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  • भोपाल के स्पा सेंटर में मिलीं युगांडा की दो महिलाएं, पासपोर्ट-वीजा नहीं दिखा सकीं, पुलिस ने संचालक पर दर्ज किया केस

    भोपाल के स्पा सेंटर में मिलीं युगांडा की दो महिलाएं, पासपोर्ट-वीजा नहीं दिखा सकीं, पुलिस ने संचालक पर दर्ज किया केस

    भोपाल । भोपाल में पुलिस की रूटीन चेकिंग के दौरान अयोध्या नगर स्थित एक स्पा सेंटर में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। शुक्रवार रात पुलिस ने थाई आरोमा वेलनेस सेंटर फैमिली सैलून एंड स्पा की जांच की तो वहां काम करने वाली युगांडा की दो महिलाएं पासपोर्ट और वीजा से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं। इसके अलावा सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया गया था। पुलिस ने इन अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए सेंटर संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फिलहाल दोनों विदेशी महिलाओं के भारत आने और यहां रहने से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार 30 अक्टूबर की रात करीब आठ बजे अयोध्या नगर क्षेत्र में नियमित जांच के दौरान थाई आरोमा वेलनेस सेंटर का निरीक्षण किया गया। इस दौरान सेंटर के भीतर छह महिलाएं और एक पुरुष कर्मचारी मौजूद मिले। जांच के दौरान दो महिलाओं ने अपनी पहचान रशीम उर्फ मैसी और ईरीन उर्फ नीना के रूप में बताई। दोनों ने स्वयं को युगांडा का निवासी बताया। पुलिस ने जब उनसे भारत आने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि वे नौकरी की तलाश में भारत आई थीं।

    इसके बाद पुलिस ने दोनों महिलाओं से उनके पासपोर्ट और वीजा संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा। हालांकि वे मौके पर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके भारत आगमन और यहां रहने की स्थिति से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू कर दी। विदेशी नागरिकों के मामले में उनकी पहचान और वैध दस्तावेजों की पुष्टि महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में पुलिस अब संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

    जांच के दौरान स्पा सेंटर में कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़ी अनियमितता भी सामने आई। सेंटर की मैनेजर पूजा नरवाड़े ने पुलिस को बताया कि वहां अन्य कर्मचारी भी काम करते हैं। हालांकि जांच के समय कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। पुलिस ने इस लापरवाही को निर्धारित निर्देशों का उल्लंघन माना है। इसी आधार पर सेंटर संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस के मुताबिक भोपाल पुलिस आयुक्त ने 15 सितंबर 2026 को स्पा सेंटर ब्यूटी पार्लर और अन्य संबंधित संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था। इसका उद्देश्य ऐसे संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की पहचान और पृष्ठभूमि का सत्यापन सुनिश्चित करना है। आदेश का पालन नहीं करने वाले संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसी व्यवस्था के तहत अयोध्या नगर स्थित स्पा सेंटर में मिली अनियमितताओं पर कार्रवाई की गई है।

    फिलहाल पुलिस दोनों विदेशी महिलाओं से जुड़े दस्तावेजों और भारत में उनके प्रवास की स्थिति की जानकारी जुटा रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि उनके पास आवश्यक दस्तावेज क्यों उपलब्ध नहीं थे और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। साथ ही सेंटर में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इस घटना के बाद स्पा सेंटर और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में कर्मचारियों के सत्यापन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • माफी मांगने के बाद भी नहीं रुकी पिटाई, भोपाल के स्कूल में चौथी के छात्र के साथ मारपीट का आरोप, पिता ने मांगी सख्त कार्रवाई

    माफी मांगने के बाद भी नहीं रुकी पिटाई, भोपाल के स्कूल में चौथी के छात्र के साथ मारपीट का आरोप, पिता ने मांगी सख्त कार्रवाई


