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  • पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा

    पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मानसून के आगमन से पहले हुई बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी है। नगर निगम और प्रशासन की ओर से नाले-नालियों की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष इंतजाम के दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही तेज बारिश में ये दावे धरातल पर कमजोर नजर आए। शहर के कई हिस्सों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जबकि जलभराव के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई।

    बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के व्यस्त मार्गों और प्रमुख चौराहों पर देखने को मिला। बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज तक का मार्ग महज कुछ मिनटों की बारिश में पानी से भर गया। सड़क पर इतना पानी जमा हो गया कि वाहन चालकों को रास्ता पहचानने में भी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान इस इलाके में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है।

    रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से एम्स की ओर जाने वाले फ्लाइओवर पर भी भारी जलभराव देखने को मिला। सड़क पर पानी भरने के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। इस दौरान एक एम्बुलेंस भी वाहनों की कतार में फंस गई, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगा।

    शहर के पॉश इलाकों में शामिल रानी कमलापति स्टेशन रोड, एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और सात नंबर क्षेत्र भी जलभराव से अछूते नहीं रहे। इन क्षेत्रों में सड़कों पर घंटों पानी जमा रहा। कई जगहों पर जल निकासी की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई, जिसके कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    भोपाल में अधूरी सड़क परियोजनाएं भी बारिश के दौरान बड़ी समस्या बनकर सामने आई हैं। कई इलाकों में सीवेज पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए महीनों पहले सड़कें खोदी गई थीं, लेकिन अब तक उनका पुनर्निर्माण नहीं किया गया। रचना नगर समेत कई कॉलोनियों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ गया है।

    वहीं खुले नाले भी शहरवासियों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बागसेवनियां से कटारा हिल्स मार्ग और दस नंबर मार्केट सहित कई क्षेत्रों में नालों को अब तक ढंका नहीं गया है। बारिश के दौरान नाले और सड़क के बीच का अंतर मिट जाता है, जिससे लोगों के गिरने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार बच्चे और राहगीर नालों में गिर चुके हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार पहले भी एक बच्चे की जान नाले में गिरने से जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

    नगर निगम ने मानसून से पहले विशेष सफाई अभियान चलाने और जलभराव की समस्या को नियंत्रित करने का दावा किया था। हालांकि पहली ही बारिश ने इन तैयारियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही यह स्थिति है, तो आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    अब लोगों की नजर प्रशासन और नगर निगम पर है कि वे मानसून के दौरान जलभराव, खुले नालों और अधूरी सड़कों जैसी समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से कर पाते हैं। राजधानी के नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार बारिश उनके लिए राहत लेकर आए, परेशानी नहीं।

  • भोपाल में कचरा फैलाने और जलाने पर लगेगा जुर्माना, नए नियमों पर निगम परिषद में गरमाई बहस

    भोपाल में कचरा फैलाने और जलाने पर लगेगा जुर्माना, नए नियमों पर निगम परिषद में गरमाई बहस


    मध्यप्रदेश । भोपाल में स्वच्छता व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है। मंगलवार को आईएसबीटी स्थित नगर निगम मुख्यालय में आयोजित विशेष परिषद बैठक में इन नियमों को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। बैठक में बताया गया कि खुले में कचरा फेंकने, कचरा जलाने और बिना पूर्व सूचना बड़े आयोजनों के संचालन पर सख्त कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि इन प्रस्तावित नियमों को लेकर परिषद में लंबी बहस भी देखने को मिली।

    बैठक में विशेषज्ञ अतुल खरे ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत प्रस्तावित व्यवस्थाओं की जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण के अनुसार यदि कोई व्यक्ति या संस्था खुले में कचरा फेंकती है या उसे जलाती है तो नगर निगम जुर्माना लगाएगा। इसके अलावा 100 या उससे अधिक लोगों के किसी भी सार्वजनिक आयोजन के लिए आयोजकों को कम से कम तीन दिन पहले निगम को सूचना देना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जा सकेगी।

    नए नियमों को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने कई सवाल उठाए। वार्ड-16 के पार्षद मोहम्मद सरवर ने कहा कि पॉलीथिन पर प्रतिबंध के बावजूद शहर में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जब तक मौजूदा नियमों का कड़ाई से पालन नहीं होगा, तब तक नए नियम भी केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे। उन्होंने सफाई व्यवस्था की खामियों का जिक्र करते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में नालियों से निकाला गया कचरा दिनों तक सड़क किनारे पड़ा रहता है क्योंकि उसे उठाने की व्यवस्था नहीं होती।

    कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने निगम के संसाधनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नए नियम लागू करने से पहले यह देखना होगा कि निगम के पास पर्याप्त बजट, वाहन और कर्मचारी हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि कई वार्डों में कचरा वाहन खराब होने पर कई दिनों तक कचरा नहीं उठ पाता। कर्मचारियों की कमी के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है।

    वहीं भाजपा पार्षदों ने भी सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की। भाजपा पार्षद विलास राव घाड़गे ने कहा कि हर वर्ष कर्मचारियों की संख्या कम होती जा रही है जबकि शहर में कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने नए नियमों का समर्थन करते हुए कहा कि इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से सख्ती से शुल्क एवं दंड वसूला जाना चाहिए।

    बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद देवांशु कंसाना ने अपने वार्ड में गिरे पेड़ को हटाने में छह दिन लगने का उदाहरण देते हुए निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस पर भाजपा पार्षदों ने आपत्ति जताई और कहा कि उनके क्षेत्रों में ऐसी समस्याएं नहीं हैं। इस मुद्दे पर परिषद में कुछ देर तक तीखी नोकझोंक भी हुई।

    महापौर मालती राय ने चर्चा के दौरान कहा कि सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति वही पार्षद बेहतर जानते हैं जो नियमित रूप से अपने वार्डों का निरीक्षण करते हैं। उन्होंने रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था और जमीनी निगरानी की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    नए नियमों के तहत अब बड़ी इमारतों, स्कूलों, कॉलेजों और व्यावसायिक परिसरों को अपने स्तर पर गीले कचरे के निपटान की व्यवस्था करनी होगी। बड़े आयोजनों और प्रदर्शनियों के लिए ऑनलाइन पंजीयन भी अनिवार्य किया जाएगा। नगर निगम 30 जून तक इन नियमों को लागू करने की तैयारी कर रहा है। निगम का दावा है कि नई व्यवस्था से शहर में कचरे के परिवहन में लगभग 25 प्रतिशत तक कमी आएगी और कचरा प्रबंधन अधिक वैज्ञानिक एवं जवाबदेह बन सकेगा।

    बैठक के दौरान एक दिलचस्प दृश्य भी देखने को मिला। भीषण गर्मी और परिषद हॉल में एयर कंडीशनर बंद होने के कारण कई पार्षद एजेंडे की प्रतियों से खुद को हवा करते नजर आए। यह दृश्य बैठक की चर्चा के साथ-साथ लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना रहा।

  • भोपाल में बड़ा हादसा टला, निगम भवन की लिफ्ट में फंसी महिला; बैकअप सिस्टम नहीं होने से बढ़ी चिंता

    भोपाल में बड़ा हादसा टला, निगम भवन की लिफ्ट में फंसी महिला; बैकअप सिस्टम नहीं होने से बढ़ी चिंता


    भोपाल । भोपाल नगर निगम की नई मुख्यालय बिल्डिंग में बुधवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला कर्मचारी लिफ्ट के अंदर फंस गईं। लिंक रोड नंबर-2 स्थित 73 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस अत्याधुनिक भवन में बिजली गुल होते ही लिफ्ट बीच रास्ते में रुक गई और महिला करीब 20 मिनट तक उसमें कैद रहीं। घटना ने भवन की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार महिला कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर से तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुई थीं। जैसे ही लिफ्ट ऊपर बढ़ी, अचानक बिजली चली गई और लिफ्ट सेकंड फ्लोर के पास अटक गई। अंदर फंसी महिला घबरा गईं, जबकि घटना की जानकारी मिलते ही भवन में मौजूद कर्मचारियों और नागरिकों की भीड़ मौके पर जमा हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तकनीकी टीम के पहुंचने से पहले कुछ लोगों ने चाबी और पेचकस की मदद से लिफ्ट का दरवाजा खोलने की कोशिश भी की। हालांकि बाद में पहुंचे तकनीकी कर्मचारियों ने लोगों को ऐसा करने से रोका और लिफ्ट सिस्टम को रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की। करीब 10 मिनट की मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बाहर निकलते समय वह काफी घबराई हुई नजर आईं।

