Tag: Bhopal Sealing Action

  • भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, ड्राफ्ट में लैंडयूज बदला तो भी तुरंत नहीं हटेगी सीलिंग

    भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, ड्राफ्ट में लैंडयूज बदला तो भी तुरंत नहीं हटेगी सीलिंग


    भोपाल । भोपाल के नए मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से चल रही कवायद अब अगले चरण में पहुंच गई है। 21 साल से लंबित मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार को इसे प्रकाशित करने और लोगों से दावे आपत्तियां लेने की अनुमति मिल गई है। हालांकि ड्राफ्ट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां तत्काल वैध हो जाएंगी या सीलिंग की कार्रवाई रुक जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में मौजूदा मास्टर प्लान और लागू बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर कार्रवाई जारी रखने की स्थिति स्पष्ट की है।

    22 सितंबर को हुई सुनवाई के आदेश में भोपाल का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और इसे प्रकाशित कर लोगों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित करने की अनुमति चाहिए। अदालत ने ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है लेकिन अंतिम मास्टर प्लान को लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी देना और आवश्यक अनुमति लेना जरूरी रहेगा। इसका मतलब है कि ड्राफ्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है लेकिन अंतिम प्लान पर अभी अदालत की निगरानी बनी रहेगी।

    सीलिंग के मामले में भी अदालत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। फिलहाल किसी जमीन या भवन में चल रही गतिविधि की वैधता मौजूदा मास्टर प्लान और संबंधित बिल्डिंग नियमों के आधार पर जांची जाएगी। यदि कोई क्षेत्र विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है और वहां नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि चल रही है तो अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में केवल नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में संभावित लैंडयूज बदलाव का प्रस्ताव तत्काल राहत का आधार नहीं बनेगा।

    अदालत ने उन इलाकों को अलग माना है जहां मौजूदा मास्टर प्लान में जमीन के उपयोग को स्पष्ट रूप से किसी एक श्रेणी में निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे स्थानों पर मिश्रित उपयोग के सवाल पर विचार किया जा सकता है लेकिन फिलहाल वहां यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं अगर कोई निर्माण पूरी तरह बिना अनुमति के हुआ है तो कानून के अनुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

    भोपाल में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर पहले से ही कार्रवाई चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक नगर निगम ने बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित किया है और कई मामलों में नोटिस तथा कार्रवाई की गई है। इस दौरान कुछ प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने की शिकायतें भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई थीं। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव या चुनिंदा तरीके से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

    अब कारोबारियों और रहवासियों की नजर नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर है। ड्राफ्ट सामने आने के बाद लोग अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद सरकार को अंतिम प्लान की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ड्राफ्ट में किसी क्षेत्र के लैंडयूज में बदलाव प्रस्तावित होने मात्र से वहां चल रही मौजूदा व्यावसायिक गतिविधि स्वतः वैध नहीं मानी जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

  • भोपाल में 8 हजार कारोबारियों को नोटिस, 190 दुकानें सील: चौथे दिन बदली तस्वीर, मामला सुप्रीम कोर्ट में

    भोपाल में 8 हजार कारोबारियों को नोटिस, 190 दुकानें सील: चौथे दिन बदली तस्वीर, मामला सुप्रीम कोर्ट में


    भोपाल । राजधानी भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई अचानक धीमी पड़ गई है। तीन दिनों तक लगातार कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया लेकिन चौथे दिन शहर में एक भी सीलिंग नहीं हुई। कार्रवाई रुकने के साथ ही छोटे व्यापारियों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अलग-अलग कार्रवाई को लेकर विवाद और तेज हो गया है। उधर रहवासियों नगर निगम और नगरीय प्रशासन के अधिकारी अपने-अपने पक्ष के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

    भोपाल में 31 अगस्त से शुरू हुई कार्रवाई के पहले दिन नगर निगम ने 109 प्रतिष्ठानों को बंद कराया था। इसके बाद 1 सितंबर को 61 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की गई जबकि 2 सितंबर को केवल 20 प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इस तरह तीन दिनों में कुल 190 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। लेकिन चौथे दिन 3 सितंबर को शहर में कहीं भी सीलिंग नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि टीम हाईकोर्ट में जमीन से जुड़े मामलों में व्यस्त रही जिसके कारण सीलिंग की कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद कार्रवाई में आई इस अचानक नरमी को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

