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  • भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब

    भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब


    भोपाल । भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में ऑडिट आपत्तियों के बावजूद भुगतान किए जाने का मुद्दा गरमा गया। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने वित्तीय मामलों पर सवाल उठाते हुए वर्ष 2024-25 और 2026-27 की ऑडिट आपत्तियों के बावजूद किए गए भुगतानों का हिसाब मांगा। इस पर मेयर इन काउंसिल यानी एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने जवाब देते हुए कहा कि भुगतान नियमानुसार किए गए हैं और कोई दस्तावेज नहीं छिपाया गया है। सवाल-जवाब के दौरान दोनों के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई। बैठक में बजट और विकास कार्यों से जुड़े कई प्रस्ताव चर्चा के लिए रखे जाने हैं लेकिन शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों जैसे जनहित के मुद्दे एजेंडे में शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने नाराजगी जताई।

    नगर निगम परिषद का सम्मेलन आईएसबीटी स्थित मीटिंग हॉल में शुरू हुआ। बैठक के प्रारंभ में परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने सरकार द्वारा नियुक्त 12 एल्डरमैन और नए निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार का परिचय कराया। अहिरवार ने तीन दिन पहले ही पदभार संभाला है। बैठक में महापौर मालती राय भी मौजूद रहीं। कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने छुट्टी के दिन परिषद का सम्मेलन बुलाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने निगम एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि छुट्टी के दिन सदन का संचालन नहीं किया जा सकता। इस पर अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने उन्हें समझाइश दी जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।

    प्रश्नकाल के दौरान ऑडिट आपत्तियों से जुड़े भुगतानों का मामला उठा। नेता प्रतिपक्ष ने संबंधित वित्तीय मामलों पर सवाल करते हुए जवाब मांगा तो एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि सभी भुगतान नियमों के अनुसार किए गए हैं और किसी तरह की जानकारी छिपाई नहीं गई है। इसी दौरान वर्ष 2026-27 के प्रावधानिक बजट में प्रस्तावित राशि से तैयार योजना के आय-व्यय पर भी सवाल किया गया। शुक्ला ने प्रश्न में बताई गई 108 करोड़ रुपये की राशि पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नगर निगम का प्रावधानिक बजट 3938.45 करोड़ रुपये का है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल हाउसिंग फॉर ऑल योजना का बजट ही लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के बीच है। इसके बाद उन्होंने बजट से संबंधित जानकारी देना शुरू किया।

    बैठक के एजेंडे में नगर निगम के नए मुख्यालय के सर्विस ब्लॉक को 10 साल के लिए देने और इसके बाद अगले 10 साल के लिए नवीनीकरण से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा गर्ल्स कॉलेज के पास स्थित सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर के संचालन और अमृत 2.0 योजना के लिए 493.49 करोड़ रुपये का ऋण लेने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग के हॉल को किराए पर देने का प्रस्ताव भी परिषद के सामने रखा गया है। इन प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान पार्षदों की ओर से सवाल उठाए जाने की संभावना है।

    दूसरी ओर विपक्ष ने शहर की बदहाल सड़कों और बारिश के बाद खराब हुई अंदरूनी सड़कों का मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं होने पर नाराजगी जताई। विपक्ष का कहना है कि सड़कें और गड्ढे आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़े मुद्दे हैं और इन पर परिषद में चर्चा होनी चाहिए। पार्षदों की ओर से शहर में वैध और अवैध होर्डिंग्स सहित अन्य नागरिक समस्याओं पर भी सवाल उठाए जाने की संभावना है। ऐसे में बैठक में वित्तीय प्रस्तावों के साथ शहर की बुनियादी सुविधाओं और जनता से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच

    भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि दुकान में जल रही भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी। इसके बाद आग की लपटें तेजी से फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। इस हादसे में कई दुकानों और एक दर्जन से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद करोड़ों रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। अब पुलिस के साथ नगर निगम भी बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती कर रहा है।

    जांच के मुताबिक बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में भट्टी जल रही थी। उसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैलती चली गईं। देखते ही देखते आग ने आसपास की चार अन्य दुकानों को भी प्रभावित किया। इनमें आम्रपाली रेस्टोरेंट विजय स्टोर एक कैफे और मोबाइल की दुकान शामिल थीं। हादसे के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक आग की शुरुआत भट्टी के पास रखे कपड़े से हुई थी।

