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  • मेट्रो यात्रियों को मिली टिकट की नई सुविधा, हर स्टेशन पर लगीं दो मशीनें; बोर्ड ऑफिस में आई खराबी

    मेट्रो यात्रियों को मिली टिकट की नई सुविधा, हर स्टेशन पर लगीं दो मशीनें; बोर्ड ऑफिस में आई खराबी


    भोपाल । भोपाल और इंदौर मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों के लिए टिकट लेने की प्रक्रिया अब पहले से आसान होने जा रही है। दोनों शहरों के मेट्रो स्टेशनों पर गुरुवार 30 अक्टूबर से टिकट वेंडिंग मशीन यानी TVM की सुविधा शुरू कर दी गई है। अब यात्रियों को टिकट के लिए काउंटर पर लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। वे स्टेशन पर लगी मशीन के जरिए खुद ही टिकट प्राप्त कर सकेंगे। मेट्रो कॉरपोरेशन का दावा है कि मशीन से टिकट लेने की पूरी प्रक्रिया में करीब 30 सेकंड का समय लगेगा। हालांकि सुविधा शुरू होने के पहले ही दिन भोपाल के बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन पर मशीन में तकनीकी खराबी सामने आ गई।

    बोर्ड ऑफिस स्टेशन पर टिकट वेंडिंग मशीन से टिकट निकालने की कोशिश के दौरान दो बार टिकट जनरेट नहीं हुआ। इसके बाद मशीन में आई खराबी को ठीक किया गया और मेंटेनेंस के बाद टिकट निकल सका। इस दौरान मौके पर मशीन के पास कोई मेट्रो कर्मचारी मौजूद नहीं था। यात्रियों ने जब मशीन चलाने में मदद मांगी तो कर्मचारी ने भी मशीन की पूरी जानकारी नहीं होने की बात कही। बाद में तकनीकी सुधार के बाद मशीन से करीब 30 सेकंड में टिकट प्राप्त हो गया। शुरुआती दिन ही आई इस परेशानी के बाद मशीनों के रखरखाव और यात्रियों की सहायता के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता पर सवाल उठने लगे हैं।

    मेट्रो प्रबंधन ने भोपाल और इंदौर के सभी स्टेशनों पर दो-दो टिकट वेंडिंग मशीनें लगाई हैं। भोपाल के छह स्टेशनों पर कुल 12 मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इन मशीनों के माध्यम से यात्री अपनी जरूरत के अनुसार टिकट ले सकेंगे। खास बात यह है कि दृष्टिबाधित यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मशीनों में ब्रेल लिपि का प्रावधान भी किया गया है। इससे तकनीक के इस्तेमाल में उन्हें भी मदद मिल सकेगी।

    नई सुविधा शुरू होने के बाद अब भोपाल और इंदौर मेट्रो में टिकट लेने के तीन विकल्प उपलब्ध होंगे। यात्री MPMRCL मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा स्टेशन पर मौजूद टिकट काउंटर से टिकट लेने की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी। तीसरा विकल्प अब टिकट वेंडिंग मशीन का होगा। डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था में यात्रियों को UPI QR कोड और ई-वॉलेट के माध्यम से कैशलेस भुगतान करने की सुविधा भी दी गई है।

    मेट्रो यात्रियों को टिकट पर प्रमोशनल डिस्काउंट का लाभ भी मिल रहा है। यह छूट 11 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। इसके तहत सिंगल जर्नी टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जा रही है। रिटर्न जर्नी टिकट पर कुल 30 प्रतिशत और ग्रुप टिकट पर कुल 35 प्रतिशत छूट का लाभ मिल रहा है। ग्रुप टिकट की सुविधा को भी आसान बनाया गया है। अब इसके लिए कम से कम दो यात्री ही पात्र होंगे।

    टिकट वेंडिंग मशीन शुरू होने से यात्रियों को टिकट लेने के लिए एक और विकल्प मिल गया है। इससे काउंटर पर भीड़ कम करने और टिकट प्रक्रिया को तेज बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि पहले ही दिन मशीन में आई खराबी ने यह भी दिखाया है कि नई व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए नियमित तकनीकी निगरानी और यात्रियों को सही जानकारी देने वाले कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी होगी।

  • मेट्रो में सफर करना हुआ और आसान, भोपाल-इंदौर के हर स्टेशन पर लगीं दो टिकट मशीनें, जानिए टिकट लेने के तीन तरीके

    मेट्रो में सफर करना हुआ और आसान, भोपाल-इंदौर के हर स्टेशन पर लगीं दो टिकट मशीनें, जानिए टिकट लेने के तीन तरीके


    भोपाल । भोपाल और इंदौर में मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। अब टिकट खरीदने के लिए काउंटर पर लंबी कतार में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने 30 अक्टूबर से दोनों शहरों के मेट्रो स्टेशनों पर टिकट वेंडिंग मशीन यानी TVM की सुविधा शुरू की है। इन मशीनों की मदद से यात्री खुद टिकट प्राप्त कर सकेंगे। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य टिकट खरीदने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है। मशीनों के शुरू होने से यात्रियों का समय बचेगा और टिकट काउंटरों पर निर्भरता भी कम होगी।

    भोपाल और इंदौर के मेट्रो स्टेशनों पर दो दो टिकट वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों के माध्यम से यात्री अपनी जरूरत के अनुसार टिकट खरीद सकेंगे। भोपाल के छह मेट्रो स्टेशनों पर कुल 12 मशीनें लगाए जाने की जानकारी दी गई है। शुरुआत में यात्रियों की सहायता के लिए मेट्रो कर्मचारी मशीनों के पास मौजूद रहेंगे ताकि पहली बार टिकट लेने वाले लोगों को प्रक्रिया समझने में परेशानी न हो। ये मशीनें रेलवे स्टेशनों पर इस्तेमाल होने वाली टिकट वेंडिंग मशीनों की तरह काम करेंगी।

