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  • MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने

    MP News: अपनी ही सरकार पर विधायक ने उठाए सवाल, भाजपा कार्यक्रम में महिला सम्मान पर बवाल; भोपाल थाने में TI और हिंदू नेता आमने-सामने


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सड़क से लेकर सरकारी दफ्तर और पार्टी के कार्यक्रम तक कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। कहीं भाजपा विधायक अपनी ही सरकार की सड़क व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जनता के गुस्से का डर बता रहे हैं तो कहीं भाजपा के कार्यक्रम में महिला जनप्रतिनिधियों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर भोपाल के एक थाने में पुलिस अधिकारी और हिंदू संगठन के नेता के बीच तीखी बहस का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और सामाजिक संगठनों के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    जबलपुर जिले के पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने प्रदेश की खराब सड़कों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कों की हालत खराब है और इसका सीधा असर जनप्रतिनिधियों पर पड़ता है। उनका कहना है कि जब सड़कें खराब होती हैं तो परेशान जनता सबसे पहले स्थानीय विधायक से सवाल करती है। विधायक ने यह भी कहा कि सड़क चाहे लोक निर्माण विभाग की हो या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़ी हो कई जगहों पर स्थिति खराब है। उनके बयान को अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है।

    विधायक ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार और ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ठेकेदार काम हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में कम दर पर ठेके लेते हैं और निर्माण प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण सड़कों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। खराब सड़कें केवल आवागमन की परेशानी नहीं बल्कि आम लोगों की नाराजगी का कारण भी बनती हैं। यही वजह है कि विधायक ने कहा कि जनता की नाराजगी का पहला सामना स्थानीय जनप्रतिनिधियों को करना पड़ता है।

    दूसरी तस्वीर गुना के एक भाजपा कार्यक्रम से सामने आई जहां भाजपा विधायक प्रियंका मीणा और नगर पालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता को काफी देर तक खड़े रहना पड़ा। कार्यक्रम में मौजूद पुरुष नेताओं के लिए कुर्सियां और सोफा मौजूद थे लेकिन दोनों महिला जनप्रतिनिधियों के लिए बैठने की व्यवस्था नजर नहीं आई। आखिरकार विधायक ने खुद अपनी कुर्सी लगाई और बैठ गईं। इसके बाद अपने भाषण में उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों को बराबरी का सम्मान दिए जाने की बात कही। उन्होंने महिला आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को भी बराबरी के साथ बैठाने से ही वास्तविक महिला सशक्तीकरण की तस्वीर सामने आएगी।

    इस घटना के बाद भाजपा के कार्यक्रमों में महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रियंका मीणा इससे पहले भी महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर अपनी ही पार्टी के विधायक पन्नालाल शाक्य के साथ सार्वजनिक मंच पर बहस को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं।

    इसी बीच भोपाल के जहांगीराबाद थाने का एक वीडियो भी चर्चा में है। यहां हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और थाना प्रभारी राजन सिंह के बीच एक मामले को लेकर तीखी बहस हो गई। बताया गया कि हिंदू संगठन के कार्यकर्ता शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस और संगठन के प्रतिनिधियों के बीच बात बढ़ गई। मौके पर एसीपी उमेश तिवारी भी मौजूद थे और दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास करते नजर आए।

    इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़े अलग अलग पहलुओं को एक साथ चर्चा में ला दिया है। सड़क व्यवस्था पर विधायक की नाराजगी हो या महिला जनप्रतिनिधियों को सम्मान देने का सवाल या फिर थाने में पुलिस और संगठन के बीच तीखी बहस ये घटनाएं बताती हैं कि जनता और जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुद्दों पर अब सार्वजनिक जवाबदेही की मांग लगातार बढ़ रही है।

  • MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट

    MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाएं इन दिनों कई सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं देशभक्ति के नाम पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में नेता और अधिकारी पैदल चलते नजर आए तो उनके पीछे खाली सरकारी और निजी वाहनों का काफिला चलता रहा। कहीं उफनती नर्मदा की लहरों के बीच भाजपा विधायक और अधिकारी बिना लाइफ जैकेट नाव में सवार दिखाई दिए। वहीं राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे से पहले मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें झारखंड के रांची जाने की सलाह देते हुए टिकट तक कराने का ऑफर दे दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक बयानबाजी से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और अन्य नेता अधिकारी करीब डेढ़ किलोमीटर तक हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील के बीच इस यात्रा की एक तस्वीर चर्चा का विषय बन गई। वजह थी पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे चलता खाली वाहनों का काफिला। इन गाड़ियों में ड्राइवरों के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद पैदल यात्रा कर रहे थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का सवाल है कि क्या इस तरह ईंधन की खपत को कम किया जा सकता था।

    महेश्वर में तिरंगा यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़ा मामला और ज्यादा गंभीर नजर आया। बारिश के मौसम में नर्मदा नदी उफान पर है और नदी की धार तेज होने के बावजूद भाजपा विधायक राजकुमार मेव टीआई समेत अन्य नेता और अधिकारी नाव में सवार हो गए। तस्वीरों के मुताबिक नाव पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आम लोगों को नदी और जलाशयों में सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है तो जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए इन नियमों का पालन कितना जरूरी है। देशभक्ति का उत्साह अपनी जगह है लेकिन उफनती नदी में सुरक्षा से समझौता किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सितंबर में उज्जैन आने की संभावित चर्चा के बीच मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने उन पर राजनीतिक तंज कसा है। सारंग ने राहुल गांधी को मध्य प्रदेश आने से पहले रांची जाने की सलाह दी। उनका कहना है कि राहुल गांधी दिल्ली में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वहां नहीं पहुंचे। इसी मुद्दे को लेकर मंत्री ने राहुल गांधी से पहले रांची जाने को कहा और यहां तक कहा कि वह उनकी दिल्ली से रांची की टिकट करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में टिकट वाला बयान फिलहाल सियासी तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    अब बात प्रशासनिक व्यवस्था की। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षक ई-अटेंडेंस की तकनीकी परेशानी से जूझते रहे। दिनभर स्कूल में ड्यूटी करने के बाद शिक्षकों को आउट-पंच करना था लेकिन ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण पंच नहीं हो पा रहा था। शिक्षकों की चिंता इसलिए बढ़ गई क्योंकि अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर वेतन कटने का डर था। नियम के मुताबिक शिक्षकों को स्कूल के 200 मीटर के दायरे में रहकर अटेंडेंस लगानी होती है। लिहाजा कई शिक्षक घंटों तक स्कूल में बैठकर पोर्टल ठीक होने का इंतजार करते रहे।

    देर शाम जब पोर्टल की समस्या दूर हुई तो विभाग की ओर से शिक्षकों को संदेश भेजकर राहत दी गई कि वे जहां हैं वहीं से अटेंडेंस लगा सकते हैं। हालांकि शिक्षकों के लिए यह समस्या नई नहीं है। प्रदेश के कई हिस्सों में नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतों के कारण ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर लगातार परेशानी सामने आती रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ पोर्टल के कुछ घंटों तक ठप रहने का नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था का है जिसमें तकनीकी खामी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने का डर बना रहता है।

    कुल मिलाकर तिरंगा यात्रा से लेकर नर्मदा की लहरों और ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत तक मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने अलग-अलग मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं सुरक्षा नियमों के पालन पर। वहीं राजनीतिक बयानबाजी ने राहुल गांधी के संभावित मध्य प्रदेश दौरे को भी सियासी रंग दे दिया है।

  • MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी

    MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी


    कटनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. राज्य के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाने वाले और कटनी जिले (Katni district) के विजयराघवगढ़ (Vijayraghavgarh) से विधायक संजय पाठक (MLA Sanjay Pathak) की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी का मामला सामने आया है. शातिर साइबर ठगों ने कंपनी के सीनियर डायरेक्टर के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को चकमा दिया और बड़ी आसानी से पैसे ट्रांसफर करवा लिया।

