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  • क्या भाजपा को पहले से था विधेयक गिरने का अंदाजा, फिर क्यों महिला आरक्षण में संशोधन का खेला दांव

    क्या भाजपा को पहले से था विधेयक गिरने का अंदाजा, फिर क्यों महिला आरक्षण में संशोधन का खेला दांव

    नई दिल्‍ली। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के गिरने के बाद बीजेपी विपक्ष पर आक्रामक है तो वहीं विपक्ष का कहना है कि यह बीजेपी की सोची-समझी साजिश है। बिना संवाद के विशेष सत्र बुलाया गया और फिर विधेयक ना पास होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा रहा है।
    महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2023 और परिसीमन विधेयक 2026 समेत तीन विधेयकों को पास कराने के लिए पांच राज्यों में चुनाव के बीच ही संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। पहले दिन रात 1 बजे के बाद तक विधेयकों पर चर्चा होती रही। 17 अप्रैल को सरकार ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने की अधिसूचना भी जारी कर दी और फिर शाम को जब वोटिंग हुई तो विधेयक निचले सदन में गिर गया। विधेयक गिरते ही बीजेपी विपक्ष पर आक्रामक हो गई।
    बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस समेत विपक्ष महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। वहीं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि यह एक तरह का षड्यंत्र था ताकि बीजेपी विधानसभा चुनाव के बीच बिना ठीक से संवाद किए ऐसी परिस्थितियां बनाए कि विधेयक पारित ना होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा सके।

    बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में वोटिंग से पहले ही सोशल मीडिया पर अपना संदेश जारी करते हुए कहा विपक्षी सांसदों से भी अपील की थी कि वे विधेयक के पक्ष में वोटिंग करें। वहीं विपक्ष के सांसदों का कहना था कि 2023 में पारित विधेयक को उसी रूप में लागू किया जाए। इसमें संशोधन की जरूरत कहां से पड़ गई अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कहा, धानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी सरकार को यह पहले दिन से मालूम था कि संविधान संशोधन विधेयक विपक्ष के सहयोग के बिना पास नहीं हो सकता। इसके बावजूद उन्होंने विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया।
    बीजेपी ने किया विपक्ष में फूट डालने का प्रयास- गहलोत

    गहलोत ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे थे, परन्तु इतने महत्वपूर्ण विषय पर प्रधानमंत्री ने सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ बुलाकर बात करने के बजाय अलग-अलग बात कर उनमें फूट डालने का प्रयास किया।

    कैसे गिर गया विधेयक

    सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी।

    विधेयक गिरने का भी फायदा उठाएगी बीजेपी?

    विधानसभा चुनावों में बीजेपी अकसर महिला वोटों के लिए कोई ना कोई दांव खेलती है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि बीजेपी को पहले से पता था कि इस विधेयक को लेकर विपक्ष एकजुट होने का प्रयास करेगा। अगर विधेयक पास होता है तब भी बीजेपी इसे बंगाल चुनाव में मुद्दा बना सकती है। वहीं अगर विधेयक पास नहीं होता है तो वह इसी के बहाने विपक्ष को निशाने पर ले सकती है। अब इस राजनीति की शुरुआत पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से हो चुकी है। यह मुद्दा 2029 के चुनाव में भी भुनाया जा सकता है।

  • महाराष्ट्र विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ विधेयक पेश

    महाराष्ट्र विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ विधेयक पेश


    मुंबई।
    महाराष्ट्र विधानसभा में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने शुक्रवार को ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ नामक विधेयक पेश किया। इस विधेयक का मकसद गैर-कानूनी धर्मांतरण पर रोक लगाना है।

    विधानसभा में यह विधेयक पेश करने वाले गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा, “बिल का मकसद धर्म की आज़ादी के अधिकार की रक्षा करना है। इसका मकसद ज़बरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच या शादी के ज़रिए किए गए गैर-कानूनी धर्मांतरण पर भी रोक लगाना है। बिल में गैर-कानूनी धर्मांतरण को ज़बरदस्ती, धोखाधड़ी, गलत जानकारी, ज़बरदस्ती, गलत असर या लालच देकर किया गया धर्मांतरण बताया गया है। बिल के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी दूसरे व्यक्ति को तोहफ़े, कैश, नौकरी, मुफ़्त शिक्षा, शादी का वादा, बेहतर लाइफ़स्टाइल, या भगवान का का लालच देकर गैर-हिंदू धर्म में अन्य धर्म में बदलने की कोशिश नहीं कर सकती, जिसे लालच माना गया है। लालच, ज़बरदस्ती, धोखा या गलत जानकारी, ज़बरदस्ती या धमकी, धोखाधड़ी के तरीके और गलत असर डालना गैर-कानूनी होगा। विधेयक में ज़बरदस्ती किसी व्यक्ति या ग्रुप को उसकी मर्जी के खिलाफ़ धर्म बदलने के लिए मजबूर करने के काम गैरकानूनी धर्म परिवर्तन बतलाया गया है।

