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  • सीएम बनने के बाद पहली दिल्ली यात्रा में सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से मुलाकात मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य विकास पर मंथन

    सीएम बनने के बाद पहली दिल्ली यात्रा में सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से मुलाकात मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य विकास पर मंथन

    नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद Samrat Choudhary ने पहली बार राष्ट्रीय राजधानी पहुंचकर प्रधानमंत्री Narendra Modi से शिष्टाचार मुलाकात की इस मुलाकात को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें बिहार के विकास और भविष्य की योजनाओं को लेकर व्यापक चर्चा हुई

    बताया जा रहा है कि इस दौरान विकसित भारत और समृद्ध बिहार के विजन को लेकर विस्तार से विचार विमर्श किया गया मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त किया और राज्य के विकास को नई दिशा देने पर जोर दिया इस मुलाकात के बाद सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री का सहयोग और मार्गदर्शन बिहार की प्रगति को गति देने में अहम भूमिका निभाएगा

    सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात के दौरान केवल औपचारिक चर्चा ही नहीं बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिति और आगामी रणनीतियों पर भी विचार किया गया माना जा रहा है कि बिहार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी बातचीत हुई है वर्तमान में राज्य सरकार का मंत्रिमंडल अधूरा है और इसे जल्द पूरा करना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है

    गौरतलब है कि बिहार में अभी तक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों ने ही शपथ ली है जनता दल यूनाइटेड की ओर से दो नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है जबकि भारतीय जनता पार्टी के हिस्से से अभी तक किसी विधायक को मंत्री पद नहीं दिया गया है ऐसे में गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने और प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कैबिनेट विस्तार जरूरी माना जा रहा है

    बिहार विधानसभा में कुल मंत्रियों की संख्या 33 तक हो सकती है लेकिन वर्तमान स्थिति में सरकार अधूरी मानी जा रही है इससे शासन और निर्णय प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है इसलिए आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तेज गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं

    इस बीच राजनीतिक दृष्टि से एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने है 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपनी सरकार का विश्वास मत पेश करेंगे यह सत्र सरकार की स्थिरता और बहुमत को साबित करने के लिए निर्णायक माना जा रहा है

    विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री से हुई यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है इससे न केवल राज्य और केंद्र के बीच तालमेल मजबूत होगा बल्कि बिहार में नई सरकार के कामकाज को भी स्पष्ट दिशा मिलेगी

  • बिहार में नई सरकार का शक्ति परीक्षण, 24 अप्रैल को विधानसभा में सम्राट चौधरी पेश करेंगे विश्वास मत

    बिहार में नई सरकार का शक्ति परीक्षण, 24 अप्रैल को विधानसभा में सम्राट चौधरी पेश करेंगे विश्वास मत

    नई दिल्ली: बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई सरकार 24 अप्रैल को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी। इसके लिए 18वीं बिहार विधानसभा का दूसरा सत्र इसी दिन से शुरू होगा और पहले ही दिन सरकार विश्वास प्रस्ताव पेश कर सदन का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेगी।

    राज्य में हाल ही में सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सम्राट चौधरी को सौंपी गई है। संवैधानिक परंपरा के अनुसार किसी भी नए मुख्यमंत्री को यह साबित करना होता है कि उनके पास विधानसभा में बहुमत का समर्थन मौजूद है। इसी प्रक्रिया के तहत अब सरकार विश्वास मत का सामना करेगी।

    इस विश्वास मत को लेकर राजनीतिक हलकों में खासा उत्साह और तनाव दोनों देखा जा रहा है। यह वोटिंग मौजूदा सत्ता समीकरणों की वास्तविक स्थिति को सामने लाएगी और यह तय करेगी कि सरकार कितनी मजबूत स्थिति में है। सभी राजनीतिक दलों की नजर इसी प्रक्रिया पर टिकी हुई है क्योंकि इसका असर आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी पड़ सकता है।

    सूत्रों के अनुसार नई सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार अभी अंतिम रूप से तय नहीं हो पाया है। विभागों का अस्थायी बंटवारा कर प्रशासनिक कामकाज जारी रखा गया है। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अंतिम निर्णय आने वाले राजनीतिक हालात और अन्य राज्यों के चुनावी परिणामों के बाद लिया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल केंद्रीकृत ढांचे में काम कर रही है। वहीं कुछ वरिष्ठ नेताओं को भी उपमुख्यमंत्री स्तर पर जिम्मेदारियां दी गई हैं ताकि शासन व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।

    विधानसभा में होने वाला यह विश्वास मत केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सरकार की राजनीतिक ताकत की असली परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष भी इस मौके पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बना रहा है, जिससे सदन में तीखी बहस की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह विश्वास मत न केवल सरकार की स्थिरता तय करेगा, बल्कि बिहार की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित करेगा। इसके परिणाम आने वाले समय में राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।