    दूसरी ओर नगर निगम यह भी जांच कर रहा है कि संबंधित दुकान में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं। फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच के बाद इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यह घटना एक बार फिर बाजारों में अग्नि सुरक्षा और दुकानों के आसपास रखे सामान से पैदा होने वाले खतरे को लेकर सवाल खड़े करती है।

    आग लगने के दौरान दमकल वाहनों को बाजार में आगे बढ़ने में परेशानी हुई थी। दुकानों के सामने रखे सामान और रेहड़ियों के कारण रास्ता बाधित होने की बात सामने आई थी। इसी के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई और दो दमकल वाहनों को बाजार में चलाकर रास्तों की स्थिति देखी गई। जहां दमकलों के आगे बढ़ने में बाधा आई वहां निगम के अमले ने सामान जब्त किया।

    नगर निगम अब रेहड़ी संचालकों को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग की जा रही है। दुकानदारों को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित सीमा से आगे सामान रखने पर कार्रवाई होगी।

    इस घटना के बाद बाजार में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर व्यापक सवाल भी उठ रहे हैं। हादसे वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर दो अन्य छोले-भटूरे की दुकानें संचालित हो रही हैं। आसपास नमकीन की दुकानें भी हैं जहां भट्टियां जलती हैं। ऐसे में सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है।

    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय रही है। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसकी प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे थे। जुमेराती इब्राहिमपुरा नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत अन्य बाजारों में भी सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच की जरूरत है।

    बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 17 दिसंबर 2017 को लगी आग में 100 से ज्यादा कपड़ा दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। इसके बाद फायर सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए थे लेकिन उनके रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। न्यू मार्केट की घटना ने साफ कर दिया है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है। समय पर जांच नियमित रखरखाव और दमकल वाहनों के लिए रास्ते खुले रखना भी उतना ही जरूरी है।


  • जिस नक्शे पर निगम ने दी थी बिल्डिंग परमिशन उसी के खिलाफ अब कार्रवाई बावड़ियाकलां के 22 मकान अवैध घोषित

    जिस नक्शे पर निगम ने दी थी बिल्डिंग परमिशन उसी के खिलाफ अब कार्रवाई बावड़ियाकलां के 22 मकान अवैध घोषित


    भोपाल। भोपाल के बावड़ियाकलां स्थित शुभालय बिहार में 22 मकानों को लेकर नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित की जमीन पर टीएंडसीपी से स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाए गए इन निर्माणों को नगर निगम ने अवैध घोषित करते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए हैं। निगम ने 17 मकान मालिकों को 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए हैं जबकि पांच अधूरे मकानों का निर्माण तत्काल रोकने को कहा गया है। इस कार्रवाई के बाद अब इन मकानों में रहने वाले और निर्माण करा रहे लोगों के सामने अपने निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

    इस मामले की खास बात यह है कि जिन मकानों को अब नगर निगम अवैध निर्माण बता रहा है उनमें से बिल्डिंग परमिशन पहले नगर निगम की ही बिल्डिंग परमिशन शाखा की ओर से जारी की गई थी। ऐसे में निगम की मौजूदा कार्रवाई और पहले जारी की गई अनुमतियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह पूरा मामला हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका के बाद आगे बढ़ा है। उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को नगर निगम को पत्र भेजकर संबंधित निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था।

    इसके बाद नगर निगम ने पहले 17 मकानों को नोटिस जारी किए और अब बाकी पांच अधूरे मकानों को भी कार्रवाई के दायरे में ले लिया है। इस तरह शुभालय बिहार में कुल 22 निर्माणों को लेकर निगम ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। 17 मकानों के मालिकों को 15 दिन का समय दिया गया है ताकि वे कथित अवैध हिस्से को स्वयं हटा सकें। वहीं जिन पांच मकानों का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है वहां आगे किसी भी तरह का निर्माण करने पर रोक लगा दी गई है।

