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  • रणवीर सिंह के घर आई खुशखबरी…. दीपिका ने दिया दूसरी बेटी को जन्म

    रणवीर सिंह के घर आई खुशखबरी…. दीपिका ने दिया दूसरी बेटी को जन्म


    मुम्बई।
    दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने 19 सितंबर को एक बेटी को जन्म (Daughter birth) दिया है। दीपिका पादुकोण ने खुद ये जानकारी फैंस को दी है। रणवीर सिंह (Ranveer Singh) और दीपिका की पहली बेटी का जन्म भी सितंबर में हुआ था। दीपिका और रणवीर के जीवन में इस खुशी के मौके पर फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने भी कपल को बधाई दी है। अनिल कपूर ने दीपिका के पोस्ट पर कमेंट करके लिखा- लड़कियां बेस्ट होती हैं।


    बॉलीवुड सेलेब्स ने दी रणवीर और दीपिका को बधाई

    दीपिका पादुकोण ने पैरों की छाप की एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की है। इस तस्वीर के साथ दीपिका ने लिखा- बेबी गर्ल का स्वागत। इसी के साथ दीपिका ने ईविल आई वाले इमोजी पोस्ट किए हैं। दीपिका के इस पोस्ट पर कृति सेनन, अनिल कपूर, आलिया भट्ट और श्रेया घोषाल जैसे सितारों ने बधाई दी।


    आलिया भट्ट ने यूं जाहिर की खुशी

    विकी कौशल ने लिखा- भगवान भला करे! बधाई हो। कृति सेनन ने लिखा- आप दोनों को बधाई। अब दुआ के पास छोटी बहन है। ये सच में एक आशीर्वाद है। आलिया भट्ट ने दीपिका के पोस्ट पर बहुत सारे दिल, ईविल आई इमोजी, सूरज और दो नाचते हुए लोगों वाले इमोजी बनाकर अपनी खुशी जाहिर की।

    अनिल कपूर से लेकर बिपाशा बसु तक ने दी कपल को बधाई
    अनिल कपूर ने दीपिका पादुकोण को बधाई देते हुए लिखा- लड़कियां बेस्ट होती हैं। इसी के साथ उन्होंने भी ईविल आई इमोजी बनाया। बिपाशा बसु ने लिखा- बधाई। आप सबको प्यार। सोनम कपूर ने लिखा- क्या शानदार सपना है। बधाई हो। सिंगर श्रेया घोषाल ने भी कपल को बधाई दी है। सोनाक्षी सिन्हा ने लिखा- बधाई हो, दिल खुशी से भर गया। लोका चैप्टर 1 एक्ट्रेस कल्याणी प्रियदर्शन ने भी रणवीर और दीपिका को बधाई दी। उन्होंने लिखा- बधाई और भगवान भला करे।


    2024 में पहली बार पेरेंट्स बने थे रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण

    दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की बेटी दुआ का जन्म 8 सितंबर, 2024 को हुआ था। शादी के 6 साल बाद दीपिका और रणवीर पेरेंट्स बने थे। अब साल 2026 में एक बार फिर रणवीर और दीपिका के घर खुशियों ने दस्तक दी है। इस खुशखबरी के साथ ही फैंस को अब बेटी की झलक का इंतजार है। बता दें, दुआ के जन्म के लगभग दो महीने बाद दीपिका और रणवीर ने पहली बार बेटी की झलक दिखाई थी। दीपिका ने दुआ के पैरों की तस्वीर शेयर की थी। इसके बाद दिवाली के मौके पर रणवीर सिंह और दीपिका ने बेटी दुआ का चेहरा रिवील किया था।


    साल 2013 में शुरू हुआ था दीपिका और रणवीर सिंह का प्यार

    रणवीर और दीपिका की बात करें तो दोनों के प्यार की शुरुआत साल 2013 में रिलीज हुई फिल्म रामलीला के सेट पर हुई थी। लगभग 6 साल एक दूसरे को डेट करने के बाद साल 2018 में दीपिका और रणवीर ने इटली में एक दूसरे के साथ शादी रचाई थी।

