Tag: Bhopal protest

  • 4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना

    4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना


    नई दिल्ली। भोपाल में वर्ग-2 माध्यमिक और वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। नीलम पार्क में 21 अगस्त से जारी अनिश्चितकालीन धरने के बीच ब्यावरा निवासी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत पिछले चार दिनों से निर्जल अनशन पर बैठे हैं। सोमवार रात करीब 3 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत हुई, जिसके बाद धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। आंदोलनकारियों के मुताबिक पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन नरेंद्र ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

    नरेंद्र राजपूत का कहना है कि जब तक सरकार शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं करती, तब तक वह धरना स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रशासन उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो धरना स्थल पर ही डॉक्टरों की टीम भेजकर स्वास्थ्य जांच कराई जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार चार दिन तक भोजन और पानी नहीं लेने के कारण नरेंद्र की हालत कमजोर हो रही है और ऐसे में प्रशासन को तत्काल स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।

    शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लंबे समय से वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में पर्याप्त पद शामिल नहीं किए गए। इसके चलते पात्रता और चयन परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए हैं। आंदोलनकारी अब सरकार से पदों की संख्या बढ़ाने के साथ बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं।

    अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 में प्रत्येक विषय के 3 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाए जाएं, जबकि वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद किए जाएं। उनका कहना है कि रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। इसी मांग को लेकर प्रदेशभर के अभ्यर्थी भोपाल में जुटे हैं और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

    इस आंदोलन में महिला अभ्यर्थियों की भी बड़ी भागीदारी है। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ नीलम पार्क में धरने पर बैठी हैं। इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर अपनी 5 और 8 साल की बेटियों के साथ आंदोलन में शामिल हैं। वहीं सरोज कुशवाहा अपने छोटे बेटे माधव के साथ धरना स्थल पर मौजूद हैं। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि बच्चों के साथ पार्क में रहना बेहद मुश्किल हो रहा है। मच्छरों की समस्या, पानी और वॉशरूम की परेशानी के अलावा छोटे तालाब के पास होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। इसके बावजूद वे अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रही हैं।

    पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से अभ्यर्थी 21 अगस्त को भोपाल पहुंचे थे। डीपीआई के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद अभ्यर्थियों ने रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच भी कई चरणों में भोपाल में प्रदर्शन और धरने किए जा चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पर अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ।

    अब नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर पदवृद्धि पर निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि वे किसी आश्वासन के बजाय लिखित आदेश चाहते हैं, ताकि बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग शुरू हो सके और शिक्षक भर्ती में चयन से वंचित योग्य अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति का अवसर मिल सके।

  • भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल ।राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस और अन्य शुल्क वसूले जाने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। पालक महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए घेराव किया और निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल फीस, बस शुल्क, किताबों और अन्य मदों में लगातार मनमानी वसूली कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा माफिया सक्रिय है और निजी स्कूल संचालकों के दबाव में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि अभिभावक लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

    प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने DEO कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना से प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अभिभावकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता बताया।

    अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर देते हैं, जबकि बस शुल्क और किताबों के नाम पर भी भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

    पालक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए और फीस, बस चार्ज तथा किताबों की कीमतों के लिए एक पारदर्शी और तय ढांचा बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषी स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई है।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव डालने वाले लोगों की जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। पालक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • भीम आर्मी और ASP का प्रदर्शन: यूजीसी समर्थन में 17 सूत्रीय ज्ञापन, दलित-आदिवासी और किसानों के मुद्दे उठाए

    भीम आर्मी और ASP का प्रदर्शन: यूजीसी समर्थन में 17 सूत्रीय ज्ञापन, दलित-आदिवासी और किसानों के मुद्दे उठाए

    भोपाल। भीम आर्मी भारत एकता मिशन और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने यूजीसी के समर्थन में राजधानी भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ता अंबेडकर जयंती मैदान पर इकट्ठे हुए और मुख्यमंत्री के नाम 17 सूत्रीय विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान संगठन ने चेतावनी दी कि यदि दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, किसान और छात्रों से जुड़ी मांगों पर तुरंत सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

    ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग ओबीसी आरक्षण की रही। संगठन ने 13% होल्ड आरक्षण तुरंत लागू करने और आगामी जातिगत जनगणना में पिछड़ा वर्ग की जातियों के लिए अलग कॉलम बनाने की मांग उठाई। इसके साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लंबित बैकलॉग पदों को विशेष भर्ती अभियान के जरिए भरने और पदोन्नति में आरक्षण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। शिक्षा क्षेत्र में संगठन ने यूजीसी विनियम 2026 में संशोधन की मांग की और वर्ष 2012 की तर्ज पर सख्त निर्देश जारी करने की अपील की ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव समाप्त हो। संगठन ने इक्विटी कमेटी और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन तंत्र में इन वर्गों की कम से कम 50% भागीदारी अनिवार्य करने की भी मांग की।