    मामले के याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित के अनुसार यह विवाद केवल 22 मकानों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे जमीन और प्लॉट की बिक्री से जुड़ा बड़ा मामला है। उनका आरोप है कि संस्था के 44 संस्थापक सदस्यों की करीब पांच एकड़ जमीन पर भू माफिया ने 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेच दिए। याचिकाकर्ता के मुताबिक इन प्लॉटों को खरीदने वाले लोग संस्था के सदस्य नहीं थे और उन्होंने संस्था को राशि भी नहीं दी। दूसरी ओर संस्था के संस्थापक सदस्यों को उनकी जमीन का हिस्सा नहीं मिल पाया।

    मामले में सहकारिता विभाग की जांच भी हुई है। विभाग की फरवरी 2026 की जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों को दरकिनार कर बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां की गईं। जांच में इनमें से 32 रजिस्ट्रियों को अवैध बताया गया। इसके अलावा 38 रजिस्ट्रियों से संबंधित करीब 18 करोड़ 74 लाख रुपए की राशि संस्था के खाते में जमा नहीं होने की बात भी सामने आई।

    ऑपरेटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेज और हैंडराइटिंग में हेरफेर के जरिए वास्तविक सदस्यों के अधिकार प्रभावित किए जाने का उल्लेख किया गया है। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल से जुड़ी बताई गई हैं। सहकारिता विभाग ने इन रजिस्ट्रियों को शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट में मामला भी दायर किया है। अब नगर निगम की ताजा कार्रवाई के बाद बावड़ियाकलां के इन 22 मकानों का मामला एक बार फिर चर्चा में है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

  • आवासीय इलाकों में चल रहे कारोबार पर आज बड़ा फैसला संभव 8084 प्रतिष्ठानों को मिल चुका है नोटिस

    आवासीय इलाकों में चल रहे कारोबार पर आज बड़ा फैसला संभव 8084 प्रतिष्ठानों को मिल चुका है नोटिस


    भोपाल। भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। इस मामले में शहर के करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है। इससे पहले 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई कैंसिल हो गई थी। अब मंगलवार को दोपहर में होने वाली सुनवाई पर नगर निगम के साथ रहवासी और प्रभावित कारोबारी पक्षों की भी नजर है। मामले को लेकर नगर निगम और रहवासियों ने अपनी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

    दरअसल 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने रहवासी इलाकों में संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाकर कार्रवाई शुरू की थी। निगम की सूची में करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं। इसके बाद करीब 15 दिनों तक संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस देने की प्रक्रिया चली। इस दौरान 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए। नोटिस के बाद निगम ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए तीन दिनों में 190 प्रतिष्ठानों को बंद भी किया था।

    निगम की इस कार्रवाई के बाद शहर के व्यापारी संगठनों में नाराजगी देखने को मिली। कारोबारियों ने नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। विरोध बढ़ने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी। पिछले करीब 22 दिनों से इस मामले में सीलिंग या बंद करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि आगे नगर निगम को किस तरह की कार्रवाई करनी होगी और प्रभावित प्रतिष्ठानों को लेकर क्या व्यवस्था लागू होगी।

    मामले में रहवासियों की ओर से भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि निगम की ओर से प्रस्तुत की गई कार्रवाई की जानकारी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। उनके मुताबिक कुछ ऐसे प्रतिष्ठान भी हैं जिन्हें सील किए जाने का दावा किया गया था लेकिन बाद में वे दोबारा खुल गए। रहवासी पक्ष ने इस संबंध में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सुप्रीम कोर्ट के सामने रखने की तैयारी की है।

    सोमवार को नगर निगम के अधिकारी दिनभर सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाने वाली रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। अधिकारियों ने अब तक की कार्रवाई और नोटिस से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित किया। दूसरी ओर रहवासी पक्ष भी अपने दस्तावेज तैयार करता रहा। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने से संबंधित फोटो और वीडियो भी अदालत के सामने रखे जा सकते हैं।

    इस पूरे मामले का असर भोपाल के हजारों कारोबारियों और रहवासी इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है। व्यापारियों की नजर इस बात पर है कि अदालत की सुनवाई के बाद कार्रवाई को लेकर क्या दिशा तय होती है जबकि रहवासी पक्ष यह चाहता है कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध में नियमों का पालन सुनिश्चित हो। अब मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के रुख से आगे की कार्रवाई की तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।