    पूरी घटना बुधवार 12 अगस्त दोपहर करीब 2 बजे की है. विधायक संजय पाठक की कंपनी के सीनियर अकाउंटेंट शैलेश तिवारी के पास एक मैसेज आया. यह मैसेज कंपनी के ही एक सीनियर डायरेक्टर के मोबाइल नंबर से आया था, जिस पर उनकी फोटो भी लगी हुई थी. मैसेज में अकाउंटेंट को तुरंत किसी दूसरे बैंक खाते में डेढ़ करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया।

    चूंकि मैसेज सीधे सीनियर डायरेक्टर के नंबर और उनकी प्रोफाइल फोटो के साथ आया था, इसलिए अकाउंटेंट को किसी भी तरह का कोई शक नहीं हुआ. बिना देर किए अकाउंटेंट ने कंपनी के खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए. दो बार में ट्रांजेक्शन किए गए, जिसमें एक बार 1 करोड़ 16 लाख और दूसरी बार करीब 33 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. इस तरह कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये ठगों के खाते में चले गए।


    फ्लाइट से उतरते ही विधायक को मिली जानकारी

    दिलचस्प बात यह है कि जिस समय यह फ्रॉड हो रहा था, विधायक संजय पाठक फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे. जैसे ही वह प्लेन से उतरे, उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक संजय पाठक ने तुरंत कटनी के पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा को पूरी घटना की जानकारी दी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने कुछ राशि को होल्ड कराने के निर्देश दिए. कंपनी के अकाउंटेंट की शिकायत पर रंगनाथ नगर थाने में साइबर ठगी का मामला दर्ज कर लिया गया है।


    ‘बॉस स्कैम’ का शिकार हुई कंपनी

    कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कमल मौर्य ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि यह एक टिपिकल साइबर फ्रॉड है, जिसे ‘बॉस स्कैम’ कहा जाता है. इसमें ठग बड़े अधिकारियों की नकली प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को झांसे में लेते हैं।

    एएसपी ने बताया कि साइबर ठगों ने मात्र दो-तीन घंटे के अंदर ही पूरी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर साफ कर दिया. ठगी गई रकम को करीब 200 अलग-अलग जगहों पर डिस्ट्रीब्यूट किया गया, जिसे एटीएम और चेक के माध्यम से निकाला जा रहा है।

    पुलिस और साइबर सेल की टीम ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए ठगों के खातों से अब तक करीब 23 लाख रुपये की राशि को होल्ड (फ्रीज) करवा लिया है. फिलहाल, साइबर सेल की टीम तकनीकी जांच में जुटी हुई है और ठगों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

  • MP: BJP विधायक ने लिया ऐसा प्रण… जिसे सुन CM भी हैरान, बोले- अच्छे कार्य के लिए जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं

    MP: BJP विधायक ने लिया ऐसा प्रण… जिसे सुन CM भी हैरान, बोले- अच्छे कार्य के लिए जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं


    शाजापुर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के कालापीपल (Kalapipal) से भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी (BJP MLA Ghanshyam Chandravanshi) ने गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) के सामने एक ऐसा प्रण ले लिया, जिसे सुनकर सीएम भी हैरान रह गए। चंद्रवंशी ने अपने विधानसभा क्षेत्र की सड़कें बनने तक जूते-चप्पल नहीं पहनने की घोषणा कर दी, जिसके बाद मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि अच्छे कार्य के लिए जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं है, साथ ही विधायक की भाषा के लिए उन्हें एक हिदायत भी दी।

    कालापीपल में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान सीएम की मौजूदगी में विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र की सड़कों की खराब स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक क्षेत्र की सड़कें नहीं बनेंगी, तब तक वह जूते-चप्पल का त्याग करेंगे, चाहे इसमें दस वर्ष ही क्यों न लग जाएं।


    MLA ने लिया काम पूरा होने तक जूते-चप्पल नहीं पहनने का प्रण

    दरअसल कार्यक्रम के दौरान विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने सीएम से अपनी विधानसभा की 48 सड़कों के उन्नयन और 16 नई सड़कों की स्वीकृति समेत नए राजस्व भवन और अरनियाकला में आर्ट एंड साइंस खोलने की मांग रखी। इसी दौरान उन्होंने कहा कि, 16 सड़कें स्वीकृत नहीं हुईं या उनका निर्माण पूरा नहीं हुआ तो मैं जूते-चप्पल नहीं पहनूंगा।


