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  • चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का फीका प्रदर्शन, तीन मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ एक विकेट

    चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का फीका प्रदर्शन, तीन मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ एक विकेट


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चार साल बाद वापसी अब तक उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही है। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज में मेरठ के 36 वर्षीय गेंदबाज को शुरुआती तीन मुकाबलों में अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा है। अपनी स्विंग गेंदबाजी के दम पर दुनिया के बड़े बल्लेबाजों को परेशान करने वाले भुवनेश्वर इस बार रन रोकने और विकेट निकालने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके। तीन मैचों में उन्होंने कुल 12 ओवर गेंदबाजी करते हुए 139 रन खर्च किए और उनके खाते में केवल एक विकेट आया। ऐसे प्रदर्शन के बाद अब अगले मुकाबलों में उनकी गेंदबाजी पर सभी की निगाहें रहेंगी।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा है। बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाकर विरोधी टीम पर दबाव बनाया है और गेंदबाजों ने भी कई मौकों पर अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि भुवनेश्वर कुमार के लिए शुरुआती मुकाबले चुनौतीपूर्ण साबित हुए। पहले मैच में उन्होंने चार ओवर में 49 रन दिए जबकि दूसरे मुकाबले में उनके खाते से 50 रन खर्च हुए। तीसरे टी20 में भी उन्होंने चार ओवर में 40 रन दिए। हालांकि पिछले दो मैचों की तुलना में उनके प्रदर्शन में कुछ सुधार दिखाई दिया लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिल सका। तीन मैचों में उनकी इकोनॉमी 11.58 रन प्रति ओवर रही है जो टी20 क्रिकेट के लिहाज से काफी महंगी मानी जाती है।

    भुवनेश्वर कुमार को भारतीय क्रिकेट में उनकी शानदार स्विंग गेंदबाजी और शुरुआती ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता के लिए जाना जाता है। नई गेंद से दोनों तरफ स्विंग कराने की उनकी कला ने उन्हें लंबे समय तक टीम इंडिया का अहम गेंदबाज बनाए रखा। लेकिन लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। मैच की परिस्थितियों के अनुसार गेंदबाजी करना और दबाव के बीच सही लाइन और लेंथ बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भुवनेश्वर को भी अपनी पुरानी लय पाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।

    टीम प्रबंधन को अनुभव पर भरोसा

    शुरुआती तीन मुकाबलों में महंगे साबित होने के बावजूद टीम प्रबंधन और मुख्य कोच ने भुवनेश्वर कुमार के अनुभव पर भरोसा जताया है। टीम का मानना है कि लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के कारण खिलाड़ी को लय में लौटने में समय लग सकता है। मेरठ के गांधी बाग में क्रिकेट कोच तनकीब अहमद ने भी माना कि लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने पर खिलाड़ी के ऊपर दबाव रहता है। हर खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करना चाहता है और भुवनेश्वर भी आने वाले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कोच अतरह अली के मुताबिक भी वापसी के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव रहता है और खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करता है।

    अगले मुकाबलों में लय हासिल करने की चुनौती

    अब सीरीज के अगले मैच भुवनेश्वर कुमार के लिए काफी अहम होंगे। उन्हें अपनी गेंदबाजी में सटीकता लाने के साथ विकेट निकालने की क्षमता भी दिखानी होगी। शुरुआती ओवरों में रन रोकना और बल्लेबाजों को गलतियां करने के लिए मजबूर करना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। यदि वह अपनी स्विंग और अनुभव का सही इस्तेमाल कर पाए तो टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। फिलहाल उनके प्रदर्शन पर सवाल जरूर उठ रहे हैं लेकिन सीरीज के बाकी मुकाबलों में वापसी करने का अवसर उनके पास है। अब देखना होगा कि अनुभवी भुवी अपने प्रदर्शन में कितना सुधार कर पाते हैं और टीम प्रबंधन के भरोसे पर किस तरह खरे उतरते हैं।

  • टीम इंडिया में चयन नहीं होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, चयनकर्ताओं पर साधा निशाना, बोले मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं

    टीम इंडिया में चयन नहीं होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, चयनकर्ताओं पर साधा निशाना, बोले मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी के बाद मोहम्मद शमी के चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ भुवनेश्वर कुमार को लंबे इंतजार के बाद टी20 टीम में जगह मिली है तो दूसरी तरफ मोहम्मद शमी अब भी भारतीय टीम में वापसी का इंतजार कर रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से खेलने जा रहे शमी ने टीम में चयन नहीं होने को लेकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि पिछले दो से तीन साल से उनके साथ यही स्थिति बनी हुई है और लगातार प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें टीम इंडिया में मौका नहीं मिल रहा है।
    रेवस्पोर्ट्स से बातचीत के दौरान जब शमी से भुवनेश्वर कुमार की वापसी और खुद के लंबे समय से टीम से बाहर रहने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि भुवनेश्वर को भारत के लिए खेलने का मौका मिला है और यह उनके लिए अच्छी बात है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भुवनेश्वर के चयन से उनका कोई लेना देना नहीं है। शमी ने कहा कि उन्हें जहां भी खेलने का अवसर मिलेगा वह अपना शत प्रतिशत प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल उनका पूरा ध्यान रणजी ट्रॉफी के मुकाबलों पर है।
    शमी ने अपने बयान में चयन को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले दो से तीन वर्षों से उनके साथ ऐसा ही हो रहा है। वह लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और बंगाल के लिए खेलते हुए अपनी फिटनेस भी साबित कर चुके हैं। इसके बावजूद अगर उन्हें दोबारा भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिलता है तो यह उनका नुकसान नहीं होगा। उनके इस बयान के बाद अनुभवी तेज गेंदबाजों के चयन और टीम इंडिया में वापसी के अवसरों को लेकर बहस तेज हो गई है।
    36 वर्षीय मोहम्मद शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी में खेला था। इसके बाद से वह भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं। फिटनेस से जुड़ी समस्याओं और युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दिए जाने को उनके टीम से बाहर रहने की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। हालांकि शमी घरेलू क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी के दम पर वापसी की उम्मीद बनाए हुए हैं। रणजी ट्रॉफी में बंगाल की टीम का हिस्सा होने के कारण उनके पास एक बार फिर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर है।
    दूसरी ओर भुवनेश्वर कुमार ने आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टी20 टीम में वापसी की है। उन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम में शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि उन्हें 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप की योजनाओं के मद्देनजर भी परखा जा सकता है। भुवनेश्वर की वापसी ने अनुभवी गेंदबाजों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
    वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सपाट पिचों पर गेंदबाजों को मिल रही चुनौती के बीच क्रिकेट प्रशंसक और विशेषज्ञ अनुभवी खिलाड़ियों को मौका देने की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में शमी का बयान चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि टीम में चयन का अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की रणनीति पर निर्भर करता है। शमी के लिए फिलहाल रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करना और अपनी गेंदबाजी की लय बनाए रखना अहम होगा। उनका घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन आने वाले समय में टीम इंडिया में वापसी की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
  • भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा

    भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा


    नई दिल्ली । करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। 36 साल की उम्र में टीम इंडिया के पेस अटैक में दोबारा जगह बनाने वाले भुवनेश्वर के लिए यह वापसी उनके अनुभव और शानदार प्रदर्शन का इनाम मानी जा रही है। लेकिन इसके साथ ही भारतीय तेज गेंदबाजी की गहराई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुने गए भुवनेश्वर की वापसी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जसप्रीत बुमराह के बाद भारतीय तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी उठाने के लिए भरोसेमंद विकल्प कौन है।
    भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था। अब उसी टीम के विरुद्ध उनकी वापसी की कहानी दिलचस्प संयोग लेकर आई है। भुवनेश्वर ने अपने करियर में 21 टेस्ट 87 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 121 वनडे मुकाबले खेले हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही है। इसके अलावा वह सटीक यॉर्कर और नियंत्रित लाइन लेंथ से बल्लेबाजों को परेशान करने में माहिर हैं। पिछले दो आईपीएल सीजन में उनके प्रदर्शन ने भी चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। करीब आठ की इकॉनमी से 45 विकेट लेने वाले भुवनेश्वर ने साबित किया है कि अनुभव और कौशल के दम पर वह अब भी प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।
    भुवनेश्वर की वापसी को समझने के लिए भारतीय क्रिकेट के पुराने उदाहरणों पर भी नजर डालना जरूरी है। पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी 2011 विश्व कप के बाद करीब पांच साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद 2016 में टीम इंडिया में वापसी की थी। उस समय उनकी उम्र भी लगभग 36 साल थी। नेहरा ने इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित की और 2017 में संन्यास लिया। ऐसे में भुवनेश्वर की वापसी को उम्र के लिहाज से असामान्य नहीं कहा जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या यह वापसी केवल उनके मौजूदा प्रदर्शन का परिणाम है या भारतीय टीम को अनुभवी तेज गेंदबाजों की कमी भी महसूस हो रही है।
    जसप्रीत बुमराह भारतीय गेंदबाजी की सबसे मजबूत कड़ी हैं लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में टीम को संतुलित रखने की चुनौती बनी रहती है। मोहम्मद शमी लंबे समय तक इस भूमिका को मजबूती से निभाते रहे हैं लेकिन उन्हें लगातार मौके मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मोहम्मद सिराज ने भी कई मुकाबलों में अपनी क्षमता दिखाई है लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी भूमिका और निरंतरता को लेकर चर्चा जारी है। दूसरी ओर अर्शदीप सिंह प्रसिद्ध कृष्णा हर्षित राणा और मयंक यादव जैसे गेंदबाजों ने अलग-अलग मौकों पर उम्मीद जगाई है। इसके बावजूद किसी एक तेज गेंदबाज को तीनों प्रारूपों में लंबे समय तक भरोसेमंद विकल्प मानना अभी आसान नहीं है।
    भारतीय क्रिकेट के पास बड़ा घरेलू ढांचा आईपीएल जैसा प्रतिस्पर्धी मंच और खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। बल्लेबाजी में हर दौर के बाद नई पीढ़ी सामने आती रही है। सचिन तेंदुलकर सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी आए। अब युवा बल्लेबाज भी अपनी जगह बनाने लगे हैं। तेज गेंदबाजी में हालांकि ऐसी निरंतरता उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं देती। चोटें कार्यभार प्रबंधन और प्रदर्शन में उतार चढ़ाव तेज गेंदबाजों के करियर को प्रभावित करते रहे हैं।
    भुवनेश्वर कुमार की वापसी इसलिए केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल भी है। बुमराह जैसा गेंदबाज हर पीढ़ी में नहीं मिलता और किसी दूसरे खिलाड़ी से हूबहू उनकी जगह लेने की उम्मीद करना भी सही नहीं होगा। लेकिन टीम के पास ऐसे विकल्प जरूर होने चाहिए जो उनकी अनुपस्थिति में गेंदबाजी को मजबूती दे सकें। न्यूजीलैंड सीरीज भुवनेश्वर के लिए खुद को दोबारा साबित करने का मौका होगी। साथ ही यह चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण परीक्षा होगी कि वे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा तेज गेंदबाजों को किस तरह तैयार करते हैं। आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही है कि भुवी के बाद कौन और भविष्य में बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम इंडिया की अगुवाई कौन करेगा।
  • NZ Tour: टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान… 4 साल बाद भुवनेश्वर कुमार की वापसी

    NZ Tour: टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान… 4 साल बाद भुवनेश्वर कुमार की वापसी


    नई दिल्ली।
    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Cricket Control Board of India- BCCI) की पुरुष चयन समिति ने आगामी न्यूजीलैंड दौरे (New Zealand Tour) के लिए टीम इंडिया (Team India) और इंडिया ‘ए’ के स्क्वाड का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