    भोपाल । भोपाल के फादर एग्नेल स्कूल में चौथी कक्षा के एक छात्र के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घटना 8 अक्टूबर की बताई जा रही है। छात्र के पिता उजेर अहमद ने गांधी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए स्कूल के प्रिंसिपल मनोहर काटा पर बेटे के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। पिता के मुताबिक घटना के बाद बच्चे के चेहरे और कंधे पर चोट के निशान दिखाई दिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि बच्चे को सुनने में परेशानी होने लगी और घर पहुंचने के बाद चक्कर आने से वह गिर गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चे का हमीदिया अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया है।
    बच्चे के पिता उजेर अहमद के अनुसार 8 अक्टूबर को उनका बेटा स्कूल से घर लौटा तो उसने अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। बच्चे ने कथित तौर पर कहा कि स्कूल के प्रिंसिपल मनोहर काटा ने उसके साथ मारपीट की। पिता का कहना है कि मारपीट के दौरान बच्चा माफी मांगता रहा लेकिन इसके बावजूद पिटाई नहीं रुकी। घर पहुंचने पर जब परिजनों ने बच्चे की स्थिति देखी तो उन्हें उसके चेहरे और कंधे पर चोट के निशान नजर आए। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद बच्चे को कान से ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था। इसके अलावा उसे चक्कर आने की शिकायत भी हुई जिसके बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से लिया।
    पिता ने बताया कि घटना के दिन ही उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला किया। उनके मुताबिक 8 अक्टूबर की रात करीब 11 से 11:30 बजे के बीच वह गांधी नगर थाने पहुंचे और शिकायत दी। उजेर अहमद का कहना है कि शिकायत के बाद से उन्हें जांच जारी होने और मेडिकल रिपोर्ट मंगाए जाने की जानकारी दी जा रही है। हालांकि उनके अनुसार अभी तक मामले में कार्रवाई को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। पिता ने पुलिस से मांग की है कि शिकायत पर गंभीरता से जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
    उजेर अहमद ने यह आरोप भी लगाया है कि स्कूल से जुड़े एक व्यक्ति ने फोन करके उनसे समझौता करने के लिए कहा। पिता का कहना है कि वह मामले में समझौता करने के बजाय निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उन्होंने संबंधित प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की है। उनका कहना है कि बच्चे की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और स्कूल में ऐसी घटना के आरोपों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
    इस मामले में फिलहाल स्कूल प्रबंधन और संबंधित प्रिंसिपल का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में घटना को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट से ही चोटों की प्रकृति तथा घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मामले में स्कूल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद घटनाक्रम की तस्वीर और साफ हो सकती है।
    स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन के तरीकों को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा दिलाने की उम्मीद से स्कूल भेजते हैं। ऐसे में किसी छात्र के साथ मारपीट का आरोप सामने आने पर निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। फिलहाल बच्चे के पिता ने कार्रवाई की मांग की है और अब इस मामले में पुलिस जांच तथा मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
  • भोपाल IAS मर्डर केस: घर में गला रेती लाश और फरार केयरटेकर ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती लूट से लेकर पुराने विवाद तक जांच

    भोपाल IAS मर्डर केस: घर में गला रेती लाश और फरार केयरटेकर ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती लूट से लेकर पुराने विवाद तक जांच


    नई दिल्ली। भोपाल के रातीबड़ इलाके के सूरज नगर में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद पुलिस की जांच कई एंगल पर आगे बढ़ रही है। 30 सितंबर की सुबह अग्रवाल अपने घर में मृत मिले थे। उनके गले पर धारदार हथियार से हमला किए जाने के निशान थे। घटना के बाद पुलिस ने घर के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ ही उनके पुराने विवादों और हाल की गतिविधियों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। जांच में करीब 11 महीने पुराने एक करोड़ रुपए से अधिक के कथित धोखाधड़ी मामले का एंगल भी सामने आया है। हालांकि पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि पुराने मामले का हत्या से सीधा संबंध है।

