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  • भोपाल में प्रोफेसर की खुदकुशी: 'बीमारी से तंग आ गया हूं…' सुसाइड नोट लिख फंदे पर झूले शैलेंद्र, पत्नी भी लड़ रही कैंसर से जंग

    भोपाल में प्रोफेसर की खुदकुशी: 'बीमारी से तंग आ गया हूं…' सुसाइड नोट लिख फंदे पर झूले शैलेंद्र, पत्नी भी लड़ रही कैंसर से जंग


    भोपाल। राजधानी के रातीबड़ इलाके में एक निजी कॉलेज के प्रोफेसर द्वारा सुसाइड करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात 32 वर्षीय प्रोफेसर शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने अपने किराए के कमरे में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। बुधवार सुबह जब परिजनों ने उन्हें फंदे पर लटका देखा तो इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस को मौके से एक भावुक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें मृतक ने अपनी बीमारी और मानसिक पीड़ा का जिक्र किया है।

    मूल रूप से सीहोर जिले के आष्टा गोपालपुर के रहने वाले शैलेंद्र पिछले 6 महीनों से भोपाल की गोल्डन सिटी में किराए से रह रहे थे और रातीबड़ के ही एक प्राइवेट कॉलेज में अध्यापन कार्य कर रहे थे। पुलिस के अनुसार शैलेंद्र के कमरे से मिले सुसाइड नोट में लिखा है मैं अपनी बीमारी से बहुत तंग आ चुका हूं… इसलिए अब जीना नहीं चाहता। मैं आप सभी से बहुत प्यार करता हूं कृपया अपना ध्यान रखें और स्वस्थ रहें।

    हैरानी की बात यह है कि परिजनों ने शैलेंद्र को किसी भी तरह की ‘गंभीर’ बीमारी होने से इनकार किया है। भाई के मुताबिक शैलेंद्र अक्सर मामूली मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम और उसके बाद होने वाली शारीरिक कमजोरी से परेशान रहते थे। हालांकि पुलिस जांच में एक और दुखद पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि शैलेंद्र की पत्नी ‘बच्चेदानी के कैंसर’ से जूझ रही हैं और पिछले एक साल से उनका इलाज चल रहा है। वर्तमान में पत्नी अपने मायके में रहकर उपचार करा रही हैं जिसे लेकर शैलेंद्र काफी समय से गहरे तनाव में थे।

    जांच अधिकारी SI गब्बर सिंह ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अब इस मामले की जांच मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों के नजरिए से भी कर रही है। यह घटना दर्शाती है कि कभी-कभी छोटी दिखने वाली शारीरिक समस्याएं और अपनों की बीमारी का बोझ एक व्यक्ति को भीतर से कितना कमजोर कर सकता है।

  • डॉक्टर बनने की चाहत और सिलेबस का भारी तनाव; भोपाल GMC की छात्रा की बाथरूम में मिली लाश, पीजी इंचार्ज का बड़ा खुलासा

    डॉक्टर बनने की चाहत और सिलेबस का भारी तनाव; भोपाल GMC की छात्रा की बाथरूम में मिली लाश, पीजी इंचार्ज का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एक बार फिर मानसिक तनाव और पढ़ाई के दबाव ने एक उभरते हुए करियर को हमेशा के लिए शांत कर दिया। आलीराजपुर जिले की रहने वाली एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी ने कोहेफिजा स्थित एक निजी पीजी (पेइंग गेस्ट) के बाथरूम में एसिड पीकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह जब रोशनी अपने कमरे से बाहर नहीं निकली और सहेलियों के बार-बार बुलाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तब इस खौफनाक वारदात का खुलासा हुआ।

    घटना की जानकारी मिलते ही आलीराजपुर से भोपाल पहुंचे पिता वंतर सिंह कलेश की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोशनी बचपन से ही मेधावी थी और उसका सपना एक सफल डॉक्टर बनने का था। नीट परीक्षा में 400 से अधिक अंक हासिल कर उसने अपनी मेहनत के दम पर गांधी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। पिता के अनुसार, रोशनी पिछले कुछ दिनों से घर पर ही थी और शनिवार को ही उन्होंने खुद उसे भोपाल जाने वाली ट्रेन में बैठाया था। हालांकि रोशनी ने बातों-बातों में पढ़ाई के दबाव का जिक्र किया था, लेकिन वह हमेशा हिम्मत दिखाते हुए कहती थी, “पापा, मैं संभाल लूंगी, मैं पढ़ लूंगी।” किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पढ़ाई का यह बोझ उसकी जान ले लेगा।

    दूसरी ओर, पीजी की संचालक करुणा नायर के बयानों ने मामले में एक नया मोड़ दे दिया है। संचालक का दावा है कि रोशनी जब दो दिन पहले घर से लौटी थी, तभी से वह अपनी सहेलियों के सामने सुसाइड करने की बातें कर रही थी। मंगलवार सुबह जब वह कॉलेज के लिए तैयार होकर बाहर नहीं निकली, तो सहेलियों ने गार्ड को बुलाकर दरवाजा तुड़वाया। भीतर का नजारा भयावह था; रोशनी बाथरूम में बेसुध पड़ी थी और पास ही एसिड की खाली बोतल पड़ी मिली। उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि एसिड पीने के कारण अंदरूनी अंगों के बुरी तरह जल जाने से उसकी मृत्यु हुई।

    गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन कविता एन. सिंह ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि रोशनी एक ‘डे-स्कॉलर’ छात्रा थी और अक्टूबर में ही उसने कॉलेज में प्रवेश लिया था। प्रारंभिक जांच और मोबाइल संदेशों से यह संकेत मिले हैं कि रोशनी को मेडिकल का सिलेबस समझने में कठिनाई हो रही थी। वह कड़ी मेहनत कर रही थी, लेकिन उसे लग रहा था कि वह विषयों को ठीक से समझ नहीं पा रही है। इसी ‘एकेडमिक स्ट्रेस’ के कारण वह गहरे अवसाद में चली गई थी। पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या तनाव का कारण सिर्फ पढ़ाई थी या इसके पीछे कुछ और भी वजहें छिपी हैं।