    नई टिकट व्यवस्था में दिव्यांग यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। मशीनों में दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल लिपि का प्रावधान किया गया है। इससे मेट्रो सेवाओं को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने में मदद मिलेगी। मेट्रो प्रबंधन का प्रयास है कि तकनीक के इस्तेमाल से अलग अलग जरूरतों वाले यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

    अब भोपाल और इंदौर मेट्रो में टिकट लेने के लिए यात्रियों के पास तीन विकल्प उपलब्ध होंगे। पहला विकल्प MPMRCL मोबाइल ऐप है जिसके माध्यम से यात्री डिजिटल टिकट बुक कर सकते हैं। दूसरा विकल्प मेट्रो स्टेशन पर मौजूद टिकट काउंटर है। तीसरे विकल्प के रूप में अब टिकट वेंडिंग मशीन से सीधे टिकट प्राप्त किया जा सकेगा। डिजिटल भुगतान करने वाले यात्री UPI और QR कोड जैसे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ई वॉलेट के माध्यम से भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
    अब भोपाल और इंदौर मेट्रो में टिकट लेने के लिए यात्रियों के पास तीन विकल्प उपलब्ध होंगे। पहला विकल्प MPMRCL मोबाइल ऐप है जिसके माध्यम से यात्री डिजिटल टिकट बुक कर सकते हैं। दूसरा विकल्प मेट्रो स्टेशन पर मौजूद टिकट काउंटर है। तीसरे विकल्प के रूप में अब टिकट वेंडिंग मशीन से सीधे टिकट प्राप्त किया जा सकेगा। डिजिटल भुगतान करने वाले यात्री UPI और QR कोड जैसे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ई वॉलेट के माध्यम से भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

    भोपाल में फिलहाल ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सुभाष नगर से एम्स के बीच मेट्रो सेवा संचालित हो रही है। वहीं ऑरेंज लाइन के दूसरे चरण में सुभाष नगर से करोंद तक निर्माण कार्य जारी है। इसके अलावा ब्लू लाइन पर भदभदा से रत्नागिरी के बीच भी मेट्रो परियोजना का काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार होने की उम्मीद है।

    मेट्रो यात्रियों को टिकट पर विशेष छूट का लाभ भी दिया जा रहा है। 11 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू प्रमोशनल डिस्काउंट व्यवस्था के तहत सिंगल जर्नी टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जा रही है। रिटर्न जर्नी टिकट पर कुल 30 प्रतिशत और ग्रुप टिकट पर कुल 35 प्रतिशत छूट का लाभ मिल रहा है। ग्रुप टिकट की सुविधा को भी आसान बनाया गया है और अब दो यात्री मिलकर इसका लाभ ले सकते हैं।

    नई टिकट वेंडिंग मशीनों की शुरुआत से भोपाल और इंदौर में मेट्रो यात्रा पहले से अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई है। हालांकि मेट्रो में यात्रियों की संख्या बढ़ाना प्रबंधन के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में आसान टिकट व्यवस्था और आकर्षक छूट यात्रियों को मेट्रो की ओर आकर्षित करने में कितनी सफल होती है यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

  • MP: भारी घाटे में चल रही भोपाल मेट्रो…. जितनी महीने की कमाई, उतना एक दिन का खर्च!

    MP: भारी घाटे में चल रही भोपाल मेट्रो…. जितनी महीने की कमाई, उतना एक दिन का खर्च!


    भोपाल।
    राजधानी भोपाल (Bhopal) में मेट्रो (Metro) की चमक तो दिखाई दे रही है, लेकिन यात्रियों की संख्या और कमाई के आंकड़े इसकी रफ्तार पर सवाल खड़े कर रहे हैं. आधुनिक सफर का सपना लेकर शुरू हुई मेट्रो फिलहाल सीमित यात्रियों के सहारे दौड़ रही है. हर दिन करीब 5 लाख रुपये के संचालन खर्च के मुकाबले पूरे महीने में टिकटों से महज 4 से 5 लाख रुपये की आय हो रही है. यानी एक दिन के संचालन पर जितनी रकम खर्च हो रही है, उतनी कमाई जुटाने में मेट्रो को पूरा महीना लग रहा है. हालांकि, मेट्रो प्रबंधन (Metro Management) का कहना है कि इसे केवल मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था (Public Transport System) का अहम हिस्सा है।


    सात किलोमीटर के ट्रैक पर सवारी का इंतजार

    भोपाल में एम्स से सुभाष नगर के बीच करीब सात किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर दिसंबर 2025 में मेट्रो सेवा शुरू हुई थी. शुरुआत में उम्मीद जताई गई थी कि मेट्रो शहर के यातायात को नई दिशा देगी और लोगों को जाम से राहत दिलाने में मदद करेगी. लेकिन फिलहाल आठ स्टेशनों तक सीमित इस रूट पर यात्रियों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सकी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महीनेभर में करीब 13 से 15 हजार यात्री मेट्रो से सफर कर रहे हैं. सीमित नेटवर्क के चलते मेट्रो अभी शहर के बड़े हिस्से को सीधे जोड़ने में सक्षम नहीं हैं, जिसका असर इसकी उपयोगिता और कमाई दोनों पर पड़ रहा है।


    एक दिन का खर्च पांच लाख, महीने की कमाई भी इतनी नहीं

    मेट्रो के संचालन पर प्रतिदिन करीब पांच लाख रुपये खर्च हो रहे हैं. इस हिसाब से मासिक संचालन खर्च लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंचता है. वहीं, यात्रियों से मिलने वाला किराया पूरे महीने में केवल 4 से 5 लाख रुपये के आसपास है. इन आंकड़ों के बीच का अंतर मेट्रो के सामने खड़ी आर्थिक चुनौती को साफ तौर पर दिखाता है. हालांकि, यह गणना संचालन खर्च और टिकटों से होने वाली आय पर आधारित है. मेट्रो को विज्ञापन और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों से मिलने वाला राजस्व अलग है, इसलिए कुल आय का आकलन करने के लिए सभी स्रोतों के आंकड़े जरूरी हैं।


    जनसंपर्क अधिकारी धीरज शुक्ला क्या बोले ?

