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  • MP में CM मोहन यादव का बड़ा फैसला….शासकीय नौकरी में दो बच्चों की अधिकतम सीमा समाप्त

    MP में CM मोहन यादव का बड़ा फैसला….शासकीय नौकरी में दो बच्चों की अधिकतम सीमा समाप्त


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) और इसके लिए आवेदन करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब उन्हें 2 बच्चों वाले नियम का पालन नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को ना सिर्फ नए प्रस्ताव को वापस लेने का आदेश दिया, बल्कि पुराने नियमों को भी खत्म करने को कहा है। यादव ने प्रस्तावित सिविल सर्विसेज रूल्स के मसौदे से उस नियम को हटाने का आदेश दिया, जिसके तहत सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम दो बच्चों की सीमा निर्धारित करने की बात कही गई थी।

    मोहन यादव ने आधिकारिक पोर्टल से ट्राफ्ट को तुरंत हटाने को कहा है। हालांकि, यह नियम प्रदेश में काफी पुराना है। 2001 में सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रावधान को लागू किया था। इसके तहत दो से अधिक जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सीधी भर्ती या विभागों में नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

    सीएम ने नया आदेश प्रकाशित करने को कहा
    मध्य प्रदेश में 2001 में लागू किए गए नियम के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले लोग सरकारी नौकरी के योग्य नहीं थे। इसके अलावा एमपी सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स 1965 के तहत दो से अधिक बच्चे होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार माना जाता था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अब तक के सबी नियमों को हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने नया मसौदा तैयार करने का आदेश दिया है।

    नए मसौदे के बाद सीएम का ऐक्शन
    दरअसल, मध्य प्रदेश में सेवा की सामान्य शर्तें नियम 2026 का मसौदा तैयार किया गया था और इस पर आम लोगों से 15 जून तक सुझाव मांगे गए थे। इसमें लाए गए कई नए नियमों के बीच बच्चे वाले पुराने नियम को भी शामिल किया गया था। लेकिन अब मोहन यादव सरकार ने इसे खत्म करने का आदेश दे दिया है।

  • लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म

    लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म


    नई दिल्ली।
    लक्षद्वीप (Lakshadweep) को लेकर केंद्र सरकार (Central government) ने बड़ा फैसला किया है। यहां 47 साल पहले लागू की गई शराबबंदी (Prohibition of alcohol) अब खत्म कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक द्वीपसमहू में पर्यटन को बढ़ावा देने और राजस्व के लिए सरकार ने यह फैसला किया है। आपको बता दें कि लक्षद्वीप में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। ऐसे में इस्लामिक सिद्धातों को देखते हुए यहां 1979 में शराबबंदी लागू की गई थी। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से लक्षद्वीप के लोग खुश नहीं हैं।


    क्यों हटा ली गई शराबबंदी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने लक्षद्वीप एक्साइज रेग्युलेशन 2026 पर साइन कर दिए हैं। इसके बाद लक्षद्वीप प्रोहिबिशन रेग्युलेश 1979 को वापस ले लिया गया है। केंद्र सरकार लक्षद्वीप को वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। ऐसे में विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए रेस्तरां और होटलों में शराब उपलब्ध करवाने और रेवेन्यू जनरेट करने के लिए सरकार ने लगभग 50 साल पुराना कानून वापस ले लिया है।

    नए नियमों के मुताबिक नियंत्रित तरीके से द्वीपसमूह में शराब बेची जा सकगी। सरकार को इससे बड़ा मुनाफा होने वाला है. सरकार शराब पर एक्साइज ड्यूटी, लाइसेंस फीस और अन्य चार्ज लगाकर कमाई करेगी। पूरी तरह से लागू की गई शराबबंदी को नए कानून ने रिप्लेस कर दिया है और अब नियंत्रित करीके से शराब की मैन्युफेक्चरिंग, आयात, निर्यात, ट्रांसपोर्ट और बिक्री को लागू किया जाएगा। साथ ही सरकार इन सारी गतिविधियों पर पूरी नजर रखेगी।


    कैसे काम करेगा नया नियम

    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि शराब को मनमाने तरीके से बेचने की छूट दे दी गई है। इसपर सरकार का पूर् नियंत्रण होगा। देसी और विदेशी शराब पर 400 फीसदी का आबकारी कर लगाया गया है। इसके अलावा बियर पर 200 फीसदी और वाइन पर 80 पर्सेंट का कर वसूला जाएगा। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट एजेंसियां शराब बिक्री के लिए लाइसेंस ले सकती हैं। 21 साल से नीचे वालों को शराब बेचने की अनुमति नहीं होगी।


