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  • रियाज मंजिल पर किसका हक, आफताब जहां के स्वामित्व पर आपत्ति, 2024 के शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की भी होगी जांच

    रियाज मंजिल पर किसका हक, आफताब जहां के स्वामित्व पर आपत्ति, 2024 के शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की भी होगी जांच


    भोपाल । भोपाल में नवाबी दौर की संपत्तियों को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक सुनवाई के अगले चरण में पहुंच गया है। बैरागढ़ एसडीएम कोर्ट में मंगलवार को रियाज मंजिल कोठी और खसरा नंबर 42 से जुड़े मामले में दोनों पक्ष अपने रिकॉर्ड और दस्तावेज पेश करेंगे। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन संपत्तियों को नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से जुड़ा मानते हुए शत्रु संपत्ति के तौर पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं और संबंधित पक्षों ने पुराने सरकारी रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।

    खानूगांव स्थित ऐतिहासिक रियाज मंजिल कोठी के साथ खसरा नंबर 42 के स्वामित्व को लेकर मुख्य विवाद सामने आया है। आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन आफताब जहां बेगम के नाम दर्ज नहीं है। उनके अनुसार रिकॉर्ड में इसका संबंध नवाब हमीदुल्लाह खान और बाद में उनकी उत्तराधिकारी नवाब बेगम साजिदा सुल्तान से बताया गया है। ऐसे में केवल किसी व्यक्ति के संपत्ति में रहने के आधार पर उसके कानूनी स्वामित्व को तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए पुराने दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

    आपत्तियों में वर्ष 2020 की राजस्व जांच का भी उल्लेख किया गया है। दावा है कि तत्कालीन तहसीलदार संत हिरदाराम नगर ने खसरा नंबर 42 से संबंधित राजस्व प्रकरण में जांच की थी। इस जांच में आफताब जहां के पक्ष में कथित हिबा या दान के आधार पर किए गए नामांतरण के दावे को सिद्ध नहीं माना गया था। अब इसी बिंदु को आधार बनाकर सवाल उठाया गया है कि यदि पिछली राजस्व जांच में उनका मालिकाना हक स्थापित नहीं हुआ था तो वर्ष 2024 में इसी संपत्ति को उनके स्वामित्व वाली मानकर शत्रु संपत्ति घोषित करने का आधार क्या था।

    मामले में 29 अप्रैल 2024 को जारी बताए जा रहे शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता और उसे जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। आपत्तिकर्ताओं ने इसे सीधे फर्जी नहीं बताया है बल्कि इसकी मूल फाइल और उससे जुड़े दस्तावेज बुलाने की मांग की है। इसके लिए भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से संबंधित मूल या प्रमाणित रिकॉर्ड मंगाने की मांग की गई है। इसमें नोटशीट अनुमोदन आदेश संपत्ति सत्यापन रिपोर्ट स्वामित्व का आधार और केंद्र तथा राज्य के बीच हुए पत्राचार को शामिल करने की मांग की गई है।

    पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रियाज मंजिल और खसरा नंबर 42 का वास्तविक कानूनी स्वामित्व किसके पास था। साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आफताब जहां बेगम के स्वामित्व का आधार क्या था और वर्ष 2024 में जारी प्रमाण-पत्र किन दस्तावेजों और जांच के आधार पर तैयार किया गया।

    नवाबी संपत्तियों का विवाद केवल रियाज मंजिल तक सीमित नहीं है। भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्तियों को लेकर सैफ अली खान और उनके परिवार के साथ नवाब की तीसरी बेटी राबिया सुल्तान के वारिसों की ओर से भी दावे किए गए हैं। संपत्तियों की जांच और सत्यापन के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की गई है। बैरागढ़ टीटी नगर कोलार हुजूर और गोविंदपुरा के एसडीएम अलग अलग क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड का सर्वेक्षण और सत्यापन कर रहे हैं।

