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  • सिक्किम से रेल नेटवर्क से जुड़ेगा भूटान… तेजी से चल रहा काम, बढ़ सकती है चीन की टेंशन

    सिक्किम से रेल नेटवर्क से जुड़ेगा भूटान… तेजी से चल रहा काम, बढ़ सकती है चीन की टेंशन


    नई दिल्ली।
    पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम (Northeastern State Sikkim) और पड़ोसी देश भूटान (Bhutan) जल्द भारतीय रेल (Indian Railways) के आधिकारिक मानचित्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। भारत-चीन (India-China) और भारत-भूटान सीमा (India-Bhutan border) पर रणनीतिक पहुंच और कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए रेल और रक्षा मंत्रालय ने इन परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। सरकार ने सिक्किम के लिए 2027 और भूटान के लिए 2029 तक ट्रेन सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा है। भारत सरकार का यह कदम चीन के लिए टेंशन बन सकता है। चिकन नेक पर नजर रखने वाले चीन के लिए यह बड़ा झटका होगा।


    भूटान के लिए 69 किमी की रेल लाइन

    रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत-भूटान को जोड़ने के लिए 69 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय रेललाइन पर केंद्र सरकार 3500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। सरकार ने कोकराझार-गेलेफू रेललाइन को आधिकारिक तौर पर विशेष रेल परियोजना का दर्जा दिया है। ऐसा प्रशासनिक अड़चनें दूर कर भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी के लिए किया गया है। यह रेल कनेक्टिवटी न केवल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार को नई मजबूती देगा, बल्कि भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी मास्टर प्लान को भी सीधे भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगा।


    सीमा सुरक्षा मजबूत होगी, पर्यटन को भी उड़ान

    इन दोनों परियोजनाओं से न केवल पूर्वोत्तर के दुर्गम क्षेत्रों में आम लोगों, पर्यटकों और व्यापारियों की आवाजाही सुगम और सस्ती होगी, बल्कि सीमा पर भारत का सामरिक और भौगोलिक शक्ति-संतुलन भी पूरी तरह बदल जाएगा। सीमा सुरक्षा और सैन्य रसद (लॉजिस्टिक्स) में रणनीतिक मजबूती आएगी। चीन और भूटान की सीमाओं पर स्थित इन बेहद संवेदनशील मोर्चों पर वर्तमान में मौसम खराब या भूस्खलन के कारण सेना की आवाजाही बाधित हो जाती है। नई रेल लाइन शुरू होने से वहां सैन्य साजो-सामान, हथियार और टुकड़ियों को पहुंचाने में लगने वाला समय 50 फीसदी से अधिक घट जाएगा। विशेषकर तीस्ता के नीचे बन रहे भूमिगत स्टेशन और सुरंगों से गुजरने वाला यह मार्ग हर मौसम में सुरक्षित कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

    सिक्किम को ब्रॉडगेज रेल सेवा से जोड़ने के लिए सेवक-रंगपो रेल परियोजना पर काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। 44.96 किलोमीटर लंबी इस चुनौतीपूर्ण रेललाइन का लगभग 86-90 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। परियोजना का सबसे मुख्य आकर्षण तीस्ता नदी के नीचे तैयार किया जा रहा तीस्ता बाजार रेलवे स्टेशन है। यह देश का पहला पूरी तरह अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन होगा। 12450 करोड़ की लागत से बनाई जा रही रेल लाइन पर सेफ्टी ट्रायल रन और ट्रेन परिचालन दिसंबर 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य है।

  • भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति

    भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति


    नई दिल्ली ।
    भारत और भूटान के बीच लंबे समय से कायम मित्रता अब विकास सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य केंद्रित रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रही है। दोनों देशों के बीच पिछले एक वर्ष के दौरान आर्थिक योजना, ऊर्जा परिवर्तन, क्षेत्रीय संपर्क और ज्ञान साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिली है।

    भारत और भूटान के संबंध 1949 और 2007 की मैत्री संधियों की भावना पर आधारित हैं। समय के साथ दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ा है और भारत की विकास भागीदारी अब केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। इसे भूटान की दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा जा रहा है।

    हाल में हुई पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना 2024-29 के लिए भारत की ओर से घोषित 10,000 करोड़ रुपये की सहायता की समीक्षा की गई। इस सहयोग पैकेज का बड़ा हिस्सा प्राथमिकता वाली विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया गया है।