    इस दौरे पर भारतीय टीम मेजबान न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की रोमांचक टी20 सीरीज खेलेगी, जबकि इंडिया ‘ए’ की टीम न्यूजीलैंड ‘ए’ के खिलाफ तीन मल्टी-डे (चार दिवसीय) मैच खेलेगी. वनडे और टेस्ट सीरीज के लिए टीमों की घोषणा फिलहाल बाद में की जाएगी।

    इस स्क्वाड की सबसे बड़ी खबर अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी है, जिन्हें एक बार फिर नीली जर्सी में गेंदबाजी का जिम्मा सौंपा गया है. श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंपी गई है, जबकि उपकप्तानी की जिम्मेदारी तिलक वर्मा को दी गई है।


    क्यों हुई भुवनेश्वर कुमार की वापसी?

    भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी टी20 मुकाबला नवंबर 2022 में एडिलेड ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेला था. इसके बाद से वह टीम से बाहर चल रहे थे, लेकिन पिछले दो आईपीएल (IPL) सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के लिए उनके शानदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    पिछले दो संस्करणों में शानदार गेंदबाजी करते हुए उन्होंने कुल 45 विकेट झटके और टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई. नई गेंद से उनकी स्विंग और अनुभव को देखते हुए उन्हें एक बार फिर नेशनल टीम में मौका मिला है. हालांकि, इस चयन के चलते भुवनेश्वर कुमार को हांगकांग सिक्सेस से हटना होगा, जहां उन्हें हाल ही में कप्तान बनाया गया था।

    टी20 टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, नमन धीर, प्रिंस यादव, मयंक यादव, अर्शदीप सिंह, भुवनेश्वर कुमार, वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव.

    इंडिया ‘ए’ टीम: ध्रुव जुरेल (कप्तान/विकेटकीपर), यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, रविचंद्रन स्मरण, ऋषभ पंत* (विकेटकीपर – फिटनेस के अधीन), वाशिंगटन सुंदर, आकिब नबी, आकाश दीप, अंशुल कंबोज, मानव सुथार, मुकेश चौधरी, साई सुदर्शन, यश राठौड़ और मुकेश कुमार।

  • IPL 2026: चोपड़ा की नजर में सबसे खास खिलाड़ी, ओपनर और गेंदबाज दोनों तय

    IPL 2026: चोपड़ा की नजर में सबसे खास खिलाड़ी, ओपनर और गेंदबाज दोनों तय


    नई दिल्ली । आईपीएल 2026 का सीजन रोमांच, रिकॉर्ड और व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिहाज से बेहद यादगार रहा। इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर Aakash Chopra ने इस सीजन के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों की अपनी पसंद साझा की है, जिसमें युवा बल्लेबाजों से लेकर अनुभवी गेंदबाजों तक को जगह मिली है।

    आकाश चोपड़ा ने सबसे पहले इस सीजन की सर्वश्रेष्ठ पारी के रूप में KL Rahul की धमाकेदार 152 रनों की नाबाद पारी को चुना। यह पारी Delhi Capitals की ओर से खेलते हुए आई थी, जिसमें राहुल ने 67 गेंदों पर 16 चौके और 9 छक्के लगाए थे। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर दिल्ली ने 20 ओवर में 264 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था, जो सीजन के सबसे बड़े स्कोरों में से एक रहा।

    सर्वश्रेष्ठ ओपनर के तौर पर आकाश चोपड़ा ने 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi को चुना, जिन्होंने Rajasthan Royals के लिए शानदार प्रदर्शन किया। वैभव ने 16 मैचों में 776 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 237 रहा। इस सीजन उन्होंने 72 छक्के लगाकर कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ दिए और सबसे युवा ऑरेंज कैप विजेता बनने का गौरव हासिल किया।

    मिडिल ऑर्डर में आकाश चोपड़ा ने Heinrich Klaasen को सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज चुना। Sunrisers Hyderabad की ओर से खेलते हुए क्लासेन ने 15 मैचों में 624 रन बनाए और पूरे सीजन में 160 के स्ट्राइक रेट से आक्रामक बल्लेबाजी की। वह इस सीजन टॉप रन स्कोरर्स में भी शामिल रहे।

