एक साथ शुरू हो सकेगा

    इस परियोजना के तहत कुल 3 दशमलव 39 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड सुरंग का निर्माण किया जाना है जिसमें दो प्रमुख स्टेशन भी विकसित किए जाएंगे मेट्रो अधिकारियों के अनुसार अगले दो वर्षों में इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है गहराई में सुरंग निर्माण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सतह पर कंपन बेहद कम महसूस होता है जिससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी बिना बाधा के काम संभव हो पाता है पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्नत मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए सुरक्षा और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है

    प्रदेश में पहली बार दो टनल बोरिंग मशीनों का एक साथ उपयोग किया जा रहा है जो इस परियोजना को तकनीकी दृष्टि से खास बनाता है यह सुरंग ऐशबाग से सिंधी कॉलोनी के बीच बनाई जा रही है जो भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे अहम क्षेत्रों को जोड़ेगी टीबीएम तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह संवेदनशील और घनी शहरी आबादी के नीचे भी सटीकता और सुरक्षा के साथ कार्य कर सके

    भोपाल नगर निगम लोक निर्माण विभाग रेलवे पुलिस प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से यह प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है शहर में एम्स से करोंद चौराहे तक ऑरेंज लाइन पर काम जारी है जिसमें सुभाषनगर से एम्स तक 6 किलोमीटर लंबा प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले से संचालित हो रहा है अब सुभाषनगर से करोंद के बीच दूसरे चरण में अंडरग्राउंड सेक्शन तैयार किया जा रहा है जहां टीबीएम को रेड सी प्लाजा के पास से आगे बढ़ाया गया है

    इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर में भोपाल और नादरा नाम के दो स्टेशन बनाए जाएंगे जिनकी लंबाई करीब 180 मीटर होगी सुरंग निर्माण पूरा होने के बाद नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर लंबे स्लोप के जरिए मेट्रो फिर से जमीन के ऊपर आएगी इन स्टेशनों को तीन स्तरों में विकसित किया जाएगा जहां ग्राउंड लेवल पर प्रवेश और निकास के साथ टिकट काउंटर और दुकानें होंगी कॉनकोर्स लेवल पर टिकटिंग ऑटोमेटिक गेट और प्रतीक्षालय की सुविधा मिलेगी जबकि प्लेटफॉर्म लेवल पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन प्लेटफॉर्म तैयार किए जाएंगे इस तरह भोपाल मेट्रो परियोजना न केवल शहर के यातायात को नई दिशा दे रही है बल्कि आधुनिक तकनीक और सटीक योजना के साथ भविष्य के शहरी विकास की मजबूत नींव भी रख रही है

  • भोपाल मेट्रो ऑरेंज लाइन: भूमिगत कॉरिडोर निर्माण का बड़ा कदम

    भोपाल मेट्रो ऑरेंज लाइन: भूमिगत कॉरिडोर निर्माण का बड़ा कदम


    भोपाल मेट्रो परियोजना ने एक महत्वपूर्ण मोड़ हासिल किया है। शहर के पुराने और घनी आबादी वाले हिस्सों के नीचे बनने वाले भूमिगत कॉरिडोर के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) का पहला हिस्सा लगभग 15 मीटर की गहराई में उतार दिया गया है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, मशीन की तकनीकी स्थापना और परीक्षण के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल की शुरुआत में सुरंग की खुदाई शुरू हो सकती है।

    यह भूमिगत कॉरिडोर भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक लगभग 3.39 किलोमीटर लंबा होगा। इस हिस्से में मेट्रो ट्रेन के संचालन के लिए दो समानांतर सुरंगें बनाई जाएंगी। इंजीनियरों का कहना है कि यह चरण तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि सुरंग पुराने शहर के व्यस्त और संवेदनशील इलाकों से गुजरने वाली है।

    TBM मशीन को दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल लाया गया था। मशीन कई हिस्सों में आती है जिन्हें क्रमिक रूप से जमीन के नीचे उतारकर असेंबल किया जाता है। पूरी तरह स्थापित होने के बाद यह मशीन लगभग 19 से 20 मीटर की गहराई पर सुरंग खोदने का काम शुरू करेगी। इसकी तकनीकी क्षमता प्रतिदिन लगभग 15 मीटर तक खुदाई करने की है।

    परियोजना के तहत पुल पातरा और सिंधी कॉलोनी क्षेत्र में अंडरग्राउंड रैंप भी बनाए जाएंगे, जिससे मेट्रो ट्रेन सतह से भूमिगत स्टेशन तक आसानी से पहुंच सके। यह कार्य मेट्रो परियोजना के पैकेज BH-04 के अंतर्गत किया जा रहा है।