    सीएम बोले- जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं

    विधायक की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में पांच लाख किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण हुआ है और सरकार विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि अच्छे और सच्चे कार्य के लिए संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विधायक को शब्दों के चयन में भी सावधानी बरतने की सलाह दी।


    सीएम बोले- 16 नहीं, हम 17 सड़कें देंगे, शब्दों का ध्यान रखें

    मुख्यमंत्री यादव ने विधायक को जवाब देते हुए कहा, ’16 नहीं, 17 सड़कें देंगे। हमारे जूते-चप्पल कांटों से बचाने और दौड़ लगाने के लिए हैं। विधायक जी को जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं है। अपनी बात और शब्दों का ध्यान रखना चाहिए। यह काम कांग्रेसियों के लिए रहने दो। सरकार अच्छे और सच्चे काम के लिए आपके साथ है।’


    सीएम ने दी 30.86 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘यह कागज मैंने ले लिया है। नाम नहीं पढ़ूंगा, लेकिन आपको बुलाकर सभी मांगें मंजूर कर रहा हूं। विकास के कामों में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।’ इसके साथ ही सीएम ने 30.86 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। इस दौरान उन्होंने 16 प्रमुख सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के साथ ही सांसद की मांग पर रेलवे ओवर ब्रिज की भी घोषणा की।

    दरअसल ये पूरा वाकिया शाजापुर जिले के कालापीपल में आयोजित किसान सम्मेलन में नजर आया, जिसमें शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव पहुंचे थे। इस कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार में मंत्री इंदर सिंह परमार, सांसद महेंद्र सोलंकी और स्थानीय विधायक घनश्याम चंद्रवंशी समेत अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन नागरिक भी उपस्थित रहे।

  • दिग्विजय सिंह ने बीच कार्यक्रम में जीतू पटवारी को टोका, चर्चा में आया मंच

    दिग्विजय सिंह ने बीच कार्यक्रम में जीतू पटवारी को टोका, चर्चा में आया मंच


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना जिसने सियासी गलियारों में चर्चा का माहौल गर्म कर दिया। कहीं सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आई तो कहीं कांग्रेस के कार्यक्रम में अव्यवस्था ने नेताओं को असहज कर दिया। इन घटनाओं ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के भीतर चल रही हलचलों को उजागर कर दिया।

    गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने अपनी ही सरकार के मंत्री और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले नेताओं पर खुलकर हमला बोला। खराब बिजली व्यवस्था को लेकर बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचे शाक्य ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें नाकारा तक कह दिया। उन्होंने कहा कि जनता को ऐसे जनसेवक नहीं चाहिए जो केवल दिखावे के काम करें बल्कि ऐसे लोग चाहिए जो ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि कोई मुख्यमंत्री की छवि खराब करेगा तो वे स्वयं भोपाल जाकर मुख्यमंत्री से ऐसे मंत्रियों को हटाने का आग्रह करेंगे।

    शाक्य ने गुना जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभारी मंत्री किसी को भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीब नहीं आने देते। उनके इस बयान ने भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक जानकार इसे मूल भाजपा और सिंधिया समर्थक खेमे के बीच जारी असहजता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

    उधर विदिशा जिले के सिरोंज में भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा का अलग ही विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। नई सब्जी मंडी में फैली गंदगी और अव्यवस्थाओं से नाराज विधायक सीधे कचरे के ढेर पर जाकर बैठ गए। उन्होंने वहीं से प्रशासनिक अधिकारियों और नगरपालिका अमले को मौके पर बुलाया। अधिकारियों के पहुंचने के बाद विधायक उन्हें पूरे परिसर में घुमाते रहे और सफाई व्यवस्था की बदहाली दिखाते रहे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब भाजपा सरकार में भाजपा विधायक को ही कचरे में बैठकर विरोध करना पड़े तो स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    इधर उज्जैन जिले की तराना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक महेश परमार भी चर्चा में रहे। राजस्थान से भेड़ चराने आए गड़रिया समुदाय के लोगों से मिलने पहुंचे विधायक ने ऊंट की सवारी की और उनके साथ समय बिताया। उन्होंने चाय पी और ग्रामीण जीवन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। हालांकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर भी मजाकिया टिप्पणियां देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे पेट्रोल और डीजल बचाने का नया तरीका बताया तो कुछ ने मशहूर कहावतों को नए अंदाज में पेश किया।