  • बिहार विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार और भाई वीरेंद्र के बीच तीखी नोकझोंक, चौकीदारों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर हंगामा

    बिहार विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार और भाई वीरेंद्र के बीच तीखी नोकझोंक, चौकीदारों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर हंगामा


    नई दिल्ली । पटना बिहार विधानसभा में आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र आमने सामने आ गए। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। दरअसल सदन की कार्यवाही शुरू होते ही आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने कल चौकीदारों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी की। आरजेडी विधायकों ने लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी नहीं चलेगी का नारा लगाया। आरजेडी विधायकों को जवाब देने के लिए मंत्री विजय चौधरी उठे। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चलेगी तो चौकीदारों की सुनेगा कौन।

    नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए विपक्षी विधायक

    इतने में सीएम नीतीश भी खड़े हो गए। उन्होंने भाई वीरेन्द्र को कहा कि आप बैठिए। आपकी संख्या कितनी कम है। आप लोगों ने कभी कोई काम नहीं किया है। नीतीश जब बोल रहे थे तो आरजेडी विधायक सर्वजीत भी खड़े हो गए। फिर राजद विधायक वेल की तरफ आ गए और नारे लगाने लगे। मार्शल ने विधायकों के हाथ से तख्तियां ले ली।

    सरकार ने दिया विपक्ष के आरोपों का जवाब

    आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने चौकीदारों पर लाठीचार्ज को क्रूर बताया। आरजेडी विधायकों ने सदन में हंगामा किया। संसदीय मामलों के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन चौकीदारों और दफादारों की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने कहा कि उसने चौकीदार के विरोध को दबाने की कोशिश नहीं की है और उनकी मांगों की जांच करेगी।

    मांगों को लेकर किया था प्रदर्शन

    बता दें कि बिहार पुलिस के चौकीदारों ने सोमवार को अपने मानदेय में बढ़ोतरी और सर्विस में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और बैरिकेड तोड़ दिए जिसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया। पुलिस की कार्रवाई में कई चौकीदार घायल हो गए। बिहार पुलिस के चौकीदारों ने पटना के बीच में जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन किया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और डाक बंगला क्रॉसिंग की ओर बढ़ने की कोशिश की।

  • पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर ने कहा ये बात, तेजस्वी यादव ने पलटवार कर विधानसभा में मचाया हंगामा

    पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर ने कहा ये बात, तेजस्वी यादव ने पलटवार कर विधानसभा में मचाया हंगामा



    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा में गुरुवार को अलीनगर से पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर के विवादित बयान ने राजनीति में भूचाल ला दिया है। उन्होंने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे के प्रति स्नेह की तुलना महाभारत के धृतराष्ट्र और दुर्योधन से की। हालांकि मैथिली ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से 2005 से पहले के आरजेडी शासन की ओर इशारा साफ नजर आया।

    तेजस्वी यादव ने पलटवार किया
    आरजेडी के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को इस बयान पर तीखा हमला बोला। सोशल मीडिया पर मैथिली का फोटो साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि कुछ लोग विधायक बनते ही राजनीति का पूरा ज्ञान होने का भ्रम पाल लेते हैं। तेजस्वी ने कहा कि “विधानसभा का ए, बी, सी भी ठीक से समझे बिना कुछ लोग ‘जननायक’ पर कटाक्ष करने का दुस्साहस कर रहे हैं।”

    उन्होंने मैथिली पर आरोप लगाया कि दरभंगा में हाल ही में हुई दलित लड़की के दुष्कर्म और हत्या पर वह चुप रही। साथ ही उन्होंने तंज कसा कि जो लोग आरजेडी शासनकाल को “जंगल राज” कहते हैं, उनके परिवार ने हाल ही में मधुबनी में चोरी की शिकायत दर्ज कराई, जबकि राज्य में उनकी ही पार्टी की सरकार है।

    राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस
    मैथिली और तेजस्वी के बीच यह विवाद बिहार की राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है। भाजपा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह विवाद अगले कुछ दिनों में और गहराने वाला है।

    विश्लेषकों का मानना है कि मैथिली के महाभारत के उदाहरण और तेजस्वी के तीखे पलटवार ने विधानसभा में नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है, और राजनीतिक दल इसे लोकप्रियता और मीडिया कवरेज बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

    भविष्य की राजनीति पर असर
    बिहार में इस तरह की बयानबाजी अगले विधानसभा सत्र और स्थानीय राजनीति में भी असर डाल सकती है। तेजस्वी का सोशल मीडिया तंज और मैथिली का विवादित बयान दोनों ही पार्टियों की रणनीतियों का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

  • अपराधियों को पूरा विश्वास… ये सरकार कुछ नहीं उखाड़ सकती', सदन में खूब गरजे तेजस्वी यादव