    भोपाल के पुराने शहर में कई इमारतें दशकों पुरानी हैं और कुछ संरचनाएं अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती हैं। निर्माण कार्य के दौरान विशेष सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक भूमिगत तकनीक की मदद से ऊपर की इमारतों और सड़कों पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा और यातायात सामान्य रूप से चलता रहेगा।

    तेजी से बढ़ती आबादी और यातायात दबाव को देखते हुए मेट्रो परियोजना को शहर के सार्वजनिक परिवहन के लिए अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमिगत कॉरिडोर तैयार होने के बाद पुराने भोपाल और नए शहर के बीच आवागमन अधिक तेज और सुगम होगा। इससे ट्रैफिक जाम कम होने और यात्रियों को समय की बचत होने की उम्मीद है।

    मेट्रो परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि आगामी महीनों में सुरंग निर्माण की प्रगति के साथ अन्य चरणों पर भी तेजी से काम किया जाएगा। यदि कार्य तय समय के अनुसार चलता रहा तो आने वाले वर्षों में भोपाल को आधुनिक और बेहतर शहरी परिवहन प्रणाली मिल सकेगी।

    भोपाल मेट्रो की यह प्रगति शहरवासियों के लिए बेहतर और सुविधाजनक आवागमन का संकेत है। भूमिगत तकनीक और सुरक्षित निर्माण पद्धति के संयोजन से यह परियोजना शहरी परिवहन में नए मानक स्थापित करेगी।

  • भोपाल मेट्रो में पैसेंजर की कमी 14 दिन में ही ट्रिप घटाई नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू

    भोपाल मेट्रो में पैसेंजर की कमी 14 दिन में ही ट्रिप घटाई नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू


    भोपाल । भोपाल मेट्रो में कम पैसेंजर की संख्या को लेकर एक बड़ी समस्या सामने आई है। मेट्रो की शुरुआत के सिर्फ 14 दिन बाद ही मेट्रो कॉर्पोरेशन को यात्री कम होने की वजह से टाइमिंग और ट्रिप्स में बदलाव करना पड़ा है। अब मेट्रो का नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू होगा जिसमें ट्रिप्स की संख्या कम कर दी गई है और टाइमिंग में भी बदलाव किया गया है।

    पहले मेट्रो का संचालन सुबह 9 बजे से शुरू होता था लेकिन अब एम्स स्टेशन से मेट्रो दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। वहीं शाम का आखिरी ट्रिप अब साढ़े सात बजे होगा जबकि पहले यह समय देर रात तक था। इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि मेट्रो को अपेक्षित संख्या में यात्री नहीं मिल रहे हैं। शुरुआत के दिनों में भी मेट्रो की सवारी में गिरावट देखी गई है और अब यह स्थिति इस हद तक पहुँच चुकी है कि मेट्रो को दिन में कम ट्रिप्स करने पड़ रहे हैं।

    भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को हुआ था जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल ने इसका उद्घाटन किया। इसके बाद 21 दिसंबर से मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हुआ था। उद्घाटन के पहले दिन लोगों में मेट्रो को लेकर काफी उत्साह था और 6568 पैसेंजर ने मेट्रो में सफर किया था। हालांकि इसके बाद यात्रियों की संख्या में गिरावट आई और मेट्रो के संचालन के लिए आवश्यक पैसेंजर संख्या नहीं जुटाई जा सकी।

    भोपाल मेट्रो के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि मेट्रो का संचालन काफी महंगा होता है और इसकी लागत को कवर करने के लिए पैसेंजर की संख्या जरूरी है। अब मेट्रो को यात्रा की स्थिति में सुधार लाने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार करना होगा।