    जानकारी के मुताबिक राकेश अग्रवाल ने करीब 11 महीने पहले अपने पूर्व परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत की थी। आरोप था कि कंपनी में निवेश कराने और बेहतर रिटर्न दिलाने का भरोसा देकर उनसे एक करोड़ रुपए से अधिक की रकम अलग अलग किस्तों में ली गई थी। रकम वापस नहीं मिलने के बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद अक्टूबर 2025 में पुलिस ने अजीत पाटनी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था और उसे गिरफ्तार किया गया था। अब इसी मामले में अग्रवाल की गवाही और अदालत में चल रही कार्रवाई को भी पुलिस जांच के दायरे में रख रही है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या गवाही या कोर्ट की कार्रवाई को लेकर राकेश अग्रवाल पर किसी तरह का दबाव बनाया गया था। हालांकि अभी तक ऐसा कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि पुराने धोखाधड़ी मामले के कारण ही हत्या हुई। पुलिस दोनों घटनाओं के बीच संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है।

    इस बीच हत्या की जांच में घर के केयरटेकर अरुण का नाम प्रमुखता से सामने आया है। पुलिस के अनुसार वारदात रात करीब 12 बजे से 2 बजे के बीच होने की आशंका है। इसके बाद करीब 2 बजकर 15 मिनट पर अरुण सीसीटीवी कैमरे में सूरज नगर से भदभदा की तरफ जाता दिखाई दिया। फुटेज में उसके पास पिट्ठू बैग भी नजर आने की बात सामने आई है। घटना के बाद से वह फरार है। पुलिस की पांच टीमें और क्राइम ब्रांच उसकी तलाश में जुटी हैं। उसकी आखिरी लोकेशन कुरवाई बीना रोड की ओर मिलने की जानकारी भी सामने आई है।

    पुलिस लूट के एंगल की भी जांच कर रही है। घर में सामान और अलमारी की स्थिति को देखते हुए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हत्या के पीछे चोरी या लूट का मकसद था। इसके साथ ही मृतक के पुराने मामलों कोर्ट से जुड़े दस्तावेज परिचितों और हाल के संपर्कों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

    पुलिस को यह भी पता चला है कि केयरटेकर को एक होम हेल्थ केयर एजेंसी के माध्यम से राकेश अग्रवाल के घर काम पर रखा गया था। पुलिस एजेंसी के कार्यालय पहुंचकर उसके दस्तावेज नौकरी से जुड़ी जानकारी और पुलिस वेरिफिकेशन से संबंधित रिकॉर्ड जुटा रही है। इन दस्तावेजों के आधार पर उसके पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस केयरटेकर की गिरफ्तारी को अहम मान रही है। अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के बाद हत्या की वास्तविक वजह और घटनाक्रम को लेकर तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। मुख्यमंत्री ने भी डीजीपी को मामले की निगरानी करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस पुराने धोखाधड़ी विवाद लूट और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है।

  • भोपाल में जुआ फड़ पर पुलिस की छापेमारी: कई जुआरी गिरफ्तार, TI समेत 3 पर गिरी गाज

    भोपाल में जुआ फड़ पर पुलिस की छापेमारी: कई जुआरी गिरफ्तार, TI समेत 3 पर गिरी गाज


    भोपाल । भोपाल के चौक बाजार इलाके में जुए के अड्डे पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद कोतवाली थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। एसीपी कोतवाली संतोष पटेल की टीम ने क्षेत्र में दबिश देकर दर्जनभर से ज्यादा जुआरियों को पकड़ा था। मौके से करीब सवा दो लाख रुपए भी जब्त किए गए थे। कार्रवाई के बाद जब अधिकारियों ने जुए के अड्डे के संचालन और स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर जानकारी जुटाई तो थाना स्तर पर लापरवाही का मामला सामने आया। इसके बाद कोतवाली थाना प्रभारी प्रभात गौड़ को निलंबित कर दिया गया।