    दीपिका ने 19 अप्रैल को फैंस को बताया था कि वो प्रेग्नेंट हैं। दीपिका ने खास अंदाज में फैंस को ये खुशखबरी दी थी। उन्होंने बेटी दुआ के हाथ में प्रेग्नेंसी किट पकड़ाकर फोटो शेयर की थी। इसके साथ दीपिका पादुकोण ने कुछ लिखा नहीं था, लेकिन ये एक तस्वीर ये बताने के लिए काफी थी कि दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर में एक बार फिर खुशियां दस्तक देने वाली हैं।

  • जन्माष्टमी पर था द्वापर जैसा नजारा…. मध्यरात्रि मथुरा में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण, देशभर में गूंज उठे जयकारे

    जन्माष्टमी पर था द्वापर जैसा नजारा…. मध्यरात्रि मथुरा में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण, देशभर में गूंज उठे जयकारे


    मथुरा।
    इस भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Krishna Paksha, Ashtami) तिथि की मध्यरात्रि नजारा बिल्कुल द्वापर (Dvapar) सरीखा ही था। दिन में खूब बदरा बरसे और रात को भी काली घटाएं छाईं थीं। हर पल जोर जोर से बरसने को आतुर। आसमान में बिजली भी खूब चमकी। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने शुक्रवार को रात के 12 बजाए, संपूर्ण ब्रजमंडल नंद घर आनंद भए, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। अलौकिक आभा, अपार जनसैलाब, ढोल-नगाड़ों की थाप और घंटे-घड़ियालों की गूंज के बीच भगवान श्रीकृष्ण (Lord Sri Krishna) का घर-घर और मंदिरों में जन्म हुआ। लाखों श्रद्धालु इसके साक्षी बने।

    मुख्य आयोजन श्रीकृष्ण जन्मस्थान (Shri Krishna Janmasthan) पर हुआ। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भक्तों का उल्लास देखते ही बन रहा था। घड़ी में जैसे ही 11 बजे तत्काल नवगृह स्थापना के साथ पूजन शुरू हो गया। 11.55 बजे तक कमल पुष्प एवं तुलसीदल से सहस्त्रार्चन हुआ। 11.59 बजते ही भागवत भवन स्थित युगल सरकार के पट बंद हो गए।

    इस एक मिनट के पल में श्रद्धालुओं को लगा मानो घंटों बीत रहे हों। ठीक 12 बजे लीलाधर के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के ट्रस्टी अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने सोने-चांदी से निर्मित 100 किग्रा की कामधेनु गाय की मूर्ति में गंगाजल सहित पंचामृत भरकर लल्ला का अभिषेक किया।

    इस दौरान जन्मस्थान पर ढोल-नगाड़े और घंटे-घड़ियाल गूंजते रहे। झांझ-मजीरे, मृदंग और शंख की मंगलध्वनि के बीच कान्हा के बधाई गीत गुंजायमान हो उठे। दर्शन का दौर 1:30 बजे तक चलता रहा।

    श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित मूल श्रीगर्भगृह (कारागार) से अभिषेक व पूजा-अर्चना की लाइव स्ट्रीमिंग कराई गई। गर्भगृह में श्रीकृष्ण बाल-गोपाल रूप में विराजते हैं। अब तक केवल भागवत भवन से ही लाइव प्रसारण होता रहा है, शुक्रवार मध्यरात्रि करोड़ों श्रद्धालुओं ने घर बैठे टीवी स्क्रीन पर सीधा प्रसारण देखा। इसके लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा अत्याधुनिक कैमरे लगाकर डिजिटल प्रसारण की व्यवस्था की गई।

  • MP: सतना में महिला ने एक साथ 3 बच्चों को दिया जन्म, जिला अस्पताल में हुई नॉर्मल डिलीवरी

