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  • बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए

    बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए


    भोपाल । भोपाल में बारिश के साथ जलभराव की पुरानी समस्या एक बार फिर सामने आ गई है। पिछले साल ट्रैफिक पुलिस ने शहर में जलभराव वाले 35 स्थानों को चिह्नित कर नगर निगम पीडब्ल्यूडी और दूसरी संबंधित एजेंसियों को इनकी सूची भेजी थी। इन जगहों पर जलभराव की वजह तलाशने के साथ जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने 17 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा होने का दावा किया। कहीं नालों की सफाई और मरम्मत कराई गई तो कहीं सड़क का लेवल ठीक किया गया। कुछ स्थानों पर गड्ढे भरने और सीसी रोड बनाने का काम भी किया गया। लेकिन इस बार बारिश ने इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला दी है।

    बारिश के दौरान जिन जगहों पर सुधार किए जाने की बात कही गई थी उनमें से कई स्थानों पर फिर पानी जमा हो गया। हालात इतने खराब हुए कि कुछ जगहों पर सड़क तक बंद करनी पड़ी। 11 अगस्त को हुई बारिश में भी शहर के कई हिस्सों में भारी जलभराव देखने को मिला था। अब समस्या सिर्फ पुराने स्थानों तक सीमित नहीं रही है। इस मानसून के दौरान शहर में जलभराव के 8 नए स्थान भी सामने आए हैं। ट्रैफिक पुलिस इन नए स्पॉट की सूची तैयार कर संबंधित एजेंसियों को भेजने की तैयारी कर रही है।

    इस बार किलोल पार्क डिपो चौराहा आरआरएल से एम्स रोड बाणगंगा रानी कमलापति बंसल प्लाजा वीआईपी रोड पर सेल्फी पार्क से पहले और लालघाटी से बैरागढ़ लेफ्ट टर्न तक के क्षेत्र नए जलभराव वाले स्थान के रूप में सामने आए हैं। इन जगहों पर बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

    पुराने जलभराव वाले स्थानों की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। गणेश मंदिर तिराहे पर जलभराव रोकने के लिए साइड वर्ज हटाकर पानी की निकासी का रास्ता बनाने की कोशिश की गई थी। इसके बावजूद बारिश के दौरान यहां रास्ता बाधित होने की स्थिति बन गई। अब पीडब्ल्यूडी की ओर से निकासी व्यवस्था को और बेहतर करने का काम किया जा रहा है।

    ओल्ड केम्पियन तिराहे पर सड़क का लेवल सुधारने के लिए उसे ऊंचा किया गया और सीसी रोड भी बनाई गई। इसके बावजूद बारिश में यहां पानी जमा हो गया। खटलापुरा मंदिर क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए सड़क का समतलीकरण कराया गया था लेकिन बारिश के बाद यहां भी पानी रुकने की समस्या सामने आई। नर्मदापुरम रोड की सर्विस रोड पर गड्ढे भरने सहित कई सुधार कार्य किए गए थे लेकिन बारिश के दौरान यहां भी पानी की निकासी ठीक नहीं रही।

    बैरागढ़ क्षेत्र की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। ईसाइ कब्रिस्तान से सीहोर नाके तक सड़क के दोनों तरफ 150 से अधिक बड़े गड्ढे होने की बात सामने आई है। इन गड्ढों को भरने का दावा भी किया गया था लेकिन बारिश के बाद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया। जलभराव के साथ सड़क पर गड्ढे होने से वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।

    ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि पिछले साल चिह्नित किए गए 35 स्थानों की सूची संबंधित एजेंसियों को दी गई थी और इनमें अधिकांश जगहों पर सुधार कार्य किए गए हैं। इस बारिश में सामने आए 8 नए स्थानों की सूची भी संबंधित विभागों को भेजी जाएगी। वहीं नगर निगम का कहना है कि इन स्थानों पर जलभराव के बजाय जल रुकाव की समस्या है और इसका समाधान किया जा रहा है। विभाग से जुड़े स्थानों पर सुधार कार्य किए जाने की बात भी कही गई है।

