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  • 25 दिन बाद भी नहीं सुलझी गुत्थी, पुलिस को साइबर रिपोर्ट और बिसरा जांच का इंतजार

    25 दिन बाद भी नहीं सुलझी गुत्थी, पुलिस को साइबर रिपोर्ट और बिसरा जांच का इंतजार


    मध्य प्रदेश । भोपाल के अशोका गार्डन क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही 18 वर्षीय ख्याति जैन की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। घटना के 25 दिन बाद सामने आए एक वीडियो ने जांच की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिवार ने वीडियो को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    नए वीडियो ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
    ख्याति जैन की मौत की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ सकी है। इसी बीच सामने आए दो सीसीटीवी वीडियो में तनिष चंद्रवंशी नाम का युवक ख्याति के घर में प्रवेश करता और कुछ देर बाद बाहर निकलता दिखाई दे रहा है। एक वीडियो में युवक हेलमेट पहनकर घर के अंदर जाता नजर आता है, जबकि दूसरे वीडियो में वह बिना हेलमेट घर में प्रवेश करता दिखाई देता है। वीडियो सामने आने के बाद परिवार का कहना है कि इन फुटेज की गहन जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। परिवार का आरोप है कि घटना के इतने दिनों बाद भी जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पर्याप्त पड़ताल नहीं की गई है।

    मां ने उठाए गंभीर सवाल
    मृतका की मां वर्षा जैन का कहना है कि मामले में संदेही युवक की भूमिका की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। उनका दावा है कि ख्याति के सोशल मीडिया अकाउंट, विशेष रूप से इंस्टाग्राम के उपयोग और एक्सेस को लेकर कई ऐसे तथ्य हैं, जिनकी जांच अभी बाकी है। वर्षा जैन का आरोप है कि सीसीटीवी फुटेज में युवक के घर से निकलने के कुछ मिनट बाद ही ख्याति के मोबाइल फोन से आत्महत्या से जुड़ा एक संदेश भेजा गया था। ऐसे में मोबाइल गतिविधियों, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी के साथ उनके संबंध बेहद अच्छे थे। मदर्स डे पर ख्याति ने उन्हें उपहार देकर सम्मानित महसूस कराया था। पढ़ाई को लेकर भी वह बेहद गंभीर थी और अपने भविष्य को लेकर लगातार योजनाएं बना रही थी।

    कमरे की दीवारों पर लिखे थे सपने
    परिवार के अनुसार ख्याति अपने लक्ष्य और महत्वाकांक्षाओं को लेकर बेहद स्पष्ट थी। उसके कमरे में लिखे गए प्रेरणादायक नोट्स और व्यक्तिगत संदेश यह संकेत देते हैं कि वह अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थी। मां का कहना है कि ख्याति अपने लगभग हर लक्ष्य के साथ “मां के लिए करना है” जैसी बातें लिखती थी। सोशल मीडिया पर भी वह अपनी मां के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने वाले संदेश साझा करती रहती थी। परिवार का दावा है कि ख्याति और तनिष की दोस्ती को लेकर उन्हें आपत्ति थी और इसी वजह से उनकी गैरमौजूदगी में युवक घर पहुंचा था। यही कारण है कि वे उसकी भूमिका की गहन जांच की मांग कर रहे हैं।

    पुलिस को साइबर रिपोर्ट और बिसरा रिपोर्ट का इंतजार
    मामले की जांच कर रही पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। थाना प्रभारी अनुराग लाल के अनुसार ख्याति के मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण कराया जा रहा है। साइबर सेल से रिपोर्ट मांगी गई है, जबकि बिसरा जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया गतिविधियों, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
    पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार ख्याति की मौत बाएं हाथ की कलाई में लगी चोट से हुए अत्यधिक रक्तस्राव और सदमे के कारण हुई थी। हालांकि डॉक्टरों ने किसी विषैले पदार्थ की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। इसी कारण रक्त और आंतरिक अंगों के नमूनों को सुरक्षित रखकर रासायनिक एवं विष विज्ञान परीक्षण के लिए भेजा गया है। अंतिम चिकित्सकीय राय रिपोर्ट आने के बाद ही दी जाएगी। फिलहाल पुलिस आत्महत्या सहित अन्य सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है, जबकि परिवार लगातार निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग पर अड़ा हुआ है।

