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  • पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविन्द नारायण सिंह की कार्यशैली आज भी प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविन्द नारायण सिंह की कार्यशैली आज भी प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। पुष्पांजलि कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह के परिजन उपस्थित थे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं, समाज का कल्याण करना है। आज की नई पीढ़ी को पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह के जीवन से सेवा, समर्पण और नैतिकता की सीख लेनी चाहिए। वे बेहद सरल जीवन और सहज व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थे। जनता से उनका सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी शक्ति था। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और सामान्य नागरिकों की समस्याओं को निकट से समझा। ऐसे व्यक्तित्व सदैव समाज का मार्गदर्शन करते हैं। उनकी कार्यशैली आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह का जीवन युवाओं को ईमानदारी, संघर्ष और राष्ट्र सेवा का संदेश देता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गोविन्द नारायण सिंह वर्ष 1967 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, जब प्रदेश की राजनीति एक नए दौर से गुजर रही थी। उन्होंने प्रशासन में जवाबदेही और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया. लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप शासन चलाने की दिशा में कार्य किया। उनका कार्यकाल राजनीतिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह की जयंती पर हम सभी उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लें। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए हम विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए कार्य करेंगे। प्रदेश में जनकल्याण, सुशासन और सतत् विकास के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

    पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह का जन्म 25 जुलाई 1920 को रामपुर बघेलान में हुआ था। एम.ए., एलएलबी. तक शिक्षा ग्रहण कर उन्होंने अपने सार्वजनिक एवं राजनैतिक जीवन प्रारंभ किया। उन्होंने चतुर्थ विधानसभा (1967-1972) में 30 जुलाई 1967 से 12 मार्च 1969 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश के विकास को एक नई दिशा दी थी। सिंह का 10 मई 2005 को देहावसान हो गया।

    मीडिया से चर्चा
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्पांजलि कार्यक्रम के पश्चात मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह राज्य में तत्कालीन संविद सरकार की राजनीति के केंद्र बिंदु थे। वे रीवा के निवासी थे। उन्होंने सादगी, निष्पक्षता के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज उनकी जयंती के अवसर पर हम सभी उनका स्मरण कर रहे हैं। सिंह ने राजमाता सिंधिया के कार्यकाल में जनता की आवाज बनकर यह भरोसा दिलाया था कि पक्ष हो या विपक्ष, अब राजनीति में बदलाव का समय है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह प्रदेश की राजनीति में लोकतांत्रिक परंपरा की मिसाल बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विधानसभा अध्यक्षों की जयंती और पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि कार्यक्रम कराने की उत्कृष्ट पहल की है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण


    भोपाल। गुरूवार, 29 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ की जयंती पर उनका पुण्य स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रो. रज्जू भैया का प्रखर व्यक्तित्व, उनके विचार और कृतित्व हमेशा राष्ट्रसेवकों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने विशेष रूप से रज्जू भैया की मां भारती और राष्ट्र की सेवा में समर्पित जीवन की सराहना की और कहा कि उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करेंगे।

    मुख्यमंत्री के इस स्मरण ने राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के क्षेत्र में रज्जू भैया की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। उनकी जयंती पर देशभर में उनके योगदान और विचारों को याद किया जा रहा है।

  • बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अर्पित किया नमन

    बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अर्पित किया नमन


    नई दिल्ली । बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती के अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने उन्हें सादर पूर्वक नमन करते हुए उनके राष्ट्रनिष्ठ जीवन, अडिग सिद्धांतों और स्वाभिमानपूर्ण नेतृत्व का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे जी ने राष्ट्र, धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया और उनका यह योगदान सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

    श्री अमित शाह ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे जी ऐसे जननेता थे, जिन्होंने कभी भी परिस्थितियों के दबाव में अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनका जीवन मूल्यनिष्ठ राजनीति, स्पष्ट विचार और निडर अभिव्यक्ति का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि बालासाहेब जी का व्यक्तित्व केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं था, बल्कि वे पूरे देश के राष्ट्रप्रेमियों के लिए समान रूप से आदरणीय और प्रिय बने रहे। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे जी ने समाज में स्वाभिमान की भावना को जागृत किया और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जनमानस को दिशा देने का कार्य किया। उनका विचार और संघर्ष आज भी युवाओं तथा समाज के विभिन्न वर्गों को राष्ट्रसेवा और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है।

    श्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा, “बालासाहेब ठाकरे जी ने राष्ट्र, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, सिद्धांतों से कभी समझौता न करने वाले बालासाहेब जी महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश के राष्ट्रप्रेमियों के लिए सदैव प्रिय बने रहेंगे। बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती पर उन्हें सादर पूर्वक नमन।” बालासाहेब ठाकरे जी की जयंती पर देशभर में उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री का यह संदेश उनके विचारों, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति को सम्मान देने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का संदेश भी है।