    हालांकि लगातार सामने आ रही तस्वीरें यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि अगर सुधार कार्य किए जा चुके हैं तो मामूली बारिश में कई स्थानों पर दोबारा पानी क्यों भर रहा है। भोपाल जैसे बड़े शहर में जलभराव सिर्फ यातायात की समस्या नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं से भी जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में नए स्पॉट के साथ पुराने स्थानों की निकासी व्यवस्था की भी दोबारा जांच जरूरी हो गई है ताकि हर बारिश में वही समस्या दोबारा खड़ी न हो।

  • आखिरी समय पर बदली फ्लाइट तो एयरलाइन पर गिरी कानूनी गाज कश्मीर ट्रिप खराब होने पर छह यात्रियों को मिलेगा मुआवजा

    आखिरी समय पर बदली फ्लाइट तो एयरलाइन पर गिरी कानूनी गाज कश्मीर ट्रिप खराब होने पर छह यात्रियों को मिलेगा मुआवजा


    भोपाल । भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एयर इंडिया को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए छह वरिष्ठ नागरिक यात्रियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने एयरलाइन को कुल 96 हजार रुपए की राशि क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि यह राशि 8 दिसंबर 2024 से सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर संबंधित यात्रियों को दी जाए। आयोग ने माना कि एयरलाइन ने यात्रियों को यात्रा शुरू होने से महज दो घंटे पहले फ्लाइट कार्यक्रम में बदलाव की सूचना दी जिससे उनकी पूरी यात्रा योजना बुरी तरह प्रभावित हुई और उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी।

    मामले के अनुसार भोपाल निवासी छह वरिष्ठ नागरिकों ने 13 अप्रैल 2024 को 11 मई 2024 की भोपाल से दिल्ली होते हुए श्रीनगर और 17 मई 2024 की वापसी यात्रा के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट बुक की थी। टिकटों पर करीब 1.18 लाख रुपए खर्च किए गए थे। टिकट कन्फर्म होने के बाद यात्रियों ने श्रीनगर पहलगाम और गुलमर्ग में होटल हाउसबोट स्थानीय टैक्सी पर्यटन पैकेज और अन्य सेवाओं की अग्रिम बुकिंग भी कर ली थी। वापसी यात्रा के लिए दिल्ली से रानी कमलापति स्टेशन तक वंदे भारत एक्सप्रेस के आरक्षित टिकट भी पहले से बुक थे।

    यात्रा के दिन एयर इंडिया ने उड़ान शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले सूचना दी कि निर्धारित यात्रा संभव नहीं होगी और यात्रियों को अगले दिन भेजा जाएगा। अचानक हुए इस बदलाव के कारण पूरी यात्रा योजना अस्तव्यस्त हो गई। यात्रियों को होटल बुकिंग दोबारा करनी पड़ी स्थानीय परिवहन और पर्यटन पैकेज बदलने पड़े जबकि रेलवे टिकटों में भी बदलाव करना पड़ा। उनका कहना था कि यदि समय रहते जानकारी दी जाती तो इतना बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं होता। यात्रियों ने एयरलाइन से कई बार मुआवजे की मांग की लेकिन राहत नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

    सुनवाई के दौरान एयर इंडिया ने अपना बचाव करते हुए कहा कि फ्लाइट रद्द नहीं हुई थी बल्कि दिल्ली में बर्ड स्ट्राइक की अप्रत्याशित घटना के कारण उड़ान प्रभावित हुई थी। एयरलाइन के अनुसार इसी वजह से यात्रियों की दिल्ली से श्रीनगर जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने की आशंका थी इसलिए उन्हें अगले दिन की उड़ान में समायोजित किया गया। एयर इंडिया ने इसे अपने नियंत्रण से बाहर की स्थिति बताते हुए सेवा में कमी से इनकार किया।