    मेट्रो के खर्च और कमाई के बीच बड़े अंतर पर मेट्रो के जनसंपर्क अधिकारी धीरज शुक्ला का कहना है कि भोपाल मेट्रो लगातार यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है. उनके मुताबिक मेट्रो का एक दिन का संचालन खर्च करीब पांच लाख रुपये है, जबकि महीनेभर में 13 से 15 हजार यात्री सफर करते हैं. इन यात्रियों से लगभग 4 से 5 लाख रुपये की आय होती है।

    धीरज शुक्ला का कहना है कि मेट्रो सार्वजनिक परिवहन का साधन है, इसलिए इसे केवल मौजूदा कमाई के आधार पर नहीं देखा जा सकता. फिलहाल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. जब शहर के अलग-अलग हिस्सों तक मेट्रो की कनेक्टिविटी पहुंचेगी, तब यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ आय में भी इजाफा होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि यात्री सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और मेट्रो को ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए उपयोगी बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं।


    जन्मदिन, प्री-वेडिंग शूट और विज्ञापन से कमाई की कोशिश

    टिकटों से सीमित आय के बीच मेट्रो प्रबंधन गैर-किराया राजस्व बढ़ाने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है. इसके तहत मेट्रो के अंदर जन्मदिन मनाने, किटी पार्टी और प्री-वेडिंग शूट जैसे आयोजनों की सुविधा दी जा रही है. इसके अलावा विज्ञापनों के जरिए भी राजस्व जुटाने की कोशिश की जा रही है. प्रबंधन का मानना है कि ऐसी गतिविधियां मेट्रो की कमाई बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं. हालांकि, इन माध्यमों से अब तक कितनी अतिरिक्त आय हुई है, इसका विस्तृत आंकड़ा सामने आना बाकी है।


    स्टेशन तक पहुंच आसान नहीं, तो यात्री क्यों चुनेंगे मेट्रो?

    मेट्रो में कम यात्रियों की एक बड़ी वजह सीमित रूट के साथ-साथ लास्ट माइल कनेक्टिविटी की चुनौती भी मानी जा रही है. किसी भी मेट्रो सेवा की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि यात्री अपने घर से स्टेशन तक और स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक कितनी आसानी से पहुंच पाते हैं. यदि स्टेशन तक पहुंचने के लिए पर्याप्त फीडर बसें, ई-रिक्शा या दूसरे साधन उपलब्ध नहीं होंगे, तो लोग निजी वाहनों और पारंपरिक सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे सकते हैं।

    इसके अलावा रोजाना कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और दूसरे नियमित यात्रियों के लिए मेट्रो तभी सुविधाजनक विकल्प बनेगी, जब उसका नेटवर्क शहर के प्रमुख व्यावसायिक, शैक्षणिक और रिहायशी इलाकों से बेहतर तरीके से जुड़ेगा।


    विस्तार से उम्मीद, लेकिन फिलहाल घाटे का दबाव

    भोपाल मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार भविष्य में यात्रियों की संख्या बढ़ाने की उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन तब तक संचालन खर्च और सीमित आय के बीच संतुलन बनाना प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती रहेगा. बेहतर कनेक्टिविटी, नियमित यात्रियों के लिए सुविधाजनक योजनाएं, स्टेशनों तक पहुंचने के साधन और विज्ञापन जैसी गतिविधियों से होने वाली आय इस चुनौती को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    फिलहाल भोपाल मेट्रो के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ट्रेनें कितनी रफ्तार से दौड़ रही हैं, बल्कि यह भी है कि उनमें सफर करने वालों की संख्या कब बढ़ेगी. प्रबंधन को उम्मीद है कि पूरे शहर में नेटवर्क फैलने के बाद तस्वीर बदलेगी. लेकिन मौजूदा स्थिति यही बताती है कि मेट्रो को शहर की रोजमर्रा की जरूरत बनाने के लिए अभी यात्रियों का भरोसा जीतना होगा. अब देखना होगा कि विस्तार की योजनाएं कब तक मेट्रो को खाली सीटों से आगे बढ़ाकर आम लोगों की पहली पसंद बना पाती हैं।

  • भोपाल-इंदौर मेट्रो में बचेंगे पैसे, सिंगल टिकट से लेकर ग्रुप टिकट तक पर बड़ी राहत, जानिए कैसे मिलेगा 44% तक का लाभ

    भोपाल-इंदौर मेट्रो में बचेंगे पैसे, सिंगल टिकट से लेकर ग्रुप टिकट तक पर बड़ी राहत, जानिए कैसे मिलेगा 44% तक का लाभ


    भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर में मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। त्योहारों के मौसम में यात्रियों को आकर्षित करने और मेट्रो में सफर को किफायती बनाने के लिए मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने टिकट पर अतिरिक्त छूट देने का फैसला किया है। नई व्यवस्था 11 अक्टूबर 2026 से लागू होगी और इसका लाभ 31 दिसंबर 2026 तक उठाया जा सकेगा। इसके तहत यात्रियों को सिंगल जर्नी टिकट पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी। वहीं रिटर्न टिकट और ग्रुप टिकट पर भी पहले की तुलना में ज्यादा बचत होगी। मेट्रो कॉरपोरेशन के मुताबिक मौजूदा ई-वॉलेट बोनस और नई टिकट छूट को मिलाकर यात्रियों को अधिकतम लगभग 44 प्रतिशत तक का फायदा मिल सकता है।

    नई व्यवस्था के तहत सिंगल जर्नी टिकट यानी एक तरफ की यात्रा के टिकट पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। रिटर्न जर्नी टिकट लेने वाले यात्रियों को कुल 30 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलेगा। पहले इस टिकट पर 5 प्रतिशत की छूट मिलती थी। इसी तरह ग्रुप टिकट पर मिलने वाली छूट को बढ़ाकर कुल 35 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले ग्रुप टिकट पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाती थी। इस बदलाव से रोजाना मेट्रो का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के साथ ही परिवार और दोस्तों के साथ घूमने जाने वालों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

    ग्रुप टिकट की सुविधा में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले इसका लाभ लेने के लिए कम से कम आठ यात्रियों का होना जरूरी था। अब इस संख्या को घटाकर केवल दो यात्री कर दिया गया है। यानी दो लोग भी एक साथ ग्रुप टिकट लेकर छूट का फायदा उठा सकेंगे। इससे परिवार के सदस्यों और दोस्तों के लिए मेट्रो से सफर करना पहले से अधिक किफायती हो सकता है। हालांकि 20 रुपये वाले सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत की छूट लागू नहीं होगी। यात्रियों को टिकट खरीदने से पहले संबंधित नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

    मेट्रो में बचत का एक और तरीका मोबाइल ऐप का ई-वॉलेट है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन पहले से ही रिचार्ज की राशि के आधार पर बोनस दे रहा है। 200 से 499 रुपये तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत बोनस मिलता है। 500 से 999 रुपये तक के रिचार्ज पर 10 प्रतिशत बोनस दिया जाता है। वहीं 1000 से 1499 रुपये तक के रिचार्ज पर 12 प्रतिशत और 1500 से 2000 रुपये तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस राशि मिलती है। नई टिकट छूट के साथ इस बोनस का लाभ लेने पर यात्रियों की बचत और बढ़ सकती है। हालांकि वास्तविक फायदा टिकट के प्रकार और रिचार्ज राशि पर निर्भर करेगा।

    भोपाल और इंदौर मेट्रो में डिजिटल टिकटिंग की सुविधा भी यात्रियों के लिए उपयोगी है। यात्री एमपी मेट्रो मोबाइल ऐप के जरिए टिकट प्राप्त कर सकते हैं और यूपीआई क्यूआर कोड तथा ई-वॉलेट जैसे डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर सकते हैं। इससे टिकट खरीदने की प्रक्रिया आसान होती है और नकद भुगतान की जरूरत भी कम होती है।

    किराये की बात करें तो एक से दो स्टेशन की यात्रा के लिए 20 रुपये तीन से पांच स्टेशन के लिए 30 रुपये और छह से आठ स्टेशन के लिए 40 रुपये किराया निर्धारित है। पूरे रूट पर अधिकतम किराया 80 रुपये तक है। नई छूट लागू होने के बाद यात्रियों को मेट्रो के सफर पर खर्च कम करने का अवसर मिलेगा। त्योहारों के दौरान शुरू की जा रही यह पहल कितने नए यात्रियों को मेट्रो की ओर आकर्षित करती है इस पर भी नजर रहेगी।

  • मेट्रो काम को लेकर विधायक का विरोध, शाही कब्रिस्तान के नीचे रूट पर बोले बिना अनुमति नहीं चलेगा काम

    मेट्रो काम को लेकर विधायक का विरोध, शाही कब्रिस्तान के नीचे रूट पर बोले बिना अनुमति नहीं चलेगा काम


    भोपाल । भोपाल में मेट्रो के फेज 2 के रूट को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार देर रात भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान में मेट्रो की टीम पहुंची और बैरिकेड्स लगाने का काम शुरू किया तो उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील मौके पर पहुंच गए। कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट निकाले जाने को लेकर विधायक ने कड़ी आपत्ति जताई और मेट्रो तथा पुलिस अधिकारियों से काम रोकने को कहा। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से सख्त लहजे में कहा कि बाहर निकलो वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा। विधायक के इस तेवर के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी हलचल देखने को मिली।

    बताया गया कि देर रात विधायक को जानकारी मिली कि मेट्रो कॉरपोरेशन की टीम कब्रिस्तान के पास बैरिकेड्स लगाने के लिए मशीनें और अन्य सामान लेकर पहुंची है। इसके बाद वह समाज के लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। विधायक ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब यह शाही कब्रिस्तान की संपत्ति है तो यहां काम शुरू करने से पहले अनुमति ली गई या नहीं। उन्होंने कहा कि पहले शाही औकाफ से अनुमति ली जानी चाहिए और उसके बाद ही किसी तरह का निर्माण कार्य किया जाना चाहिए।

    विधायक आतिफ अकील ने स्पष्ट कहा कि बिना वैधानिक अनुमति के कब्रिस्तान में किसी भी तरह का काम नहीं होना चाहिए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से मशीनें और सामान हटाने की मांग की। विधायक का कहना है कि इस कब्रिस्तान में उनके पूर्वजों की कब्रें हैं और यहां बड़ी संख्या में कब्रें मौजूद हैं। ऐसे में वह कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो लाइन निकाले जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थान से मेट्रो रूट को हटाकर कोई दूसरा विकल्प तलाशा जाना चाहिए।