  • सीलिंग से सहमा भोपाल का कारोबार अरेरा कॉलोनी में निगम टीम का विरोध 15 से ज्यादा प्रतिष्ठान बंद व्यापारियों ने मास्टर प्लान की मांग उठाई

    सीलिंग से सहमा भोपाल का कारोबार अरेरा कॉलोनी में निगम टीम का विरोध 15 से ज्यादा प्रतिष्ठान बंद व्यापारियों ने मास्टर प्लान की मांग उठाई


    भोपाल । भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने सोमवार सुबह से बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह करीब 9 बजे शुरू हुए अभियान के तहत शहर के अलग अलग इलाकों में दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया। चार घंटे के भीतर 15 से ज्यादा प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के दौरान अरेरा कॉलोनी में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब नगर निगम की टीम आर्य समाज मंदिर के पास कार्रवाई करने पहुंची। दुकानदारों ने निगम की कार्रवाई का विरोध करते हुए सवाल उठाया कि केवल छोटे कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर ही कार्रवाई क्यों की जा रही है जबकि बड़े शॉपिंग मॉल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर समान कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

    अरेरा कॉलोनी में विरोध कर रहे दुकानदारों का कहना था कि एक ही इलाके में कई जगह कमर्शियल गतिविधियां संचालित हो रही हैं लेकिन निगम का अमला चुनिंदा दुकानों को ही निशाना बना रहा है। दुकानदारों के विरोध के बाद निगम की टीम आगे बढ़ गई। इस दौरान निगम अधिकारी पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। कार्रवाई के दौरान कई व्यापारियों ने अपनी परेशानी सामने रखते हुए कहा कि अचानक प्रतिष्ठान बंद होने से उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

    10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि व्यापारियों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि अगर भोपाल का मास्टर प्लान समय पर लागू किया जाता तो आज इस तरह की समस्या सामने नहीं आती। व्यापारियों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द मास्टर प्लान लागू करे या फिर मिक्स्ड लैंड यूज की व्यवस्था को लेकर समाधान निकाले ताकि रहवासी इलाकों में लंबे समय से चल रहे कारोबार को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बन सके।

    व्यापारियों का दावा है कि सीलिंग की कार्रवाई का असर भोपाल के बड़े हिस्से के कारोबार पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से मुख्यमंत्री मंत्री सांसद विधायक महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्या रखी जा चुकी है लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। व्यापारियों के मुताबिक कार्रवाई से कई बाजारों में सन्नाटा छा गया है और छोटे कारोबारियों के सामने भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    नगर निगम की कार्रवाई रचना नगर सर्वधर्म अरेरा कॉलोनी खानूगांव और गौतम नगर तक पहुंची। रचना नगर में जूंबा डांस हाउस को सील किया गया। सर्वधर्म बी सेक्टर में एक होटल को बंद कराया गया। गौतम नगर में एक होटल संचालक ने खुद ही कमर्शियल गतिविधि बंद कर दी। खानूगांव में भी एक भवन में चल रही व्यावसायिक गतिविधि को बंद कराया गया। ई-3 अरेरा कॉलोनी में कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने कुछ और समय देने की मांग की लेकिन निगम अधिकारियों ने कहा कि पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है।

    इस बीच मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले रहवासी विवेक त्रिपाठी ने भी निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बड़े और प्रभावशाली लोगों के प्रतिष्ठानों को छोड़कर छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में रखी जाएगी। दूसरी ओर निगम की कार्रवाई के बाद कई प्रतिष्ठानों पर यह तख्तियां भी लगाई गई हैं कि भवन में व्यवसायिक गतिविधियां बंद हैं। अब इस पूरे मामले में व्यापारियों और नगर निगम के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है और स्थायी समाधान के लिए मास्टर प्लान तथा मिक्स्ड लैंड यूज की मांग फिर तेज हो गई है।

  • भोपाल के कटारा हिल्स में नगर निगम के खिलाफ फूटा गुस्सा! जलभराव और गड्ढों से परेशान लोगों ने फूंका पुतला

    भोपाल के कटारा हिल्स में नगर निगम के खिलाफ फूटा गुस्सा! जलभराव और गड्ढों से परेशान लोगों ने फूंका पुतला