    यह विधेयक गैर-हिंदू धर्म में बदलने की प्रोसेस में शामिल लोगों के रिश्तेदारों या करीबी परिवार के सदस्यों को गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करने की इजाज़त देता है, जिससे पुलिस जांच शुरू हो सकती है। कानून के तहत अपराध गैर-ज़मानती होंगे, जिससे पुलिस को ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन के आरोप में केस दर्ज करने और जांच शुरू करने की इजाज़त मिलेगी। विधेयक पुलिस स्टेशन के इंचार्ज के लिए किसी भी व्यक्ति की शिकायत दर्ज करना ज़रूरी बनाता है। बिल के सेक्शन 14 में गैर-हिंदू धर्मों में धर्म बदलने के लिए उकसाने वाले संगठनों पर बैन लगाने और उन्हें सज़ा देने के कानूनी प्रावधान हैं।

    दूसरे राज्यों में लागू ऐसे ही कानूनों के आधार पर बिल में शामिल कानूनी प्रावधानों में, जो लोग गैर-हिंदू धर्मों में धर्म बदलना चाहते हैं, उनके लिए एक तय सरकारी अथॉरिटी से पहले इजाज़त लेना, धर्म बदलने से 60 दिन पहले पहले से बताना और धर्म बदलने के बाद उसे रजिस्टर कराना शामिल है। महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2026 के ड्राफ्ट के प्रावधानों के अनुसार, धर्म बदलने को रजिस्टर न करने या प्रक्रियाओं का पालन न करने पर कोई भी धर्म बदलना अमान्य हो सकता है। विधेयक के अनुसार, शादी का झांसा देकर गैर-कानूनी धर्म बदलने में शामिल पाए जाने वालों को सात साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा। किसी नाबालिग, पागल व्यक्ति या महिला या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का धर्म बदलने के लिए उकसाने की कोशिश करने पर सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। विधेयक के मुताबिक, बड़े पैमाने पर धर्म बदलने के लिए उकसाने वालों को सात साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा, जबकि बार-बार ऐसा करने वालों को 10 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा। विधेयक के मुताबिक, ज़बरदस्ती धर्म बदलने के दोषी पाए जाने वालों को 7 साल तक की जेल और 3 लाख रुपये का जुर्माना होगा।

    फडणवीस की महायुति सरकार का कहना है कि अल्पसंख्यकों के बनाए शिकारी धर्म बदलने के रैकेट से कमज़ोर बहुसंख्यक हिंदुओं को बचाने के लिए ऐसा धर्म बदलने के खिलाफ़ कानून ज़रूरी है। महाराष्ट्र धर्म की आज़ादी बिल, 2026 उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे दूसरे राज्यों के ऐसे ही धर्म बदलने के खिलाफ़ कानूनों पर आधारित है।

  • भोपाल वृत्‍त के लगभग 3 लाख उपभोक्‍ताओं को जनवरी में दो करोड़ से अधिक की छूट

    भोपाल वृत्‍त के लगभग 3 लाख उपभोक्‍ताओं को जनवरी में दो करोड़ से अधिक की छूट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्य क्षेत्र में 5 लाख 20 हजार 457 स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में टाइम ऑफ डे छूट का लाभ प्रदान करते हुए जनवरी 2026 में कुल 3 करोड़ 61 लाख 26 हजार की रियायत प्रदान की गई है। इसमें भोपाल शहरी एवं ग्रामीण वृत्‍त के 2 लाख 97 हजार 813 उपभोक्‍ताओं को 2 करोड़ 10 लाख 66 हजार रुपये की दिन के टैरिफ में छूट मिली है।

    जनसम्पर्क अधिकारी राजेश पाण्डेय ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी द्वारा स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर टाइम ऑफ डे छूट के तहत यह रियायत प्रदान की गई है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत माह जनवरी 2026 के दौरान यह छूट प्रदान की गई है। दिन के टैरिफ में स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है।

    कंपनी ने उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि वे अपने परिसर में स्‍मार्ट मीटर लगाने में सहयोग करें और स्‍मार्ट मीटर लगवाने से न घबराएं। स्‍मार्ट मीटर उनके लिए हर तरह से फायदेमंद है और स्‍मार्ट मीटर की सटीक रीडिंग और बिलिंग के साथ ही कार्यप्रणाली में भी किसी प्रकार की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।

    स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्‍ताओं को ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद मिलती है। स्‍मार्ट मीटर बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। ऐप से मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित किया जा सकता है। उपभोक्‍ताओं को ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बनाया जा सकता है। उपभोक्‍ता ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन मोबाइल एप के द्वारा किसी भी समय कहीं से भी देख सकते हैं। स्‍मार्ट मीटर ऊर्जा की खपत को कम करने में सहायक होकर पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करता है।