    दरअसल भोपाल में मेट्रो के ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। अब फेज 2 में सुभाषनगर से करोंद तक मेट्रो रूट का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पूरे कॉरिडोर की लंबाई करीब 16.74 किलोमीटर बताई गई है। इसमें कुछ हिस्सा एलिवेटेड होगा जबकि पुराने शहर के महत्वपूर्ण हिस्से में मेट्रो को अंडरग्राउंड ले जाने की योजना है।

    फेज 2 के तहत करीब 5.38 किलोमीटर हिस्से में छह एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाने हैं। इनमें पुल बोगदा ऐशबाग सिंधी कॉलोनी डीआईजी बंगला कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस हिस्से के निर्माण पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। वहीं लगभग 3.39 किलोमीटर का हिस्सा अंडरग्राउंड रखा गया है। इस हिस्से में भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल होंगे। अंडरग्राउंड हिस्से के निर्माण पर करीब 890 करोड़ रुपये खर्च होने की योजना है।

    शाही कब्रिस्तान से जुड़े मेट्रो रूट को लेकर मामला पहले से ही विवाद में है। मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में भी इस मुद्दे पर सुनवाई चल रही है और दोनों पक्ष अपना पक्ष रख रहे हैं। ऐसे में विधायक की ताजा आपत्ति ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। विधायक का कहना है कि जब तक संबंधित संस्था से आवश्यक अनुमति नहीं मिलती तब तक कब्रिस्तान में कोई काम नहीं होना चाहिए।

    अब देखना होगा कि मेट्रो परियोजना और कब्रिस्तान से जुड़े पक्ष के बीच यह विवाद किस तरह सुलझता है। एक तरफ भोपाल में मेट्रो के फेज 2 को तेजी से पूरा करने की कोशिश चल रही है तो दूसरी तरफ शाही कब्रिस्तान से जुड़े रूट को लेकर आपत्ति लगातार सामने आ रही है। ऐसे में इस हिस्से में निर्माण कार्य आगे बढ़ाने से पहले अनुमति और रूट को लेकर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • बीच सड़क बेरिकेड्स, दोनों तरफ गड्ढे, रायसेन रोड पर कैसे निकलें वाहन, मेट्रो काम के बीच बढ़ी परेशानी

    बीच सड़क बेरिकेड्स, दोनों तरफ गड्ढे, रायसेन रोड पर कैसे निकलें वाहन, मेट्रो काम के बीच बढ़ी परेशानी


    भोपाल। भोपाल में बारिश और मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते कई इलाकों की सड़कों की हालत खराब हो गई है। रायसेन रोड पर स्थिति ज्यादा परेशानी वाली नजर आ रही है। सुभाषनगर चौराहे से रत्नागिरी तक सड़क जगह जगह से उखड़ गई है। कई हिस्सों में गड्ढे और कीचड़ के कारण वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश रुकने के बाद इन्हीं सड़कों से धूल के गुबार उठ रहे हैं। इस बीच सड़क के बीचोंबीच मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बेरिकेडिंग की गई है जिससे वाहनों के निकलने की जगह और कम हो गई है।

    कॅरियर कॉलेज से रत्नागिरी के बीच कई स्थानों पर सड़क की हालत इतनी खराब है कि वाहन चालकों को संभलकर निकलना पड़ रहा है। रायसेन रोड पर बस और लोडिंग वाहन भी फंसने की स्थिति सामने आ रही है। इससे कई बार यातायात प्रभावित हो जाता है। कांग्रेस नेता अभिनव बारोलिया ने सड़क की बदहाल स्थिति और फंसे वाहनों का वीडियो जारी किया है। वीडियो के जरिए उन्होंने सड़क की स्थिति को लेकर जिम्मेदार विभागों पर सवाल उठाए हैं।

    कांग्रेस नेता के अनुसार रायसेन रोड पर हर दिन करीब 15 से 20 वाहन फंस जाते हैं। इनमें लोडिंग वाहनों के पहिए गड्ढों में फंसने के साथ बसों के कारण भी यातायात प्रभावित होने की बात कही गई है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का असर आम वाहन चालकों के साथ आसपास के रहवासियों और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ रहा है।

    रायसेन रोड पर मेट्रो की ब्लू लाइन का काम भी चल रहा है। भदभदा से रत्नागिरी तक प्रस्तावित ब्लू लाइन का रूट करीब 14.16 किलोमीटर लंबा बताया गया है। भदभदा से जवाहर चौक के बीच मेट्रो निर्माण कार्य के चलते सड़क के बीच में बेरिकेडिंग की गई है। निर्माण कार्य के लिए की गई खुदाई और लगातार बारिश के कारण सड़क के दोनों ओर की सतह कई जगह खराब हो गई है। संकरी सड़क और जर्जर हिस्सों के कारण वाहन चालकों की परेशानी और बढ़ गई है।

    भोपाल के दूसरे इलाकों में भी बारिश के बाद सड़कों की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। करोंद एमपी नगर पॉलीटेक्निक चौराहा अवधपुरी रोहित नगर और अयोध्या बायपास सहित कई क्षेत्रों में सड़कें जगह जगह से उखड़ने की बात सामने आई है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी और कीचड़ भरने से वाहन चालकों को परेशानी होती है जबकि मौसम साफ होने पर धूल की समस्या बढ़ जाती है।

    कोहेफिजा क्षेत्र में भी सड़क की खराब हालत के कारण हादसे की स्थिति सामने आई है। सड़क से उखड़ी गिट्टी के कारण एक टू व्हीलर फिसल गई और एक बुजुर्ग गिरकर घायल हो गए। इस घटना ने सड़क की सतह और यातायात सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के बीच सड़क की मरम्मत और यातायात व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    रायसेन रोड पर मेट्रो निर्माण और जर्जर सड़क के बीच लोगों को रोजाना आवागमन करना पड़ रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि निर्माण क्षेत्र में सुरक्षित आवाजाही के लिए पर्याप्त जगह और सड़क की स्थिति को बेहतर करने के इंतजाम किए जाएं ताकि मेट्रो प्रोजेक्ट का काम भी चलता रहे और आम लोगों को आवागमन में कम से कम परेशानी हो।

  • भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव, सुबह 11:30 से शुरू होगी सेवा; छुट्टियों में रात 8:30 बजे तक दौड़ेगी ट्रेन

    भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव, सुबह 11:30 से शुरू होगी सेवा; छुट्टियों में रात 8:30 बजे तक दौड़ेगी ट्रेन


    भोपाल । भोपाल मेट्रो अब नई समय सारणी के साथ यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ गई है। सोमवार से भोपाल मेट्रो का नया शेड्यूल लागू हो गया है। इसके तहत यात्रियों को सप्ताह के सभी दिनों में हर 15 मिनट के अंतराल पर मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। नई व्यवस्था के मुताबिक सोमवार से शनिवार तक मेट्रो कुल 62 फेरे लगाएगी जबकि रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में ट्रेनों के 70 फेरे संचालित किए जाएंगे। मेट्रो के नए समय को इस तरह तय किया गया है कि यात्रियों को पूरे परिचालन समय के दौरान नियमित अंतराल पर ट्रेन मिल सके।

    नए शेड्यूल के अनुसार सुभाष नगर स्टेशन से पहली मेट्रो सुबह 11:30 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन एम्स की ओर जाएगी। वहीं एम्स स्टेशन से पहली मेट्रो दोपहर 12 बजे सुभाष नगर के लिए रवाना होगी। सोमवार से शनिवार तक मेट्रो सेवा सुबह 11:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक उपलब्ध रहेगी। सुभाष नगर स्टेशन से इन दिनों आखिरी मेट्रो शाम 7 बजे रवाना होगी जबकि एम्स स्टेशन से अंतिम ट्रेन शाम 7:30 बजे चलेगी। इस अवधि में दोनों दिशाओं को मिलाकर कुल 62 फेरे लगाए जाएंगे।

    रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में यात्रियों को मेट्रो की सुविधा एक घंटे ज्यादा समय तक मिलेगी। इन दिनों सेवा सुबह 11:30 बजे शुरू होकर रात 8:30 बजे तक जारी रहेगी। सुभाष नगर से आखिरी मेट्रो रात 8 बजे रवाना होगी जबकि एम्स स्टेशन से अंतिम मेट्रो रात 8:30 बजे चलेगी। रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर दोनों दिशाओं में कुल 70 ट्रिप संचालित किए जाएंगे। इस तरह छुट्टी वाले दिनों में मेट्रो से सफर करने वाले लोगों को अतिरिक्त समय और ज्यादा ट्रिप का फायदा मिलेगा।

    भोपाल मेट्रो का संचालन अब दोनों ट्रैक पर किया जा रहा है। नई समय सारणी में ट्रेनों के बीच 15 मिनट का समान अंतराल रखा गया है। इससे यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खासकर नियमित रूप से मेट्रो का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव काफी उपयोगी माना जा रहा है। यात्री अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार आसानी से बना सकेंगे।

    मेट्रो प्रबंधन ने यात्रियों के लिए स्टेशन पहुंचने और सुरक्षा जांच से जुड़ी व्यवस्था को भी स्पष्ट किया है। पहली मेट्रो के निर्धारित प्रस्थान समय से करीब 15 मिनट पहले यात्रियों के लिए स्टेशन खोले जाएंगे। इससे यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश करने सुरक्षा जांच पूरी करने और प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। टिकटिंग की सुविधा भी निर्धारित प्रवेश और निकास द्वार पर उपलब्ध रहेगी।

    सुभाष नगर स्टेशन पर गेट नंबर 3 केंद्रीय विद्यालय स्टेशन पर गेट नंबर 3 बोर्ड ऑफिस स्टेशन पर गेट नंबर 3 एमपी नगर स्टेशन पर गेट नंबर 3 रानी कमलापति स्टेशन पर गेट नंबर 2 डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट नंबर 3 अलकापुरी स्टेशन पर गेट नंबर 3 और एम्स स्टेशन पर गेट नंबर 1 पर मैनुअल टिकटिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी। नई टाइमिंग और नियमित 15 मिनट के अंतराल से भोपाल मेट्रो सेवा के इस्तेमाल को आसान बनाने की कोशिश की गई है। अब यात्रियों को सप्ताह के अधिकांश दिनों में तय अंतराल पर ट्रेन मिलेगी जबकि रविवार और सार्वजनिक अवकाश पर अतिरिक्त परिचालन समय का लाभ भी मिलेगा।

  • भोपाल मेट्रो का अंडरग्राउंड मिशन तेज, दो TBM एक साथ कर रहीं खुदाई; 3.39 किमी सुरंग से जुड़ेंगे रेलवे स्टेशन और नादरा

    भोपाल मेट्रो का अंडरग्राउंड मिशन तेज, दो TBM एक साथ कर रहीं खुदाई; 3.39 किमी सुरंग से जुड़ेंगे रेलवे स्टेशन और नादरा


