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  • विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क

    विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क


    भोपाल। भोपाल में गणपति विसर्जन का दौर शुरू होने वाला है लेकिन विसर्जन घाटों तक पहुंचने वाले कई प्रमुख रास्ते अभी भी बदहाल हैं। 22 सितंबर से गणपति विसर्जन शुरू होगा जबकि 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के मौके पर बड़े चल समारोह निकलेंगे। 26 सितंबर तक विसर्जन का सिलसिला जारी रहेगा। ऐसे में बड़ी झांकियों ट्रकों और जुलूसों की आवाजाही के दौरान सड़कों पर मौजूद गड्ढे और उखड़ी गिट्टी परेशानी बढ़ा सकती है। लोक निर्माण विभाग ने सड़कों के मेंटेनेंस के लिए 30 सितंबर की डेडलाइन तय की है लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण स्थायी पैचवर्क का काम प्रभावित हो रहा है।

    भोपाल में पीडब्ल्यूडी की करीब 174 किलोमीटर सड़कों का मेंटेनेंस परफॉर्मेंस गारंटी के तहत संबंधित ठेकेदारों को करना है। फिलहाल बड़े गड्ढों में गिट्टी और छोटे गड्ढों में कोल्ड मिक्स डालकर अस्थायी सुधार किया जा रहा है। हालांकि बारिश और लगातार वाहनों की आवाजाही के कारण यह सामग्री ज्यादा समय तक टिक नहीं पा रही है। स्थायी पैचवर्क के लिए हॉट मिक्स प्लांट से काम कराने की जरूरत है जिसके लिए करीब एक सप्ताह तक मौसम साफ रहना जरूरी बताया जा रहा है।

    पुराने शहर से कमलापति घाट की ओर जाने वाले मार्ग पर भी कई जगह सड़क की हालत खराब है। जिंसी से मोती मस्जिद के बीच करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में दर्जनों बड़े गड्ढे बताए जा रहे हैं। वहीं प्रोफेसर कॉलोनी से गायत्री मंदिर तक करीब 6.50 किलोमीटर के रास्ते पर भी सड़क सुधार का काम बाकी है। भदभदा घाट की ओर जाने वाले लिंक रोड 3 मुख्य मार्ग 2 नेहरू नगर तुलसी नगर और भदभदा नीलबड़ सीहोर मार्ग पर कई जगह गिट्टी उखड़ चुकी है।

    शाहपुरा और कलियासोत क्षेत्र के विसर्जन रूट पर भी अरेरा हिल्स गुलमोहर इकोसिटी दानिशकुंज बावड़ियाकलां और कलियासोत से चेतक ब्रिज तक सड़क सुधार की जरूरत है। अयोध्या बायपास करोंद पलासी बंगरसिया और बावड़ियाकलां मार्ग पर फिलहाल गड्ढों में गिट्टी डाली जा रही है।

    इधर प्रेमपुरा घाट के विसर्जन मार्ग पर मेट्रो निर्माण की बैरिकेडिंग भी चुनौती बनी हुई है। सड़क के एक हिस्से में बैरिकेडिंग होने के कारण करीब 4.5 मीटर चौड़ा रास्ता ही बचा है। गुरुवार शाम एसीपी ट्रैफिक अजय बाजपेयी ने डिपो से भदभदा चौराहे के बीच सड़क की चौड़ाई इंचीटेप से नापी। बड़ी झांकियों और ट्रकों की आवाजाही के लिए दोनों तरफ करीब 6-6 मीटर जगह की जरूरत बताई गई है। इसके बाद मेट्रो से बैरिकेड्स पीछे करने के निर्देश दिए गए।

    बारिश ने समस्या और बढ़ा दी है। गुरुवार शाम हुई बारिश के बाद बैरागढ़ मेन रोड स्थित विसर्जन घाट के पहुंच मार्ग पर पानी और कीचड़ जमा हो गया। ऐसे में प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विसर्जन से पहले प्रमुख रास्तों को सुरक्षित और सुगम बनाने की है। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के अनुसार मेंटेनेंस का काम शुरू है और प्रमुख सड़कों के गड्ढे भरे जा रहे हैं। हालांकि स्थायी सुधार के लिए मौसम साफ होना जरूरी है।