    हालांकि आयोग ने एयरलाइन के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि यदि वास्तव में बर्ड स्ट्राइक हुई थी तो उसके समर्थन में डीजीसीए की जांच रिपोर्ट तकनीकी रिपोर्ट या अन्य आधिकारिक दस्तावेज पेश किए जाने चाहिए थे लेकिन एयरलाइन ऐसा कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। केवल लिखित दावा करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि फोर्स मेज्योर का दावा करने वाली एयरलाइन पर ही उसे प्रमाणित करने की जिम्मेदारी होती है।

    परिवादियों की ओर से पैरवी करने वाली अधिवक्ता कल्पना वर्मा ने बताया कि यात्रियों ने प्रति व्यक्ति लगभग 40 हजार रुपए के वास्तविक नुकसान का दावा किया था लेकिन आयोग ने फिलहाल प्रति व्यक्ति 15 हजार रुपए क्षतिपूर्ति और एक हजार रुपए वाद व्यय देने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। यह फैसला उन यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिन्हें अंतिम समय में फ्लाइट में बदलाव या एयरलाइन की लापरवाही के कारण परेशानी उठानी पड़ती है।

  • आयशर कॉलेज के पास जल उठा एथेनॉल टैंकर का केबिन, दमकल की तत्परता से बची बड़ी तबाही

    आयशर कॉलेज के पास जल उठा एथेनॉल टैंकर का केबिन, दमकल की तत्परता से बची बड़ी तबाही


    भोपाल  राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह उस समय अफरा तफरी मच गई जब आयशर कॉलेज के पास एथेनॉल से भरे एक टैंकर के केबिन में अचानक आग भड़क उठी। घटना सुबह करीब सवा ग्यारह बजे की बताई जा रही है। आग की लपटें उठती देख आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और तत्काल इसकी सूचना दमकल विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम तेजी से मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। दमकल कर्मियों की मुस्तैदी के चलते आग पर कुछ ही देर में काबू पा लिया गया जिससे एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार टैंकर पूरी तरह एथेनॉल से भरा हुआ था जिसकी पुष्टि संबंधित डिपो के अधिकारियों ने भी की है। एथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ माना जाता है और यदि आग टैंकर के मुख्य हिस्से तक पहुंच जाती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। राहत की बात यह रही कि आग केवल चालक के केबिन तक सीमित रही और टैंकर में भरे एथेनॉल तक नहीं पहुंच सकी। इससे किसी बड़े विस्फोट और जनहानि की आशंका पूरी तरह टल गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार केबिन से अचानक धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने सुरक्षित दूरी बना ली। कुछ ही देर में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का अभियान शुरू किया और एक फायर ब्रिगेड वाहन की मदद से आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि यदि कुछ मिनट और देरी होती तो आग टैंकर तक पहुंच सकती थी जिससे बड़ा नुकसान हो सकता था।

    दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में इसे अज्ञात कारणों से लगी आग माना जा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह जांच की जाएगी कि आग शॉर्ट सर्किट किसी तकनीकी खराबी या अन्य वजह से लगी थी। इसके साथ ही टैंकर की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाएगी।

    घटना के समय टैंकर चालक मौके पर मौजूद नहीं मिला। ऐसे में यह भी जांच का विषय बन गया है कि हादसे के दौरान चालक कहां था और आग लगने के समय परिस्थितियां क्या थीं। पुलिस चालक की तलाश करने के साथ उससे पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सटीक जानकारी सामने आ सके।

    अधिकारियों के अनुसार आग में टैंकर का केबिन पूरी तरह जलकर खाक हो गया है लेकिन टैंकर में भरा एथेनॉल सुरक्षित बचा हुआ है। यही वजह रही कि एक बड़ा औद्योगिक हादसा टल गया। घटना के दौरान किसी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं तथा आग लगने के कारणों का पता लगाने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन के दौरान सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।

  • स्कूल वैन हादसे से मची अफरा-तफरी, चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, महिला स्टाफ घायल

    स्कूल वैन हादसे से मची अफरा-तफरी, चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, महिला स्टाफ घायल