    थाना प्रभारी के साथ बीट प्रभारी एएसआई राकेश गुर्जर और माइक्रो बीट प्रभारी आरक्षक नरेंद्र रावत पर भी कार्रवाई की गई है। तीनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच करने के साथ निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई डीसीपी जोन तीन आयुष गुप्ता के स्तर से की गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चौक बाजार क्षेत्र में जुआ चलने की जानकारी सामने आने के बावजूद उसे रोकने के लिए थाना स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई थी।

    दरअसल गत दिवस एसीपी कोतवाली संतोष पटेल अपनी टीम के साथ चौक बाजार क्षेत्र में पहुंचे थे। टीम ने जुए के अड्डे पर अचानक दबिश दी। पुलिस की कार्रवाई से वहां मौजूद जुआरियों में अफरा तफरी मच गई। टीम ने दर्जनभर से ज्यादा लोगों को पकड़ा और मौके से करीब 2.25 लाख रुपए बरामद किए। इस कार्रवाई के बाद वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान इस बात पर गया कि जिस इलाके में जुआ चल रहा था वहां स्थानीय पुलिस की ओर से पहले क्या कार्रवाई की गई थी।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जुआ बंद कराने को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से पहले निर्देश दिए जा चुके थे। इसके बावजूद गतिविधियां पूरी तरह नहीं रुक सकीं। थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर पुलिस अधिकारियों ने जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी जांच के दौरान थाना प्रभारी प्रभात गौड़ पर जुआरियों को संरक्षण देने से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की गई। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और विभागीय कार्रवाई के आधार पर ही तय होगा।

    बीट और माइक्रो बीट स्तर के पुलिसकर्मियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया। अधिकारियों का मानना है कि किसी क्षेत्र में लगातार अवैध गतिविधि चलने की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होना पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। इसी आधार पर थाना प्रभारी के साथ बीट प्रभारी और माइक्रो बीट प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।

    भोपाल में जुए से जुड़े मामलों में थाना स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई का यह दूसरा बड़ा मामला बताया जा रहा है। इससे पहले बजरिया थाना प्रभारी शिल्पा कौरव को भी निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ भी जुआरियों को संरक्षण देने से जुड़े आरोप सामने आए थे। अब कोतवाली क्षेत्र की कार्रवाई के बाद तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन से पुलिस विभाग में जिम्मेदारी और निगरानी को लेकर सख्ती का संकेत मिला है।

    एसीपी कोतवाली संतोष पटेल ने कोतवाली थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की पुष्टि की है। पुलिस अब चौक बाजार में जुए के अड्डे से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि वहां जुए की गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और इसमें कौन कौन लोग शामिल थे। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

  • भोपाल में पुलिस ने पीछा कर पकड़ी शराब से भरी स्कॉर्पियो भागने की कोशिश में डिवाइडर से टकराई गाड़ी 40 पेटी शराब जब्त

    भोपाल में पुलिस ने पीछा कर पकड़ी शराब से भरी स्कॉर्पियो भागने की कोशिश में डिवाइडर से टकराई गाड़ी 40 पेटी शराब जब्त


    भोपाल। भोपाल में अवैध शराब के परिवहन के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक स्कॉर्पियो वाहन को पकड़ लिया है। कजलीखेड़ा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक स्कॉर्पियो के जरिए बड़ी मात्रा में शराब ले जाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन पर नजर रखना शुरू किया और उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस को देखकर चालक ने वाहन रोकने के बजाय उसे तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने स्कॉर्पियो का पीछा शुरू कर दिया।

    पुलिस के पीछा करने के दौरान चालक ने वाहन को बचाकर निकालने का प्रयास किया लेकिन कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। हादसे में चालक को मामूली चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। जब पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाशी ली तो उसके अंदर बड़ी मात्रा में शराब रखी मिली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन से करीब 40 पेटी शराब बरामद की गई है।