    क्यों है इस फैसले पर विवाद कि आशंका

    लक्षद्वीप में 96.5 पर्सेंट मुसलमान रहते हैं। 1979 में शराबबंदी इस्लामिक सिद्धातों को ध्यान में रखकर ही की गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां शराब बेचने की अनुमति देकर माहौल बिगाड़ने का ही प्रयास है। अपने फायदे के लिए सरकार समाज को दूषित करना चाहती है। लक्षद्वीप से सांसद हमदुल्लाह सईद ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह से सरकार की उपलब्धता से युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। वे नशे के आदी हो जाएंगे और फिर लक्षद्वीप में भी अपराध बढ़ने लगेंगे।

  • झारखंड सरकार का बड़ा फैसला…. तंबाकू युक्त गुटखा-पान मसाला पर लगाया एक साल का प्रतिबंध

    झारखंड सरकार का बड़ा फैसला…. तंबाकू युक्त गुटखा-पान मसाला पर लगाया एक साल का प्रतिबंध


    रांची।
    झारखंड (Jharkhand) में जन-स्वास्थ्य (Public Health) की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार (State Government) ने तंबाकू और निकोटीन (Tobacco and Nicotine) युक्त गुटखा और पान मसाला (Gutkha and pan masala) के निर्माण, भंडारण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के हस्ताक्षर से एक आदेश जारी किया गया है।

    अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह प्रतिबंध उन सभी उत्पादों पर लागू होगा, जो किसी भी नाम से बाजार में बेचे जा रहे हों, यदि उनमें तंबाकू या निकोटीन की मात्रा पाई जाती है। आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार ने यह फैसला खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम-2006 की धारा 30(2)(ए) और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियमन 2011 के नियम के तहत लिया है। इसमें कहा गया है कि प्रतिबंध का यह आदेश जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान प्रतिबंधित तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पकड़ा जाता है, तो कानून सम्मत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई

    MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने किसानों के हित में गेहूं खरीद (Purchasing wheat) के लिए स्लॉट बुकिंग (Slot Booking) की समय-सीमा बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है ताकि कोई भी किसान एमएसपी के लाभ से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सोमवार को यह घोषणा की। पहले इसकी अंतिम तिथि नौ मई थी। एक अधिकारी ने बताया कि यह फैसला इस उद्देश्य से लिया गया है कि समर्थन मूल्य योजना से कोई भी किसान वंचित न रह जाए।

    चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन
    अधिकारी के अनुसार, दो मई तक राज्य में किसानों से 34.73 टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। साल 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत लगभग 600 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन 30 मार्च से 28 मई तक निर्धारित की गई है।

    सरकार ने चना के लिए 6.49 लाख टन और मसूर के लिए 6.01 लाख टन खरीद का लक्ष्य तय किया है, जबकि अरहर की 1.31 लाख टन खरीद का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदी गई उपज का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा रहा है।

    अधिकारी ने बताया कि किसानों की उपज की सुरक्षा के लिए खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत लगभग 3.55 लाख टन क्षमता का भंडारण तैयार किया गया है। सामग्री भंडारण योजना के अंतर्गत 1.5 लाख टन क्षमता के आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 1.1 लाख टन क्षमता वाले गोदामों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।


    भूमि और फसल का होगा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड

    सीएम मोहन यादव ने बताया कि ‘ई-विकास’ और ‘ई-किसान’ प्रणाली के जरिए किसानों को योजनाओं, बाजार भाव, मौसम और तकनीकी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही है। एक अप्रैल से राज्य के सभी जिलों में लागू ई-किसान प्रणाली के तहत हर किसान को एक विशिष्ट आईडी दी जा रही है, जिसमें उसकी भूमि और फसल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड होगा।


    हर खेत का किया जा रहा भू-टैगिंग

    किसान रजिस्ट्री के माध्यम से प्रत्येक खेत का भू-टैगिंग किया जा रहा है, जिससे फसल बीमा, नुकसान का आकलन और ड्रोन से छिड़काव में सुविधा होगी।


    1,000 से अधिक कृषि ड्रोन आपरेटरों को ट्रेनिंग

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में मध्य प्रदेश देश और दुनिया में अग्रणी है, जहां 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खेती हो रही है और 6,000 से अधिक संकुल बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आधुनिक कृषि प्रणाली के तहत 1,000 से अधिक कृषि ड्रोन ऑपरेटरों को जैविक कीटनाशकों के छिड़काव के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

  • बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी

    बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जजों की संख्या को लेकर मंगलवार को अहम फैसला लिया। कैबिनेट ने SC में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने की मंजूरी दे दी। यह फैसला छह साल बाद लिया गया है, जब 2019 में इसे 31 से बढ़ाकर 33 किया गया था। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद सुप्रीम कोर्ट को और मजबूत करना व न्याय प्रक्रिया को तेज (Justice Process Speeding up) करना है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने बताया कि फिलहाल अदालत में 33 न्यायाधीश और एक मुख्य न्यायाधीश हैं। संसद के आगामी सत्र में इस संबंध में एक विधेयक पेश किया जाएगा। विधेयक के पारित होने के बाद मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के जजों की कुल संख्या 38 हो जाएगी। यह फैसला न्यायालय में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से लिया गया है।


    SC में कुछ इस तरह बढ़ती गई जजों की संख्या

    सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 में मूल रूप से मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर 10 न्यायाधीशों का प्रावधान था। 1960 में इसे 13 और बाद में 17 किया गया। 1986 के संशोधन से संख्या 25 हो गई और 2009 में इसे 30 कर दिया गया। फिलहाल ताजा प्रस्ताव के बाद न्यायपालिका को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उठाया गया है, जो देश के न्यायिक ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक साबित होगा।

    भारत के संविधान में सुप्रीम कोर्ट की कुल संख्या तय नहीं है। अनुच्छेद 124(1) के तहत चीफ जस्टिस के अलावा अन्य जजों की संख्या संसद तय करती है। समय-समय पर बढ़ती मुकदमों की संख्या को देखते हुए इसमें बदलाव किया जाता है। इस बढ़ोतरी का मकसद लंबित मामलों के बोझ को कम करना है। हालांकि, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाने से ही न्याय में देरी पूरी तरह दूर नहीं हो सकती।

  • CG: HC का बड़ा फैसला…. जग्गी हत्याकांड में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास

    CG: HC का बड़ा फैसला…. जग्गी हत्याकांड में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास


    बिलासपुर।
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने साल 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Former Chief Minister Ajit Jogi) के बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा (Life Sentence) सुनाई है। हाईकोर्ट ने बीते गुरुवार को अमित जोगी को इस मामले में दोषी करार दिया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अमित जोगी को सजा सुनाया जाना 23 सालों से चल रही कानूनी लड़ाई में एक बड़ा मोड़ है।


    सजा के साथ जुर्माना भी लगाया

    चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। बेंच ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।


    निचली अदालत ने जोगी को कर दिया था बरी

    हाईकोर्ट का आज का फैसला 31 मई 2007 को रायपुर की स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को पूरी तरह पलटता है, जिसमें अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी समेत अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।


    मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ना न्यायसंगत नहीं : हाईकोर्ट

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ देना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे विधिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण बताया।


    SC के आदेश पर दोबारा खुला था मामला

    गौरतलब है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा खोला गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से वकील बीपी शर्मा ने गंभीर तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने अदालत को बताया कि यह हत्याकांड उस समय की राज्य सरकार के संरक्षण में रचा गया षड्यंत्र था। दलील दी गई कि जब सीबीआई ने जांच शुरू की, तब प्रभावशाली हस्तक्षेप के चलते महत्वपूर्ण सबूतों को मिटा दिया गया। ऐसे मामलों में केवल भौतिक साक्ष्यों की कमी के आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती, बल्कि पूरे षड्यंत्र की कड़ियों को समझना आवश्यक है।


    क्या था मामला

    उल्लेखनीय है कि 4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह बाद में सरकारी गवाह बन गए थे। शेष 28 आरोपियों को सजा मिली थी, जबकि अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। बाद में रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शुरुआती दौर में अमित जोगी को राहत मिली, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट भेज दिया था।


    विद्याचरण शुक्ल के करीबी थे जग्गी

    कारोबारी और राजनेता रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। कांग्रेस से अलग होकर जब शुक्ल ने राकांपा का रुख किया, तब जग्गी भी उनके साथ जुड़े और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया।


    इन लोगों को ठहराया था दोषी

    जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी पाया गया था।

  • मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला… 489 मदिरा दुकानों के संचालन के लिए बनेगा निगम-मंडल

    मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला… 489 मदिरा दुकानों के संचालन के लिए बनेगा निगम-मंडल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में आबकारी विभाग के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति की शुक्रवार को हुई वर्चुअल बैठक में 12 दौर की नीलामी प्रक्रिया के बाद शेष बची दुकानों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि नीलामी के बाद शेष 489 दुकानों के संचालन के लिए आबकारी विभाग स्वयं एक निगम/मंडल गठित कर इन दुकानों के संचालन की संभावना पर विचार करेगा।

    मंत्री-मंडल समिति में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक कुमार सक्सेना मौजूद रहे।