  • भोपाल मेट्रो का पहला दिन बना उत्सव, यात्रियों ने डांस कर मनाया जश्न

    भोपाल मेट्रो का पहला दिन बना उत्सव, यात्रियों ने डांस कर मनाया जश्न

    भोपाल /राजधानी भोपाल में रविवार को मेट्रो सेवा का औपचारिक कमर्शियल शुभारंभ हो गया। सुबह ठीक 9 बजे एम्स स्टेशन से पहली मेट्रो रवाना हुई-जिसने करीब 30 मिनट में सुभाष नगर स्टेशन तक का सफर तय किया। इस ऐतिहासिक मौके पर लगभग 100 यात्रियों ने मेट्रो की पहली सवारी का अनुभव लिया। यात्रियों में 7 साल के बच्चे से लेकर 75 साल के बुजुर्ग तक शामिल रहे। पहली ही यात्रा में मेट्रो का माहौल उत्सव जैसा नजर आयाजहां कई यात्री खुशी में डांस करते दिखाई दिए और मोबाइल से इस पल को कैद करते रहे।भोपाल मेट्रो के चलने के साथ ही भोपाल देश का 26वां मेट्रो शहर बन गया है। इससे पहले मध्यप्रदेश के इंदौर में 31 मई 2024 को मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हुआ था। भोपाल मेट्रो का उद्घाटन शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया था। उद्घाटन के बाद रविवार, 21 दिसंबर से आम जनता के लिए मेट्रो सेवा शुरू कर दी गई।

    सुबह से ही स्टेशन पर उमड़ा उत्साह

    मेट्रो में सफर करने को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कई यात्री सुबह 7 बजे से ही स्टेशन पहुंच गए थे। यात्रियों का कहना था कि भोपाल के मेट्रो सिटी बनने का सपना आज साकार हो गया है और यह शहर के लिए गर्व का क्षण है। कोलार से आए एक कपल ने बताया कि भोपाल में मेट्रो की शुरुआत उनके लिए “वाओ मोमेंट” जैसा है।मेट्रो में सवार स्कूली बच्चों में भी खासा उत्साह दिखा। केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों ने कहा कि मेट्रो से उनका स्कूल नजर आया और पहली बार मेट्रो में बैठना बेहद रोमांचक अनुभव रहा। वहीं एक युवक वीडियो कॉल के जरिए अपने परिवार को मेट्रो और भोपाल के नजारे दिखाता नजर आया।

    सुविधाओं से लैस है भोपाल मेट्रो

    मेट्रो के सभी स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए एस्केलेटर, लिफ्ट और रैंप की व्यवस्था की गई है। सुभाष नगर, डीबी मॉल और एमपी नगर स्टेशनों पर फुट ओवरब्रिज बनाए गए हैं। रानी कमलापति मेट्रो स्टेशन को रेलवे स्टेशन से सीधे जोड़ा गया है, जिससे ट्रेन से उतरकर यात्री सीधे मेट्रो पकड़ सकें। एम्स स्टेशन पर भी फुटओवर ब्रिज के जरिए एम्स कैंपस तक सीधी पहुंच दी गई है।सुरक्षा के लिहाज से सभी स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर लगाए गए हैं, जिससे ट्रेन रुकने के बाद ही दरवाजे खुलते हैं और ट्रैक पर गिरने की आशंका नहीं रहती।

    टाइमिंग, किराया और ट्रिप की जानकारी

    भोपाल मेट्रो सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगी। एक दिन में कुल 17 ट्रिप रहेंगी। मेट्रो फिलहाल 8 स्टेशनों-एम्स, अलकापुरी, डीआरएम, आरकेएमपी, एमपी नगर, डीबी मॉल, केंद्रीय स्कूल औरसुभाष नगर-से होकर गुजरेगी। शुरुआती चरण में हर 75 मिनट में एक ट्रेन उपलब्ध होगी।टिकट फिलहाल मैन्युअल रूप से काउंटर से ही मिलेंगे। किराया तीन जोन में तय किया गया है। पहले दो स्टेशनों के लिए 20 रुपये, तीन से पांच स्टेशनों के लिए 30 रुपये और छह से आठ स्टेशनों के लिए 40 रुपये किराया निर्धारित किया गया है।

    पार्किंग बनी बड़ी चुनौती

    मेट्रो की शुरुआत से जहां लोग खुश हैं, वहीं स्टेशनों पर पार्किंग की कमी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। किसी भी स्टेशन पर चार पहिया वाहनों के लिए समुचित पार्किंग व्यवस्था नहीं है। हालांकि मेट्रो प्रबंधन टू-व्हीलर पार्किंग की व्यवस्था करने की दिशा में काम कर रहा है।
    2018 से शुरू हुआ था सफर
    भोपाल मेट्रो परियोजना का काम साल 2018 में शुरू हुआ था। पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर के बीच 6.22 किलोमीटर का प्राथमिकता कॉरिडोर अब आम जनता के लिए शुरू कर दिया गया है। दो साल पहले, 3 अक्टूबर 2023 को भोपाल में मेट्रो का पहला ट्रायल रन हुआ था।कुल मिलाकर, भोपाल मेट्रो की शुरुआत ने शहर के परिवहन तंत्र को एक नई दिशा दी है। पहले ही दिन दिखा उत्साह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में मेट्रो भोपालवासियों की जीवनरेखा बनने जा रही है।