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  • बिहार से पवन सिंह जाएंगे राज्यसभा, लटकेगा उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य? सियासी गलियारे में चर्चा

    बिहार से पवन सिंह जाएंगे राज्यसभा, लटकेगा उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य? सियासी गलियारे में चर्चा


    नई दिल्ली । राज्यसभा चुनाव की तारीख सामने आ गई है. अगले महीने 16 मार्च को चुनाव होंगे. 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होने हैं. इस चुनाव से सदन में बीजेपी का आंकड़ा तो बढ़ेगा ही, साथ ही यह कई दिग्गजों का भविष्य भी तय करेगा. कई बड़े नेता नंबर के फेर में फंसकर सियासी रूप से पैदल हो सकते हैं. वहीं, कई नेताओं की लॉटरी भी लग सकती है.

    राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव की तारीख जारी होने के साथ ही सियासी गलियारों में कई चर्चित चेहरों के भविष्य को लेकर चर्चा अब होने लगी है. माना जा रहा है कि सबसे दिलचस्प बिहार का चुनाव रहने वाला है. क्योंकि यहां राज्यसभा की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से 2 आरजेडी की सीटें हैं. मौजूदा नंबर के हिसाब से तेजस्वी यादव किसी को भेज नहीं पाएंगे.

    पवन सिंह जाएंगे राज्यसभा!

    ऐसे में बीजेपी के खाते में 2 सीटें जा सकती हैं. राजनीतिक गलियारों में जो चर्चा है उसके मुताबिक नितिन नबीन विधायक बने रहेंगे. ऐसे में एक नाम जो रेस में है वो भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह का है. विधानसभा चुनाव के वक्त पवन सिंह ने खूब प्रचार किया था. इस दौरान माना गया था कि राज्यसभा की ही डील हुई थी.

    लटक सकता है उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य
    आंकड़ों के हिसाब से जेडीयू अपने दोनों सदस्यों को फिर से रिपीट कर सकती है. क्योंकि हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा में बड़ा कद है और रामनाथ ठाकुर मंत्री हैं. रही बात पांचवीं सीट की तो नंबर के हिसाब से चिराग पासवान का दावा बनेगा. लिहाजा उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य लटक सकता है.

    26 फरवरी से शुरू होगी राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया
    बता दें कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 को शुरू होगी. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च रखी गई है. नामांकनों की जांच 6 मार्च को होगी और उम्मीदवार 9 मार्च तक नाम वापस ले सकते हैं.
  • नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष

    नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष


    नई दिल्ली। नितिन नबीन का नाम इन दिनों भाजपा और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। 45 वर्षीय नितिन नबीन निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। बिहार के पथ निर्माण मंत्री रह चुके नितिन की राजनीतिक यात्रा लंबी और भरोसेमंद रही है। पांच विधानसभा चुनाव जीतने, भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने और छत्तीसगढ़ प्रभारी बनने के बाद भी यह निर्णय कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है।

    असल में नितिन नबीन पीएम नरेंद्र मोदी के करीब दो दशक पुराने विश्वासपात्र हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी से मिलने के लिए वह पटना से उड़कर जाते थे। बिहार में मोदी की आंख और कान बने नितिन नबीन ने पार्टी में कई अहम फैसलों और लोकसभा अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई।2009 में लुधियाना रैली इसका प्रमाण है। एनडीए द्वारा एलके आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के दौरान आयोजित विशाल जनसभा में नीतीश कुमार की हिचकिचाहट के बावजूद नितिन नबीन के प्रयास से भाजपा के वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने में सफल हुए। रैली में मंच पर नरेंद्र मोदी ने नीतीश का हाथ उठाकर सबके सामने दिखाया, जिससे नीतीश असहज हो गए।

    पटना में 2010 के बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सत्र के दौरान भी नितिन नबीन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोदी के प्रति आभार जताने के लिए पटना की दीवारों पर बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए, जिसमें स्थानीय बीजेपी यूनिट के नितिन और रामेश्वर चौरसिया की सक्रियता देखने को मिली। इस अभियान ने मोदी की लोकप्रियता बढ़ाई, लेकिन नीतीश कुमार इस पर नाराज हुए। अखबारों में छपी तस्वीरों ने उन्हें परेशान कर दिया और उन्होंने डिनर का कार्यक्रम रद्द कर दिया।

    इस पूरी कहानी से यह साफ है कि नितिन नबीन न केवल पार्टी के अंदर बल्कि मोदी के भरोसे के मामले में भी वर्षों से मजबूत स्थिति में रहे हैं। उनकी यह यात्रा पटना से गुजरात तक मोदी के विश्वास और भाजपा के संगठनात्मक काम में गहरे जुड़े रहने का उदाहरण है।आज राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर नितिन नबीन भाजपा में युवाओं और संगठनात्मक मजबूती दोनों के लिए बड़ी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनकी राजनीतिक समझ, मोदी के साथ लंबे समय से चलती मित्रता और बिहार में उनके अनुभव ने उन्हें यह बड़ा मंच दिलाया है।