    नगर निगम की बिजली शाखा के कार्यपालन यंत्री आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि लिफ्ट में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि बिजली बाधित होने के कारण यह बीच में रुक गई थी। हालांकि घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि करोड़ों रुपए की लागत से बने नए भवन में ऑटो रेस्क्यू सिस्टम और पावर बैकअप जैसी जरूरी सुविधाएं क्यों नहीं हैं।

    कर्मचारियों और आम नागरिकों का कहना है कि रोजाना बड़ी संख्या में लोग इस भवन में आते हैं। ऐसे में लिफ्ट में ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस और बैकअप पावर सिस्टम होना अनिवार्य है, ताकि बिजली जाने की स्थिति में यात्री सुरक्षित बाहर निकल सकें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक लिफ्टों में सुरक्षा के लिए कई स्वचालित सिस्टम लगे होते हैं। बिजली जाने पर लिफ्ट निकटतम फ्लोर तक पहुंचने का प्रयास करती है। ऐसे समय में दरवाजा जबरन खोलने या छेड़छाड़ करने से सुरक्षा तंत्र प्रभावित हो सकता है और राहत कार्य में देरी हो सकती है।

    उल्लेखनीय है कि इस नई निगम बिल्डिंग का लोकार्पण 6 मई को मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने किया था। भवन में निगम के अधिकांश विभागों को एक छत के नीचे लाने की योजना बनाई गई है। हालांकि उद्घाटन के एक महीने के भीतर सामने आई इस घटना ने भवन की तकनीकी तैयारियों और सुरक्षा मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • परिषद मीटिंग हॉल न बनने पर विवाद, भोपाल में कैम्पस निर्माण को लेकर मंथन तेज

    परिषद मीटिंग हॉल न बनने पर विवाद, भोपाल में कैम्पस निर्माण को लेकर मंथन तेज


    नई दिल्ली। भोपाल में नगर निगम की नई प्रशासनिक बिल्डिंग के लोकार्पण के साथ ही एक बड़ी चूक सामने आई है। करीब ₹73 करोड़ की लागत से तैयार इस भव्य भवन में परिषद का मीटिंग हॉल ही नहीं बनाया गया, जिसे अब गंभीर डिजाइन भूल माना जा रहा है। इस कमी के सामने आने के बाद अब प्रशासन परिसर के भीतर ही मीटिंग हॉल बनाने पर मंथन कर रहा है।
    इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा जब लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान महापौर मालती राय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से 5 एकड़ जमीन की मांग रखी। हालांकि, चर्चा के बाद संकेत मिले कि अलग जमीन लेने की बजाय मौजूदा परिसर में ही नया परिषद हॉल तैयार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, यह हॉल बिल्डिंग के सामने स्थित पार्किंग क्षेत्र में विकसित किया जा सकता है, ताकि भविष्य में परिषद की बैठकें यहीं आयोजित की जा सकें।
    गौरतलब है कि इस नई बिल्डिंग की लागत पहले ₹43 करोड़ बताई गई थी, लेकिन लोकार्पण के समय यह आंकड़ा बढ़कर ₹73 करोड़ तक पहुंच गया। इसमें सिविल वर्क के अलावा इंटीरियर, तकनीकी और अन्य सुविधाओं पर खर्च शामिल है। यह भवन प्रदेश का पहला ऐसा नगरीय निकाय मुख्यालय बताया जा रहा है जो ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट और जियोथर्मल तकनीक से लैस है।
    ‘अटल भवन’ नाम से पहचानी जाने वाली इस आठ मंजिला इमारत में आधुनिक सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। पार्किंग क्षेत्र में लगे सोलर पैनलों से लगभग 300 किलोवाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। इसके साथ ही, भोपाल निगम द्वारा नीमच जिले में विकसित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया गया।
    भवन के विभिन्न फ्लोर को विभागवार विभाजित किया गया है। ग्राउंड फ्लोर पर जनसंपर्क, टैक्स काउंटर और विवाह पंजीकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं, साथ ही बच्चों के लिए गेम जोन और मेडिकल इमरजेंसी रूम भी बनाया गया है। पहली से चौथी मंजिल तक महापौर कार्यालय, एमआईसी सदस्य, जलकार्य, राजस्व और अन्य विभाग हैं। पांचवीं से सातवीं मंजिल तक स्मार्ट सिटी, आईटी, स्वास्थ्य और योजना से जुड़े विभागों को रखा गया है, जबकि आठवीं मंजिल पर कमिश्नर कार्यालय और स्मार्ट सिटी मुख्यालय स्थित है।
    पूरे भवन में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू किया गया है, जिससे नागरिकों को एक ही स्थान पर सभी विभागीय सेवाएं मिल सकें। पहले निगम के विभिन्न विभाग शहर के अलग-अलग हिस्सों में संचालित होते थे, लेकिन अब सभी सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
    हालांकि, इस आधुनिक भवन को लेकर कई तकनीकी और डिजाइन खामियां भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी चूक परिषद मीटिंग हॉल का न होना माना जा रहा है, जिसे अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। इसके लावा सोलर पैनलों की दिशा और ऊर्जा उत्पादन क्षमता को लेकर भी विशेषज्ञों ने कुछ सवाल उठाए हैं।
    बिल्डिंग की डिजाइनिंग तीन अलग-अलग कमिश्नरों के कार्यकाल में पूरी हुई, जिसके चलते परियोजना में कई बदलाव और संशोधन हुए। अब यह भवन न केवल प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा, बल्कि शहर की आधुनिक शहरी संरचना का प्रतीक भी माना जा रहा है।
    फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि परिषद मीटिंग हॉल का समाधान किस रूप में किया जाता है और यह भव्य लेकिन विवादों में घिरी इमारत आने वाले समय में कितना प्रभावी साबित होती है।