    फिनिशर की भूमिका में आकाश चोपड़ा ने Donovan Ferreira को सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी माना, जिन्होंने दबाव की परिस्थितियों में अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    गेंदबाजी में सबसे बड़ा नाम Bhuvneshwar Kumar का रहा, जिन्हें आकाश चोपड़ा ने आईपीएल 2026 का सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज चुना। Royal Challengers Bengaluru के लिए खेलते हुए भुवनेश्वर ने 16 मैचों में 28 विकेट हासिल किए और 17.89 की शानदार इकॉनमी से रन रोके। वह इस सीजन दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल रहे।

    आईपीएल 2026 में आकाश चोपड़ा की यह टीम चयन इस बात को दिखाता है कि इस सीजन युवा प्रतिभा और अनुभवी खिलाड़ियों दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया। वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा सितारे जहां भविष्य की झलक देते हैं, वहीं भुवनेश्वर कुमार जैसे अनुभवी गेंदबाज आज भी अपनी उपयोगिता साबित करते हैं।

  • RCB की लगातार दूसरी जीत के बाद खिलाड़ियों ने खोले दिल, कोहली की पारी से फाइनल में 5 विकेट से जीत

    RCB की लगातार दूसरी जीत के बाद खिलाड़ियों ने खोले दिल, कोहली की पारी से फाइनल में 5 विकेट से जीत


    मध्य प्रदेश । आईपीएल 2026 का खिताब जीतने के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाड़ियों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी, लेकिन टीम के अनुभवी गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं, बल्कि टीम की जीत सबसे महत्वपूर्ण है।

    भुवनेश्वर कुमार ने कहा, “मुझे ट्रॉफी चाहिए थी, पर्पल कैप नहीं। यह सीजन हमारे लिए बेहद खास रहा और हमने शुरुआत से ही मजबूत रणनीति के साथ खेला।” उन्होंने बताया कि लगातार विकेट लेने से आत्मविश्वास बढ़ता है और बड़े मैचों में यह अनुभव काफी काम आता है।

    भुवनेश्वर इस सीजन में आरसीबी के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 16 मैचों में 28 विकेट लिए और सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे। उनसे आगे केवल गुजरात टाइटंस के कगिसो रबाडा रहे, जिन्होंने 29 विकेट झटके, हालांकि उन्होंने एक मैच ज्यादा खेला था।

    टीम की जीत में बल्लेबाजों का भी अहम योगदान रहा। देवदत्त पड्डिकल ने कहा कि इस टीम के साथ खेलना एक शानदार अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि टीम में मौजूद बड़े खिलाड़ियों से सीखने का मौका मिला और गेंदबाजों ने बेहतरीन योजनाओं के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने विशेष रूप से विराट कोहली की बल्लेबाजी और उनके रन बनाने की भूख की तारीफ की।

    विकेटकीपर बल्लेबाज जितेश शर्मा ने भी टीम मैनेजमेंट की रणनीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम का फोकस दबाव में भी प्रक्रिया पर टिके रहने पर था, न कि सिर्फ नतीजों पर। इसी सोच ने टीम को मजबूत बनाए रखा और लगातार जीत की ओर बढ़ाया।

    वहीं तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड ने कहा कि टीम का माहौल और सपोर्ट स्टाफ बेहद मजबूत है, जिसने खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भुवनेश्वर की लगातार विकेट लेने की क्षमता को टीम के लिए बड़ा प्लस पॉइंट बताया।

    फाइनल मुकाबले की बात करें तो गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 155 रन बनाए। जवाब में RCB ने विराट कोहली की नाबाद 75 रनों की शानदार पारी की बदौलत 18 ओवर में 5 विकेट पर 161 रन बनाकर मैच जीत लिया।

    इस जीत के साथ RCB ने लगातार दूसरी बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की और टीम ने एक बार फिर साबित किया कि संतुलित प्रदर्शन और मजबूत रणनीति ही सफलता की कुंजी है।

  • आईपीएल 2026 पॉइंट्स टेबल अपडेट: हार के बाद भी RCB नंबर-2, भुवनेश्वर के सिर सजी पर्पल कैप

