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  • नर्मदापुरम में क्रेडिट की सियासत शिवराज के स्वागत में दिखीं सांसद लेकिन पोस्ट से गायब हुआ नाम

    नर्मदापुरम में क्रेडिट की सियासत शिवराज के स्वागत में दिखीं सांसद लेकिन पोस्ट से गायब हुआ नाम

    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में एक साधारण सा स्वागत कार्यक्रम अचानक सियासी चर्चा का केंद्र बन गया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे के दौरान हुई एक छोटी सी सोशल मीडिया गतिविधि ने बड़े सवाल खड़े कर दिए इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राजनीति में हर तस्वीर और हर शब्द के अपने मायने होते हैं

    मंगलवार रात करीब 10 बजकर 10 मिनट पर शिवराज सिंह चौहान का काफिला भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी के जनता कार्यालय पहुंचा जहां उनका भव्य स्वागत किया गया ढोल नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच उन्हें पारंपरिक तरीके से हल भेंट किया गया कार्यक्रम छोटा था और शिवराज सिंह करीब 10 मिनट रुककर आगे बढ़ गए लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया

    कार्यक्रम के बाद सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर स्वागत की तस्वीरें साझा कीं इन तस्वीरों में क्षेत्र के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता नजर आए पोस्ट में विधायकों और जिला अध्यक्ष का नाम विस्तार से लिखा गया लेकिन हैरानी की बात यह रही कि राज्यसभा सांसद माया नारोलिया का नाम पूरी तरह से गायब था

    दिलचस्प पहलू यह है कि जिन तस्वीरों को पोस्ट किया गया उनमें माया नारोलिया स्पष्ट रूप से सामने की पंक्ति में खड़ी दिखाई दे रही हैं वह विधायक के ठीक बगल में मुस्कुराती नजर आती हैं यानी उनकी मौजूदगी किसी से छिपी नहीं थी इसके बावजूद पोस्ट में उनका नाम शामिल न होना कई सवाल खड़े कर रहा है

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह महज एक मानवीय भूल है या फिर इसके पीछे कोई सियासी रणनीति या आंतरिक खींचतान छिपी हुई है कई लोग इसे भाजपा के भीतर चल रही क्रेडिट की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं जहां बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में अपने योगदान को प्रमुखता देने की होड़ रहती है

    राजनीति में क्रेडिट लेना और देना दोनों ही अहम माना जाता है ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता का नाम नजरअंदाज करना सामान्य बात नहीं मानी जाती खासकर तब जब वह कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मौजूद हों यही वजह है कि इस छोटी सी चूक ने बड़ा रूप ले लिया है और सोशल मीडिया पर लोग इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं

    हालांकि इस मामले पर अभी तक किसी भी नेता की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा चर्चा में आया है उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह सियासी समीकरणों पर असर डाल सकता है

    यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि आज के दौर में सोशल मीडिया केवल जानकारी साझा करने का माध्यम नहीं बल्कि राजनीति का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है जहां एक छोटी सी पोस्ट भी बड़े राजनीतिक संदेश दे सकती है और कभी कभी अनजाने में ही विवाद का कारण बन जाती है

  • BJP विधायक प्रीतम लोधी पर गिरेगी गाज! 3 दिन में जवाब तलब, खंडेलवाल ने भेजा नोटिस

    BJP विधायक प्रीतम लोधी पर गिरेगी गाज! 3 दिन में जवाब तलब, खंडेलवाल ने भेजा नोटिस



    मध्य प्रदेश शिवपुरी मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर संगठनात्मक अनुशासन का मुद्दा सुर्खियों में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने शिवपुरी जिले के पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से जारी किया गया है, जिसमें विधायक से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
    जारी पत्र में पार्टी ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में विधायक प्रीतम लोधी का आचरण “अत्यंत आपत्तिजनक” पाया गया है और यह पार्टी की अनुशासनात्मक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं माना जा रहा है। भाजपा ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जवाब तलब किया है और साफ संकेत दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    यह नोटिस 22 अप्रैल 2026 को जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को भी भेजी गई है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भाजपा नेतृत्व इस पूरे मामले को केवल औपचारिकता नहीं मान रहा, बल्कि इसे अनुशासन से जुड़ा गंभीर विषय मानकर आगे बढ़ रहा है।
    हालांकि, नोटिस में किसी विशेष बयान या घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे हाल के बयानों और सार्वजनिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाकर संगठन में अनुशासन और एकरूपता बनाए रखना चाहता है।
    भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी लंबे समय से सार्वजनिक मंचों पर दिए जा रहे विवादित बयानों और अनुशासनहीन गतिविधियों को लेकर सतर्क है। इसी क्रम में यह कार्रवाई एक संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है कि पार्टी लाइन से बाहर जाकर बयानबाजी या आचरण को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
    इस नोटिस के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, जबकि भाजपा के भीतर इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामान्य हिस्सा बताया जा रहा है।
    अब सभी की निगाहें विधायक प्रीतम लोधी के जवाब पर टिकी हैं। उनका स्पष्टीकरण यह तय करेगा कि मामला यहीं समाप्त हो जाता है या आगे किसी बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की दिशा में बढ़ता है।