    अपराधियों को पूरा विश्वास… ये सरकार कुछ नहीं उखाड़ सकती', सदन में खूब गरजे तेजस्वी यादव


    नई दिल्ली । बिहार विधानसभा में गुरुवार 05 फरवरी, 2026 को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर जमकर भड़ास निकाली. तेजस्वी यादव ने कहा कि आप लोगों ने लोकतंत्र को डरतंत्र बना दिया है. इस सरकार की नींद बेटियों की चीख से भी नहीं टूटती है. तेजस्वी ने कहा कि बिहार की हालत देखकर तो यही लगता है कि अपराधियों को पूरा विश्वास हो गया है कि ये सरकार उसका कुछ नहीं उखाड़ सकती है. बिहार के अपराधियों में डर नहीं बल्कि सरकार में शर्म भी नहीं है.

    तेजस्वी यादव ने सदन में स्पीकर से कहा कि उनके पैर का नाखून पूरा उखड़ गया है इसलिए वे अपनी बात बैठकर कहना चाहते हैं. विधानसभा अध्यक्ष ने बैठने की अनुमति दे दी. इसके बाद तेजस्वी यादव ने पटना के नीट कांड का जिक्र किया. इसके अलावा उन्होंने अन्य जिलों के बारे में कहा कि मधेपुरा में महिला के साथ दुष्कर्म और हत्या हुई, खगड़िया में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई. मुजफ्फरपुर में महिला और तीन बच्चों का अपहरण और फिर हत्या की गई. इसके साथ ही और भी अपराध को उन्होंने गिनवाया.

    बिहार सरकार को बताया कोल्ड स्टोरेज

    तेजस्वी यादव ने कहा कि थाना खामोश है, प्रशासन बेहोश है और सरकार पूरी तरह मदहोश है. जनता में इस सरकार के लिए अफसोस और आक्रोश है. बिहार सरकार कोल्ड स्टोरेज बन चुकी है. हर मामले को ठंडा करने में लगी हुई रहती है.

    बिहार आखिर किस चीज में नंबर वन?
    आरजेडी नेता ने कहा कि बिहार जब इतना विकास कर रहा है तो एक बात बता दें कि बिहार आखिर किस चीज में नंबर वन है? आर राज्यों के मुकाबले बिहार सबसे ज्यादा गरीब है. सबसे ज्यादा बेरोजगारी है. शिक्षा के मामले में फिसड्डी है. स्वास्थ्य के मामले में फिसड्डी है. भ्रष्टाचार में अव्वल है. अपराधियों का बोलबाला है. प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है. किसान ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. जिन गरीबों का वोट लिया उसके घर को उजाड़ रहे हैं.

  • नीतीश के कायल बने ओवैसी के विधायक, बिहार में AIMIM-जेडीयू की सियासत में फिर गर्मा सकती है हवा

    नीतीश के कायल बने ओवैसी के विधायक, बिहार में AIMIM-जेडीयू की सियासत में फिर गर्मा सकती है हवा

    बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा हो गई है। AIMIM के विधायक मुर्शीद आलम ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक गुरु बताया है। मुर्शीद आलम का कहना है कि 2014 में नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू में राजनीति की राह दिखाई और उन्होंने अपनी सियासी उन्नति में मुख्यमंत्री का योगदान कभी नहीं भुलाया। जोकीहाट सीट से चुने गए इस विधायक ने हाल ही में नीतीश से मुलाकात कर अपने क्षेत्र के लिए दो नए महाविद्यालय और एक अतिरिक्त अंचल की मांग भी रखी।

    सियासी अर्थ और संभावनाएं
    मुर्शीद आलम की तारीफ और उनके नीतीश कुमार के करीब आने से सियासत में अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या AIMIM के विधायक जेडीयू के साथ किसी राजनीतिक समीकरण में शामिल हो सकते हैं। हालांकि AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने मुलाकात को केवल सीमांचल के मुद्दों तक सीमित बताते हुए राजनीतिक अर्थ न निकालने की अपील की। बावजूद इसके, पिछली बार AIMIM के कई विधायक जेडीयू या आरजेडी में शामिल हो चुके हैं, जिससे संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं।

    जेडीयू और बीजेपी का परिदृश्य
    2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 85 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि सहयोगी बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या AIMIM के विधायकों को जेडीयू में शामिल कर अपनी संख्या बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

    AIMIM के साथ सियासी समीकरण पर सवाल
    मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र से चुने गए AIMIM के पांचों विधायक – मुर्शीद आलम, अख्तरुल ईमान, गुलाम सर्वर, सरवर आलम और मोहम्मद तौसीफ आलम – की नीतीश कुमार के साथ बढ़ती नजदीकियां बिहार की सियासत में नए समीकरण खड़े कर सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या AIMIM और जेडीयू के बीच कोई नया ‘खेला’ सामने आएगा।