    भोपाल । भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में बारिश के बीच मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर रहवासियों का गुस्सा रविवार को सड़क पर देखने को मिला। अमलतास चौराहे पर बड़ी संख्या में लोगों ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। रहवासियों का आरोप है कि इलाके में जलभराव सड़कों पर गड्ढे गंदगी और बंद स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। बारिश के दौरान हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं जिससे लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनसे नियमित रूप से टैक्स वसूला जा रहा है लेकिन उसके बदले जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। रहवासियों के मुताबिक कटारा हिल्स की मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों के अंदर की सड़कों तक जगह जगह बड़े गड्ढे हैं। बारिश होने के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है और सड़क की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों को भी परेशानी होती है और हादसे का खतरा बना रहता है।

    इलाके के लोगों का कहना है कि रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है क्योंकि कई जगहों पर स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं। अंधेरे और खराब सड़कों के कारण वाहन चालकों को गड्ढे दिखाई नहीं देते। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रहवासियों ने मांग की है कि खराब स्ट्रीट लाइटों को जल्द दुरुस्त कराया जाए और सड़कों की मरम्मत कराकर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता भी लोगों के साथ मौजूद रहे। युवक कांग्रेस के अनिकेत द्विवेदी ने वार्ड 85 के कई इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वार्ड में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी मार्ग तक गड्ढों की वजह से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    रहवासियों ने बताया कि तेज बारिश के दौरान इलाके के कई हिस्सों में पानी जमा हो जाता है। कॉलोनियों के आसपास जलभराव के साथ कीचड़ फैलने से लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं होने का आरोप लगाया गया। लोगों का कहना है कि जल निकासी की व्यवस्था बेहतर नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है और रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित होती है।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा। पुलिस की मौजूदगी में ही प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम का पुतला जलाया। इस दौरान लोगों ने निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि वार्ड की मूलभूत समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा।

    प्रदर्शन में मध्य प्रदेश कांग्रेस झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष निकेश सिंह चौहान भोपाल युवा कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष राहुल मंडलोई रोहित राजोरिया शिवी शर्मा लोकेंद्र शर्मा अनिल मीणा और राजकुमार सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। फिलहाल कटारा हिल्स में रहवासियों के प्रदर्शन ने बारिश के दौरान शहर की जल निकासी सड़क और सफाई व्यवस्था से जुड़े सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बाद व्यापारियों और रहवासी संगठनों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कार्रवाई और सर्वे से परेशान व्यापारियों ने अब विरोध का अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के नेतृत्व में व्यापारी बुधवार सुबह कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर यानी मिंटो हॉल परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रार्थना सभा करेंगे। इस दौरान व्यापारी सामूहिक रूप से रामधुन का गायन करेंगे और कारोबारियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रार्थना करेंगे। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल के नेतृत्व में होने वाली इस सभा को व्यापारियों की ओर से शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।

    दरअसल राजधानी में रहवासी क्षेत्रों में संचालित दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। कई इलाकों में सर्वे के साथ भवनों में किए गए अन्य निर्माण संबंधी उल्लंघनों की भी जांच की जा रही है। निगम की सख्ती के बाद ऐसे व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है जो लंबे समय से रहवासी भवनों में दुकान या अन्य कारोबार संचालित कर रहे हैं। अवधपुरी अयोध्या बायपास गौतम नगर अशोका गार्डन और लालघाटी समेत कई क्षेत्रों में दुकानदारों के बीच नोटिस मिलने के बाद वैकल्पिक कमर्शियल स्थान तलाशने की चर्चा तेज हो गई है।

    व्यापारियों का कहना है कि अचानक सख्ती से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका तर्क है कि यदि शहर का मास्टर प्लान समय पर स्पष्ट तरीके से लागू होता और रहवासी तथा व्यावसायिक क्षेत्रों का पहले से व्यवस्थित निर्धारण किया जाता तो आज ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। वहीं दूसरी ओर रहवासी संगठनों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है और किसी भी स्थिति में रहवासी इलाकों का व्यावसायीकरण नहीं होना चाहिए।