    पुलिस ने शराब के साथ स्कॉर्पियो को भी जब्त कर लिया है। कार्रवाई के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद शराब किस जगह से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। इसके साथ ही शराब के अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक वाहन चालक से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के जरिए यह जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है कि स्कॉर्पियो में शराब किसके कहने पर भरी गई थी और इसके पीछे किसी बड़े शराब तस्करी नेटवर्क का हाथ तो नहीं है। पुलिस शराब की कुल मात्रा और उसकी अनुमानित कीमत का भी पता लगा रही है।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब वाहन से जुड़े दस्तावेजों और शराब के संबंध में उपलब्ध जानकारी की जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि बरामद शराब वैध तरीके से खरीदी गई थी या इसे अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल कजलीखेड़ा पुलिस ने स्कॉर्पियो और उसमें मिली शराब को जब्त कर लिया है। चालक से पूछताछ जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं। अवैध शराब के परिवहन के खिलाफ पुलिस की इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बड़ी मात्रा में शराब एक वाहन के जरिए ले जाई जा रही थी। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

  • भोपाल में पुलिस आरक्षक को बनाया बंधक! रातभर कार में घुमाया और जंगल में फेंकने की दी धमकी

    भोपाल में पुलिस आरक्षक को बनाया बंधक! रातभर कार में घुमाया और जंगल में फेंकने की दी धमकी


    भोपाल । भोपाल में नाइट गश्त के दौरान खुले में शराब पी रहे दो युवकों को रोकना एक पुलिस आरक्षक के लिए बेहद खतरनाक साबित हुआ। शाहपुरा थाना क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों ने जब कार में शराब पी रहे युवकों को थाने चलने के लिए कहा तो आरोपियों ने आरक्षक को ही अपनी कार में बैठा लिया और थाने ले जाने के बजाय उसे रातभर शहर में घुमाते रहे। इस दौरान आरक्षक के साथ मारपीट की गई और उसे जंगल में ले जाकर फेंकने की धमकी भी दी गई। हालांकि आरक्षक ने हिम्मत और सूझबूझ दिखाते हुए अपने साथी को मोबाइल से लाइव लोकेशन भेज दी जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

    घटना 8 और 9 अगस्त की दरमियानी रात की बताई जा रही है। शाहपुरा थाने में पदस्थ आरक्षक सुंदर पटेल और आरक्षक मयंक ठाकुर नाइट रूटीन ड्यूटी पर थे। गश्त के दौरान दोनों पुलिसकर्मी दाना पानी रेस्टोरेंट के सामने पहुंचे। यहां उन्हें एक कार में दो युवक शराब पीते हुए दिखाई दिए। पुलिसकर्मियों ने दोनों युवकों से पूछताछ की और उन्हें थाने चलने के लिए कहा।

    इसके बाद आरक्षक मयंक ठाकुर बाइक से थाने की ओर निकल गए जबकि आरक्षक सुंदर पटेल दोनों युवकों की कार में बैठ गए। पुलिस के मुताबिक कार में सवार भूपेंद्र शर्मा और ऋषि नामदेव ने आरक्षक को शाहपुरा थाने ले जाने के बजाय कार को दूसरी दिशा में दौड़ा दिया। आरक्षक को कुछ समझ आता उससे पहले ही दोनों आरोपी उसे लेकर एमपी नगर की तरफ निकल गए।

    कार के भीतर आरक्षक के साथ मारपीट की गई। आरोपियों ने उसे जंगल में ले जाकर फेंकने की धमकी भी दी। खतरे को भांपते हुए सुंदर पटेल ने किसी तरह अपने साथी आरक्षक को मोबाइल से अपनी लाइव लोकेशन शेयर कर दी। जब आरोपियों को इसका पता चला तो उन्होंने आरक्षक के साथ दोबारा मारपीट शुरू कर दी। इसके बावजूद आरक्षक ने हिम्मत नहीं छोड़ी।

