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  • केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन-पेंशन पर बड़ा अपडेट, 8वें वेतन आयोग का अगला पड़ाव भुवनेश्वर और कोलकाता; रिपोर्ट से पहले अंतिम चरण की परामर्श प्रक्रिया तेज

    केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन-पेंशन पर बड़ा अपडेट, 8वें वेतन आयोग का अगला पड़ाव भुवनेश्वर और कोलकाता; रिपोर्ट से पहले अंतिम चरण की परामर्श प्रक्रिया तेज

    नई दिल्ली । केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे 8वें वेतन आयोग ने अपनी परामर्श प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंपने से पहले आयोग देश के विभिन्न हिस्सों में कर्मचारी संगठनों, मंत्रालयों और सरकारी विभागों से लगातार संवाद कर रहा है। इसी क्रम में अब आयोग की टीम ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का दौरा करेगी, जहां विभिन्न हितधारकों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाएंगी।

    आयोग की अध्यक्षता कर रहीं न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में टीम हाल ही में लखनऊ में विभिन्न कर्मचारी संगठनों से चर्चा कर चुकी है। अब 6 और 7 जुलाई को भुवनेश्वर में रेलवे, रक्षा क्षेत्र और अन्य केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श प्रस्तावित है। इसके बाद 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में पूर्वी भारत के कर्मचारी संगठनों और संबंधित पक्षों के साथ अंतिम दौर की बैठकों का आयोजन किया जाएगा।

    इन बैठकों का उद्देश्य विभिन्न विभागों और कर्मचारी वर्गों की मांगों, सुझावों और व्यावहारिक समस्याओं को सीधे समझना है। आयोग चाहता है कि अंतिम सिफारिशें तैयार करते समय सभी वर्गों की राय को समुचित महत्व दिया जाए। इसी कारण देश के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर कर्मचारियों और उनके प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित किया जा रहा है।

    आयोग केवल कर्मचारी संगठनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और प्रशासनिक इकाइयों से भी विस्तृत जानकारी एकत्र कर रहा है। वेतन, भत्तों, पेंशन और अन्य वित्तीय दायित्वों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि सरकार पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय प्रभाव का वास्तविक आकलन किया जा सके। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसी संतुलित सिफारिशें तैयार करना है जो कर्मचारियों के हितों और सरकारी वित्तीय क्षमता, दोनों के अनुरूप हों।

    जानकारी के अनुसार अभी कई मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से आवश्यक आंकड़े आयोग को उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं। इसी वजह से संबंधित डेटा जमा करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी गई है। आयोग का मानना है कि सभी आवश्यक सूचनाएं प्राप्त होने के बाद ही व्यापक और तथ्याधारित रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी।

    रिपोर्ट की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आयोग विशेषज्ञ सलाहकारों की सेवाएं भी ले रहा है। वित्तीय विश्लेषण, प्रशासनिक ढांचे और वेतन संरचना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों की राय शामिल की जा रही है, ताकि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यवहारिक और प्रभावी सिफारिशें तैयार की जा सकें। आयोग इस बात पर विशेष ध्यान दे रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में किसी प्रकार की तथ्यात्मक त्रुटि या अधूरी जानकारी न रहे।

    मौजूदा कार्यप्रणाली को देखते हुए माना जा रहा है कि आयोग इस वर्ष अगस्त से दिसंबर के बीच अपनी अंतिम रिपोर्ट का मसौदा तैयार कर सकता है। इसके बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिस पर संबंधित मंत्रालयों और केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विचार किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर अब आयोग की आगामी बैठकों और अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि इन्हीं सिफारिशों के आधार पर भविष्य की वेतन और पेंशन संरचना तय होगी।

  • भुवनेश्वर: ‘मंदिरों का शहर’ जहां पत्थरों में सांस लेता है इतिहास और हर मोड़ पर झलकती है आस्था

    भुवनेश्वर: ‘मंदिरों का शहर’ जहां पत्थरों में सांस लेता है इतिहास और हर मोड़ पर झलकती है आस्था



    नई दिल्ली।
    ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को भारत का “टेंपल सिटी ऑफ इंडिया” कहा जाता है, जहां हर मोड़ पर आस्था और इतिहास की झलक देखने को मिलती है। यह शहर अपने प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध है, और यहां आने वाले पर्यटकों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव मिलता है।

    ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, एक समय भुवनेश्वर में 2000 से भी अधिक मंदिर हुआ करते थे, हालांकि समय के साथ कई मंदिर नष्ट हो गए, लेकिन आज भी यहां 700 से ज्यादा प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। इन मंदिरों में सबसे प्रमुख लिंगराज मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है और लगभग एक हजार साल पुराना माना जाता है। यह मंदिर कलिंग शैली की अद्भुत वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है, जिसकी ऊंची मीनारें और पत्थरों पर की गई नक्काशी लोगों को आकर्षित करती है।

    भुवनेश्वर सिर्फ मंदिरों का शहर ही नहीं, बल्कि यहां की रोजमर्रा की जिंदगी भी धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। सुबह की शुरुआत मंदिरों की घंटियों और भजनों से होती है, जबकि फूल, दीपक और पूजा सामग्री से जुड़ा स्थानीय कारोबार भी इसी आस्था पर आधारित है। यहां के त्योहार पूरे शहर को आध्यात्मिक रंग में रंग देते हैं और ओडिया व्यंजनों में भी धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।