    मामले में रहवासियों ने नगर निगम की कार्रवाई पर पक्षपात का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि अरेरा कॉलोनी के जिन बड़े मॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर रहवासियों ने शिकायतें की थीं उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जबकि छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। इसी आधार पर रहवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज पेश कर अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में छोटे और बड़े प्रतिष्ठानों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

    इस बीच नगरीय प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी दिल्ली पहुंच गए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार और निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने इस मामले में वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों से भी चर्चा की है। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में नगर निगम कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट और आगे की स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

    सीलिंग कार्रवाई के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी माना है कि इस कार्रवाई से भोपाल के व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा रास्ता तलाशने का प्रयास कर रही है जिससे कानून का पालन भी हो और आम लोगों तथा व्यापारियों को अनावश्यक नुकसान भी न उठाना पड़े। मंत्री ने भोपाल के मास्टर प्लान को जल्द जारी करने की बात भी कही है। ऐसे में सीलिंग विवाद के बीच मास्टर प्लान को लेकर सरकार का अगला फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नगर निगम अब तक एक महीने के भीतर 8 हजार से अधिक दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को नोटिस जारी कर चुका है। कई स्थानों पर 24 घंटे के भीतर रहवासी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद कई दुकानदारों ने प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद करने के पोस्टर और बैनर भी लगा दिए।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ा हुआ है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और हाईकोर्ट से दुकानदारों को मिले राहत आदेश भी निरस्त कर दिए थे। अब 15 सितंबर की सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि भोपाल में सीलिंग कार्रवाई दोबारा तेज होगी या सरकार और प्रभावित व्यापारियों के लिए कोई नया समाधान निकाला जाएगा। फिलहाल 190 सीलिंग के बाद चौथे दिन की जीरो कार्रवाई ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।

  • 190 प्रतिष्ठान बंद कराने का दावा और जमीनी हकीकत कुछ और: भोपाल की सीलिंग कार्रवाई में खुली दुकानों ने खड़े किए कई सवाल

    190 प्रतिष्ठान बंद कराने का दावा और जमीनी हकीकत कुछ और: भोपाल की सीलिंग कार्रवाई में खुली दुकानों ने खड़े किए कई सवाल


    भोपाल । भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई लगातार चर्चा में बनी हुई है। नगर निगम जहां बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर कमर्शियल गतिविधियां बंद कराने का दावा कर रहा है वहीं जमीनी तस्वीर कुछ अलग ही दिखाई दे रही है। शहर के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी समेत कई स्थानों पर ऐसे मामले सामने आए हैं जहां एक ही बिल्डिंग में कुछ दुकानों के बाहर व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने का पोस्टर लगा हुआ है जबकि ठीक बगल की दुकानें खुली मिलीं। इस स्थिति ने नगर निगम की कार्रवाई की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    नगर निगम का दावा है कि अब तक करीब 190 प्रतिष्ठानों ने स्वेच्छा से अपनी व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी हैं। बंद किए गए प्रतिष्ठानों के बाहर यह सूचना भी लगाई गई है कि नगर निगम के आदेश के अनुसार भवन में कमर्शियल गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। हालांकि कई जगह इस दावे और वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई दिया। अरेरा कॉलोनी में एक तीन मंजिला भवन के ग्राउंड फ्लोर पर दो दुकानों के शटर बंद मिले और उन पर बंदी का पोस्टर लगा था लेकिन उसी के पास एक अन्य दुकान खुली हुई दिखाई दी। इसी तरह एक टेलरिंग शॉप के बाहर कारोबार बंद करने का बैनर लगा था लेकिन भवन का गेट खुला मिला जिससे कार्रवाई को लेकर सवाल उठे।

    एक अन्य मामला पहले होटल के रूप में संचालित भवन का है जिसे कार्रवाई के बाद बंद कराया गया। इसके बाद वहां निज निवास का बोर्ड लगा दिया गया। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि कार्रवाई के बाद संबंधित भवनों की वास्तविक स्थिति की निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है। यही वजह है कि नगर निगम की सीलिंग और नोटिस कार्रवाई अब व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी बहस का विषय बन गई है।

    शहर के 10 नंबर मार्केट में भी कार्रवाई को लेकर भेदभाव के आरोप सामने आए हैं। कुछ प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर बंद कराया गया जबकि आसपास कई अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलती दिखाई दीं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने वाले पक्ष का कहना है कि कार्रवाई छोटे कारोबारियों तक सीमित दिखाई दे रही है जबकि बड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ समान स्तर पर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी साक्ष्यों के साथ अपनी बात रखने की तैयारी की जा रही है।

    कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों का गुस्सा भी लगातार बढ़ रहा है। बीते दिनों सीलिंग कार्रवाई के विरोध में हजारों व्यापारियों ने प्रदर्शन किया और कई दुकानों को बंद रखा गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान शहर के प्रमुख इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। इसके बाद कोलार रोड क्षेत्र में भी व्यापारी संगठनों के आह्वान पर बाजार बंद रखा गया। व्यापारियों का कहना है कि अचानक की जा रही कार्रवाई से उनका कारोबार और रोजी रोजगार प्रभावित हो रहा है।

    दरअसल यह पूरा मामला आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद नगर निगम पर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दबाव है। इसी कारण शहर में नोटिस और सीलिंग की प्रक्रिया तेज की गई है। रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती कमर्शियल गतिविधियों से ट्रैफिक शोर भीड़ और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम की कार्रवाई सभी प्रतिष्ठानों पर समान रूप से होगी या फिर बंदी के पोस्टर और खुली दुकानों का विरोधाभास इस पूरे अभियान पर सवाल खड़े करता रहेगा।

  • सीलिंग कार्रवाई से भड़के भोपाल के व्यापारी, 170 प्रतिष्ठानों पर एक्शन के बाद कोलार रोड पर आंदोलन की तैयारी

    सीलिंग कार्रवाई से भड़के भोपाल के व्यापारी, 170 प्रतिष्ठानों पर एक्शन के बाद कोलार रोड पर आंदोलन की तैयारी


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर चल रही सीलिंग कार्रवाई अब बड़ा विवाद बनती जा रही है। नगर निगम की लगातार कार्रवाई से नाराज व्यापारियों ने विरोध तेज कर दिया है। इसी क्रम में कोलार व्यापारी महासंघ ने बुधवार को कोलार रोड बंद रखने का आह्वान किया है। व्यापारी अपनी दुकानें बंद रखकर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई का विरोध करेंगे और सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी करेंगे। महासंघ की ओर से कोलार तिराहे से गोल जोड़ तक सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की गई है। हालांकि मेडिकल और पेट्रोल पंप जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से अलग रखा गया है।

    व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह से नगर निगम प्रतिष्ठानों को बंद करने की कार्रवाई कर रहा है उससे छोटे कारोबारियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। कोलार व्यापारी महासंघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में व्यापारी परेशान हैं और अब उनके सामने विरोध प्रदर्शन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। मंगलवार को भी सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने अलग तरीके से प्रदर्शन किया था। कई व्यापारियों ने थाली और मंजीरा बजाकर अपनी नाराजगी जताई और प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की।

    दूसरी ओर नगर निगम ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई रुकने वाली नहीं है। निगम लगातार तीसरे दिन भी प्रतिष्ठानों को बंद कराने की कार्रवाई करने की तैयारी में है। अब तक करीब 170 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। नगर निगम की कार्रवाई के साथ ही व्यापारी संगठनों का विरोध भी लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को व्यापारियों ने रोशनपुरा चौराहे पर करीब चार घंटे तक प्रदर्शन किया और सीलिंग की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई सभी पर समान रूप से नहीं हो रही है और छोटे कारोबारियों को अधिक परेशान किया जा रहा है जबकि प्रभावशाली और बड़े लोगों के प्रतिष्ठानों को लेकर भी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। इस संबंध में पूरी स्थिति की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाने की बात कही गई है।

    भोपाल में यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से भी जुड़ी हुई है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से गठित जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाई गई और मामले में पहले दिए गए राहत आदेशों को भी लेकर स्थिति बदली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों के तहत चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है और इससे पहले नगर निगम को कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट पेश करनी है।

    इसी कारण शहर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई को तेज किया गया है। नगर निगम मुख्य मार्गों के दोनों ओर और उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे कर रहा है। नदी और तालाब किनारे बने भवन ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट क्षेत्र में स्थित निर्माण प्राथमिक जांच के दायरे में रखे गए हैं। अवैध मैरिज गार्डन और नियमों के विरुद्ध संचालित अन्य प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में भोपाल में सीलिंग कार्रवाई और व्यापारियों के विरोध के बीच टकराव और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • भोपाल में सीलिंग पर आर-पार की तैयारी! व्यापारियों ने गांधी के सामने की प्रार्थना, शाम को कैंडल मार्च से रहवासी जताएंगे विरोध