    आरक्षक मयंक ठाकुर को मिली लोकेशन के आधार पर उन्होंने बाइक से कार का पीछा शुरू कर दिया। आरोपी गणेश मंदिर होते हुए डीबी मॉल की तरफ पहुंचे। जीजी फ्लाईओवर के पास ट्रैफिक और पुलिस की घेराबंदी के कारण कार की रफ्तार धीमी हुई। इसी मौके का फायदा उठाकर सुंदर पटेल ने कार का दरवाजा खोला और बाहर कूद गए। आरोपियों ने कार रोकी और उन्हें फ्लाईओवर के पास उतारकर वहां से फरार हो गए।

    घटना के बाद पुलिस ने कार के नंबर और आसपास लगे CCTV कैमरों की मदद से दोनों आरोपियों की पहचान की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भूपेंद्र शर्मा और ऋषि नामदेव को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ अपहरण शासकीय कार्य में बाधा डालने मारपीट और धमकी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस के अनुसार भूपेंद्र शर्मा मूल रूप से गंजबासौदा का रहने वाला है और उसके खिलाफ विदिशा में हत्या के प्रयास का मामला पहले से दर्ज है। वह हाल ही में कोलार इलाके में रहने आया था। दूसरा आरोपी ऋषि नामदेव बावड़िया कला क्षेत्र का निवासी बताया गया है। दोनों आरोपी ड्राइवरी का काम करते हैं। पुलिस के मुताबिक घटना में इस्तेमाल कार एक ट्रैवल्स कंपनी से अटैच है।

    शाहपुरा पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में अपहरण शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब घटना के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। आरोप सिद्ध होने पर संबंधित धाराओं के तहत आरोपियों को कई वर्षों तक की सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

  • राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त

    राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त


    भोपाल। राजधानी भोपाल के संवेदनशील माने जाने वाले इतवारा इलाके में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात पुलिस ने नशे के कारोबार और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। डीसीपी जोन तीन आयुष गुप्ता के नेतृत्व में करीब 200 पुलिसकर्मियों की टीम ने सुनियोजित तरीके से इलाके के 24 से अधिक घरों और संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। देर रात शुरू हुआ यह ऑपरेशन कई घंटों तक चलता रहा जिससे पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई।

    पुलिस की यह कार्रवाई पहले से तैयार रणनीति के तहत की गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ अलग अलग टीमों ने एक ही समय पर कई स्थानों पर छापेमारी की ताकि किसी भी संदिग्ध को भागने या सबूत नष्ट करने का मौका न मिल सके। कार्रवाई के दौरान कई घरों की गहन तलाशी ली गई और पुलिस ने गांजा सहित अन्य अवैध मादक पदार्थ बरामद किए। हालांकि जब्त किए गए नशीले पदार्थों की कुल मात्रा का आधिकारिक खुलासा अभी नहीं किया गया है।

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक दर्जन से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया है। अधिकारियों के अनुसार इन सभी से पूछताछ की जा रही है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड तथा नशे के अवैध कारोबार से संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा या पूछताछ के बाद कुछ को छोड़ दिया जाएगा।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और मामले की जांच लगातार जारी है। बरामद मादक पदार्थों की जांच की जा रही है तथा अन्य संभावित ठिकानों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का उद्देश्य नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना और इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है।

    सूत्रों के अनुसार यह अभियान लंबे समय से मिल रही शिकायतों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाया गया। इतवारा क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने एक साथ बड़े स्तर पर कार्रवाई का फैसला लिया ताकि पूरे नेटवर्क को एक ही अभियान में निशाना बनाया जा सके।

    पुलिस ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा की जाएगी। इसमें बरामद नशीले पदार्थों की मात्रा गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की पूरी जानकारी दी जाएगी। पुलिस ने यह भी संकेत दिए हैं कि राजधानी में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आगे भी इसी तरह के विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके और शहर में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।