    MP: सतना में महिला ने एक साथ 3 बच्चों को दिया जन्म, जिला अस्पताल में हुई नॉर्मल डिलीवरी


    सतना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिला अस्पताल (Satna District Hospital) में एक बार फिर कुदरत का अनोखा नजारा देखने को मिला. पन्ना जिले के सलेहा इलाके की रहने वाली 34 वर्षीय कंचन सोनी ने एक साथ 3 बच्चों को जन्म (Triplets Birth) दिया है. सबसे चौंकाने वाली और सुखद बात यह है कि ये तीनों जन्म नॉर्मल डिलीवरी (Normal Delivery) के जरिए हुए हैं,।

    सतना जिला अस्पताल में 27 अप्रैल की रात करीब डेढ़ घंटे के अंतराल में तीनों शिशुओं का जन्म हुआ. 10:34 बजे पहले पुत्र का जन्म हुआ. इसके ठीक 11 मिनट बाद 10:45 बजे दूसरे पुत्र ने जन्म लिया. इसके बाद करीब एक घंटे के इंतजार के बाद 11:57 बजे एक पुत्री का जन्म हुआ. तीनों शिशुओं का वजन स्वास्थ्य के लिहाज से काफी बेहतर पाया गया है, जो क्रमशः 2 किलो, 2.300 किलो और 2.650 किलो है।

    गायनी विभाग की एचओडी डॉ. मंजू सिंह के अनुसार, मां और तीनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें फिलहाल पीएनसी वार्ड में विशेष ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. हैरानी की बात यह भी है कि कंचन सोनी के पहले से ही चार बच्चे (11, 9, 7 और 5 वर्ष) हैं।

    जाहिर सी बात है कि यहां परिवार नियोजन कार्यक्रम हम दो हमारे दो की धज्जियां उड़ गई हैं. प्रसूता कंचन अब हम दो हमारे सात नारे के साथ है यानी अब इन तीन नए मेहमानों के आने से परिवार में बच्चों की कुल संख्या सात हो गई है।

    हालांकि, यह मामला जिला अस्पताल में परिवार नियोजन कार्यक्रमों के लिए एक चुनौती की तरह देखा जा रहा है, लेकिन सुरक्षित प्रसव और बच्चों की किलकारियों ने परिजनों के चेहरे पर खुशी ला दी है। परिजनों को गर्भावस्था के पांचवें महीने में ही सोनोग्राफी के जरिए इस बात का पता चल गया था कि घर में एक साथ तीन नन्हे मेहमान आने वाले हैं. सतना जिला अस्पताल में इससे पहले भी नवंबर 2025 में ट्रिपलेट प्रसव का सफल मामला सामने आ चुका है।

  • MP: पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं मैहर कलेक्टर…. प्रसूता को दी समझाइश

    MP: पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं मैहर कलेक्टर…. प्रसूता को दी समझाइश


    मैहर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर की कलेक्टर (Maihar: Collector) IAS बिदिशा मुखर्जी (IAS Bidisha Mukherjee) इन दिनों अपने सख्त और संवेदनशील तेवरों के लिए चर्चा में हैं. हाल ही में जब वे मैहर के सिविल अस्पताल (Maihar Civil Hospital) का औचक जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां का नजारा देख वह खुद को रोक नहीं पाईं और एक ‘सुपर वुमेन’ की तरह समाज की कुरीतियों पर दहाड़ती नजर आईं. पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं…

    अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को जब यह पता चला कि एक महिला ने अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया है, तो वे दंग रह गईं. उन्होंने महिला के पास जाकर बड़ी ही आत्मीयता, लेकिन दृढ़ता के साथ उसे समझाइश दी कि आज के महंगाई के दौर में इतने बच्चों का पालन-पोषण, उनकी अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना चुनौतीपूर्ण है. कलेक्टर ने महिला से सीधे सवाल किया कि आखिर इतने बड़े परिवार का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?