    इसमें 6,860 करोड़ रुपये 82 उच्च प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए निर्धारित हैं। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और आपदा प्रतिरोधी विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। शेष राशि भूटान के आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए बजटीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जा रही है।

    भारत-भूटान सहयोग की एक प्रमुख विशेषता यह है कि विकास परियोजनाओं को भूटान की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे स्थानीय स्वामित्व मजबूत होने और योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। भारत की जेएसडब्ल्यू एनर्जी और भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन ने 920 मेगावाट की पुनात्सांगछू-III जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए संयुक्त उद्यम बनाया है। इसमें भूटानी कंपनी की 51 प्रतिशत और भारतीय कंपनी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

    इसके अलावा, भूटान सरकार और भारतीय निर्यात-आयात बैंक के बीच 4,000 करोड़ रुपये की अम्ब्रेला ऋण सुविधा सक्रिय हुई है। इसका इस्तेमाल नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाना है। इससे भूटान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और क्षमता विस्तार को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    दोनों देश सीमा क्षेत्र को केवल भौगोलिक संपर्क के बजाय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण गलियारे के रूप में विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। दक्षिण-पूर्वी भूटान के सामरंग और असम के उदालगुड़ी जिले के बीच नया भूमि सीमा शुल्क मार्ग विकसित किया जा रहा है।

    इस मार्ग से कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं के आवागमन को सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भूटान के दक्षिणी क्षेत्रों और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा वैकल्पिक परिवहन मार्ग उपलब्ध होंगे।

    भारत-भूटान सहयोग का विस्तार डिजिटल और डाक सेवाओं तक भी हुआ है। गुवाहाटी में शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय डाक सहयोग पहल के तहत इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया है। इसमें यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की पॉसट्रांसफर व्यवस्था को भारत की यूपीआई प्रणाली से जोड़ने की पहल शामिल है।

    रेल संपर्क भी भविष्य के सहयोग का अहम हिस्सा है। भूटान के पास अभी घरेलू रेल नेटवर्क नहीं है, लेकिन भारत सीमा तक रेल संपर्क के विस्तार पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में भूटानी माल ढुलाई को तेज, कम लागत वाला और अधिक कुशल परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है।

    इस तरह भारत और भूटान के रिश्ते अब पारंपरिक विकास सहायता से आगे बढ़कर ऊर्जा, व्यापार, डिजिटल सेवाओं, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय संपर्क के साझा हितों पर आधारित व्यापक साझेदारी में बदल रहे हैं। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।

  • ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील

    ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और भूटान के बीच ई20 पेट्रोल के निर्यात को लेकर सामने आई चर्चाओं पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट और आधिकारिक रुख अपनाते हुए उन सभी दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि भूटान ने भारत से ई20 पेट्रोल आयात करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। सरकार ने साफ किया कि इस तरह का कोई प्रस्ताव भूटान को भेजा ही नहीं गया था, इसलिए उसे ठुकराने का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों से सावधान रहने की अपील भी की गई है।

    सरकार के अनुसार, भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भूटान को ई20 पेट्रोल निर्यात करने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है। ऐसे में यह दावा पूरी तरह तथ्यहीन है कि पड़ोसी देश ने भारत के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। केंद्र ने कहा कि इस प्रकार की अपुष्ट खबरें लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं और वास्तविक तथ्यों से उनका कोई संबंध नहीं है।

    हाल के दिनों में कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि भूटान ने ई20 पेट्रोल को अपनाने से इनकार कर दिया है। इन रिपोर्ट्स में स्टोरेज से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को इसकी वजह बताया गया था। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा कोई आधिकारिक संवाद या प्रस्ताव ही नहीं हुआ, इसलिए इन दावों को सही नहीं माना जा सकता।

    सरकार ने इस अवसर पर ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अन्य भ्रामक जानकारियों पर भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय का कहना है कि ई20 ईंधन को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है कि इससे वाहन खराब हो सकते हैं, इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, प्रदूषण बढ़ता है या एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी की खपत होती है। सरकार ने इन सभी दावों को वैज्ञानिक तथ्यों से परे और पूरी तरह निराधार बताया है।