  • क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

    क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल


    भोपाल । भोपाल के चर्चित अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के निलंबन के बाद अब केवल उनके खिलाफ लगे आरोप ही चर्चा का विषय नहीं हैं, बल्कि पुलिस विभाग की पोस्टिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुनील शर्मा के खिलाफ पहले से एक आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद उन्हें राजधानी भोपाल के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील थानों में गिने जाने वाले अरेरा हिल्स थाने का प्रभारी बनाया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशों के पालन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

    पूरा मामला तब सामने आया जब एक युवक ने पुलिस आयुक्त से शिकायत कर आरोप लगाया कि अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के उसकी पत्नी से अनैतिक संबंध हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि थाने में पदस्थ आरक्षक नंदकिशोर इस पूरे मामले में टीआई का सहयोग कर रहा था और महिला पर दबाव बनाने में उसकी भूमिका थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को निलंबित कर दिया।

    मामले की जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सुनील शर्मा के खिलाफ गुना कोतवाली में पहले से एक आपराधिक प्रकरण दर्ज है और यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को निर्धारित है। इसके बावजूद उन्हें भोपाल जैसे संवेदनशील जिले के वीआईपी थाने का प्रभार सौंपा गया, जिसने विभागीय प्रक्रिया और नियमों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस मुख्यालय ने वर्षों पहले ही ऐसे मामलों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। 15 अक्टूबर 2014 को जारी आदेश में कहा गया था कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले, विभागीय जांच, भ्रष्टाचार अथवा लोकायुक्त संबंधी प्रकरण लंबित हों, उन्हें थानों या अन्य संवेदनशील पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। इसके बाद 17 जून 2025 को भी पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को दोबारा निर्देश जारी कर कहा था कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण, नैतिक अधःपतन या अवैध निरोध जैसे गंभीर आरोप लंबित हों, उन्हें थानों, क्राइम ब्रांच या किसी महत्वपूर्ण कार्यालय में पदस्थ नहीं किया जाए।

    इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सुनील शर्मा की नियुक्ति ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पोस्टिंग से पहले उनके सेवा रिकॉर्ड और लंबित मामलों की जांच की गई थी। यदि जांच हुई थी तो नियमों के बावजूद उन्हें संवेदनशील जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई। वहीं यदि जांच नहीं हुई तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया में बड़ी चूक मानी जा सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग की जवाबदेही पर भी बहस तेज हो गई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि पोस्टिंग नियमों के विपरीत हुई है तो क्या केवल संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी या फिर ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी जिन्होंने नियमों के बावजूद यह पदस्थापना की।

    डीसीपी जोन-3 विकास सेहवाल ने बताया कि महिला के पति की शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल यह मामला केवल एक थाना प्रभारी के निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस विभाग की पारदर्शिता, पोस्टिंग प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर बहस का विषय बन चुका है।

  • अपराधियों पर पुलिस की कड़ी नजर पुराने भोपाल में रातभर चला चेकिंग अभियान कई वाहनों की जांच

    अपराधियों पर पुलिस की कड़ी नजर पुराने भोपाल में रातभर चला चेकिंग अभियान कई वाहनों की जांच


    भोपाल । भोपाल के पुराने शहर में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा अपराधियों पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से मंगलवार देर रात पुलिस ने व्यापक चेकिंग और सर्च अभियान चलाया। अभियान के दौरान शहर के कई थाना क्षेत्रों में प्रमुख चौराहों बाजारों और संवेदनशील इलाकों में बैरिकेड्स लगाकर आने जाने वाले वाहनों की गहन जांच की गई। पुलिस की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना अपराधियों में कानून का भय बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

    रातभर चले इस अभियान के दौरान पुलिस ने बिना किसी ठोस कारण देर रात सड़कों पर घूम रहे लोगों से पूछताछ की। उनकी पहचान की पुष्टि की गई और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों पर विशेष नजर रखी गई। जरूरत पड़ने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की गई ताकि किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