    आज भुवनेश्वर आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जहां नई इमारतें और बेहतर सुविधाएं विकसित हो रही हैं, लेकिन इसके बीच सदियों पुराने मंदिर आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। यही परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम भुवनेश्वर को एक खास और अद्वितीय शहर बनाता है, जहां हर आगंतुक इतिहास, संस्कृति और भक्ति का अनुभव एक साथ करता है।

  • दिल्ली के प्रदूषण से त्रस्त BJD सांसद का बड़ा बयान संसद सत्र को अन्य शहरों में शिफ्ट करने की अपील

    दिल्ली के प्रदूषण से त्रस्त BJD सांसद का बड़ा बयान संसद सत्र को अन्य शहरों में शिफ्ट करने की अपील


    नई दिल्ली । दिल्ली में प्रदूषण की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है जिससे न केवल आम लोग बल्कि संसद के सदस्य भी प्रभावित हो रहे हैं। इस मुद्दे पर बीजू जनता दल राज्यसभा सदस्य मानस रंजन मंगराज ने सरकार से संसद के शीतकालीन और बजट सत्र को दिल्ली से बाहर अन्य शहरों में शिफ्ट करने की अपील की है। उनका कहना है कि प्रदूषण के स्तर के कारण संसद के सत्रों को दिल्ली से बाहर शिफ्ट करना आवश्यक है ताकि संसद के सदस्य और कर्मचारी स्वच्छ वायु में काम कर सकें और उनकी सेहत पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    प्रदूषण को मानव निर्मित आपदा करार

    सांसद मंगराज ने दिल्ली में प्रदूषण को “मानव निर्मित आपदा” बताया और इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि दिल्ली के प्रदूषण को नियंत्रित करना अब एक बड़े संकट का रूप ले चुका है और इसके प्रभाव से न सिर्फ आम जनता बल्कि संसद के कार्य में लगे कर्मचारी भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार होने तक संसद के सत्रों को अन्य शहरों में स्थानांतरित करने की मांग की।

    ओडिशा से तुलना संकटों से निपटने की क्षमता

    मानस रंजन मंगराज ने ओडिशा राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका राज्य चक्रवात बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने में हमेशा तत्पर रहता है। उन्होंने बताया कि ओडिशा सरकार ने कितनी प्रभावी ढंग से इन संकटों से निपटने के लिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया और हजारों लोगों की जान बचाई। मंगराज का कहना था कि जब ओडिशा जैसी जगह अपने नागरिकों को संकट से बाहर निकालने में सक्षम है तो दिल्ली में प्रदूषण के संकट को देखते हुए संसद के सत्र को कहीं और स्थानांतरित करने के लिए भारत सरकार को भी तत्पर होना चाहिए।

    सांसदों और कर्मचारियों की सुरक्षा की चिंता

    सांसद ने संसद के सदस्यों कर्मचारियों ड्राइवरों सफाई कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की सेहत को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण ये सभी लोग रोजाना जहरीली हवा के संपर्क में आ रहे हैं और यह उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। मंगराज ने कहा “हम इन कर्मचारियों की तकलीफ को नजरअंदाज नहीं कर सकते। प्रदूषण के चरम स्तर पर संसद सत्र आयोजित करना अनावश्यक रूप से लोगों की जान को खतरे में डालता है।”

    वैकल्पिक शहरों का सुझाव

    बीजेडी सांसद ने दिल्ली की जगह कुछ अन्य शहरों का सुझाव भी दिया जहां प्रदूषण कम है और जो बेहतर वायु गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे के साथ सत्र आयोजित करने के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। इनमें ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर हैदराबाद बेंगलुरु गांधीनगर गोवा और देहरादून शामिल हैं। मंगराज ने इन शहरों को संसद सत्र के लिए आदर्श स्थान बताया और सरकार से अनुरोध किया कि बिना देरी किए इन शहरों में सत्र आयोजित करने की संभावना पर विचार करें।

    राजनीति से प्रेरित नहीं जीवन और सेहत की सुरक्षा

    सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी इस मांग का उद्देश्य राजनीति नहीं है बल्कि यह लोगों की जिंदगी और सम्मान से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा “यह राजनीति की चीज नहीं है। यह जीवन और सम्मान की बात है। संसद को नेतृत्व दिखाना होगा और यह दिखाना होगा कि जीवन का अधिकार किसी भी राजनीतिक विवाद से पहले आता है।”

    प्रदूषण का असर

    दिल्ली में प्रदूषण की समस्या मुख्य रूप से अक्टूबर से जनवरी तक ज्यादा गंभीर हो जाती है। इस दौरान पराली जलाने वाहनों के उत्सर्जन और निर्माण कार्य से धूल के कारण वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। यही समय होता है जब संसद का शीतकालीन और बजट सत्र आयोजित किया जाता है। ऐसे में प्रदूषण के कारण सांस की बीमारी आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

    दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते संकट ने अब संसद के सत्रों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बीजेडी सांसद मानस रंजन मंगराज का यह बयान संसद के सत्रों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में आयोजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उनकी मांग से यह स्पष्ट है कि जब तक दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होता तब तक सत्र को अन्य शहरों में स्थानांतरित करने का विचार किया जाना चाहिए। यह केवल संसद के सदस्यों की सेहत के लिए जरूरी नहीं बल्कि पूरे देश के नागरिकों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करने का समय है।