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  • रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में

    रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में


    भोपाल । मध्यप्रदेश में दशहरे के मौके पर रावण दहन के साथ राजनीति और दिलचस्प घटनाओं की भी खूब चर्चा रही। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने बंगले पर रावण का पुतला जलाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी तो कहीं भाजपा विधायक की जुबान फिसलने से जनता ही रावण बन गई। धार जिले में रावण के पुतले से निकले रॉकेटों ने लोगों को दौड़ने पर मजबूर कर दिया। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा पर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने तीखा राजनीतिक तंज कस दिया। इन घटनाओं के वीडियो और बयान अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    शिवराज सिंह चौहान को रावण दहन में करनी पड़ी मशक्कत

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दशहरे पर अपने बंगले में रावण के पुतले का दहन किया। लेकिन पुतले को जलाने की कोशिश उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रही। कई प्रयासों के बाद पुतले में आग लगी। इसके बावजूद धुआं छंटने पर रावण का पुतला दोबारा दिखाई देने लगा और वह पूरी तरह नहीं जल पाया था। हालांकि बाद में पुतला पूरी तरह जलकर खाक हो गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर चुटकी लेने लगे। लोगों का कहना है कि रावण दहन का वीडियो तो बन गया लेकिन इसके लिए शिवराज सिंह को काफी मेहनत करनी पड़ी।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा ने जनता को ही बता दिया रावण

    भोजपुर से भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा दशहरा कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान ऐसी बात कह गए जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज यहां रावण रूपी जो हमारे सारे लोग यहां पर आए हुए हैं। उनके इस बयान को जुबान फिसलने के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि वह कुछ और कहना चाहते थे लेकिन शब्दों के चयन में चूक हो गई। इसके बाद उनके बयान पर लोगों ने चुटकी ली। कुछ लोगों ने इसे मंच पर बोलते समय हुई सामान्य गलती माना जबकि कुछ ने नाराजगी भी जताई। फिलहाल इस बयान की चर्चा राजनीतिक हलकों में भी हो रही है।

    धार में रावण के पुतले से निकले रॉकेट तो भागने लगे लोग

    धार जिले के टांडा में रावण दहन के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला। बताया गया कि राम की भूमिका निभा रहे युवक ने रावण दहन के लिए जलता हुआ तीर चलाया तो पुतले में रखे पटाखे और रॉकेट फूटने लगे। रॉकेट इधर-उधर जाने लगे और कुछ लोगों की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इससे मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इस बार रावण ने भी पलटवार कर दिया। हालांकि ऐसी घटनाएं सार्वजनिक कार्यक्रमों में पटाखों के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत भी याद दिलाती हैं।

    दिग्विजय सिंह को धृतराष्ट्र और बेटे को बताया दुर्योधन

    कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज है। गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना धृतराष्ट्र से की और उनके बेटे को दुर्योधन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह अपने बेटे को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पदयात्रा कर रहे हैं। यह भाजपा विधायक का राजनीतिक आरोप है। यात्रा के उद्देश्य और इसके पीछे की मंशा को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन इस बयान ने मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर परिवारवाद और राजनीतिक विरासत की बहस को हवा दे दी है।

    सत्ताधारी दल के नेताओं की खींचतान में अफसर परेशान

    राज्य में सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के मुताबिक महाकौशल क्षेत्र के एक जिले में बच्चों की सेहत से जुड़े मुद्दे पर भाजपा विधायक प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। मामला कथित तौर पर सत्ताधारी दल के एक पूर्व सांसद के बेटे से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विधायक ने सरकार से शिकायत की है और अब इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि संबंधित जिले और मामले का विस्तृत विवरण सामने नहीं रखा गया है। ऐसे में पूरे प्रकरण पर निष्कर्ष निकालने से पहले प्रशासन की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

    कुल मिलाकर दशहरे के दौरान मध्यप्रदेश में धार्मिक उत्सव के साथ राजनीतिक बयान और कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। शिवराज सिंह के रावण दहन से लेकर सुरेंद्र पटवा की जुबान फिसलने और दिग्विजय सिंह पर किए गए तंज तक अलग-अलग मुद्दों ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं प्रशासन और सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के बीच कथित खींचतान ने शासन व्यवस्था में तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

    जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति


    जबलपुर । जबलपुर में नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के तबादले को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई जिसमें उन्होंने दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो जाने की बात लिखी। पोस्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बीच विधायक ने अपनी पोस्ट हटा दी लेकिन तबादले को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।

    राज्य शासन की ओर से दो दिन पहले अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया गया था। इसके तहत जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाया गया है। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद विधायक अजय विश्नोई ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो गया। पोस्ट में रामप्रकाश अहिरवार के नाम में राम शब्द को लेकर भगवान श्रीराम से तुलना किए जाने का अर्थ निकाला गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    पोस्ट वायरल होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाए। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि रामप्रकाश अहिरवार की तुलना भगवान श्रीराम से क्यों की गई। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधायक विश्नोई ने बाद में अपनी पोस्ट हटा दी। इसके बावजूद यह मामला शहर के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इस घटनाक्रम में नगर निगम आयुक्त का तबादला और उस पर की गई राजनीतिक टिप्पणी दोनों चर्चा के केंद्र में हैं। अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाए जाने के बाद जबलपुर में नए प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। वहीं विधायक की पोस्ट ने धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेताओं ने टिप्पणी पर आपत्ति जताई जबकि पोस्ट हटाए जाने के बाद विवाद की चर्चा सोशल मीडिया पर जारी रही।

    इस मामले में एक तथ्यात्मक गलती भी सामने आई। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने अपनी पोस्ट में अजय विश्नोई को कांग्रेस का विधायक बता दिया जबकि विश्नोई भाजपा के नेता हैं और पाटन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में विवाद के बीच राजनीतिक पहचान को लेकर भी गलत जानकारी साझा होने का मामला सामने आया।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में विधायक अजय विश्नोई की पोस्ट हटाए जाने और कांग्रेस नेताओं की आपत्ति की बात सामने आई है। नगर निगम आयुक्त का तबादला शासन के आदेश के तहत हुआ है जबकि पोस्ट को लेकर उठे सवाल राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक फेरबदल के साथ दशहरे के धार्मिक संदर्भ को जोड़कर नई बहस पैदा कर दी है।