    इसी मुद्दे को लेकर पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन भी तेज हुए हैं। रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने चक्काजाम किया था। इसके बाद बाग सेवनिया अवधपुरी 10 नंबर और आनंद नगर में भी प्रदर्शन हुए। दूसरी ओर रहवासी संघ की ओर से गुलमोहर कॉलोनी में टॉर्च लाइट रैली निकाली गई थी। इससे पहले सात नंबर मार्केट में भी रहवासी संगठनों ने रैली के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

    नगर निगम ने अब मुख्य मार्गों के दोनों ओर के क्षेत्रों के साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे शुरू कर दिया है। नदी और तालाब के किनारे बने भवनों के अलावा ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में निर्माण की भी प्राथमिकता से जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस दिए जाने की तैयारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज होने के संकेत हैं।

    व्यापारियों की प्रार्थना सभा के जरिए अब इस पूरे विवाद का स्थायी समाधान निकालने की मांग सामने रखी जाएगी। सवाल यह है कि प्रशासन व्यापारियों की चिंता और रहवासियों की आपत्तियों के बीच ऐसा रास्ता कैसे निकालेगा जिससे नियमों का पालन भी हो और वर्षों से कारोबार कर रहे लोगों की रोजी-रोटी पर भी अचानक संकट न आए। भोपाल में कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब शहर की बड़ी प्रशासनिक और कारोबारी चुनौती बनता जा रहा है।

  • भोपाल की सड़कों पर जानलेवा गड्ढे और जलभराव से लोग परेशान निगम परिषद में कई मुद्दों पर बात लेकिन सड़कों पर खामोशी

    भोपाल की सड़कों पर जानलेवा गड्ढे और जलभराव से लोग परेशान निगम परिषद में कई मुद्दों पर बात लेकिन सड़कों पर खामोशी


    भोपाल । राजधानी भोपाल में लगातार हो रही बारिश ने शहर की सड़कों की हालत खराब कर दी है। कई इलाकों में सड़कें उखड़ चुकी हैं और जगह जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी इन गड्ढों में भर जाने के कारण वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ गया है। कई जगह सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि जर्जर सड़कों की समस्या लगातार बढ़ रही है लेकिन जिम्मेदार स्तर पर इसका स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा है।

    इसी बीच बुधवार को भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित हुई। बैठक में नगर निगम से जुड़े कई अहम प्रस्तावों और मुद्दों पर पार्षदों तथा निगम प्रशासन के बीच चर्चा हुई। भवनों को किराए पर देने से लेकर फर्नीचर और स्टेशनरी की खरीद तथा मल्टीलेवल पार्किंग के ठेके जैसे विषय बैठक में उठाए गए। निगम परिषद की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ी लेकिन शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों की समस्या चर्चा का हिस्सा नहीं बन सकी।

    बारिश के बाद भोपाल के कई इलाकों में सड़कों की स्थिति लगातार खराब हुई है। कहीं सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है तो कहीं बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी बन चुके हैं। जिन सड़कों पर पहले से छोटे गड्ढे थे वे लगातार बारिश के कारण और गहरे हो गए हैं। पानी भरने के बाद इनकी वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहन अचानक गड्ढे में गिरने पर असंतुलित हो सकते हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति ज्यादा जोखिम भरी हो जाती है।

    शहर के लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में सड़कों की स्थिति हर साल खराब होती है और कई स्थानों पर मरम्मत के बाद भी समस्या दोबारा सामने आ जाती है। नागरिक चाहते हैं कि केवल गड्ढों को मिट्टी या मलबे से भरने के बजाय सड़क की स्थायी मरम्मत की जाए ताकि बारिश के बाद दोबारा वही स्थिति पैदा न हो। कई लोगों का यह भी कहना है कि नगर निगम और संबंधित विभागों को बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत करानी चाहिए।

    नागरिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता उन सड़कों की है जहां दिनभर भारी यातायात रहता है। इन मार्गों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या रास्ता बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं पैदल राहगीरों के लिए जलभराव वाली सड़कें और खुले या गहरे गड्ढे अलग परेशानी पैदा कर रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक में जब कई प्रशासनिक और ठेके से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई तो शहर की जर्जर सड़कों का विषय सामने नहीं आने पर नागरिकों के बीच सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मांग है कि राजधानी की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को भी परिषद की प्राथमिकता में शामिल किया जाए। भोपालवासियों का कहना है कि सड़कों की समस्या सीधे उनकी रोजमर्रा की आवाजाही और सुरक्षा से जुड़ी है इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    फिलहाल बारिश का दौर जारी रहने के कारण सड़कों की स्थिति और खराब होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में शहरवासियों की नजर अब नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर है कि गड्ढों और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कब शुरू होती है और लोगों को इस परेशानी से कब राहत मिलती है।