    उप मुख्यमंत्री देवड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में नीलामी के बाद शेष बची 489 मदिरा दुकानों को सीधे निगम/मंडल के माध्यम से संचालित करने के विकल्प पर चर्चा की गई। यह कदम शेष शराब दुकानों का निस्तारण करने और राजस्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

  • संकट के बीच केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये घटाया टैक्स

    संकट के बीच केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये घटाया टैक्स

    नई दिल्ली। भारत सरकार (Government of India) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol and Diesel Prices) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क पहले पेट्रोल पर 13 रुपये लीटर था और डीजल पर 10 रुपये था। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा हुआ है।

    नायरा ने बढ़या था पेट्रोल-डीजल के दाम
    इस फैसले से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि बाजार में कीमतों का ट्रेंड अभी भी अस्थिर बना हुआ है। खास बात यह है कि यह सरकारी हस्तक्षेप उस समय आया है जब निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ा दिए थे।

    रूस की कंपनी रोसनेफ्ट की मालिकाना हक वाली नायरा एनर्जी देश भर में 7,000 से अधिक पेट्रोल पंप चलाती है। वहां के डीलरों ने इस कीमत वृद्धि पर चिंता जताई है, और कहा है कि इससे ईंधन की मांग पर असर पड़ सकता है। साथ ही, उन्होंने संभावित विरोध प्रदर्शनों का भी इशारा किया है। कुछ डीलरों ने यह भी बताया कि पिछले कुछ दिनों में ईंधन की सप्लाई में कटौती की गई है।

    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर
    सरकार के इस कदम से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए यह दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक्साइज ड्यूटी घटने से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) जैसी कंपनियों पर कीमतें स्थिर रखने का दबाव बढ़ सकता है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

    क्यों लिया गया यह फैसला?
    इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में सरकार ने टैक्स घटाकर आम लोगों को राहत देने और महंगाई पर नियंत्रण रखने की कोशिश की है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं।

    फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। यह कीमतें करीब 119 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं और फिर घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।

  • निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाने के लिए SEBI का बड़ा फैसला… बदलेंगे Gold-Silver ETF के नियम

    निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाने के लिए SEBI का बड़ा फैसला… बदलेंगे Gold-Silver ETF के नियम


    नई दिल्ली।
    बाजार नियामक सेबी (Market Regulator SEBI) ने सोने और चांदी के ईटीएफ (Gold-Silver ETF) के कारोबारी नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है। इसका मकसद है कि इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव के ज्यादा करीब रहें और निवेशकों को सही भाव पर खरीद-फरोख्त का मौका मिल सके। इससे आम निवेशकों को काफी फायदा होगा और अनचाहा नुकसान होने से बचाव हो सकेगा।

    दरअसल, दुनियाभर में सोने और चांदी की खरीद-बिक्री 24 घंटे होती है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज में भी इनकी कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो जाती हैं लेकिन भारत में ईटीएफ की खरीद-बिक्री शेयर बाजार के समय मुताबिक सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तक ही होती है। इस दौरान इनके भाव एक तय सीमा (फिक्स्ड प्राइस बैंड) के भीतर ही घट-बढ़ सकते हैं।

    इस तय सीमा और समय अंतर की वजह से अक्सर भारतीय ईटीएफ की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से पिछड़ जाती हैं या उनमें बड़ा अंतर आ जाता है। इसके चलते आम निवेशकों को सही दाम पर खरीद-बिक्री नहीं मिल पाती और कई बार बिना वजह नुकसान हो भी जाता है। वर्तमान में सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है जिसकी वजह से निवेशकों को नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। इसके चलते सेबी ने ईटीएफ के कारोबारी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।


    क्या है नया प्रस्ताव

    सेबी ने अब ‘डायनामिक प्राइस बैंड’ लागू करने का सुझाव दिया है। इसका मतलब यह है कि कीमतों की सीमा बाजार की स्थिति के अनुसार बदली जा सकेगी। शुरुआत में एक तय सीमा रहेगी, लेकिन अगर बाजार में ज्यादा हलचल होती है तो यह दायरा बढ़ाया जा सकेगा। हर बड़े बदलाव के बाद कुछ समय का अंतर भी दिया जाएगा, ताकि बाजार स्थिर हो सके और घबराहट में खरीद-फरोख्त न हो। सेबी ने हाल ही में प्रस्ताव का मसौदा जारी किया है और मार्च 2026 तक लोगों से राय मांगी है, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।