    भोपाल में सीलिंग पर आर-पार की तैयारी! व्यापारियों ने गांधी के सामने की प्रार्थना, शाम को कैंडल मार्च से रहवासी जताएंगे विरोध


    भोपाल । भोपाल में आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ चल रही नगर निगम की कार्रवाई को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को व्यापारियों ने सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई के विरोध में गांधीवादी तरीका अपनाते हुए कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर परिसर में प्रार्थना सभा की। व्यापारी महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एकत्र हुए और सामूहिक रूप से रामधुन गाकर समस्याओं के स्थायी समाधान की कामना की। व्यापारियों का कहना है कि वे विरोध के जरिए प्रशासन तक अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना चाहते हैं।

    भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष गोविंद गोयल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारिक संगठन के पदाधिकारी और व्यापारी कन्वेंशन सेंटर पहुंचे। गांधी प्रतिमा के सामने प्रार्थना सभा के दौरान व्यापारियों ने मौजूदा परिस्थितियों के समाधान के लिए मार्गदर्शन की कामना की। उनका कहना है कि सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई से लंबे समय से कारोबार कर रहे दुकानदारों में असमंजस और चिंता का माहौल है। व्यापारी चाहते हैं कि प्रशासन नियमों के दायरे में रहते हुए ऐसी व्यवस्था तैयार करे जिससे कारोबार और रहवासी इलाकों से जुड़े विवाद का स्थायी समाधान निकल सके।

    नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में भोपाल में पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे पहले रोशनपुरा चौराहे पर चक्काजाम किया गया था। इसके बाद बाग सेवनिया अवधपुरी 10 नंबर और आनंद नगर सहित कई क्षेत्रों में भी व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। अब व्यापारियों ने गांधीवादी तरीके से अपनी आवाज उठाने का फैसला किया है।

    दूसरी ओर रहवासी भी इस मुद्दे पर लगातार सक्रिय हैं। रहवासियों का कहना है कि आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों की वजह से शोर भीड़ और ट्रैफिक जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उनका आरोप है कि दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के कारण सार्वजनिक शांति प्रभावित होती है और कई स्थानों पर असामाजिक तत्वों की आवाजाही भी बढ़ी है। रहवासी इलाकों में रहने वाले लोगों को स्कूली बच्चों की सुरक्षा और बढ़ते ट्रैफिक को लेकर भी चिंता है।

    इसी कड़ी में बुधवार शाम पांच नंबर मार्केट क्षेत्र में रहवासी कैंडल मार्च निकालने की तैयारी में हैं। रहवासियों का कहना है कि रविशंकर शुक्ला मार्केट की दुकानों को पुनर्विकास योजना के तहत खाली कराया गया था और इसके बाद दुकानदारों को रहवासी क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। उनका दावा है कि इससे आवासीय क्षेत्रों में भीड़ शोर और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं पैदा हो रही हैं।

    इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी अहम महत्व है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने दुकान संचालकों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मिले राहत आदेश भी निरस्त कर दिए थे और अपने निर्देशों के तहत चल रही जांच में किसी तरह के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करने की बात कही थी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को प्रस्तावित है।

    नगर निगम को कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करनी है। इसी प्रक्रिया के तहत शहर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। निगम ने मुख्य मार्गों के दोनों ओर और उनसे जुड़ी गलियों में सर्वे शुरू किया है। नदी और तालाब किनारे बने भवनों के साथ ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में निर्माणों की भी जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है।

    कार्रवाई तेज होने के बाद अवधपुरी अयोध्या बायपास गौतम नगर अशोका गार्डन और लालघाटी सहित कई क्षेत्रों के कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। कई दुकानदार अब व्यावसायिक क्षेत्रों में नए ठिकाने तलाश रहे हैं। वहीं रहवासी व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह रोकने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में भोपाल में व्यापारी और रहवासियों के विरोध के बीच अब प्रशासन के सामने नियमों के पालन के साथ दोनों पक्षों की चिंताओं का समाधान निकालने की चुनौती है।

  • भोपाल में कमर्शियल सीलिंग के खिलाफ सड़क पर उतरे व्यापारी! मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज की मांग तेज

    भोपाल में कमर्शियल सीलिंग के खिलाफ सड़क पर उतरे व्यापारी! मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज की मांग तेज