  • टीवी सुपरस्टार इरफान खान की सालगिरह: यादगार किरदारों में छोड़ा अपना असर

    टीवी सुपरस्टार इरफान खान की सालगिरह: यादगार किरदारों में छोड़ा अपना असर

    नई दिल्ली। अपनी दमदार ऐक्टिंग और आवाज के दम पर लोगों को एंटरटेन करने वाला हिंदी सिनेमा का हीरा यानी इरफान खान अब इस दुनिया में नहीं रहें। पिछले दो महीनों से उनकी तबियत खराब थी, जिसके बाद उन्हें कोलोन इंफेक्शन के कारण हाल ही मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन वहां वह अपनी जिंदगी की रेस हार गए।
    इरफान खान सिनेमा की दुनिया का वह हीरा थे, जिसकी चमक दिन-रात बढ़ती ही गई और हर निर्माता-निर्देशक उनके साथ काम करने को मचल उठा। सिर्फ फिल्मों ही नहीं बल्कि टीवी की दुनिया में भी इरफान ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। शायद ही लोग जानते हों लेकिन सिनेमा का स्टार बनने से पहले इरफान टीवी की दुनिया के सुपरस्टार बने।

    मुस्लिम पठानी परिवार में जन्म, यह था असली नाम
    7 जनवरी 1967 को जयपुर के मुस्लिम पठानी परिवार में जन्मे इरफान बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनका पूरा और असली नाम था साहबजादे इरफान अली खान, जिसे बाद में बदलकर इरफान खान कर लिया। इरफान खान कभी भी ऐक्टिंग में नहीं आना चाहते थे। उनकी ख्वाहिश तो क्रिकेटर बनने की थी, लेकिन नैशनल स्क्रूल ऑफ ड्रामा से स्कॉलरशिप मिली तो ऐक्टिंग का कीड़ा जाग गया।

    मुंबई आने पर एसी रिपेयर का काम किया
    ऐक्टिंग का चस्का लेकर इरफान खान मुंबई आ गए और यहां उन्होंने एसी रिपेयर करने का काम शुरू कर दिया। माना जाता है कि जिस शख्स के घर वह सबसे पहले एसी ठीक करने गए थे, वह सुपरस्टार राजेश खन्ना का घर था।

    टीवी की दुनिया में कदम रखते ही मचाया था तहलका
    खैर, इसके बाद इरफान खान की एंट्री ऐक्टिंग में हुई और पहला कदम टीवी की दुनिया में रखा। पहला टीवी शो ‘श्रीकांत’ था और इसके बाद उन्होंने ‘भारत एक खोज’, ‘कहकशां’ ‘सारा जहां हमारा’, ‘बनेगी अपनी बात’, ‘चाणक्य’, ‘अंगूरी’, ‘स्पर्श’ और ‘चंद्रकांता’ जैसे सीरियलों में काम किया और अपनी एक अलग पहचान बनाई।

    नीरजा गुलेरी के ‘चंद्रकांता’ में इरफान खान ने शिवदत्त के विश्वसनीय पात्र बद्रीनाथ का किरदार निभाया था। बद्रीनाथ के अलावा उन्होंने जुड़वां भाई सोमनाथ का किरदार भी प्ले किया। इस शो ने तो इरफान खान के करियर की दिशा ही बदल दी। उनके पास फिल्म और टीवी के बड़े ऑफरों की लाइन ही लग गई।
    इस बीच इरफान ने दूरदर्शन पर ‘लाल घास पर नीले घोड़े’ नाम का एक टेलिप्ले किया था, जिसमें उन्होंने लेनिन का किरदार निभाया। इसके अलावा इरफान ने टीवी सीरीज ‘डर’ में भी काम किा, जिसमें उन्होंने साइको किलर का रोल किया था। इस सीरीज में ऐक्टर के के मेनन भी थे। इरफान थिअटर और टीवी की दुनिया में कमाल किए जा रहे थे कि तभी मीरा नायर की नजर उन पर पड़ी और साल 1988 में इरफान को अपनी फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ में काम दिया। यहीं से इरफान के लिए बॉलिवुड के दरवाजे खुल गए।
    जब इरफान खान ने कर लिया था ऐक्टिंग छोड़ने का फैसला
    लेकिन इसी दौरान इरफान खान की जिंदगी में वह मोड़ भी आया था जब वह ऐक्टिंग छोड़ देना चाहते थे। यह तब की बात हैजब वह टीवी के साथ फिल्मों में भी काम कर रहे थे। टीवी शोज हिट हो रहे थे, लेकिन इरफान को मलाल था कि एक भी फिल्म चल नहीं रही है। लेकिन 2001 में आई आसिफ कपाड़िया की फिल्म ‘द वॉरियर’ ने उनका मन बदल दिया।
  • पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

    पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की


    नई दिल्‍ली ।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रणब मुखर्जी को आज उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने मुखर्जी को एक महान राजनेता और असाधारण विद्वत्तापूर्ण व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उन्होंने दशकों के सार्वजनिक जीवन में अटूट समर्पण के साथ देश की सेवा की।

    पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा “प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। वह एक महान राजनेता और असाधारण विद्वत्तापूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे और उन्होंने दशकों के सार्वजनिक जीवन में अटूट समर्पण के साथ भारत की सेवा की। प्रणब बाबू की बुद्धिमत्ता और स्पष्ट विचार ने हर कदम पर हमारे लोकतंत्र को समृद्ध किया। यह मेरा सौभाग्य है कि इतने वर्षों तक उनके साथ संवाद करने के दौरान मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला।”

    https://twitter.com/narendramodi/status/1998967658382024940?s=20

    राष्ट्रपति ने प्रणब मुखर्जी की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।