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  • जब ‘बिस्मार्क’ ने डुबो दिया ब्रिटेन का गौरव, द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मन युद्धपोत की ताकत ने बदल दिए थे समीकरण

    जब ‘बिस्मार्क’ ने डुबो दिया ब्रिटेन का गौरव, द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मन युद्धपोत की ताकत ने बदल दिए थे समीकरण

    नई दिल्ली । द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास में कुछ युद्धपोत ऐसे रहे हैं जिनका नाम आज भी सैन्य रणनीति, समुद्री शक्ति और युद्धक क्षमता के प्रतीक के रूप में लिया जाता है। जर्मनी का युद्धपोत बिस्मार्क उनमें सबसे प्रमुख माना जाता है। वर्ष 1941 में अटलांटिक महासागर में उसकी मौजूदगी मात्र ने ब्रिटिश नौसेना के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी थी। यही कारण था कि उसे नष्ट करने के लिए ब्रिटेन को अपने इतिहास के सबसे बड़े नौसैनिक अभियानों में से एक चलाना पड़ा।

    मई 1941 में डेनमार्क स्ट्रेट के समुद्री क्षेत्र में हुई लड़ाई ने बिस्मार्क को विश्वभर में चर्चा का विषय बना दिया। इस युद्ध के दौरान उसने ब्रिटिश नौसेना के गौरव माने जाने वाले HMS Hood को कुछ ही मिनटों में समुद्र की गहराइयों में पहुंचा दिया। उस समय हूड ब्रिटेन का सबसे प्रतिष्ठित युद्धपोत था और उसकी तबाही ने पूरे ब्रिटिश साम्राज्य को झकझोर दिया। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिस्मार्क केवल एक बड़ा जहाज नहीं, बल्कि अत्यंत खतरनाक युद्ध मशीन था।

    बिस्मार्क की सबसे बड़ी विशेषता उसका विशाल आकार था। लगभग 41,700 टन के मानक विस्थापन वाला यह युद्धपोत अपने दौर के सबसे बड़े और प्रभावशाली जहाजों में शामिल था। उस समय दुनिया के अधिकांश युद्धपोत उससे छोटे थे। केवल बाद में विकसित हुए कुछ अमेरिकी और जापानी युद्धपोत ही आकार में उससे आगे निकल सके।

    रफ्तार के मामले में भी बिस्मार्क अपने समकालीन युद्धपोतों से बेहतर माना जाता था। लगभग 56 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति उसे तेज कार्रवाई और रणनीतिक गतिशीलता प्रदान करती थी। विशाल आकार के बावजूद उसकी गति और संचालन क्षमता ने उसे युद्ध के मैदान में विशेष बढ़त दी।

    इस युद्धपोत की एक और बड़ी ताकत उसकी सुरक्षा प्रणाली थी। जहाज के ढांचे को कई जलरोधी खंडों में विभाजित किया गया था, जिससे गंभीर क्षति के बावजूद उसके डूबने की संभावना कम हो जाती थी। यही वजह थी कि बाद में ब्रिटिश नौसेना को उसे निष्क्रिय करने के लिए लगातार गोलाबारी, हवाई हमलों और टॉरपीडो का सहारा लेना पड़ा। बिस्मार्क की मजबूती ने उसे उस समय के सबसे सुरक्षित युद्धपोतों में स्थान दिलाया।

    हथियारों की दृष्टि से भी बिस्मार्क बेहद शक्तिशाली था। उसकी आठ 15 इंच की मुख्य तोपें एक साथ भारी मात्रा में विस्फोटक और स्टील के गोले दागने में सक्षम थीं। हालांकि जापान के यामाटो जैसे कुछ युद्धपोत उससे अधिक भारी गोलाबारी कर सकते थे, फिर भी बिस्मार्क की फायर कंट्रोल प्रणाली और लक्ष्य भेदन क्षमता उसे बेहद प्रभावशाली बनाती थी।

    डेनमार्क स्ट्रेट की लड़ाई में उसने ब्रिटिश युद्धपोत Prince of Wales को भी गंभीर क्षति पहुंचाई। सटीक गोलाबारी के कारण जहाज के कई हिस्सों को नुकसान हुआ और ब्रिटिश नौसेना को पीछे हटना पड़ा। हालांकि बाद में Prince of Wales ने मरम्मत के बाद फिर से अभियान में हिस्सा लिया, लेकिन उस संघर्ष ने बिस्मार्क की युद्ध क्षमता का प्रदर्शन पूरी दुनिया के सामने कर दिया।

    HMS Hood के विनाश के बाद ब्रिटेन ने बिस्मार्क को हर कीमत पर नष्ट करने का निर्णय लिया। दर्जनों युद्धपोतों, क्रूजरों और विमानों को उसके पीछा करने के लिए लगाया गया। कई दिनों तक चले इस विशाल अभियान के बाद अंततः बिस्मार्क को घेरकर डुबो दिया गया, लेकिन तब तक वह नौसैनिक इतिहास में अपनी अमिट पहचान बना चुका था।

    आज भी बिस्मार्क को केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि समुद्री युद्धक शक्ति, तकनीकी उत्कृष्टता और द्वितीय विश्व युद्ध की सबसे चर्चित नौसैनिक घटनाओं के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।