  • भोपाल निगम में फर्जी बिलिंग के आरोप पर लोकायुक्त का सेंट्रल वर्कशॉप में छापा

    भोपाल निगम में फर्जी बिलिंग के आरोप पर लोकायुक्त का सेंट्रल वर्कशॉप में छापा



    भोपाल भोपाल नगर निगम में फर्जी बिलिंग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते रविवार सुबह लोकायुक्त की टीम ने सेंट्रल वर्कशॉप स्थित नगर निगम कार्यालय में छापेमारी की। यह कार्यवाही सुबह 9 बजे शुरू हुई और अभी भी जारी है। नगर निगम की यह वर्कशॉप गाड़ियों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य मैकेनिकल कार्यों के लिए जानी जाती है।

    लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को निगम के फतेहगढ़ डाटा सेंटर पर कार्रवाई करते हुए पिछले 10 वर्षों के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त किए थे। प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिले, जिसके आधार पर सेंट्रल वर्कशॉप में यह छापेमारी की गई। जांच टीम दस्तावेजों की जांच कर रही है और कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन फर्मों और व्यक्तियों की संलिप्तता रही।

    11 मार्च को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को प्राप्त हुई थी। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर कोर्ट से सर्च वारंट लेकर कार्रवाई की गई।

    लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार, शिकायत में आरोप है कि SAP सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल तैयार किए गए। इन बिलों के माध्यम से परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया, जबकि असल में संबंधित काम या तो किया ही नहीं गया या विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी।

    जांच में यह भी सामने आया कि नगर निगम के जलकार्य विभाग, सामान्य प्रशासन और सेंट्रल वर्कशॉप के नाम पर गाड़ियों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य काम दिखाए गए, लेकिन कई मामलों में वास्तव में काम नहीं हुआ था। डिजिटल डाटा और दस्तावेजों की जांच से अब यह पता लगाया जाएगा कि किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तविकता क्या थी।

    अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर का कहना है कि लेखा शाखा में बिल सीधे पास नहीं किए जाते। बिल संबंधित विभागों से सत्यापन के बाद आते हैं और फंड की उपलब्धता के अनुसार नगर निगम आयुक्त से चर्चा के बाद भुगतान किया जाता है। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि भुगतान प्रक्रिया में कई स्तरों पर सत्यापन होता है, लेकिन कथित फर्जी बिलिंग के मामले ने प्रणाली में संभावित गड़बड़ियों को उजागर किया है।

    लोकायुक्त टीम का कहना है कि जब्त SAP सॉफ्टवेयर का डेटा और अन्य डिजिटल दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद मामले में और फर्मों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। यह कार्रवाई भोपाल नगर निगम में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

  • भोपाल निगम में इंजीनियरों के कार्य विभाजन में बड़ा फेरबदल: उदित गर्ग और आरआर जारोलिया के जिम्मे हटाए गए विभाग

