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  • सावन के त्योहारों में साड़ी के साथ ट्रेंडिंग बिंदी डिज़ाइन अपनाकर बनाएं अपना लुक और खास

    सावन के त्योहारों में साड़ी के साथ ट्रेंडिंग बिंदी डिज़ाइन अपनाकर बनाएं अपना लुक और खास

    नई दिल्ली । सावन का महीना भारतीय संस्कृति और पारंपरिक परिधानों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दौरान महिलाएं और युवतियां पूजा, व्रत, पारिवारिक आयोजनों और त्योहारों में साड़ी पहनना पसंद करती हैं। हालांकि खूबसूरत साड़ी के साथ सही बिंदी का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। चेहरे के अनुरूप चुनी गई बिंदी न केवल पारंपरिक लुक को पूरा करती है, बल्कि पूरे व्यक्तित्व को भी अधिक आकर्षक और संतुलित बना देती है। इस सावन कई ऐसे बिंदी डिज़ाइन ट्रेंड में हैं, जिन्हें अलग-अलग तरह की साड़ियों के साथ आसानी से अपनाया जा सकता है।

    अगर आप सादगी और पारंपरिक अंदाज पसंद करती हैं तो गोल लाल बिंदी सबसे उपयुक्त विकल्प मानी जाती है। यह डिज़ाइन वर्षों से फैशन का हिस्सा रही है और लगभग हर रंग की साड़ी के साथ सहज रूप से मेल खाती है। विशेष रूप से हरे, पीले और लाल रंग की साड़ियों के साथ इसका संयोजन पारंपरिक सौंदर्य को और अधिक निखार देता है।

    सावन में हरे रंग का विशेष महत्व होने के कारण ग्रीन स्टोन बिंदी भी महिलाओं की पसंद बन रही है। यह डिज़ाइन सिल्क, कॉटन और जॉर्जेट जैसी विभिन्न प्रकार की साड़ियों के साथ आकर्षक दिखाई देता है। हल्के मेकअप और पारंपरिक आभूषणों के साथ इसका संयोजन संतुलित और सुरुचिपूर्ण लुक देता है।

    जो महिलाएं पारंपरिक पहनावे में थोड़ा अलग अंदाज चाहती हैं, उनके लिए लॉन्ग बिंदी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। यह विशेष रूप से बनारसी और प्लेन साड़ियों के साथ बेहद आकर्षक लगती है। इसके साथ हल्के आभूषण पहनने से पूरा लुक संतुलित बना रहता है और चेहरे की खूबसूरती भी उभरकर सामने आती है।

    ब्लैक बिंदी को भी अब केवल आधुनिक परिधानों तक सीमित नहीं माना जाता। हल्के रंग की साड़ियों के साथ छोटी काली बिंदी एक अलग और स्टाइलिश प्रभाव पैदा करती है। वहीं यदि किसी धार्मिक आयोजन, पूजा या पारिवारिक समारोह में शामिल होना हो तो स्टोन वर्क बिंदी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इसकी चमक चेहरे पर अलग ही आकर्षण जोड़ती है और पारंपरिक परिधान को उत्सव के अनुरूप बनाती है।

    इन दिनों लीफ शेप बिंदी भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सावन के प्राकृतिक और हरियाली से जुड़े माहौल के कारण यह डिज़ाइन काफी पसंद किया जा रहा है। हरे या सुनहरे बॉर्डर वाली साड़ियों के साथ इसका मेल बेहद आकर्षक दिखाई देता है। इसके अलावा मल्टीकलर बिंदी भी उन महिलाओं के लिए उपयुक्त है, जिनकी साड़ी में एक से अधिक रंग शामिल हों। यह पारंपरिक लुक में आधुनिकता का हल्का स्पर्श जोड़ती है।

    फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि बिंदी का चुनाव केवल ट्रेंड देखकर नहीं, बल्कि चेहरे के आकार, साड़ी के रंग और आभूषणों के अनुसार करना चाहिए। यदि आभूषण भारी हों तो साधारण बिंदी अधिक संतुलित लगती है, जबकि हल्की ज्वेलरी के साथ स्टोन या डिजाइनर बिंदी पूरे लुक को अधिक प्रभावशाली बना सकती है। सही आकार, रंग और डिज़ाइन की बिंदी न केवल चेहरे की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि पारंपरिक पहनावे को भी संपूर्ण और आकर्षक रूप प्रदान करती है। इस सावन यदि साड़ी के साथ बिंदी का चयन सोच-समझकर किया जाए, तो बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के भी आपका उत्सवी लुक और अधिक निखर सकता है।

  • Lenskart विवाद: हिजाब की इजाजत और बिंदी पर रोक की खबर से बवाल, पीयूष बंसल ने दी सफाई

    Lenskart विवाद: हिजाब की इजाजत और बिंदी पर रोक की खबर से बवाल, पीयूष बंसल ने दी सफाई

    नई दिल्ली। आईवियर कंपनी Lenskart इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़े विवाद में घिर गई है। कंपनी की कथित “स्टाफ यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग गाइड” सामने आने के बाद आरोप लगे कि कर्मचारियों को हिजाब या पगड़ी पहनने की अनुमति है, लेकिन बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई गई है।

    इस खबर के सामने आते ही लोगों में नाराजगी फैल गई और कंपनी पर भेदभाव के आरोप लगने लगे।

    क्या है पूरा विवाद?

    सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज में दावा किया गया कि Lenskart स्टोर कर्मचारियों को काले रंग का हिजाब और पगड़ी पहनने की छूट देता है, लेकिन “धार्मिक टीका/तिलक और बिंदी/स्टिकर” की अनुमति नहीं है।
    इसी कथित नियम को लेकर यूजर्स ने सवाल उठाए और इसे धार्मिक असमानता से जोड़कर देखा।

    पीयूष बंसल की सफाई

    विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वायरल दस्तावेज कंपनी की मौजूदा नीति का हिस्सा नहीं है और यह एक पुराना ड्राफ्ट है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कंपनी किसी भी तरह के धार्मिक प्रतीकों पर रोक नहीं लगाती और कर्मचारियों को बिंदी, तिलक समेत सभी प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है।
    साथ ही, उन्होंने इस पूरे मामले से पैदा हुए भ्रम के लिए माफी भी मांगी।

    सफाई पर भी उठे सवाल

    हालांकि, बंसल की सफाई के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि वायरल दस्तावेज हाल ही (फरवरी 2026) का है, इसलिए इसे “पुराना” बताना सही नहीं है।

    कुछ लोगों ने कंपनी से मौजूदा नीति सार्वजनिक करने की मांग की, जबकि अन्य ने यह सवाल उठाया कि अगर यह पुरानी पॉलिसी भी थी, तो उस समय ऐसे नियम क्यों बनाए गए थे।

    सोशल मीडिया पर बढ़ा दबाव

    यह मामला अब कंपनी की ब्रांड छवि से जुड़ गया है। यूजर्स लगातार पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं और स्पष्ट नीति सामने लाने की बात कह रहे हैं।

    फिलहाल कंपनी ने अपनी स्थिति साफ कर दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर जारी बहस से यह साफ है कि मामला अभी पूरी तरह थमा नहीं है।