    केंद्र के अनुसार, ई20 ईंधन पर देश के प्रमुख ऑटोमोटिव अनुसंधान संस्थानों द्वारा व्यापक तकनीकी अध्ययन किए जा चुके हैं। इन अध्ययनों में कहीं भी यह निष्कर्ष सामने नहीं आया कि ई20 पेट्रोल वाहनों के लिए हानिकारक है। सरकार का कहना है कि तकनीकी परीक्षणों और विशेषज्ञों की रिपोर्टों के आधार पर ही देश में चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ई20 पेट्रोल का उद्देश्य केवल पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम करना ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना भी है। एथेनॉल जैविक स्रोतों से तैयार होने वाला ईंधन है, जिसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलती है। इससे वातावरण में शुद्ध कार्बन उत्सर्जन का स्तर घटाने की दिशा में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि ई20 पेट्रोल या उससे जुड़े किसी भी विषय पर केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित होने वाली खबरें भ्रम पैदा कर सकती हैं और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए किसी भी जानकारी को सही मानने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि करना आवश्यक है। सरकार ने दोहराया कि ई20 ईंधन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का वास्तविक तथ्यों और वैज्ञानिक अध्ययनों से कोई संबंध नहीं है तथा इस संबंध में सभी निर्णय स्थापित तकनीकी मानकों और परीक्षणों के आधार पर ही लिए जा रहे हैं।

  • E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद: भूटान ने भारत से साधारण ईंधन की मांग की, तेल कंपनियों के प्रस्ताव को किया खारिज

    E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद: भूटान ने भारत से साधारण ईंधन की मांग की, तेल कंपनियों के प्रस्ताव को किया खारिज


    नई दिल्ली। देश में E20 पेट्रोल को लेकर चल रहा विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। भारत में लगातार यह आरोप लगाया जा रहा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज कम हो रहा है और इंजन संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी बीच पड़ोसी देश भूटान ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताते हुए तेल कंपनियों और भारत सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

    भूटानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भूटान सरकार ने भारत से अनुरोध किया है कि उसे पहले की तरह सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखी जाए। भूटान का कहना है कि उसके भौगोलिक हालात और परिवहन जरूरतों को देखते हुए उसे अधिक माइलेज देने वाले पारंपरिक ईंधन की आवश्यकता है।

    भूटान का बड़ा हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है, जहां ऊंची चढ़ाइयां और कठिन रास्ते हैं। ऐसे में वाहनों के लिए बेहतर माइलेज बेहद जरूरी माना जाता है। इसी आधार पर भूटान ने चिंता जताई है कि यदि E20 पेट्रोल से जुड़ी समस्याएं सही साबित होती हैं, तो पहाड़ी देश की परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    भूमिगत भंडारण को लेकर भी जताई चिंता
    भूटान के लिए E20 पेट्रोल को लेकर केवल माइलेज ही नहीं, बल्कि भंडारण भी एक बड़ी चुनौती बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूटान भारत से आयातित ईंधन को भूमिगत टैंकों में संग्रहित करता है। भूटानी अधिकारियों का कहना है कि इन टैंकों में E20 मिश्रित पेट्रोल रखने से पानी के रिसाव का खतरा बढ़ सकता है।

    स्थानीय मीडिया के अनुसार, भूमिगत भंडारण संरचना की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। वैज्ञानिक दृष्टि से भी बताया गया है कि E20 पेट्रोल में मौजूद इथेनॉल नमी को तेजी से सोख सकता है, जिससे टैंकों में पानी जमा होने की आशंका रहती है।

    भूटान ने E20 पेट्रोल खरीदने से किया इनकार
    भूटान, जो अपनी जरूरत का अधिकांश ईंधन भारत से खरीदता है, ने स्पष्ट रूप से ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लेने से इनकार कर दिया है। साथ ही उसने भारत सरकार से आग्रह किया है कि यदि भविष्य में E20 पेट्रोल की आपूर्ति बढ़ाई जाती है, तो उसे पहले से इसकी जानकारी दी जाए।

    भूटानी अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत सरकार को उनके लिए नए और सुरक्षित ईंधन भंडारण टैंकों की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    क्या है E20 विवाद?
    भारत में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से E20 पेट्रोल के समर्थन में रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह नीति कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    हालांकि, कई वाहन मालिकों का दावा है कि 2023 से पहले बने वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में गिरावट और इंजन की खराबी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। इसी कारण देश में इस ईंधन को लेकर बहस तेज हो गई है।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां सरकार ने इसे एक परीक्षण (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में बताया। सरकार के अनुसार इसके परिणाम अगले वर्ष तक स्पष्ट होंगे। वहीं आलोचकों का कहना है कि इस नीति के चलते आम उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

  • भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

    भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

    नई दिल्ली:  भूटान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। इन्हीं में से सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध उत्सव है पारो त्शेचू फेस्टिवल