    विवाद का एक प्रमुख पक्ष शत्रु संपत्ति से भी जुड़ा है। केंद्र सरकार की ओर से पूर्व नवाब की कुछ संपत्तियों को शत्रु संपत्ति माना गया है। इसके पीछे यह तर्क दिया गया है कि नवाब की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान विभाजन के समय पाकिस्तान चली गई थीं। वहीं सैफ अली खान पटौदी और उनके परिवार की ओर से दावा किया गया है कि उनकी दादी साजिदा सुल्तान वास्तविक उत्तराधिकारी थीं। इस बीच राबिया सुल्तान के वारिसों ने भी अदालत में संपत्तियों के बंटवारे की मांग की है। अब एसडीएम कोर्ट की सुनवाई में सामने आने वाले पुराने रिकॉर्ड इस विवाद को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • भोपाल में शत्रु संपत्ति विवाद ने फिर पकड़ा जोर कोहेफिजा के खसरा नंबर 42 की जांच से भू-स्वामियों की बढ़ी बेचैनी

    भोपाल में शत्रु संपत्ति विवाद ने फिर पकड़ा जोर कोहेफिजा के खसरा नंबर 42 की जांच से भू-स्वामियों की बढ़ी बेचैनी

    भोपाल। भोपाल में शत्रु संपत्ति से जुड़ा वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नवाब भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान और उनकी दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से जुड़ी संपत्तियों को लेकर चल रही जांच अब वर्तमान भू-स्वामियों और रहवासियों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। कोहेफिजा क्षेत्र में न्यायालय सहायक अभिरक्षक शत्रु संपत्ति एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संत हिरदाराम नगर यानी बैरागढ़ की ओर से कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं। इससे क्षेत्र में अपनी जमीन और संपत्ति के दस्तावेजों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है।

    सामने आए एक नोटिस में ग्राम कोहेफिजा के खसरा नंबर 42/10 में दर्ज 0.0320 हेक्टेयर भूमि से संबंधित व्यक्ति को 24 सितंबर को उपस्थित होकर अपने पक्ष में दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। नोटिस में अमिताभ अग्निहोत्री की शिकायत का उल्लेख करते हुए जांच की जानकारी दी गई है। इसमें रियाज मंजिल को भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के अनुसार शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने की बात कही गई है। साथ ही संबंधित खसरे के कॉलम 12 में शत्रु संपत्ति जांच की प्रविष्टि होने और Enemy Property Act 1968 की धारा 12 का हवाला भी दिया गया है।

    मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रियाज मंजिल का संबंध नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से बताया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह कोठी नवाब हमीदुल्लाह खान ने आफताब जहां बेगम को दी थी। अब इस संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड और आसपास की जमीनों की जांच ने पुराने विवाद को फिर सामने ला दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जांच का दायरा केवल रियाज मंजिल तक सीमित रहेगा या नवाब परिवार से जुड़ी दूसरी संपत्तियां भी इसकी जद में आएंगी।

    जून 2026 में भोपाल कलेक्टर की ओर से शत्रु संपत्तियों की जांच को लेकर बैरागढ़ सहित अलग-अलग एसडीएम को निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इस जांच में रियाज मंजिल के साथ मेपल हाउस नानी की हवेली और नवाब परिवार से संबंधित अन्य संपत्तियों को भी शामिल किए जाने की बात कही गई थी। ऐसे में कोहेफिजा के मौजूदा नोटिस को उसी व्यापक जांच प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।

    आफताब जहां बेगम से जुड़ी जमीनों को लेकर भी पुराने रिकॉर्ड और दावों की चर्चा होती रही है। वर्ष 1959 के राजस्व रिकॉर्ड में बेहटा और बोरबन क्षेत्र में उनके नाम बड़ी मात्रा में जमीन दर्ज होने का दावा किया गया है। इन जमीनों में से कुछ को बाद में पावर ऑफ अटॉर्नी और कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर हिबानाम के जरिए बेचे जाने के आरोप भी सामने आए हैं। बेहटा की 30.55 एकड़ जमीन की वर्ष 1994 में हुई बिक्री को लेकर आर्थिक अपराध शाखा से जांच की मांग किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    हालांकि मौजूदा भू-स्वामियों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि उनकी जमीन वास्तव में 29 अप्रैल 2024 के अभिरक्षक आदेश या प्रमाण पत्र में शामिल है या नहीं। नोटिस में रियाज मंजिल को शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने और संबंधित खसरे में शत्रु संपत्ति जांच की प्रविष्टि दोनों का उल्लेख है। ऐसे में अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल कोहेफिजा सहित बैरागढ़ और आसपास के क्षेत्रों में पुराने संपत्ति रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ने से इस मामले ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है।