    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शहर में हजारों नोटिस जारी होने के बाद कारोबारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने प्रदर्शन और चक्काजाम किया और सरकार के सामने तीन विकल्प रखे। व्यापारियों का कहना है कि या तो भोपाल का मास्टर प्लान लागू किया जाए या गुजरात की तर्ज पर मिक्स्ड लैंड यूज की व्यवस्था की जाए या फिर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई को तत्काल रोका जाए। इन मांगों पर समाधान नहीं निकला तो व्यापारियों ने अनिश्चितकाल के लिए भोपाल बंद करने की चेतावनी दी है।

    10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने सरकार से कार्रवाई के बीच कारोबारियों को राहत देने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से लोग इन इलाकों में कारोबार कर रहे हैं और इसी व्यवसाय से उनके परिवारों की रोजी रोटी चल रही है। व्यापारियों का दावा है कि कार्रवाई का दायरा बढ़ा तो बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और उनसे जुड़े कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि यदि कारोबार बंद हो गया तो बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च कैसे चलेगा।

    हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के कारोबारी राहुल जैन ने भी नोटिस मिलने के बाद चिंता जताई। उनका कहना है कि कई दुकानदार पहले से कर्ज में हैं। व्यापारियों का तर्क है कि उनकी संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई है बिजली के कमर्शियल मीटर लगाए गए हैं और नगर निगम को संपत्ति कर सहित दूसरे करों का भुगतान भी किया जाता रहा है। ऐसे में अब कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई किए जाने से कारोबारियों में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ रही है।

    इस पूरे विवाद में मास्टर प्लान का मुद्दा भी केंद्र में आ गया है। व्यापारियों और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर नया मास्टर प्लान लागू होता तो शहर के अलग अलग हिस्सों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जा सकती थी। व्यापारियों का दावा है कि भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 1995 में आया था और इसके बाद प्रस्तावित नया प्लान लंबे समय से लंबित है। इसी बीच शहर का विस्तार लगातार होता गया और कई ऐसे इलाकों में कारोबार शुरू हो गए जहां अब कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की जा रही है।

    सीलिंग कार्रवाई के विरोध में पहली बार बड़ी संख्या में ब्यूटिशियन और महिला कारोबारी भी सड़क पर उतरीं। प्रदर्शन के दौरान एक ब्यूटिशियन ने सड़क पर ही मेकअप करके विरोध जताया। उनका कहना है कि ब्यूटी पार्लर सैलून और छोटे कारोबारों से बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार जुड़ा है। यदि इन्हें बंद कराया गया तो सिर्फ दुकानदार ही नहीं बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारी और उनके परिवार भी प्रभावित होंगे।

    दूसरी ओर नगर निगम ने रहवासी भवनों के कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर सर्वे और नोटिस की कार्रवाई तेज कर दी है। निगम के मुताबिक अब तक 7158 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सोमवार तक 6589 नोटिस दिए गए थे जबकि मंगलवार को 569 नए नोटिस जारी किए गए। निगम के सर्वे में संपत्ति कर रिकॉर्ड के आधार पर 62 हजार 500 से ज्यादा ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं जहां रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे का दायरा बढ़ने के साथ नोटिस की संख्या और बढ़ सकती है।

    नगर निगम की कार्रवाई केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाली है। मुख्य सड़कों के साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे किया जा रहा है। नदी और तालाब के किनारे ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में बने भवनों की भी जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन और अनुमति के विपरीत निर्माण से जुड़े मामलों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

    निगम की ओर से बताया गया है कि कई मामलों में नोटिस के बाद निर्धारित समय पूरा होने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिभोग उल्लंघन के मामलों की जांच के बाद अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे और संबंधित लोगों को उल्लंघन समाप्त करने के लिए अंतिम सूचना दी जाएगी। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इधर व्यापारियों ने सरकार को तीन विकल्प देकर साफ कर दिया है कि वे कार्रवाई के खिलाफ पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। व्यापारियों की मांग है कि भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए और मिक्स्ड लैंड यूज की व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि इससे शहर की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

    फिलहाल भोपाल में नगर निगम की कार्रवाई और व्यापारियों के विरोध के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम नियमों के पालन को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है तो दूसरी तरफ व्यापारी अपने कारोबार और रोजगार को लेकर समाधान की मांग कर रहे हैं। अब सरकार के रुख पर नजर रहेगी कि वह व्यापारियों की मांगों पर क्या रास्ता निकालती है। अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला तो व्यापारियों की ओर से भोपाल बंद और बड़े आंदोलन की चेतावनी आने वाले दिनों में राजधानी की सियासत और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।