    राजधानी भोपाल में एनएसयूआई द्वारा आयोजित पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन भी चर्चा का विषय बना रहा। कार्यक्रम के दौरान मंच पर नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा हो गई जिससे अव्यवस्था की स्थिति बन गई। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शुरुआत में मंच पर जाने से ही इनकार कर दिया। बाद में जब वे संबोधन के लिए पहुंचे तो उन्होंने मंच से ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को कार्यकर्ताओं के कमजोर उत्साह को लेकर टोका। उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर हाथ उठाने को कहा गया तो कार्यकर्ताओं ने उत्साह क्यों नहीं दिखाया। इसके बाद जीतू पटवारी को स्वयं कार्यकर्ताओं से समर्थन जताने की अपील करनी पड़ी।

    इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि प्रदेश की राजनीति में केवल विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच ही नहीं बल्कि दोनों दलों के भीतर भी कई तरह की चुनौतियां और असहमतियां मौजूद हैं। आने वाले दिनों में ये घटनाएं राजनीतिक चर्चाओं का अहम विषय बनी रह सकती हैं।

  • MP: भिंड जिले में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए BJP MLA, जानें क्यां है मामला?

    MP: भिंड जिले में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए BJP MLA, जानें क्यां है मामला?


    भिंड।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भिंड जिले (Bhind District) के लहार विधायक अम्बरीश शर्मा (MLA Ambrish Sharma) ने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन (Demonstration) शुरू किया। उन्होंने कहा कि वे पिछले 35 साल से जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं और अब भी तीन प्रमुख मुद्दों को लेकर जनता के साथ मैदान में उतरे हैं। विधायक ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (Dr. Govind Singh) के परिवार के नाम से बनी कोठी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कथित रूप से सरकारी रास्ते पर बनी है, जो दलित और पिछड़ी बस्ती का रास्ता है। उन्होंने बताया कि इस रास्ते को लेकर अनुसूचित जाति के लोग पिछले 595 दिनों से आंदोलनरत हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    विधायक ने प्रशासन से मांग की कि यदि नापतौल सही है तो लिखित में जानकारी दी जाए, नहीं रास्ता तत्काल खुलवाया जाए। दूसरे मुद्दे पर विधायक ने बिजली कंपनी की उप महाप्रबंधक के व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता के साथ अभद्र व्यवहार कर रही हैं और लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।


    ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी की मुलाकात

    उन्होंन बताया कि इस मामले को लेकर वे ऊर्जा मंत्री और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मुलाकात कर चुके हैं। तीसरे मुद्दे के रूप में विधायक ने लहार क्षेत्र में रेत खदानों के बंद होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर खदानों को तीन हिस्सों में बांटा गया, लेकिन लहार क्षेत्र की खदानें अब तक शुरू नहीं हो सकीं। इसका असर यह है कि पास के मेहगांव क्षेत्र में 5 हजार रुपए में मिलने वाली रेत लहार में 11 हजार रुपए में बिक रही है।

    समाजसेवी बाबूलाल टैंगोर ने बताया कि दलित बस्ती मझतौरा मोहल्ले के सरकारी रास्ते को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।उनका कहना है कि सरकारी नापतौल में यह स्पष्ट हो चुका है कि रास्ता अवरुद्ध है। इसके बावजूद प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा।उन्होंने बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और एसडीएम कोर्ट तक से निर्णय हो चुके हैं, लेकिन जमीन पर अमल नहीं हो रहा।उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक रास्ता नहीं खुलता, आंदोलन जारी रहेगा।

  • एमपी विधानसभा बजट सत्र में पत्थरबाजी पर हंगामा, सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित

    एमपी विधानसभा बजट सत्र में पत्थरबाजी पर हंगामा, सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में आज एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया जब सदन में पत्थरबाजी के मामले पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा प्रदर्शन हुआ। मामला इतना गरमा गया कि विधानसभा की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर देना पड़ा। बजट सत्र के छठे दिन जब सदन पहुँच चुका था तब भाजपा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने अचानक ध्यान आकर्षण पेश करते हुए कहा कि भोपाल और इंदौर दोनों जगह भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई हैं जिसमें पत्थरबाजी भी शामिल रही और कुछ महिला कार्यकर्ता घायल भी हुई हैं। उन सभी घटनाओं पर चर्चा की आवश्यकता है।

    पांडे ने कहा कि “पहले से पत्थर इकट्ठा किए गए थे और यह सब न सिर्फ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास है बल्कि मध्य प्रदेश में गुंडागर्दी की तरफ इशारा भी करता है। उन्होंने यह भी बताया कि शनिवार-शनिवार होने के कारण उन घटनाओं के बारे में पहले सूचना नहीं दी जा सकी। जब विपक्ष से चर्चा शुरू करने की अपील की गई तब कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने पलटवार किया और कहा कि उनके कार्यालय पर हमला हुआ है और इसी मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस के सोहनलाल वाल्मीकि ने सवाल उठाया कि इंदौर के भागीरथपुरा में हुए विवाद और हिंसा पर क्यों चर्चा नहीं कराई जा रही है इसके बजाय सदन में अलग मुद्दों को उछाला जा रहा है।

    एक समय ऐसा आया कि विपक्ष और सदस्यों के बीच आवाजें मिलने लगीं और सदन में व्यवधान बढ़ता गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा ताकि दोनों पक्ष संतुलित होकर फिर से चर्चा शुरू कर सकें। यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026‑27 के बजट को पेश किया है जिसमें कई नई घोषणाएँ भी की गई हैं। विपक्ष का मानना है कि बजट पर बात करते हुए सुरक्षा कानून व्यवस्था और सामाजिक शांति जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए जबकि सरकार इसे स्थानीय तनाव बताते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

    मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में आज एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया जब सदन में पत्थरबाजी के मामले पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा प्रदर्शन हुआ। मामला इतना गरमा गया कि विधानसभा की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर देना पड़ा। बजट सत्र के छठे दिन जब सदन पहुँच चुका था तब भाजपा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने अचानक ध्यान आकर्षण पेश करते हुए कहा कि भोपाल और इंदौर दोनों जगह भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई हैं जिसमें पत्थरबाजी भी शामिल रही और कुछ महिला कार्यकर्ता घायल भी हुई हैं। उन सभी घटनाओं पर चर्चा की आवश्यकता है।

    पांडे ने कहा कि पहले से पत्थर इकट्ठा किए गए थे और यह सब न सिर्फ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास है बल्कि मध्य प्रदेश में गुंडागर्दी की तरफ इशारा भी करता है। उन्होंने यह भी बताया कि शनिवार-शनिवार होने के कारण उन घटनाओं के बारे में पहले सूचना नहीं दी जा सकी। जब विपक्ष से चर्चा शुरू करने की अपील की गई तब कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने पलटवार किया और कहा कि उनके कार्यालय पर हमला हुआ है और इसी मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस के सोहनलाल वाल्मीकि ने सवाल उठाया कि इंदौर के भागीरथपुरा में हुए विवाद और हिंसा पर क्यों चर्चा नहीं कराई जा रही है इसके बजाय सदन में अलग मुद्दों को उछाला जा रहा है।

    एक समय ऐसा आया कि विपक्ष और सदस्यों के बीच आवाजें मिलने लगीं और सदन में व्यवधान बढ़ता गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा ताकि दोनों पक्ष संतुलित होकर फिर से चर्चा शुरू कर सकें।  यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026‑27 के बजट को पेश किया है जिसमें कई नई घोषणाएँ भी की गई हैं। विपक्ष का मानना है कि बजट पर बात करते हुए सुरक्षा कानून व्यवस्था और सामाजिक शांति जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए जबकि सरकार इसे स्थानीय तनाव बताते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।