    भोपाल निगम में इंजीनियरों के कार्य विभाजन में बड़ा फेरबदल: उदित गर्ग और आरआर जारोलिया के जिम्मे हटाए गए विभाग


    भोपाल। भोपाल नगर निगम में इंजीनियरों के बीच लंबे समय से चल रही कार्य विभाजन की कवायद को निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने अंतिम रूप दे दिया है। नए आदेश के तहत निगम में प्रमुख इंजीनियरों के जिम्मे कई विभागों में बदलाव किए गए हैं।

    उदित गर्ग और जारोलिया के विभागों में बदलाव
    उदित गर्ग, जो कि चार विभागों के प्रभारी थे, उनसे स्वच्छ भारत मिशन और हाउसिंग फॉर ऑल शाखा का प्रभार छीन लिया गया। निगम सूत्रों के मुताबिक, गर्ग मूल रूप से पीएचई विभाग के इंजीनियर हैं और उन्होंने विभाग में वापसी के लिए आवेदन भी दिया है।

    वहीं आरआर जारोलिया, जो सिविल शाखा के प्रभारी थे, उनसे सिविल शाखा का काम भी हटा दिया गया। नए आदेश के अनुसार अब विधानसभा में पदस्थ कार्यपालन यंत्रियों की फाइलें सीधे अपर आयुक्त को भेजी जाएंगी।

    बिल्डिंग परमिशन और नगर निवेशकों में फेरबदल
    निगमायुक्त ने बिल्डिंग परमिशन शाखा में भी बदलाव किया है। अब यहां चार नगर निवेशक पदस्थ किए गए हैं, जिनमें नीरज आनंद लिखार को मुख्य नगर निवेशक का प्रभार सौंपा गया है।

    टीएंडसीपी से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ ज्वाइंट डायरेक्टर लिखार को चीफ सिटी प्लानर (सीसीपी) का प्रभार मिला है। 8 कार्यपालन यंत्रियों में से सबसे वरिष्ठ जारोलिया को अधीक्षण यंत्री का प्रभार दिया गया।

    प्रमुख इंजीनियरों को सौंपी गई जिम्मेदारियां
    आरआर जारोलिया: प्रभारी एसई, यांत्रिकी योजना प्रकोष्ठ एवं विद्युत शाखा (जोन 01 से 21)

    आरके गोयल: ईई एवं विभागाध्यक्ष, हाउसिंग फॉर ऑल (एचएफए)

    अनिल तटवाड़े: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), उत्तर व मध्य विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा)

    ए के साहनी: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), नरेला विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा), प्रभारी प्रोजेक्ट एमआईएस व अतिक्रमण सेल

    प्रमोद मालवीय: ईई एवं विभागाध्यक्ष – प्रोजेक्ट, झील संरक्षण प्रकोष्ठ, स्वच्छ भारत मिशन

    एसके राजेश: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), हुजूर विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा शाखा)

    ए के डेहरिया: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), दक्षिण-पश्चिम विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा शाखा), दक्षिण-पश्चिम और गोविंदपुरा विधानसभा

  • भदभदा कचरा स्टेशन पर बड़ा हादसा: निगम के कचरा वाहन ने ड्राइवर को कुचला, CCTV में कैद लापरवाही

    भदभदा कचरा स्टेशन पर बड़ा हादसा: निगम के कचरा वाहन ने ड्राइवर को कुचला, CCTV में कैद लापरवाही


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम के भदभदा कचरा स्टेशन पर शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। नगर निगम के कचरा वाहन की टक्कर से एक ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना का सीसीटीवी वीडियो रविवार को सामने आया, जिसमें कचरा वाहन चालक की लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के मुताबिक Bhopal Municipal Corporation के जोन-21 का कचरा वाहन चालक पवन और जोन-8 का चालक अरुण घावरी शनिवार को अपनी-अपनी गाड़ियां लेकर Bhadbhada Garbage Transfer Station पहुंचे थे। पवन के वाहन की एंट्री पहले ही हो चुकी थी, जबकि अरुण अपने वाहन की एंट्री कराने के लिए विंडो के पास खड़े थे। इसी दौरान पवन ने तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन आगे बढ़ा दिया, जिससे अरुण वाहन और दीवार के बीच फंस गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि अरुण गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका एक पैर बुरी तरह टूट गया। घटना के बाद आरोपी चालक भी वाहन से गिर पड़ा, लेकिन कुछ देर बाद उठकर दूर खड़ा हो गया। घायल अरुण को तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