    आईपीएल 2026 पॉइंट्स टेबल अपडेट: हार के बाद भी RCB नंबर-2, भुवनेश्वर के सिर सजी पर्पल कैप


    नई दिल्ली। Indian Premier League 2026 में गुरुवार को खेले गए मुकाबले के बाद पॉइंट्स टेबल में दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। Gujarat Titans से 4 विकेट की हार झेलने के बावजूद Royal Challengers Bengaluru दूसरे स्थान पर बनी हुई है, जो टीम की लगातार अच्छी परफॉर्मेंस को दर्शाता है।
    अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में हुए इस मुकाबले में गुजरात ने जीत दर्ज कर अंकतालिका में पांचवें स्थान पर छलांग लगाई है। वहीं RCB 9 मैचों में 12 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर कायम है।
    अगर टॉप-4 की बात करें तो Punjab Kings 13 अंकों के साथ पहले स्थान पर है। तीसरे स्थान पर Sunrisers Hyderabad और चौथे पर Rajasthan Royals काबिज हैं दोनों के 12-12 अंक हैं। नेट रन रेट के आधार पर उनकी रैंकिंग तय हो रही है।
    मिड-टेबल में Gujarat Titans पांचवें, Chennai Super Kings छठे और Delhi Capitals सातवें स्थान पर हैं। वहीं निचले पायदान पर Kolkata Knight Riders, Mumbai Indians और Lucknow Super Giants क्रमशः आठवें, नौवें और दसवें स्थान पर मौजूद हैं।
    इस मैच के बाद पर्पल कैप की रेस में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Bhuvneshwar Kumar ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में 28 रन देकर 3 विकेट झटके और एक बार फिर पर्पल कैप अपने नाम कर ली। उनके अब 9 मैचों में 17 विकेट हो गए हैं। दूसरे स्थान पर Eshan Malinga हैं, जिन्होंने 15 विकेट लिए हैं।
    वहीं ऑरेंज कैप की बात करें तो Abhishek Sharma 425 रनों के साथ टॉप पर बने हुए हैं। उनके पीछे Heinrich Klaasen (414 रन) दूसरे और Vaibhav Suryavanshi (400 रन) तीसरे स्थान पर हैं।
    कुल मिलाकर, टूर्नामेंट अब रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां हर मैच के साथ पॉइंट्स टेबल में बदलाव हो रहा है। प्लेऑफ की दौड़ तेज हो गई है और आने वाले मुकाबले टीमों की किस्मत तय करेंगे।
  • IPL 2026 Purple Cap Race: एक मैच ने बदला खेल, टॉप-5 में बड़ा उलटफेर

    IPL 2026 Purple Cap Race: एक मैच ने बदला खेल, टॉप-5 में बड़ा उलटफेर


    नई दिल्ली| Indian Premier League 2026 में हर मैच के साथ पर्पल कैप की रेस दिलचस्प होती जा रही है। पंजाब किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेले गए 40वें मुकाबले के बाद गेंदबाजों की रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इस मैच में पंजाब को सीजन की पहली हार झेलनी पड़ी, लेकिन असली चर्चा पर्पल कैप लिस्ट में हुए फेरबदल की रही। सबसे बड़ी बात यह रही कि Kagiso Rabada और Prasidh Krishna टॉप-5 से बाहर हो गए हैं। वहीं राजस्थान के तेज गेंदबाज Jofra Archer ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर छलांग लगा दी है।

    पर्पल कैप लिस्ट: कौन है टॉप-5 में?


     Bhuvneshwar Kumar (14 विकेट)
    भुवनेश्वर कुमार इस समय पर्पल कैप अपने नाम किए हुए हैं। उन्होंने 8 मैचों में 14 विकेट लेकर शानदार निरंतरता दिखाई है और अब भी टॉप पर मजबूती से बने हुए हैं।
     Jofra Archer (14 विकेट)
    आर्चर ने 9 मैचों में 14 विकेट लेकर दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। उनकी तेज गेंदबाजी और सटीक लाइन-लेंथ उन्हें खतरनाक बना रही है।
    Anshul Kamboj (14 विकेट)
    अंशुल कंबोज भी शानदार फॉर्म में हैं। 8 मैचों में 14 विकेट लेकर वह तीसरे स्थान पर बने हुए हैं और टॉप पर पहुंचने की पूरी क्षमता रखते हैं।
     