    निवेशक ऐसे समझें योजना को

    प्रस्ताव के मुताबिक, नया दायरा छह फीसदी का होगा। यानी एक दिन में ईटीएफ के भाव छह फीसदी तक ऊपर या नीचे हो सकते हैं। अगर बाजार में तेज हलचल होती है तो इस दायरे को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा और हर बार यह तीन फीसदी तक बढ़ेगा। हर बदलाव के बाद बाजार को स्थिर होने के लिए 15 मिनट का समय दिया जाएगा। एक दिन में कुल दायरा ±20% की सीमा तक जा सकेगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि निवेशक को ईटीएफ की जो कीमत स्क्रीन पर दिखेगी, वह उसकी वास्तविक वैल्यू के करीब होगी।


    बाजार खुलने से पहले ही तय होगी दिशा

    सेबी ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जो है ‘प्री-ओपन सेशन’ की शुरुआत। शेयर बाजार की तरह अब गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के लिए भी बाजार खुलने से पहले एक खास सत्र हो सकता है। इसका मकसद यह है कि रातभर में विदेशी बाजारों में जो भी बदलाव हुए हैं, उन्हें भारतीय बाजार खुलने से पहले ही समायोजित कर लिया जाए। इससे सुबह बाजार खुलते ही कीमतों में दिखने वाले भारी गैप को कम किया जा सकेगा और निवेशकों को एक संतुलित शुरुआत मिलेगी।

  • टी20 वर्ल्ड कप से पहले श्रीलंका ने लिया बड़ा फैसला, भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले कोच को अपने साथ जोड़ा

    टी20 वर्ल्ड कप से पहले श्रीलंका ने लिया बड़ा फैसला, भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले कोच को अपने साथ जोड़ा

    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में 7 फरवरी से आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप का आगाज होगा, जिसमें कुल 20 टीमें हिस्सा ले रही हैं। श्रीलंका की टीम अपने ग्रुप स्टेज के मुकाबले घर पर ही खेलेगी, जिसमें उसे ग्रुप-बी में जगह मिली है। श्रीलंका की टीम को अपना पहला मुकाबला 8 फरवरी को आयरलैंड की टीम के खिलाफ खेलेगी। श्रीलंका क्रिकेट ने अभी टूर्नामेंट के लिए अपनी प्रोविजनल स्क्वाड का ऐलान किया है, जिसमें वह टूर्नामेंट का आगाज होने से पहले अपने फाइनल 15 सदस्यों की घोषणा कर देंगे। वहीं इसी बीच श्रीलंका क्रिकेट ने कोचिंग सेटअप को लेकर बड़ा फैसला लिया है, जिसमें उन्होंने टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी विक्रम राठौड़ को शामिल किया है।

    टी20 वर्ल्ड कप के लिए विक्रम राठौड़ को बनाया बल्लेबाजी कोच
    श्रीलंका क्रिकेट ने विक्रम राठौड़ को आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए अपनी टीम का बल्लेबाजी कोच नियुक्त करने का फैसला लिया है। विक्रम राठौड़ अभी आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स टीम के कोचिंग सेटअप का हिस्सा हैं जिसमें वह असिस्टेंट कोच की जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। वहीं वह फिलहाल सिर्फ टी20 वर्ल्ड कप के लिए श्रीलंकाई टीम के कोचिंग सेटअप का हिस्सा बनेंगे। इससे पहले साल 2024 में जब भारतीय टीम ने रोहित शर्मा की कप्तानी में टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी को अपने नाम किया था तो उस समय विक्रम राठौड़ टीम इंडिया के कोचिंग सेटअप का हिस्सा थे जिसमें वह बैटिंग कोच की जिम्मेदारी को निभा रहे थे।

    लसिथ मलिंगा को भी कोचिंग सेटअप का बनाया है हिस्सा
    टी20 वर्ल्ड कप की अहमियत को देखते हुए श्रीलंका क्रिकेट ने विक्रम राठौड़ को बैटिंग कोच बनाने से पहले अपने पूर्व खिलाड़ी लसिथ मलिंगा को भी कोचिंग सेटअप में शामिल करने का फैसला लिया था। मलिंगा को श्रीलंका ने क्रिकेट ने आगामी मेगा इवेंट में तेज गेंदबाजी सलाहाकार की जिम्मेदारी सौंपी है, जिसमें उन्होंने मलिंगा को 40 दिनों तक के लिए इस जिम्मेदारी को सौंपा है। बता दें कि श्रीलंका टीम के हेड कोच की जिम्मेदारी अभी पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज सनथ जयसूर्या संभाल रहे हैं, जिसमें इन मलिंगा और राठौड़ के जुड़ने से कोचिंग सेटअप पहले से काफी अधिक मजबूत हो जाएगा।