    भोपाल । भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना का अंडरग्राउंड काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। शहर के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों में सड़क यातायात का दबाव कम करने के लिए जमीन के करीब 60 फीट नीचे सुरंग तैयार की जा रही है। इस काम में लगी दोनों टनल बोरिंग मशीन यानी TBM एक साथ खुदाई कर रही हैं और अब तक करीब 260 मीटर सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है। खास बात यह है कि यह भूमिगत कॉरिडोर भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे बेहद व्यस्त इलाकों के नीचे से होकर गुजरेगा। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक अंडरग्राउंड रूट का पूरा काम अगले डेढ़ से दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

    भूमिगत सुरंग का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में दोनों TBM भोपाल रेलवे स्टेशन से ऐशबाग की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पहली टनल बोरिंग मशीन करीब 160 मीटर और दूसरी लगभग 100 मीटर सुरंग तैयार कर चुकी है। इस तरह दोनों मशीनें मिलकर करीब 260 मीटर भूमिगत रास्ता बना चुकी हैं। खुदाई के साथ ही सुरंग के भीतर प्री-कास्ट आरसीसी रिंग भी लगाई जा रही हैं। ये रिंग सुरंग की दीवारों को मजबूती देती हैं और जमीन के दबाव के बीच पूरे स्ट्रक्चर को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    भोपाल जैसे घनी आबादी वाले शहर में जमीन के नीचे इतनी बड़ी परियोजना को सुरक्षित तरीके से पूरा करना बड़ी चुनौती है। इसी वजह से निर्माण के दौरान आसपास के भवनों और दूसरी संरचनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। सुरंग के ऊपर मौजूद इमारतों में कंपन और जमीन के संभावित धंसाव यानी सेटलमेंट पर नजर रखने के लिए आधुनिक इंस्ट्रूमेंटेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इससे जमीन या किसी भवन में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।

    सुरंग के अंदर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। यहां फ्रेश एयर वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे भूमिगत हिस्से में पर्याप्त हवा पहुंचती रहे। इसके अलावा गैस मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए सुरंग के भीतर गैस की लगातार जांच की जा रही है। निर्माण स्थल पर 24 घंटे सुरक्षा निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

    भोपाल मेट्रो के इस प्रोजेक्ट की एक खास बात यह भी है कि मध्यप्रदेश में पहली बार इस तरह दो TBM को एक साथ भूमिगत सुरंग निर्माण में लगाया गया है। यह सुरंग ऐशबाग से सिंधी कॉलोनी के बीच तैयार की जा रही है और आगे भोपाल रेलवे स्टेशन तथा नादरा बस स्टैंड जैसे प्रमुख परिवहन केंद्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगी। TBM तकनीक को खासतौर पर ऐसे घने शहरी इलाकों के नीचे काम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जहां ऊपर सड़क, इमारतें और लगातार चलता यातायात मौजूद रहता है।

    इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर में भोपाल और नादरा नाम से दो भूमिगत स्टेशन बनाए जा रहे हैं। दोनों स्टेशनों की लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। TBM से बनने वाली मुख्य सुरंग की लंबाई करीब 3.39 किलोमीटर रहेगी। नादरा स्टेशन के आगे बड़ा बाग के पास करीब 143 मीटर लंबे स्लोप के जरिए मेट्रो दोबारा जमीन के ऊपर आएगी।

    अंडरग्राउंड स्टेशनों को यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर तीन प्रमुख स्तरों में तैयार किया जाएगा। ग्राउंड लेवल पर मुख्य प्रवेश और निकास, बस व वाहन ड्रॉप-ऑफ जोन, टिकट काउंटर और कमर्शियल दुकानें होंगी। कॉनकोर्स लेवल पर टिकटिंग व्यवस्था, ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन गेट, ग्राहक सहायता केंद्र, एस्केलेटर, लिफ्ट और प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं रहेंगी। सबसे नीचे प्लेटफॉर्म लेवल पर मेट्रो ट्रेन के प्लेटफॉर्म, डिजिटल डिस्प्ले, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा तथा आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    भोपाल में एम्स से करोंद चौराहे तक ऑरेंज लाइन का काम भी जारी है। सुभाषनगर से एम्स के बीच करीब 6 किलोमीटर लंबा प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले से मेट्रो संचालन के लिए तैयार है। अब इसी लाइन के दूसरे चरण में सुभाषनगर से करोंद के बीच काम आगे बढ़ रहा है। इस हिस्से में मेट्रो का एक महत्वपूर्ण भाग भूमिगत होगा। परियोजना को गति देने में भोपाल नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, रेलवे, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और शहरवासियों का सहयोग मिल रहा है। अंडरग्राउंड काम पूरा होने के बाद भोपाल के व्यस्ततम हिस्सों में सड़क के ऊपर यातायात के साथ जमीन के नीचे मेट्रो का नया विकल्प उपलब्ध होगा।

  • भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव: आज से हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन, दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी; 50 ट्रिप का शेड्यूल लागू

    भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव: आज से हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन, दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी; 50 ट्रिप का शेड्यूल लागू


    भोपाल । भोपाल मेट्रो ने शहर के यात्रियों को बड़ी सौगात दी है। शनिवार, 25 जुलाई से राजधानी में मेट्रो सेवा और अधिक तेज, सुविधाजनक और आधुनिक हो गई है। अब सुभाषनगर से एम्स स्टेशन के बीच मेट्रो दोनों ट्रैक पर संचालित होगी और पीक ऑवर्स में यात्रियों को हर 15 मिनट में ट्रेन उपलब्ध होगी। पहले जहां मेट्रो सिंगल ट्रैक पर चलने के कारण यात्रियों को करीब 75 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब यह अंतर काफी कम हो जाएगा।

    मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MPMRCL) के अनुसार, नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद प्रतिदिन कुल 50 ट्रिप संचालित की जाएंगी। सुभाषनगर स्टेशन से पहली मेट्रो सुबह 9 बजे रवाना होगी। व्यस्त समय में हर 15 मिनट और सामान्य समय में हर 30 मिनट के अंतराल पर ट्रेन उपलब्ध रहेगी। इससे ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

    भोपाल मेट्रो की शुरुआत 20 दिसंबर 2025 को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की थी। अगले दिन से आम यात्रियों के लिए सेवा शुरू हुई थी, लेकिन अब तक मेट्रो केवल एक ट्रैक पर संचालित हो रही थी। करीब सात महीने बाद आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के चालू होने से पहली बार दोनों ट्रैक पर नियमित संचालन संभव हो पाया है।

    इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले जून महीने में कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने दो दिन तक निरीक्षण किया था। आवश्यक सुरक्षा परीक्षण पूरे होने और मंजूरी मिलने के बाद शनिवार से नए सिस्टम के अनुसार संचालन शुरू कर दिया गया है।

    यात्रियों को आकर्षित करने के लिए मेट्रो प्रबंधन ने विशेष प्रमोशनल डिस्काउंट भी लागू किया है। रिटर्न जर्नी टिकट पर 5 प्रतिशत तथा ग्रुप टिकट पर 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। वहीं, MPMRCL मोबाइल ऐप के जरिए ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर 8 से 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त बोनस राशि दी जाएगी। 200 से 499 रुपए तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, 500 से 999 रुपए पर 10 प्रतिशत, 1000 से 1499 रुपए पर 12 प्रतिशत और 1500 से 2000 रुपए तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस का लाभ मिलेगा।

    यात्रियों की सुविधा के लिए सभी स्टेशन पहली ट्रेन के निर्धारित समय से 15 मिनट पहले खोल दिए जाएंगे, ताकि सुरक्षा जांच और टिकट लेने में किसी तरह की परेशानी न हो। प्रत्येक स्टेशन के निर्धारित प्रवेश द्वार पर मैनुअल टिकटिंग की व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी।

    करीब 800 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया यह अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक पर आधारित है। यह सिस्टम ट्रेनों की गति नियंत्रित करने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने, दोनों ट्रैक पर संचालन और भविष्य में मेट्रो की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। माना जा रहा है कि इस नई व्यवस्था के बाद भोपाल मेट्रो का संचालन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक हो जाएगा।

  • भोपाल मेट्रो पर बढ़ा खर्च, कैबिनेट ने दी 10,033 करोड़ की संशोधित मंजूरी; मंडी शुल्क में भी बड़ा बदलाव

    भोपाल मेट्रो पर बढ़ा खर्च, कैबिनेट ने दी 10,033 करोड़ की संशोधित मंजूरी; मंडी शुल्क में भी बड़ा बदलाव

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की महत्वाकांक्षी भोपाल मेट्रो रेल परियोजना को लेकर बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी प्रदान कर दी गई। लागत में करीब 4 हजार करोड़ रुपए की वृद्धि के बाद अब भोपाल मेट्रो परियोजना की कुल लागत 10,033 करोड़ रुपए पहुंच गई है। इसके साथ ही सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेते हुए मंडी शुल्क व्यवस्था में भी बदलाव किया है।

    कैबिनेट बैठक के बाद एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि भोपाल मेट्रो परियोजना का प्रारंभिक स्वरूप वर्ष 2016 में तैयार किया गया था। उस समय इसकी अनुमानित लागत लगभग 6,241 करोड़ रुपए आंकी गई थी। हालांकि समय के साथ निर्माण सामग्री की कीमतों, तकनीकी आवश्यकताओं और अन्य कारणों से परियोजना की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब संशोधित लागत 10,033 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है, जिसे कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।

    सरकार का मानना है कि संशोधित बजट से परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आएगी और आगामी दो वर्षों में मेट्रो परियोजना का स्वरूप अधिक स्पष्ट रूप से सामने दिखाई देगा। भोपाल मेट्रो को राजधानी के सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने वाली प्रमुख परियोजना माना जा रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    बैठक में किसानों से जुड़ा एक अहम निर्णय भी लिया गया। सरकार ने कपास उत्पादक किसानों को राहत देते हुए कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को घटाकर 0.50 प्रतिशत कर दिया है। मंत्री काश्यप ने बताया कि पहले अधिक मंडी शुल्क के कारण किसानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था। महाराष्ट्र में भी कपास पर इसी दर से शुल्क लिया जाता है, इसलिए प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

    इसके विपरीत सरकार ने अन्य कृषि उपज पर मंडी शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। कुछ वर्ष पहले इसे डेढ़ प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत किया गया था, लेकिन अब फिर से इसे बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का अनुमान है कि इस निर्णय से राज्य को लगभग 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। यह राशि सड़क विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विस्तार और गौ-संवर्धन जैसी योजनाओं पर खर्च की जाएगी।

    कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में भी पहल की गई है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यशालाओं का आयोजन कर किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों और उसके लाभों के बारे में जागरूक किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे कृषि लागत में कमी आएगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन के 12 वर्ष पूर्ण होने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे देश के विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए 5 जून से 21 जून तक प्रदेशभर में जनकल्याण और विकास कार्यों से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी दी।

    इसके अलावा राज्य के लगभग एक लाख संविदा कर्मचारी-अधिकारियों को 4.5 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि दिए जाने के फैसले का भी स्वागत किया गया। कुल मिलाकर कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों को राज्य के बुनियादी ढांचे, कृषि क्षेत्र और कर्मचारी हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।