  • बारिश में भोपाल की सड़कें बनीं डांसिंग स्पॉट, कहीं तालाब तो कहीं गड्ढों का राज; रोज हादसों के साए में सफर

    बारिश में भोपाल की सड़कें बनीं डांसिंग स्पॉट, कहीं तालाब तो कहीं गड्ढों का राज; रोज हादसों के साए में सफर


    भोपाल । भोपाल में इस बार बारिश ने शहर की सड़कों की हालत पूरी तरह बिगाड़ दी है। राजधानी की मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों की अंदरूनी गलियों तक जगह जगह बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई जगह सड़क और गड्ढे में अंतर करना मुश्किल हो गया है। बारिश होते ही यही गड्ढे पानी से भरकर छोटे तालाब का रूप ले लेते हैं और वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है। ऐशबाग में तो थाने के सामने करीब 80 मीटर तक सड़क की हालत इतनी खराब है कि वहां सड़क कम और गड्ढे ज्यादा नजर आते हैं। इन रास्तों से गुजरते समय वाहन हिचकोले खाते हैं और ऐसा लगता है जैसे सड़कें डांसिंग स्पॉट बन गई हों।

    ऐशबाग थाने के सामने सड़क पर जगह जगह गड्ढे होने से स्थानीय लोगों को रोज परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में किसी तरह वाहन निकल जाते हैं लेकिन बारिश के दौरान मुश्किल कई गुना बढ़ जाती है। पानी भर जाने के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक है क्योंकि अचानक गड्ढे में पहिया जाने से बाइक या स्कूटी फिसलने और पलटने का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई बार दोपहिया वाहन चालक यहां दुर्घटना का शिकार भी हो चुके हैं।

    सड़क की बदहाली का असर केवल निजी वाहन चालकों पर ही नहीं बल्कि ऑटो और अन्य सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लोगों पर भी पड़ रहा है। ऑटो चालकों का कहना है कि बारिश के दौरान पानी और गड्ढों के बीच वाहन निकालना मुश्किल हो जाता है। यात्रियों को भी सफर के दौरान झटकों और दुर्घटना का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की समस्या नई नहीं है और लंबे समय से मरम्मत की जरूरत महसूस की जा रही है लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।

    भोपाल के पॉश और व्यस्त इलाकों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। अटल पथ लिंक रोड नंबर 2 एमपी नगर न्यू मार्केट और रोशनपुरा जैसे प्रमुख इलाकों में भी कई जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है और बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी जमा होने से राहगीरों और वाहन चालकों को यह पता लगाना मुश्किल होता है कि आगे सड़क कितनी गहरी है। बारिश थमने के बाद यही सड़कें धूल उड़ाती नजर आती हैं जिससे राहगीरों की परेशानी और बढ़ जाती है।

    रायसेन रोड पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सुभाषनगर से रत्नागिरी चौराहे तक मेट्रो का काम चलने के कारण सड़क के दोनों ओर कई स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं। बड़ी संख्या में वाहन और लोग इस मार्ग से रोज गुजरते हैं लेकिन खराब सड़क के कारण उन्हें बेहद धीमी रफ्तार से सफर करना पड़ रहा है। रात के समय समस्या और गंभीर हो जाती है क्योंकि अंधेरे में पानी से भरे गड्ढे दिखाई नहीं देते और अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि राजधानी की सड़कों पर बढ़ते गड्ढे केवल परेशानी नहीं बल्कि सुरक्षा का गंभीर मुद्दा हैं। लोगों ने संबंधित विभागों से बारिश के दौरान अस्थायी तौर पर गड्ढे भरने के साथ ही सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। सवाल यह है कि हर साल बारिश के बाद सामने आने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा। फिलहाल भोपाल की सड़कों पर सफर करने वालों को गड्ढों से बचते हुए ही अपनी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है।