  • भोपाल में रहवासी इलाकों की दुकानों पर सीलिंग की तैयारी, 8 हजार से ज्यादा नोटिस; व्यापारियों का विरोध तेज

    भोपाल में रहवासी इलाकों की दुकानों पर सीलिंग की तैयारी, 8 हजार से ज्यादा नोटिस; व्यापारियों का विरोध तेज


    भोपाल ।
    भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार को लेकर नगर निगम की कार्रवाई अब और सख्त होती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने शहरभर में ऐसे भवनों और संपत्तियों की पहचान शुरू की है जहां आवासीय उपयोग की अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 62 हजार से ज्यादा संपत्तियां जांच के दायरे में हैं और नोटिस की संख्या लगातार बढ़ रही है। 18 अगस्त तक नगर निगम की ओर से 6589 नोटिस जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद भी सर्वे और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया जारी रही।

    नगर निगम की कार्रवाई का अगला चरण सुनवाई और अंतिम आदेश से जुड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक नोटिस मिलने के बाद संबंधित संपत्ति के दस्तावेज और वास्तविक उपयोग की जांच की जाएगी। मामले के गुण दोष के आधार पर अंतिम आदेश जारी होगा। इसके बाद यदि व्यावसायिक गतिविधि नियमों के विपरीत पाई गई और आदेश का पालन नहीं हुआ तो प्रतिष्ठान को सील करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। कुछ मामलों में अंतिम चेतावनी भी दी जा चुकी है और ऐसे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की तैयारी है।

    इस पूरे अभियान ने भोपाल के व्यापारियों में चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि शहर के कई इलाकों में वर्षों से छोटे कारोबार चल रहे हैं और अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग होने से दुकानदारों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से ऐसी नीति बनाने की मांग की है जिससे नियमों के दायरे में रहकर पुराने व्यावसायिक उपयोग को नियमित करने का रास्ता निकले। व्यापारियों की ओर से मिक्स्ड लैंड यूज और नए मास्टर प्लान को लेकर भी मांग उठाई जा रही है।

    कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर भी उतर चुके हैं। रोशनपुरा चौराहे पर प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान कारोबारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। महिला कारोबारियों ने भी विरोध में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ब्यूटी पार्लर क्लीनिक दुकान और दूसरे छोटे व्यवसाय बंद होने से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की है।

    दूसरी तरफ रहवासी संगठन इस कार्रवाई के समर्थन में हैं। उनका कहना है कि आवासीय कॉलोनियों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से पार्किंग ट्रैफिक शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इसी वजह से कई रहवासी संगठनों ने अभियान चलाकर आवासीय क्षेत्रों में नियमों के खिलाफ कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है। भोपाल में रहवासियों की ओर से टॉर्च मार्च भी निकाला जा चुका है और आगे भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई है।

    नगर निगम का सर्वे केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाला है। अधिकारियों की ओर से भवन की अनुमति भूमि उपयोग और आसपास की स्थिति की भी जांच की जा रही है। मुख्य मार्गों से लेकर उनसे जुड़ी गलियों और कॉलोनियों तक सर्वे का दायरा बढ़ाया गया है। जल निकायों हरित पट्टी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित निर्माण भी जांच के दायरे में हैं। नगर निगम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्वीकृत उपयोग और मौके पर हो रही गतिविधि में कितना अंतर है।