    पूरा घटनाक्रम कचरा स्टेशन में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया है। मामले की शिकायत मिलने के बाद Kamla Nagar Police Station ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद नगर निगम में कामकाज और ड्राइवरों की भर्ती को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष Shabista Zaki ने आरोप लगाया कि निगम में लेबर क्लास के कर्मचारियों से वाहन चलवाए जा रहे हैं, जबकि जिन ड्राइवरों के पास हैवी ड्राइविंग लाइसेंस है उन्हें हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के कारण ही इस तरह की दुर्घटनाएं हो रही हैं और इसकी जांच होना चाहिए।

    वहीं नगर निगम कर्मचारी नेता Hamid Khan ने दावा किया कि जिस चालक की लापरवाही से हादसा हुआ, उसके पास कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है। इसके बावजूद उसे नौकरी पर रखा गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सिर्फ चालक ही नहीं, बल्कि उसे भर्ती करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। कर्मचारी संगठन जल्द ही इस मामले को लेकर नगर निगम आयुक्त से शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं।

    घटना के बाद नगर निगम के कचरा प्रबंधन और कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

  • भोपाल की मैपल ट्री सोसायटी में स्ट्रीट डॉग्स को लेकर हंगामा, रहवासियों ने किया प्रदर्शन; समस्या हल न हुई तो सड़क जाम की चेतावनी

    भोपाल की मैपल ट्री सोसायटी में स्ट्रीट डॉग्स को लेकर हंगामा, रहवासियों ने किया प्रदर्शन; समस्या हल न हुई तो सड़क जाम की चेतावनी



    भोपालभोपाल के करोंद इलाके में स्थित मैपल ट्री सोसायटी में गुरुवार देर रात स्ट्रीट डॉग्स की बढ़ती समस्या को लेकर रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। कॉलोनी के लोग बड़ी संख्या में सोसायटी के मुख्य गेट पर एकत्र हो गए और नगर निगम व प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। हालात बिगड़ते देख पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा और लोगों को समझाइश देकर स्थिति को शांत कराया गया।

    रहवासियों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से सोसायटी और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। इससे लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा खतरे में हैं। लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में कई लोगों को कुत्तों ने काट लिया, जिसके बाद नगर निगम में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    प्रदर्शन के दौरान सोसायटी के लोग गेट पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। उनका कहना था कि प्रशासन को कई बार शिकायत देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ डॉग लवर्स उनकी शिकायतों का विरोध करते हैं और उल्टा उनके खिलाफ थाने में झूठी शिकायतें दर्ज करवा देते हैं, जिससे लोग डर और दबाव में आ जाते हैं।

    सोसायटी के लोगों का कहना है कि आवारा कुत्ते अब राह चलते लोगों पर हमला कर रहे हैं। कई बार बच्चे खेलते समय इनका शिकार बन चुके हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए सुबह-शाम टहलना भी मुश्किल हो गया है। रहवासियों का आरोप है कि डॉग लवर्स के दबाव के कारण प्रशासन और नगर निगम सख्त कदम नहीं उठा पा रहे हैं।

    मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया और भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायत संबंधित विभाग तक पहुंचाई जाएगी। पुलिस ने रहवासियों से कुछ समय देने की अपील की है।

    हालांकि प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही स्ट्रीट डॉग्स की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क जाम भी करेंगे। उनका कहना है कि सुरक्षा और बच्चों की जान से समझौता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

  • भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक

    भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक


    भोपाल। भोपाल नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पानी में कैंसर, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया मौजूद हैं। नल से आने वाला पानी कुछ ही मिनटों में लाल हो जाता है और बदबू इतनी तीव्र होती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स), कैल्शियम, टोटल हार्डनेस, सल्फेट और कोलीफॉर्म भी उच्च मात्रा में पाए गए हैं।

    स्थानीय लोग अब पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं।

    आदमपुर खंती और पड़रिया के इलाकों में लोग भूजल का पानी पीने के बजाय, केवल फसलों की सिंचाई और साफ-सफाई में इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ इलाकों में तो हैंडपंप से लाल और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिसे देखकर लोग पीने से डर रहे हैं।

    पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष पांडे के मुताबिक, जनवरी 2018 से भोपाल का कचरा आदमपुर खंती में डंप किया जा रहा है, जिससे आसपास के 7 गांवों का भूजल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है। डंपिंग साइट पर फिलहाल 14 लाख टन कचरा जमा है, जिससे लिक्विड रसायन (लीचेट) निकलकर पानी को और दूषित कर रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भोपाल का भूजल इंदौर से भी ज्यादा गंभीर स्थिति में है। आदमपुर खंती और आसपास के इलाकों में भूजल में आयरन और क्रोमियम भी मिले हैं, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। CPCB और MPPCB की रिपोर्ट्स में भी यह तथ्य सामने आया है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल से प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें से 800 टन कचरा प्रोसेसिंग के लिए खंती भेजा जाता है। लेकिन यूनिट की क्षमता केवल 420 टन है, जिससे कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है और आसपास के गांवों का पानी दूषित होता जा रहा है।

    भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर का पानी फेल सैंपल्स दे चुका है। पानी में पाया गया ई-कोलाई बैक्टीरिया वही है, जो इंदौर के भागीरथपुरा में पाया गया था और जिसके कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है।
    भोपाल का ग्राउंड वाटर वर्तमान में पीने योग्य नहीं है और स्थानीय लोगों को सुरक्षित पानी की तत्काल आवश्यकता है। प्रशासन और पर्यावरण एजेंसियों को मिलकर पानी की सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि जनता की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

  • भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर

    भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर


    भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत के बाद मध्य प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी कड़ी में राजधानी भोपाल में भी कई इलाकों से गंदे पानी की सप्लाई की शिकायतें सामने आने लगी हैं। हालात को देखते हुए नगर निगम का अमला पानी के सैंपल लेने और वाल्व सुधारने में जुटा है। वहीं, मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने खुद मैदान में उतरकर शहर की पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया, जहां कई चौंकाने वाली लापरवाहियां सामने आईं।
    कांग्रेस नेताओं ने सबसे पहले गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के बरखेड़ा पठानी इलाके में स्थित पानी की टंकी का निरीक्षण किया। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला टंकी पर चढ़े और पूरे निरीक्षण का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। इस दौरान टंकी के अंदर और आसपास गंदगी पाई गई। झूमरवाला ने कहा कि इसी टंकी से रोजाना हजारों लोगों को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है और यदि यहां साफ-सफाई नहीं होगी, तो लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

    झूमरवाला ने कहा कि दूषित पानी से संक्रमण और गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।

    उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भोपाल में भी इंदौर जैसी दुखद घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि टंकी के आसपास गंदगी फैली हुई है और शराबियों का जमावड़ा भी रहता है, जो हालात को और खराब करता है। झूमरवाला ने कहा कि यह वक्त सिर्फ चेतावनी देने का नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई करने का है। पानी जीवन है और इसके साथ किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इसके बाद नगर निगम के कांग्रेसी पार्षद श्यामला हिल्स स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पहुंचे। इस निरीक्षण में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान और मो. जहीर सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद रहे।

    निरीक्षण के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि श्यामला हिल्स के फिल्टर प्लांट का रॉ वॉटर सीधे बड़े तालाब में मिल रहा है, जबकि इसी बड़े तालाब से शहर के कई इलाकों में पीने का पानी सप्लाई किया जाता है।

    नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि रॉ वॉटर का बड़े तालाब में मिलना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने दावा किया कि निरीक्षण के समय वाटर ट्रीटमेंट प्लांट चालू हालत में नहीं था और सिर्फ कागजी कार्रवाई ही दिखाई गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पानी का नियमित सैंपल लिया जाता है या नहीं, इसकी कोई रिपोर्ट मौके पर उपलब्ध नहीं कराई गई।

    जकी ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट में नियुक्त केमिस्ट के पास रसायन शास्त्र में ग्रेजुएशन की अनिवार्य योग्यता होनी चाहिए, लेकिन इस संबंध में भी संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पानी की गुणवत्ता जांच में भी खामियां सामने आईं और फिल्ट्रेशन के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन होता नहीं दिखा।

    कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने नगर निगम और प्रशासन से मांग की कि भोपाल की सभी पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट की तुरंत जांच कराई जाए, नियमित सैंपलिंग सुनिश्चित की जाए और जहां भी लापरवाही पाई जाए, वहां सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने साफ कहा कि इंदौर की घटना से सबक लेते हुए राजधानी में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।