    किसानों के मुद्दे पर भी संगठन मुखर रहा। उन्होंने ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों के पारदर्शी सर्वेक्षण और तत्काल मुआवजे की मांग की। इसके अलावा नीमच स्थित धानुका इथेनॉल प्लांट से फैल रहे प्रदूषण की स्वतंत्र जांच कराने, एससी-एसटी वर्ग की आवंटित जमीनों से अवैध कब्जे हटाने और पुराने आंदोलन संबंधी मुकदमों को वापस लेने की मांग की।

    प्रशासनिक सुधारों में संगठन ने सीएम हेल्पलाइन की लापरवाही और चुनाव प्रक्रिया में बैलेट पेपर के विकल्प पर विचार करने का सुझाव भी दिया। इस दौरान भीम आर्मी के प्रदेश संयोजक सुनील बैरसिया, ASP कोर कमेटी सदस्य दामोदर यादव, प्रदेश प्रभारी विनोद यादव अम्बेडकर, सुनील अस्तेय, अनिल गुर्जर और युवा मोर्चा अध्यक्ष सतेंद्र सेंगर सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे।

  • भोपाल में ब्राह्मण समाज का उग्र प्रदर्शन: CM हाउस घेराव की कोशिश, पुलिस से झड़प; बैरिकेडिंग टूटी, वॉटर कैनन का इस्तेमाल

    भोपाल में ब्राह्मण समाज का उग्र प्रदर्शन: CM हाउस घेराव की कोशिश, पुलिस से झड़प; बैरिकेडिंग टूटी, वॉटर कैनन का इस्तेमाल

    भोपाल/ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को उस वक्त हालात तनावपूर्ण हो गए, जब ब्राह्मण समाज के प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हो गई। यह प्रदर्शन सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर किया गया था। ब्राह्मण समाज के लोगों का आरोप है कि संतोष वर्मा ने ब्राह्मण बेटियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। रविवार सुबह बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रोशनपुरा चौराहे पर एकत्र हुए। ग्वालियर से आए वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी शुरू की और मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने लगे। पुलिस ने पहले ही इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे और बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद किया गया था। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़ते हुए आगे बढ़ गए।

    रोशनपुरा चौराहे से आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारी बाणगंगा चौराहे तक पहुंच गए। यहां चार लेयर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे भी पार करने की कोशिश करते रहे। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए तीन बार चेतावनी दी, लेकिन जब भीड़ नहीं मानी तो मजबूरी में वॉटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। धक्का-मुक्की और भगदड़ के दौरान कई बुजुर्ग और महिलाएं घायल हो गईं। मौके पर मौजूद एम्बुलेंस और मेडिकल टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया।

    पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में बैठाकर रातीबड़ इलाके में ले जाकर तितर-बितर किया। काफी देर की मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव किया गया। इस बीच राज्य सरकार ने सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ बर्खास्तगी का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। यह प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग GADकी ओर से 12 दिसंबर को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग DoPTको भेजा गया था। हालांकि प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यह प्रस्ताव अधूरा और अस्पष्ट है।

    पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार ने बताया कि प्रस्ताव में यह साफ नहीं किया गया है कि सरकार संतोष वर्मा को पूरी तरह बर्खास्त करना चाहती है या सिर्फ उनका प्रमोशन रद्द करना चाहती है। दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं और इनके लिए अलग तरह के तथ्यों और सबूतों की जरूरत होती है। प्रस्ताव में केवल इतना उल्लेख है कि विभिन्न संगठनों से ज्ञापन मिले हैं और वर्मा के बयान से सामाजिक तनाव पैदा हुआ है। इसी अस्पष्टता के कारण आशंका जताई जा रही है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को वापस भी कर सकती है। वहीं, ब्राह्मण समाज और अन्य सवर्ण संगठनों का कहना है कि केवल प्रस्ताव भेजना पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि जब तक ठोस और अंतिम कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, ब्राह्मण रेजिमेंट समेत कई संगठनों ने प्रस्ताव भेजे जाने को पहली सफलता बताया है  लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई में देरी हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल मध्यप्रदेश सरकार ने विवाद बढ़ने के बाद संतोष वर्मा को कृषि विभाग से हटाकर मंत्रालय में उपसचिव के पद पर पदस्थ कर दिया है। बावजूद इसके, सामाजिक संगठनों का आक्रोश कम होता नजर नहीं आ रहा। 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री निवास घेराव की घोषणा पहले ही की जा चुकी है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी और प्रशासनिक हलचल और बढ़ने की संभावना है।