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    अस्पताल में उनके इस तेवर ने वहां मौजूद कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. यह पूरा घटनाक्रम समाज की उस गहरी सोच पर प्रहार करता है जहां आज भी ‘पुत्र प्राप्ति’ या अन्य सामाजिक कारणों से लगातार बच्चे पैदा किए जाते हैं।


    महिला सशक्तिकरण का दिया उदाहरण

    कलेक्टर ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज जमाना बदल गया है. उन्होंने उदाहरण दिया कि “आज मध्य प्रदेश में 31% कलेक्टर महिलाएं हैं, हमारी पूरी टीम महिलाओं की है. फिर यह भेदभाव क्यों?”


    ग्राउंड स्टाफ को फटकार

    उन्होंने केवल महिला को ही नहीं टोका, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अमले और मैदानी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल दागे. कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आखिर परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता अभियान कहां है? उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम न करे, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों को छोटे परिवार के फायदों और मातृ स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करे।

    कलेक्टर ने अस्पताल में मिल रहे भोजन की क्वालिटी की भी जांच की और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि मैहर एक नया जिला है और यहां महिला रोग विशेषज्ञ, नेफ्रोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन जैसे विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए वे निरंतर प्रयास कर रही हैं।

  • चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद

    चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद


    अशोकनगर।
    मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील में बिना समुचित जांच के जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर नियमों की अनदेखी कर प्रमाण पत्र बनाए गए, जिससे न्यायालयों में अनावश्यक विवाद और प्रकरण बढ़ रहे हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदेरी निवासी रविकांत सेषा की शिकायत पर चंदेरी थाने में कमल सिंह लोधी निवासी ग्राम मोहनपुर के खिलाफ अपराध क्रमांक 0193/2026 दर्ज किया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338 और 336(3) के तहत प्रकरण कायम किया गया है।

    बताया गया है कि कमल सिंह लोधी ने तहसील कार्यालय में जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0376/ड-154(1)/2024-25 तथा मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0067/ड-154/2024-25 प्रस्तुत किया था। वहीं, भैयालाल लोधी ने कथित रूप से वसीयत तैयार करने के उद्देश्य से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0077/ड-154/2024-25 के माध्यम से आवेदन किया। आरोप है कि इन सभी प्रकरणों में कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर एक ही दिन में प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।

    इन प्रमाण पत्रों के जरिए कथित रूप से भूमि के नामांतरण और पूर्व विक्रय पत्रों को शून्य कराने की कोशिश की गई, जो बाद में न्यायालयीन विवाद का कारण बनी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस संबंध में तहसील प्रशासन, एसडीएम और कलेक्टर को शिकायत की गई, लेकिन पांच माह से अधिक समय बीतने के बाद भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    बाबुओं की भूमिका संदिग्ध, जांच की मांग तेज

    सूत्रों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। चंदेरी तहसील में वर्षों से पदस्थ कुछ बाबुओं की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जो कथित रूप से अधिकारियों को गुमराह कर ऑर्डर शीट तैयार कराते हैं और उनके हस्ताक्षर करवा लेते हैं। इसी के आधार पर नियम विरुद्ध तरीके से नामांतरण प्रकरण भी स्वीकृत किए जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पिछले दो-तीन वर्षों में जारी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और नामांतरण प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

    आम नागरिक पर कार्रवाई, जिम्मेदार सुरक्षित

    मामले में पुलिस ने कमल सिंह लोधी के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन तहसील स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि लापरवाही या मिलीभगत के बावजूद जिम्मेदारों को क्यों बचाया जा रहा है।

    जांच नहीं हुई तो बढ़ेंगे विवाद

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की गहन जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में ऐसे कई मामले सामने आएंगे, जिससे न्यायालयों पर बोझ बढ़ेगा और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

    अब देखना यह होगा कि राजस्व विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।