    Ishan Malinga (14 विकेट)
    सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेल रहे ईशान मलिंगा ने भी 8 मैचों में 14 विकेट झटके हैं और चौथे स्थान पर काबिज हैं।
    Prince Yadav (13 विकेट)
    लखनऊ सुपर जायंट्स का प्रदर्शन भले ही खास नहीं रहा हो, लेकिन प्रिंस यादव ने 8 मैचों में 13 विकेट लेकर खुद को इस रेस में बनाए रखा है।

    रेस हुई और भी दिलचस्प
    पर्पल कैप की इस रेस में खास बात यह है कि टॉप-4 गेंदबाजों के विकेट लगभग बराबर हैं। ऐसे में आने वाले मैचों में एक अच्छा स्पेल पूरे समीकरण को बदल सकता है।

    IPL 2026 जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे पर्पल कैप की जंग और कड़ी होती जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या Bhuvneshwar Kumar अपनी बढ़त बनाए रख पाते हैं या कोई नया गेंदबाज इस ताज को अपने नाम करता है।

  • आकाश चोपड़ा की प्रतिक्रिया के बाद बढ़ी बहस, युवा खिलाड़ी के साथ अन्याय का आरोप..

    आकाश चोपड़ा की प्रतिक्रिया के बाद बढ़ी बहस, युवा खिलाड़ी के साथ अन्याय का आरोप..


    नई दिल्ली: बेंगलुरु में खेले गए आईपीएल 2026 के 23वें मुकाबले के बाद एक नया विवाद सामने आ गया है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लखनऊ सुपर जायंट्स को पांच विकेट से हराकर अंकतालिका में पहला स्थान हासिल किया, लेकिन मैच के बाद ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चयन को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चा तेज हो गई है। इस मुकाबले में आरसीबी की जीत में गेंदबाजों का अहम योगदान रहा, खासकर रसिख सलाम डार का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा, लेकिन इसके बावजूद उन्हें यह सम्मान नहीं दिया गया।

    आरसीबी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था और गेंदबाजों ने इस निर्णय को पूरी तरह सही साबित किया। लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम को आरसीबी के गेंदबाजी आक्रमण ने दबाव में रखते हुए 20 ओवर में 146 रनों पर सीमित कर दिया। इस दौरान सभी गेंदबाजों ने अनुशासित प्रदर्शन किया, लेकिन रसिख सलाम डार सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए। उन्होंने चार ओवर में 24 रन देकर चार महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए और विपक्षी बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह प्रभावित किया। भुवनेश्वर कुमार ने तीन विकेट, क्रुणाल पांड्या ने दो विकेट और जोश हेजलवुड ने एक विकेट हासिल किया।

    लक्ष्य का पीछा करते हुए आरसीबी ने 15.1 ओवर में पांच विकेट पर 149 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम किया। हालांकि जीत में गेंदबाजों की भूमिका निर्णायक रही, लेकिन मैच के बाद ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का पुरस्कार जोश हेजलवुड को दिया गया। इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि आंकड़ों के आधार पर रसिख सलाम डार का प्रदर्शन अधिक प्रभावशाली माना जा रहा था। उनके चार विकेट और किफायती गेंदबाजी ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया था।

    इस निर्णय को लेकर क्रिकेट जगत में बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में चयन प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाए जाने की जरूरत है ताकि खिलाड़ियों के प्रदर्शन का सही मूल्यांकन हो सके। इसी बीच मशहूर कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और चयन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ी के साथ इस तरह का निर्णय उचित नहीं लगता और इससे उनके आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है।

    यह पूरा मामला अब क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक ओर आरसीबी की जीत की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चयन को लेकर असंतोष भी देखने को मिल रहा है। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या केवल नाम और अनुभव के आधार पर नहीं बल्कि पूरे प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कार तय होना चाहिए।