    मध्यप्रदेश । भोपाल में गुरुवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते होते टल गया जब बच्चों को स्कूल लेकर जा रही एक स्कूल वैन कोहेफिजा थाना क्षेत्र के फ्लाईओवर पर अनियंत्रित होकर बिजली के खंभे से टकरा गई। हादसे के समय वैन में छह स्कूली बच्चे और स्कूल की एक महिला स्टाफ सदस्य सवार थीं। राहत की बात यह रही कि सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित बच गए जबकि आगे की सीट पर बैठी महिला कर्मचारी के सिर में चोट आई जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू कराया गया। इस घटना के बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    जानकारी के अनुसार भोपाल गर्ल्स स्कूल की वैन सुबह पंचवटी क्षेत्र से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। जैसे ही वाहन कोहेफिजा थाने के सामने बने फ्लाईओवर पर पहुंचा तभी चालक का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया और वैन सीधे बिजली के खंभे से जा टकराई। तेज आवाज सुनते ही आसपास मौजूद लोग मौके की ओर दौड़े और बिना समय गंवाए वैन में फंसे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। स्थानीय लोगों ने घायल महिला को भी तुरंत अस्पताल पहुंचाने में मदद की जिससे उसे समय पर इलाज मिल सका।

    घटना की सूचना मिलते ही कोहेफिजा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दूसरी गाड़ी की व्यवस्था कर उन्हें सुरक्षित स्कूल के लिए रवाना किया। हादसे के बाद अभिभावकों में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल रहा लेकिन बच्चों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलते ही सभी ने राहत की सांस ली।

    कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि वैन के सामने अचानक एक बड़ा वाहन आ गया था। चालक ने टक्कर से बचने की कोशिश की लेकिन इसी दौरान वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा और वैन बिजली के खंभे से टकरा गई। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं वाहन के ब्रेक में तकनीकी खराबी तो नहीं थी। यदि ब्रेक ने अचानक काम करना बंद किया होगा तो चालक ने बड़ा हादसा टालने के लिए जानबूझकर वैन को खंभे से टकराकर रोकने का प्रयास किया हो सकता है।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए स्कूल वैन की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी। वाहन की ब्रेक प्रणाली स्टीयरिंग और अन्य मैकेनिकल हिस्सों की जांच विशेषज्ञों से कराई जाएगी। साथ ही चालक से भी विस्तार से पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही तो नहीं थी।

    इस घटना ने एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित फिटनेस जांच की आवश्यकता को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को लेकर चलने वाले सभी वाहनों की समय समय पर तकनीकी जांच होना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की खराबी समय रहते सामने आ सके। फिलहाल इस हादसे में किसी बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा है लेकिन यह घटना भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जरूर बन गई है।

  • वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, जमीयत उलेमा ने सरकार के फैसले पर उठाए तीखे सवाल

    वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, जमीयत उलेमा ने सरकार के फैसले पर उठाए तीखे सवाल


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के बाद प्रदेश में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस फैसले को लेकर मुस्लिम संगठनों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने सरकार के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पारदर्शिता के नाम पर वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि जो लोग अपनी धार्मिक संस्थाओं और उनसे जुड़े मामलों को प्रभावी ढंग से नहीं संभाल पा रहे हैं वे वक्फ की धार्मिक संपत्तियों और संस्थाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि वह अपनी धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन पर ध्यान दे और मुस्लिम समाज को उसकी धार्मिक संपत्तियों और संस्थाओं का संचालन स्वयं करने दे।

    मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता स्थापित करना चाहती है तो यही व्यवस्था मंदिरों और अन्य धार्मिक संस्थाओं में भी लागू की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी धार्मिक संस्था में दूसरे समुदाय के लोगों को शामिल करने का सिद्धांत अपनाया जा रहा है तो यह सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केवल वक्फ बोर्ड में ऐसा करना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास में अब तक सभी धार्मिक संस्थाओं का संचालन उसी समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता रहा है और पहली बार मुस्लिम समाज की धार्मिक संस्था में इस प्रकार का बदलाव किया गया है जिससे समाज में असंतोष पैदा हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां सरकार की नहीं बल्कि समाज के लोगों द्वारा धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए समर्पित की गई हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से लोगों का भरोसा कमजोर होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से वक्फ बोर्ड में सरकारी अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी और प्रशासनिक प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते रहे हैं और इस व्यवस्था पर कभी कोई आपत्ति नहीं रही। लेकिन गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को पारदर्शिता का नाम देकर उचित ठहराना समझ से परे है।

    जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार की मंशा निष्पक्ष है तो सभी धर्मों की धार्मिक समितियों में समान व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। केवल वक्फ बोर्ड में यह प्रयोग करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि किसी एक समुदाय की धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।

    इधर इस विवाद के बीच भोपाल के निकाह काजी मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने अपने पद से इस्तीफा देकर मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने निकाह काजी के साथ साथ दीनी तालीमी बोर्ड और जमीयत उलेमा मध्यप्रदेश के महासचिव पद से भी त्यागपत्र सौंपते हुए वर्तमान परिस्थितियों में पद पर बने रहना संभव नहीं बताया। दूसरी ओर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम को लेकर भी संगठन के भीतर मतभेद सामने आए हैं।

    गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भोपाल में ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के नेतृत्व में वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन भी किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग करते हुए इसे मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया था। वहीं जमीयत उलेमा ने साफ किया है कि संगठन इस पूरे मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेगा और सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष को मजबूती से रखेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • भोपाल में सीएम मोहन यादव का अनोखा अंदाज जनता के बीच पहुंचे कांग्रेस पर साधा निशाना

    भोपाल में सीएम मोहन यादव का अनोखा अंदाज जनता के बीच पहुंचे कांग्रेस पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को एक अलग ही राजनीतिक और जनसंवाद का नजारा देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अचानक वीआईपी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट पहुंच गए। उनके इस अचानक दौरे ने वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया और माहौल उत्साह से भर गया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात को सुना और आम लोगों के साथ बैठकर संवाद भी किया।

    सीएम का यह अंदाज काफी अलग और सहज था जहां उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के युवाओं और आम नागरिकों से बातचीत की। उन्होंने लोगों के साथ बैठकर स्वल्पाहार किया और विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि लगातार तीसरे साल यह अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान के जरिए पुराने जल स्रोतों जैसे कुएं और बावड़ियों को नया जीवन मिल रहा है और मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री ने किसानों के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी और कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह किसान हितैषी है। उन्होंने बताया कि सरकार गेहूं के साथ साथ चना और मसूर की भी खरीद कर रही है जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया।

    इस दौरान सीएम मोहन यादव ने विपक्ष विशेषकर कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बहनों के साथ जो अन्याय हुआ है उसे देश कभी नहीं भूलेगा और कांग्रेस को इसके लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के प्रति सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया।

    सीएम ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय ऐतिहासिक है लेकिन विपक्षी दलों के रवैये के कारण यह पूरी तरह लागू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं की शिक्षा सुरक्षा और रोजगार के लिए लगातार प्रयास कर रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

    इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का सहज और जनसरोकारों से जुड़ा रूप देखने को मिला जहां उन्होंने सीधे जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित किया। लोगों ने भी उनके इस अंदाज की सराहना की और खुलकर अपने विचार साझा किए।

    कुल मिलाकर यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आम लोगों से जुड़ने और उनके बीच भरोसा मजबूत करने की एक पहल के रूप में देखा जा रहा है जिसमें मुख्यमंत्री ने विकास योजनाओं के साथ साथ राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी।

  • महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    भोपाल । भोपाल की सड़कों पर रविवार को महिला आक्रोश और राजनीतिक संदेशों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला जब ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों को कुचलने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ी तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बहनों की इच्छा और अधिकार के खिलाफ जाने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करना देश की आधी आबादी के साथ अन्याय है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं वही अब उनके हक को कमजोर करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं की आकांक्षाओं को दबाने का काम किया है।