    इस विवाद की जड़ में भोपाल की पुरानी शहरी योजना और भूमि उपयोग का सवाल भी है। व्यापारियों का कहना है कि शहर के कई हिस्सों में लंबे समय से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां एक साथ चल रही हैं। उनका तर्क है कि मास्टर प्लान में स्पष्ट नीति बनाकर इस स्थिति का समाधान किया जा सकता है। दूसरी ओर रहवासियों का कहना है कि नियमों को नजरअंदाज कर किसी भी इलाके को धीरे धीरे बाजार में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भोपाल में आगे रास्ता क्या निकलेगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम पर नियमों का पालन कराने का दबाव है तो दूसरी तरफ हजारों कारोबारियों की आजीविका का सवाल है। ऐसे में सुनवाई के बाद होने वाले अंतिम आदेश और सरकार की भविष्य की शहरी नीति इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी। फिलहाल नोटिस और सर्वे के बीच भोपाल के व्यापारियों और रहवासियों की निगाह नगर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

  • निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर

    निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर


    भोपाल । भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक बुधवार 19 अगस्त को ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित होने जा रही है। साल के पहले नियमित परिषद सम्मेलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बैठक के एजेंडे में शहर की मौजूदा समस्याओं से जुड़े जनहित के मुद्दे शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि राजधानी की सड़कें बारिश के बाद बदहाल हो चुकी हैं कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है और सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं। इसके बावजूद इन अहम मुद्दों को परिषद की बैठक के एजेंडे में जगह नहीं दी गई है। ऐसे में बैठक के हंगामेदार रहने के आसार जताए जा रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक की शुरुआत पार्षदों के सवाल जवाब से होगी। इसके बाद एजेंडे में शामिल प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। बताया गया है कि सम्मेलन में नगर निगम की खाली हुई एक बिल्डिंग को किराए पर दिए जाने से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। विपक्ष का कहना है कि जब शहर के सामने बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई सवाल खड़े हैं तो परिषद की बैठक में इन विषयों पर प्राथमिकता से चर्चा होनी चाहिए।

    बारिश के बाद भोपाल की सड़कों की स्थिति विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। राजधानी में कई स्थानों पर सड़कें उखड़ी हुई हैं और कुछ इलाकों में सड़क निर्माण या दूसरे कामों के कारण रास्ते प्रभावित हैं। तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का सवाल है कि शहर की ऐसी स्थिति के बीच सड़क और जलभराव जैसे मुद्दे परिषद की बैठक में चर्चा का हिस्सा क्यों नहीं बनाए गए।

    सफाई व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष नगर निगम को घेरने की तैयारी में है। कई इलाकों में बारिश के बाद कचरा जमा होने और जल निकासी से जुड़ी शिकायतों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि शहर की सफाई और बुनियादी सुविधाएं सीधे तौर पर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हैं। ऐसे में परिषद की बैठक में इन विषयों पर पार्षदों को सवाल पूछने और अधिकारियों से जवाब लेने का मौका मिलना चाहिए।

    नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने एजेंडे को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर बैठक में शहर सरकार की ओर से जनहित के मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं दी जाती। उन्होंने दावा किया कि पिछली बैठक में भी जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की मांग की गई थी लेकिन विपक्ष की बात नहीं सुनी गई। अब एक बार फिर शहर की प्रमुख समस्याओं को एजेंडे से बाहर रखने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

    सीनियर पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने भी भोपाल की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक शहर की कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और तेज बारिश के बाद राजधानी के बड़े हिस्से में पानी भरने की स्थिति बनी। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था भी कई स्थानों पर ठीक नहीं है। विपक्ष इन सभी मुद्दों को परिषद की बैठक में उठाने की तैयारी में है।

    यह सम्मेलन इस साल का पहला ऐसा परिषद सम्मेलन बताया जा रहा है जिसमें पार्षदों को सवाल जवाब के जरिए शहर से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा। इससे पहले इस साल दो सम्मेलन हुए हैं लेकिन उनमें एक महिला सशक्तिकरण और दूसरा कचरे के नए नियमों से संबंधित था। इन बैठकों में पार्षदों के सवाल जवाब का सामान्य प्रारूप नहीं था।

    अब बुधवार की बैठक में विपक्ष के तेवर और सत्ता पक्ष के जवाब पर सबकी नजर रहेगी। एजेंडे में जनहित के मुद्दों की कमी को लेकर विपक्ष पहले ही अपनी रणनीति स्पष्ट कर चुका है। ऐसे में सड़क जलभराव सफाई और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल बैठक में जोरदार तरीके से उठने की संभावना है। अगर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होती है तो निगम परिषद का यह सम्मेलन हंगामेदार हो सकता है।