    अभियान के दौरान दोपहिया और चारपहिया वाहनों की भी सघन जांच की गई। वाहन चालकों से ड्राइविंग लाइसेंस वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई। जिन लोगों ने यातायात नियमों का उल्लंघन किया उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई। पुलिस ने बिना हेलमेट वाहन चलाने ओवरलोडिंग और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी सख्ती दिखाई।

    सिर्फ वाहन जांच तक ही अभियान सीमित नहीं रहा बल्कि पुलिस टीमों ने पुराने भोपाल के संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त भी की। बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मौजूद लोगों से बातचीत कर उन्हें सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी दी गई। पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

    डीसीपी आयुष गुप्ता ने बताया कि शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों में कानून का डर कायम रखने के लिए इस तरह के विशेष अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना ही नहीं बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करना भी है। इसके साथ ही यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए भी नियमित रूप से विशेष अभियान जारी रहेंगे।

    भोपाल पुलिस का मानना है कि लगातार निगरानी सघन चेकिंग और आम जनता के सहयोग से अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत भविष्य में भी शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे अभियान चलाए जाते रहेंगे ताकि राजधानी में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे और नागरिक सुरक्षित वातावरण में रह सकें।

  • भोपाल के ईरानी डेरे में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 17 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार, कई मामलों में वांटेड आरोपी दबोचे गए

    भोपाल के ईरानी डेरे में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 17 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार, कई मामलों में वांटेड आरोपी दबोचे गए


    मध्‍य प्रदेश । भोपाल में फरार अपराधियों और न्यायालय से जारी वारंट वाले आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए निशातपुरा क्षेत्र के ईरानी डेरा अमन कॉलोनी में विशेष सर्चिंग अभियान चलाया। करीब 40 पुलिसकर्मियों की संयुक्त टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई के दौरान दो ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जिनकी तलाश लंबे समय से विभिन्न जिलों की पुलिस कर रही थी। पुलिस की अचानक हुई दबिश से क्षेत्र में कुछ समय के लिए हलचल और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर संजय सिंह के निर्देश पर 10 जून की शाम संचालित की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य फरार अपराधियों, वारंटियों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना था। पुलिस टीम ने इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाते हुए कई लोगों से पूछताछ भी की।

    कार्रवाई के दौरान निशातपुरा थाना क्षेत्र के निगरानीशुदा बदमाश सालिग उर्फ रेहान ईरानी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ भोपाल समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में लूट, चोरी, जालसाजी, मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों के कुल 24 मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और विभिन्न मामलों में उसकी तलाश की जा रही थी।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी पर कुल 17 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इसमें बैतूल जिले के रानीपुर थाने के एक मामले में 10 हजार रुपये, रायसेन कोतवाली क्षेत्र के प्रकरण में 5 हजार रुपये तथा भोपाल के पिपलानी थाने के मामले में 2 हजार रुपये का इनाम शामिल था। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया था। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित रूप से पुलिस को बताया कि वह लंबे समय से ईरानी डेरे में छिपकर रह रहा था।

    अभियान के दौरान पुलिस ने रिजवान हुसैन नामक एक अन्य आरोपी को भी हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार जिला पन्ना से जुड़े एक मामले में उससे पूछताछ की जानी है। रिकॉर्ड के मुताबिक रिजवान के खिलाफ मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में चोरी, लूट, जालसाजी और मारपीट जैसे लगभग 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि इन मामलों में अंतिम न्यायिक निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा किया जाना शेष है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान अन्य आपराधिक घटनाओं, फरार आरोपियों तथा संभावित गिरोह नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। इसके आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

    पुलिस का दावा है कि ईरानी डेरा क्षेत्र में लगातार की जा रही निगरानी और विशेष अभियानों के कारण मोबाइल झपटमारी तथा संपत्ति संबंधी अपराधों में कमी देखने को मिली है। इस संयुक्त कार्रवाई में निशातपुरा, छोला मंदिर और गांधीनगर थाना पुलिस की टीमों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।