    सीएम डॉ. यादव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीय समाज की परंपरा हमेशा से नारी शक्ति के सम्मान पर आधारित रही है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि समाज सुधारकों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और आज भी वही विचारधारा आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिना नारी शक्ति के किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है और सरकार हमेशा महिलाओं के साथ खड़ी है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हजारों महिलाओं का अभिवादन किया और कहा कि यह आक्रोश केवल विरोध नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए उठी आवाज है जिसे पूरे देश तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रही हैं और यह देश की शक्ति का प्रतीक है।

    इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार था जिसे जानबूझकर रोका गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका इस मामले में निराशाजनक रही है और यह कदम महिलाओं के सपनों पर चोट के समान है।

    कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने हाथों में स्लोगन लिखे पोस्टर लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई जगहों पर नारों और गीतों के माध्यम से महिलाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही माहौल देखने को मिला जहां सामाजिक और राजनीतिक चेतना का संगम नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार हर स्तर पर महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी इस दिशा में मजबूत कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा और अन्य मंचों पर महिलाओं के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। पूरा आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं की शक्ति और उनके अधिकारों की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने भोपाल की सड़कों को जनआंदोलन के रंग में रंग दिया।

  • भोपाल में दर्दनाक हादसा एलपीजी टैंकर दीवार तोड़कर घर में घुसा मासूम की मौत परिवार घायल

    भोपाल में दर्दनाक हादसा एलपीजी टैंकर दीवार तोड़कर घर में घुसा मासूम की मौत परिवार घायल


    भोपाल ।
    राजधानी के छोला मंदिर क्षेत्र में शनिवार देर रात एक भयावह सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया जब एक एलपीजी टैंकर अनियंत्रित होकर रिहायशी इलाके में घुस गया और दीवार तोड़ते हुए सीधे एक घर के अंदर जा घुसा। यह हादसा रात लगभग दो बजकर बीस मिनट पर हुआ जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे और अचानक हुए तेज धमाके ने पूरे मोहल्ले में अफरा तफरी मचा दी।

    हादसे के दौरान घर में सो रही सात वर्षीय मासूम बच्ची खुशी गेहार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। टैंकर के पहिये और मलबे के बीच वह करीब एक घंटे तक फंसी रही जिसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से उसका शव बाहर निकाला जा सका। इस हृदयविदारक घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।

    हादसे में बच्ची के पिता मोनू गेहार मां मनीषा गेहार और भाई आरुष सहित कुल चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और लगातार निगरानी में रखा गया है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एलपीजी टैंकर तेज रफ्तार में था और चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा जिसके बाद वह सीधे रिहायशी बस्ती की ओर बढ़ गया और घर की दीवार तोड़ते हुए अंदर घुस गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि आसपास के दो अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंचा है जिससे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल बन गया।

    घटना के बाद मौके पर भारी अफरा तफरी मच गई। स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास शुरू किया। सूचना मिलते ही छोला मंदिर और निशातपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। पुलिस ने टैंकर को कब्जे में ले लिया है जबकि चालक घटना के बाद फरार बताया जा रहा है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार वाहन की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा मानवीय लापरवाही का परिणाम था या फिर किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ। वहीं प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।

    स्थानीय लोगों ने इस हादसे के बाद प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग भी की जा रही है।

    एसीपी अक्षय चौधरी ने बताया कि हादसे में बच्ची खुशी गेहार की मौत हुई है जबकि चार लोग घायल हैं और सभी का इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि आरोपी चालक की तलाश की जा रही है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    यह हादसा एक बार फिर शहर में भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किया करीब 2 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किया करीब 2 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन


    भोपाल :  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शनिवार को गोविंदपुरा में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। उन्होंने बताया कि लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण निर्माण कार्य कराए जाएंगे, जिनमें मालीखेड़ी विसर्जन घाट का उन्नयन प्रमुख है।
    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि मालीखेड़ी विसर्जन घाट को 1 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से आधुनिक एवं सुविधायुक्त बनाया जाएगा। घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पक्का प्लेटफॉर्म, सुरक्षा रेलिंग, समुचित प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था तथा स्वच्छता संबंधी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।
    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि गोविंदपुरा क्षेत्र में विकास कार्यों को निरंतर प्राथमिकता दी जा रही है। क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था और सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
    गोविन्दपुरा में वार्ड 72 के मालीखेड़ी में सीसी रोड एवं आरसीसी नाली निर्माण कार्य तथा मेन रोड स्थित दुर्गा मंदिर के चबूतरे के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया गया, जिसकी लागत 7 लाख 18 हजार रुपये है। वार्ड 72 की लीलाधर कॉलोनी में आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया गया, जिसकी लागत 2 लाख 86 हजार रुपये है। वार्ड 72 के गीता नगर में शंकर जी मंदिर के पास रिटेनिंग वॉल निर्माण, गीता नगर पार्श्व धाम स्थित कम्युनिटी हॉल में शेड निर्माण तथा बिहारी कॉलोनी में रोड एवं आंगनवाड़ी के पास आरसीसी नाली निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन किया गया, जिनकी कुल लागत 15 लाख रुपये है।
    वार्ड 72 के अटल नेहरू नगर में बालाजी मंदिर से आंगनवाड़ी तक, श्री महावीर हनुमान मंदिर के पास सड़क निर्माण तथा अप्रोच रोड से मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक तक सीसी रोड निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया गया, जिसकी लागत 13 लाख रुपये है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे नागरिकों को शीघ्र लाभ मिल सके।
  • स्वास्थ्य सेवा में एआई की नई छलांग: एम्स भोपाल में शुरू हुई डिजिटल नेविगेशन सुविधा, रोजाना 12 हजार मरीजों का सफर होगा आसान।

    स्वास्थ्य सेवा में एआई की नई छलांग: एम्स भोपाल में शुरू हुई डिजिटल नेविगेशन सुविधा, रोजाना 12 हजार मरीजों का सफर होगा आसान।


    मध्य प्रदेश की राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान AIIMS भोपाल ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अक्सर बड़े अस्पतालों के विशाल परिसर और एक जैसी इमारतों के बीच मरीज और उनके परिजन विभाग ढूँढ़ते हुए भटक जाते हैं, लेकिन अब एम्स भोपाल में इस समस्या का अंत होने जा रहा है। संस्थान ने देश की पहली ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI आधारित नेविगेशन प्रणाली’ शुरू की है। इस स्मार्ट तकनीक की मदद से अब रोजाना अस्पताल आने वाले 10 से 12 हजार लोगों को अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए किसी से रास्ता पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    यह आधुनिक प्रणाली बिल्कुल वैसे ही काम करेगी जैसे हम अनजान शहरों में ‘गूगल मैप्स’ का उपयोग करते हैं। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख चौराहों पर विशेष क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। जैसे ही कोई मरीज या परिजन अपने मोबाइल से इस कोड को स्कैन करेगा उसकी स्क्रीन पर पूरे अस्पताल का इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा। यह तकनीक आईआईटी इंदौर की विशेषज्ञ टीम और एक स्थानीय स्टार्टअप के सहयोग से तैयार की गई है, जो वेब और मोबाइल एप दोनों स्वरूपों में उपलब्ध होगी।

    अस्पताल प्रशासन ने इस सिस्टम को बेहद सटीक बनाने के लिए इमारतों के बाहर जीपीएस और भवनों के अंदर ‘रिले उपकरणों’ का उपयोग किया है। चूंकि इमारतों के भीतर जीपीएस सिग्नल कमजोर हो जाते हैं, इसलिए हर 15 मीटर पर विशेष सेंसर लगाए गए हैं जो मोबाइल को बिल्कुल सटीक दिशा संकेत देंगे। यह पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल एक महीने के परीक्षण पर है, जिसकी सफलता के बाद इसे पूरे परिसर में स्थायी रूप से लागू कर दिया जाएगा। इस पहल से न केवल मरीजों का कीमती समय बचेगा, बल्कि भ्रम की स्थिति खत्म होने से अस्पताल के स्टाफ पर से भी मार्गदर्शन का अतिरिक्त बोझ कम होगा।