  • कोहेफिजा में दर्दनाक घटना: पहले छात्रा ने दी जान, फिर मकान मालिक की मौत से इलाके में हड़कंप

    कोहेफिजा में दर्दनाक घटना: पहले छात्रा ने दी जान, फिर मकान मालिक की मौत से इलाके में हड़कंप


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का पॉश इलाका कोहेफिजा इस समय दोहरी आत्महत्या की घटनाओं से स्तब्ध है। तीन महीने पहले गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) की एक होनहार छात्रा की मौत से उपजा विवाद थमा भी नहीं था कि अब उसी मकान के मालिक ने मौत को गले लगा लिया है। शनिवार देर रात हुई इस घटना ने पुलिस प्रशासन और जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मृतक की पहचान विजय राठौर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विजय उसी मकान के मालिक थे, जहाँ एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी किराए पर रहती थी। फरवरी माह में रोशनी का शव उसके बाथरूम में मिला था, जिसके बाद से ही विजय और उनका परिवार लगातार जांच के दायरे में और मानसिक तनाव में था।

    आरोपों के घेरे में जांच और छात्रा के परिजन
    विजय राठौर की आत्महत्या के बाद उनकी पत्नी करुणा राठौर ने व्यवस्था और छात्रा के परिजनों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। करुणा का कहना है कि उनके पति अपराधी नहीं थे, लेकिन छात्रा की मौत के बाद से उन्हें एक अपराधी की तरह प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि रोशनी के परिजन लगातार घर आकर उन्हें धमकाते थे और झूठे केस में फंसाने का दबाव बना रहे थे।

    पत्नी का यह भी दर्द छलका कि पुलिस की कार्यप्रणाली ने विजय को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। करुणा के अनुसार, पुलिस बार-बार बयान दर्ज करने के नाम पर विजय को थाने बुलाती थी और वहां घंटों बिना किसी ठोस वजह के बैठाकर रखा जाता था। सामाजिक लोक-लाज और लगातार पूछताछ के डर ने विजय को गहरे अवसाद (Depression) में धकेल दिया, जिसका परिणाम शनिवार की रात इस आत्मघाती कदम के रूप में सामने आया।

    क्या था रोशनी सुसाइड केस?
    मामले की जड़ें फरवरी 2026 की उस घटना में हैं, जब 19 वर्षीय छात्रा रोशनी ने अपने कमरे में खुदकुशी कर ली थी। उस वक्त मेडिकल कॉलेज के छात्रों और रोशनी के परिवार ने इसे हत्या करार देते हुए कोहेफिजा थाने का घेराव किया था। हालांकि, बाद में पुलिस को रोशनी के मोबाइल से एक ‘डिजिटल सुसाइड नोट’ मिला था, जिसमें उसने नीट और एमबीबीएस की पढ़ाई के अत्यधिक तनाव का जिक्र किया था। पुलिस ने मामले की गहराई से जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन भी किया था, लेकिन अब तक कोई आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं हुई थी।

    पुलिसिया कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
    मकान मालिक की आत्महत्या के बाद कोहेफिजा पुलिस एक बार फिर रक्षात्मक मुद्रा में है। थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि विजय राठौर की मौत के मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। पुलिस फिलहाल उनकी बेटी के बेंगलुरु से आने का इंतजार कर रही है, जिसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या वाकई विजय पर किसी तरह का बाहरी दबाव था या उन्होंने किसी अन्य निजी कारण से यह कदम उठाया।

    यह घटनाक्रम न केवल एक परिवार की तबाही की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किसी मामले की लंबी खिंचती जांच और सामाजिक दबाव किस तरह एक निर्दोष व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर घातक प्रहार कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि एसआईटी इन दोनों मौतों के अंतर्संबंधों की गुत्थी कैसे सुलझाती है।