    यह उत्सव हर साल वसंत ऋतु में मनाया जाता है, आमतौर पर अप्रैल के शुरुआती दिनों में। इस वर्ष यह फेस्टिवल 29 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भूटान की आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रदर्शन है

    पारो त्शेचू के दौरान भिक्षु और स्थानीय लोग पारंपरिक मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं और बौद्ध मंत्रों का जाप करते हैं। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक मान्यताओं और कहानियों को दर्शाता है

    इस उत्सव में लोग रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में शामिल होते हैं, जिससे पूरा वातावरण जीवंत और आकर्षक बन जाता है। यहां होने वाले मुखौटा नृत्य प्राचीन बौद्ध कथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं

    इस फेस्टिवल में गुरु पद्मसंभव की कहानियों को भी दर्शाया जाता है, जिन्होंने भूटान में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माना जाता है कि उन्होंने भूटान के सम्राट को ठीक करने में मदद की थी और इसी से तिब्बती बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई
     पारो त्शेचू फेस्टिवल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भूटान की संस्कृति, आस्था और विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाला एक भव्य उत्सव है

  • विदेशी नागरिकों के आधार पर सख्ती: वीजा खत्म होते ही होगा निष्क्रिय, OCI और नेपाल-भूटान नागरिकों के लिए 10 साल तक वैध

    विदेशी नागरिकों के आधार पर सख्ती: वीजा खत्म होते ही होगा निष्क्रिय, OCI और नेपाल-भूटान नागरिकों के लिए 10 साल तक वैध


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने विदेशियों के आधार कार्ड की वैधता को लेकर नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब स्पष्ट कर दिया गया है कि भारत में वीजा लेकर रहने वाले सभी विदेशी नागरिकों का आधार कार्ड उनकी कानूनी स्थिति और वीजा की अवधि से सीधे जुड़ा रहेगा। इसका मतलब यह है कि वीजा समाप्त होते ही आधार कार्ड स्वतः निष्क्रिय डिएक्टिवेट कर दिया जाएगा जिससे फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर कड़ी रोक लगेगी।

    सरकार ने बताया कि ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्डधारक जिनका भारतीय मूल से संबंध है और जिन्हें लंबी अवधि तक रहने की विशेष अनुमति प्राप्त है उनके आधार कार्ड 10 वर्षों तक मान्य रहेंगे। 10 साल के बाद उन्हें आधार को नवीनीकरण या अपडेट करवाना होगा। इस प्रकार OCI कार्डधारकों को स्थायी रूप से आधार से जुड़े लाभों और सेवाओं का फायदा मिलता रहेगा।

    लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत में रह रहे अन्य विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड केवल उनके वीजा की अवधि तक ही वैध होंगे। इसी तरह टूरिस्ट बिजनेस स्टूडेंट और अन्य श्रेणी के वीजा पर आने वाले विदेशी नागरिकों का आधार कार्ड भी वीजा समाप्त होते ही निष्क्रिय कर दिया जाएगा। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। भारत के साथ विशेष संबंध वाले इन देशों के नागरिकों के आधार कार्ड 10 वर्षों तक वैध रहेंगे। यह प्रावधान उन सुविधाओं और लंबी अवधि के प्रवास को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है ताकि उनके लिए आधार से जुड़े लाभ जारी रह सकें।

    सरकार का कहना है कि पिछली कुछ वर्षों में ऐसे मामले सामने आए थे जहां वीजा समाप्त होने के बावजूद विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार बनवा लेते थे और देश में रहते थे। नई व्यवस्था के तहत अब आधार कार्ड की वैधता सीधे व्यक्ति की कानूनी स्थिति और वीजा अवधि से जुड़ी होगी। इससे सरकारी योजनाओं बैंकिंग सेवाओं और अन्य सुविधाओं में किसी भी तरह के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।

    विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आधार की निगरानी प्रणाली को और सख्त बनाया जाएगा। डिजिटल माध्यम और तकनीकी उपकरणों की मदद से वीजा समाप्त होते ही संबंधित आधार कार्ड स्वतः निष्क्रिय कर दिया जाएगा। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी विदेशी नागरिक केवल वैध आधार के माध्यम से ही सेवाओं का लाभ उठा सकें।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम न केवल सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि विदेशी नागरिकों और भारतीय नागरिकों के बीच पारदर्शिता और विश्वास को भी मजबूत करेगा। इससे फर्जी दस्तावेजों के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी और आधार प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहेगी।