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  • मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज

    मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और सियासी घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक की बातें बाहर आने पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी है कि गोपनीय चर्चा सार्वजनिक करने वाले नेता को भविष्य में बैठक में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। दूसरी ओर सीहोर में आदिवासी परिवारों के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की आलोचना कर रहे विधायक कमलेश्वर डोडियार को एक व्यक्ति ने टोक दिया। वहीं रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का उद्योगपति इलॉन मस्क को लेकर दिया गया बयान भी चर्चा में है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और अंदरूनी समीकरणों को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक में मंत्रियों द्वारा सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि बैठक में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। जब रीवा में मीडिया ने उनसे बैठक की चर्चाओं को लेकर सवाल किए तो वे नाराज दिखाई दिए। शुक्ल ने साफ कहा कि कोर ग्रुप की बैठक में हुई बातें बाहर पहुंचाने वाला व्यक्ति भविष्य में उस बैठक में बैठने लायक नहीं रहेगा। उनके बयान के बाद पार्टी के भीतर गोपनीय जानकारी बाहर जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि किसने जानकारी साझा की है इस बारे में कोई नाम सामने नहीं आया है।

    इसी बीच सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। रतलाम जिले के सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। वहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका पर सवाल उठाए। विधायक ने कहा कि शिवराज मुख्यमंत्री रहे हैं और आदिवासियों को पट्टे देने का अधिकार उनके पास था लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। इसी दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए कहा कि मामा उनके सुख-दुख के साथी हैं और इस समय आदिवासियों का साथ दे रहे हैं।

    इसके बाद विधायक के बयान का रुख बदल गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को बुरा आदमी नहीं कहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव से हजार गुना अच्छे थे। इस घटनाक्रम को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद विरोध जारी है और प्रभावित लोग जमीन के अधिकारों तथा मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

    रीवा में भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान भी सुर्खियों में रहा। एक कार्यक्रम में उन्होंने दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल इलॉन मस्क को लेकर तीखी टिप्पणी की। सांसद ने कहा कि वे मस्क को दो घूंसे मारकर भगा देंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को कोई झुका नहीं सकता। सांसद ने यह भी कहा कि मस्क को भारत में अनुमति तभी मिलेगी जब वे प्रधानमंत्री की शर्तें मानेंगे। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके बयान पर तंज कसा तो कुछ ने इसे सुर्खियां बटोरने वाला बयान बताया।

    इन राजनीतिक घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों में एक वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अधिकारी उनकी मौजूदा शक्तियां कम कराने की कोशिश कर रहे थे लेकिन हालिया तबादला सूची में उनकी जिम्मेदारियां बरकरार रखी गईं और उन्हें एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई। हालांकि इस घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में भाजपा की आंतरिक बैठकों की गोपनीयता से लेकर आदिवासी मुद्दे और नेताओं के तीखे बयानों तक कई विषय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इन बयानों और घटनाओं पर पार्टी तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया किस तरह सामने आती है इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • IDA की जमीन को लेकर इंदौर में सियासी घमासान, कांग्रेस का आज घेराव, भाजपा के आयोजन और पटाखा बाजार के किराये पर उठे सवाल

    IDA की जमीन को लेकर इंदौर में सियासी घमासान, कांग्रेस का आज घेराव, भाजपा के आयोजन और पटाखा बाजार के किराये पर उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर में इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA के मैदान आवंटन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने प्राधिकरण पर मैदान उपलब्ध कराने में दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए जवाब मांगा है। पार्टी का दावा है कि राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए मैदान आवंटित करने पर 14 लाख रुपये से अधिक का शुल्क लिया गया जबकि विजय नगर में भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन मुफ्त उपलब्ध कराई गई। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि दोनों आयोजन के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया तो इसके पीछे क्या आधार था और क्या भाजपा के कार्यक्रम के लिए कोई विशेष छूट दी गई थी। इन मुद्दों को लेकर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में शुक्रवार दोपहर कार्यकर्ता IDA कार्यालय पहुंचकर सीईओ का घेराव करने वाले हैं।

    कांग्रेस की मांग है कि सार्वजनिक जमीन के आवंटन से संबंधित सभी दस्तावेज और नियम सार्वजनिक किए जाएं। पार्टी जानना चाहती है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए कितनी राशि निर्धारित की गई थी और भुगतान किन शर्तों के तहत लिया गया। वहीं भाजपा के सेवा संकल्प अभियान के तहत 7 अक्टूबर को विजय नगर में आयोजित कार्यक्रम के लिए मैदान किस आधार पर आवंटित किया गया और इसके बदले कोई शुल्क लिया गया या नहीं। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग में पारदर्शिता होनी चाहिए और राजनीतिक आयोजनों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए। हालांकि भाजपा को जमीन मुफ्त दिए जाने और नियमों की अनदेखी के आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    मैदान आवंटन को लेकर विवाद के बीच पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने भारत जोड़ो मैदान पर प्रस्तावित थोक पटाखा बाजार का मामला भी उठाया गया है। यहां करीब 40 दिनों तक चलने वाले बाजार के लिए 41 अस्थायी दुकानें बनाई जा रही हैं। बाजार में जनरेटर रूम लाइट टावर और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। जानकारी के मुताबिक दुकानों का निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन IDA की ओर से किराये की अंतिम राशि तय किए जाने और आधिकारिक डिमांड नोट जारी होने की जानकारी सामने नहीं आई है। इस बीच बाजार के लिए पांच से सात लाख रुपये किराया होने की चर्चा है।

    पटाखा व्यापारी एसोसिएशन ने प्रत्येक दुकान लगाने वाले व्यापारी से एक लाख रुपये जुटाने को कहा है। इसमें दुकान निर्माण मैदान का किराया बिजली सुरक्षा और अन्य खर्च शामिल बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इसी मुद्दे को उठाते हुए पूछा है कि जब कुछ दिनों के राजनीतिक आयोजन के लिए 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया तो लगभग 40 दिन तक चलने वाले व्यावसायिक बाजार का किराया किस आधार पर निर्धारित होगा। पार्टी ने पिछले साल और इस साल के पटाखा बाजार के आवंटन शुल्क और खर्च का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की है।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि अलग-अलग आयोजनों के लिए शुल्क निर्धारण में अंतर है तो IDA को उसका स्पष्ट आधार बताना चाहिए। पार्टी ने आशंका जताई है कि आवंटन प्रक्रिया में अनियमितता होने पर प्राधिकरण को राजस्व का नुकसान हो सकता है। फिलहाल इस पूरे मामले में IDA का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही शुल्क निर्धारण और आवंटन की शर्तों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद अब प्राधिकरण के जवाब पर नजर रहेगी क्योंकि यह विवाद सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और समान नियम लागू करने के सवाल से जुड़ा है।

  • कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी

    कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी


    सिलवानी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों विरोध प्रदर्शन से लेकर नेताओं के बयानों और नौकरशाही के अंदरूनी घटनाक्रम तक कई दिलचस्प मामले सामने आ रहे हैं। रायसेन के सिलवानी में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता आग की चपेट में आ गया तो ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी एक कार्यकर्ता झुलस गया। वहीं रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के एक संबोधन ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी। उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया तो रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक बता दिया। दूसरी ओर शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव के बचाव का मामला भी चर्चा में रहा।

    रायसेन जिले के सिलवानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया जा रहा था तभी अचानक आग भड़क उठी और एक कार्यकर्ता इसकी चपेट में आ गया। युवक के सिर और कपड़ों में आग लग गई। अचानक हुई घटना से घबराया कार्यकर्ता वहां से भागा। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझाई जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि राजनीतिक विरोध के दौरान उत्साह के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

    इधर ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी कुछ ऐसा ही घटनाक्रम हुआ। सांसद भरत सिंह कुशवाह मशाल लेकर चल रहे थे। इसी दौरान एक उत्साहित कार्यकर्ता सेवा ज्योति को यात्रा रथ पर स्थापित करने के लिए ऊपर चढ़ गया। जब उसे मशाल सौंपी जा रही थी तभी उसकी लौ से आग कार्यकर्ता के कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते उसकी शर्ट जलने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे आग लगने की जानकारी दी जिसके बाद युवक ने किसी तरह आग बुझाई और नीचे उतर आया। इस घटना में सांसद भरत सिंह कुशवाह भी आग की चपेट में आने से बाल बाल बच गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    उधर रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वर्चुअल संबोधन ने अलग ही चर्चा पैदा कर दी। बलराम महोत्सव में उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया और उनके लिए तालियां भी बजवाईं। इसके बाद रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक कह दिया। मुख्यमंत्री की जुबान फिसलने से विधायक के चेहरे के भाव देखने लायक हो गए। कार्यक्रम में रतलाम के महापौर प्रहलाद पटेल की गैरमौजूदगी पर भी मुख्यमंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि महापौर किसानों के कार्यक्रम में आने के बजाय अपना मैरिज गार्डन चला रहे हैं और नगर निगम भी संभाल रहे हैं। कुछ देर बाद महापौर पहुंचे तो मुख्यमंत्री ने उन्हें और उनके साथ आए नेता को राम लक्ष्मण कहकर संबोधित किया। उनके इस अंदाज की सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।

    इसी बीच शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव बिना पूरी तैयारी के पहुंच गए और मांगी गई जानकारी नहीं दे पाए। नाराजगी सामने आने पर उन्होंने जानकारी नहीं मिलने की बात कही लेकिन संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सूचना पहले ही भेजी जा चुकी थी। मामला बिगड़ता देख बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रमुख सचिव का बचाव किया और कहा कि उन्हें जानकारी नहीं मिली थी। इस तरह बैठक का माहौल संभल गया। मध्य प्रदेश में इन घटनाओं ने राजनीति के साथ प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाओं को हवा दे दी है।

  • अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का कल्याण ही लक्ष्य', प्रशिक्षण महाअभियान में बोले CM योगी

    अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का कल्याण ही लक्ष्य', प्रशिक्षण महाअभियान में बोले CM योगी


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर में दो दिवसीय ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की विकास यात्रा को समर्पित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को भाजपा की वैचारिक नींव बताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रशिक्षण शिविर केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और आदर्शों को कार्यकर्ताओं के जीवन में उतारने का अभियान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में मिले संस्कारों के आधार पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय जनसंघ के संगठन महामंत्री के रूप में संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया।

    अंत्योदय को बताया विकास की मूल अवधारणा
    सीएम योगी ने कहा कि भारतीय राजनीति में ‘अंत्योदय’ का विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सबसे बड़ी देन है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की नीतियों का केंद्र समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति होना चाहिए। जब तक विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, तब तक सुशासन की अवधारणा अधूरी रहती है।

    उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय आर्थिक चिंतन को नई दिशा देते हुए अंत्योदय का सिद्धांत दिया, जिसे भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन और शासन दोनों में आत्मसात करने का प्रयास कर रही है।

    कार्यकर्ताओं को दिए संगठनात्मक मूल्यों के संदेश
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में चलाया जा रहा यह प्रशिक्षण महाअभियान कार्यकर्ताओं को राष्ट्रसेवा, संगठन, पारदर्शिता और जनकल्याण के मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता इन आदर्शों को अपने व्यवहार और कार्यशैली का हिस्सा बनाए, यही इस अभियान का उद्देश्य है।

    सोशल मीडिया पर भी दी शुभकामनाएं
    कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के महापुरुषों के आदर्श आज भी सार्वजनिक जीवन में शुचिता, पारदर्शिता और राष्ट्रसेवा के प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए प्रशिक्षण शिविर के सफल आयोजन की कामना की।

    उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम संगठन को मजबूत बनाने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं में वैचारिक स्पष्टता और जनसेवा की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

  • नितिन नवीन की मौजूदगी से बढ़ी अटकलें, क्या राज्यसभा जाएंगे रजनीश अग्रवाल?

    नितिन नवीन की मौजूदगी से बढ़ी अटकलें, क्या राज्यसभा जाएंगे रजनीश अग्रवाल?


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जिस नाम ने सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल पैदा की है, वह है रजनीश अग्रवाल। संगठन में वर्षों तक पर्दे के पीछे काम करने वाले रजनीश अग्रवाल को पार्टी ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा अब भी संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को शीर्ष स्तर तक पहुंचाने का दावा करती है।

    पार्टी में उन्हें मजाकिया लेकिन सम्मानजनक अंदाज में ‘बूथ का भूत’ कहा जाता है। इसकी वजह है बूथ प्रबंधन में उनकी विशेषज्ञता और चुनावी मशीनरी को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका। राज्यसभा की इस दावेदारी के साथ उन्होंने कई बड़े और चर्चित नेताओं को पीछे छोड़ दिया है।

    बूथ मैनेजमेंट के मास्टरमाइंड
    साल 2021 से मध्य प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे रजनीश अग्रवाल ने प्रदेश के करीब 65 हजार बूथों के डिजिटाइजेशन का काम कराया। उनके नेतृत्व में बूथों को A, B, C और D श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया, जिससे चुनावी रणनीति को अधिक प्रभावी बनाया जा सका। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान 30 मतदाताओं पर एक अर्द्धपन्ना प्रभारी नियुक्त करने जैसी रणनीतियां भी उनकी टीम ने तैयार कीं। भाजपा के बढ़ते वोट शेयर और बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती में उनकी भूमिका को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया।

    सवर्ण प्रतिनिधित्व के फॉर्मूले ने खोला रास्ता
    मध्य प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के आठ सांसद हैं, लेकिन इनमें सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधि नहीं था। पार्टी नेतृत्व ने इस बार सामाजिक संतुलन साधने के लिए सवर्ण वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया। इसी रणनीति के तहत कई दिग्गज नेताओं के नामों पर चर्चा हुई। इनमें नरोत्तम मिश्रा, कैलाश विजयवर्गीय, अरविंद भदौरिया, अखंड प्रताप सिंह और मुन्नालाल गोयल जैसे नाम शामिल थे। हालांकि पार्टी ने यह तर्क स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में चुनाव लड़ चुके नेताओं के बजाय ऐसे कार्यकर्ता को अवसर दिया जाए, जिसने संगठन में लंबे समय तक काम किया हो और जिसे अब तक कोई बड़ा राजनीतिक पद न मिला हो। यही कारण रहा कि अंततः रजनीश अग्रवाल के नाम पर सहमति बन गई।

    ABVP से शुरू हुआ सफर
    सागर जिले के मंडीबामोरा कस्बे से आने वाले रजनीश अग्रवाल का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। पत्रकारिता के छात्र रहे अग्रवाल लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहे और बाद में भाजपा संगठन में आए। पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने संगठनात्मक काम में ऐसी पहचान बनाई कि वे पार्टी की चुनावी रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। भाजपा नेताओं के अनुसार, वे प्रचार से अधिक संगठन पर ध्यान देने वाले कार्यकर्ता माने जाते हैं।

    वीडी शर्मा और शिवराज का मिला समर्थन
    रजनीश अग्रवाल को प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी उस समय मिली थी जब वीडी शर्मा प्रदेश अध्यक्ष थे। वे शर्मा की टीम में प्रदेश मंत्री भी बने। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही राज्यसभा के लिए सवर्ण उम्मीदवार के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई, वीडी शर्मा ने रजनीश अग्रवाल का नाम प्रमुखता से आगे बढ़ाया। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने भी उन्हें उपयुक्त उम्मीदवार मानते हुए समर्थन दिया।

    ‘मैं टिकट मांगने भी नहीं गया’
    राज्यसभा उम्मीदवार घोषित होने के बाद रजनीश अग्रवाल ने कहा कि यह केवल भाजपा में संभव है कि एक सामान्य कार्यकर्ता को राज्यसभा जैसे उच्च सदन तक पहुंचने का अवसर मिले। उन्होंने बताया कि वे संकोचवश मुख्यमंत्री मोहन यादव से टिकट की मांग करने तक नहीं गए। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया, जिसके लिए वे आभारी हैं।

    शादी में शामिल होने पहुंचे थे नितिन नबीन
    रजनीश अग्रवाल और नितिन नबीन का संबंध भारतीय जनता युवा मोर्चा के दिनों से है। अग्रवाल ने बताया कि जब वे युवा मोर्चा में प्रदेश महामंत्री थे, तब नितिन नबीन प्रदेश प्रभारी थे। उन्होंने याद करते हुए बताया कि 15 दिसंबर 2011 को अपनी शादी का निमंत्रण देते समय उन्होंने मजाक में कहा था कि घोड़ी पर उन्हें नितिन नबीन ही चढ़ाएंगे। नितिन नबीन ने वादा निभाया और शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।

    तरुण चुग को भी मिला मौका
    भाजपा ने दूसरी सीट पर तरुण चुग को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंजाब की राजनीति और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। वहीं कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है, जिन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता है।

  • बंगाल में BJP ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई, सामने आई जमीन विवाद की कहानी

    बंगाल में BJP ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई, सामने आई जमीन विवाद की कहानी


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उत्तर दिनाजपुर जिले के हेमताबाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय कार्यालय से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है। सरकारी जमीन की मापी के दौरान पता चला कि पार्टी कार्यालय का एक हिस्सा निर्धारित सरकारी भूमि के दायरे में आ रहा है। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुद आगे बढ़कर उस हिस्से को हटाने का फैसला किया।
    मामले की शुरुआत तब हुई जब हेमताबाद के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) Biswajit Dutta ने सरकारी जमीनों पर बने अवैध निर्माणों को हटाने का निर्देश जारी किया। प्रशासन की ओर से इलाके में मापी कराई गई, जिसमें शालबागान के पास राज्य राजमार्ग किनारे स्थित भाजपा ब्लॉक कार्यालय का बरामदा सरकारी जमीन पर पाया गया।

    प्रशासन के आने से पहले खुद शुरू कर दी कार्रवाई
    जांच रिपोर्ट सामने आते ही स्थानीय भाजपा नेताओं ने प्रशासन की ओर से बुलडोजर चलाए जाने का इंतजार नहीं किया। भाजपा के प्रखंड अध्यक्ष Biplab Sarkar की मौजूदगी में कार्यकर्ता हथौड़े और अन्य उपकरण लेकर कार्यालय पहुंचे और अवैध हिस्से को स्वयं तोड़ना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में कार्यालय के उस हिस्से को पूरी तरह हटा दिया गया, जो सरकारी भूमि की सीमा के भीतर पाया गया था। यह कदम स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि आमतौर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध, धरना या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं।

    सड़क चौड़ीकरण अभियान से जुड़ा मामला
    प्रशासन के अनुसार, कालियागंज से दक्षिण दिनाजपुर को जोड़ने वाले राज्य राजमार्ग के दोनों ओर 15 फीट के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
    भाजपा नेता बिप्लव सरकार ने कहा कि जब पार्टी कार्यालय का बरामदा भी चिन्हित क्षेत्र में पाया गया तो कानून का सम्मान करते हुए उसे हटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी मांग की कि अभियान से प्रभावित छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।

    दुकानदारों ने भी दिखाई पहल
    भाजपा कार्यालय पर हुई कार्रवाई का असर आसपास के व्यापारियों पर भी देखने को मिला। रायगंज-बालुरघाट राज्य राजमार्ग के किनारे स्थित कई दुकानदारों ने प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किए बिना अपने अतिक्रमण वाले हिस्सों को स्वयं हटाना शुरू कर दिया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अभियान शुरू होने से पहले लगातार मुनादी, लाउडस्पीकर घोषणाओं और नोटिसों के माध्यम से लोगों को सरकारी भूमि खाली करने के लिए आगाह किया गया था।

    BDO बिस्वजीत दत्ता ने स्पष्ट किया कि अब आधिकारिक बेदखली अभियान शुरू हो चुका है और भविष्य में सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण मिलने पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।

  • अन्नामलाई के अगले कदम पर सस्पेंस, जन्मदिन से पहले तमिलनाडु BJP में इस्तीफों का दौर

    अन्नामलाई के अगले कदम पर सस्पेंस, जन्मदिन से पहले तमिलनाडु BJP में इस्तीफों का दौर


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष K. Annamalai को लेकर हो रही है। उनके राजनीतिक भविष्य पर उठ रहे सवालों ने न केवल भारतीय जनता पार्टी बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अटकलें हैं कि अन्नामलाई जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं, जिसके संकेत उनके हालिया बयानों और समर्थकों की गतिविधियों से मिल रहे हैं।

    चर्चा इस बात की भी है कि अपने 42वें जन्मदिन के अवसर पर अन्नामलाई कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणा उनके भविष्य की दिशा तय कर सकती है। हालांकि अभी तक उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी नए राजनीतिक दल या मंच की घोषणा नहीं की है।

    सूत्रों के अनुसार, हाल ही में अन्नामलाई ने Amit Shah से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद आधिकारिक रूप से कोई जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे उनके भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है। इससे पहले उनके इस्तीफे की खबरों ने भी जोर पकड़ा था।

    अन्नामलाई का राजनीतिक सफर काफी तेज रहा है। पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे अन्नामलाई ने 2020 में पुलिस सेवा छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। इसके कुछ ही महीनों बाद उन्हें तमिलनाडु भाजपा की कमान सौंप दी गई। उनके नेतृत्व में पार्टी का जनाधार बढ़ा और राज्य में भाजपा की राजनीतिक सक्रियता को नई पहचान मिली।

    हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर Nainar Nagendran को जिम्मेदारी सौंप दी। इसके साथ ही भाजपा ने AIADMK के साथ अपने पुराने गठबंधन को भी पुनर्जीवित किया। इसके बाद से अन्नामलाई की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

    राजनीतिक सस्पेंस को और बढ़ाने का काम उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए पोस्टरों ने किया है। कोयंबटूर और मदुरै समेत कई शहरों में लगे पोस्टरों में अन्नामलाई को एक स्वतंत्र राजनीतिक चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इनमें भाजपा के शीर्ष नेताओं की तस्वीरों का न होना भी चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

    इस बीच पार्टी के अंदर भी बेचैनी दिखाई दे रही है। अन्नामलाई के भविष्य को लेकर फैल रही अटकलों के बाद कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चिंता जाहिर की है। खबरें हैं कि भाजपा के कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफा भी दिया है, जिससे संगठन में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

    फिलहाल सभी की निगाहें अन्नामलाई के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि वह भाजपा में बने रहते हैं तो यह पार्टी के लिए राहत की खबर होगी, लेकिन यदि वे अलग राजनीतिक राह चुनते हैं तो तमिलनाडु की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत हो सकती है।

  • 12 साल के कार्यकाल पर भावुक हुए पीएम मोदी के पुराने शब्द फिर चर्चा में, नेताओं ने दी शुभकामनाएं

    12 साल के कार्यकाल पर भावुक हुए पीएम मोदी के पुराने शब्द फिर चर्चा में, नेताओं ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव उस समय दर्ज हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे कर लिए। वर्ष 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से लेकर अब तक उनके नेतृत्व में कई बड़े राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलाव देखने को मिले हैं। इस खास अवसर पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का माहौल रहा और विभिन्न नेताओं की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने पर समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी उत्साह देखने को मिला।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को देश के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। आम चुनाव के परिणामों के बाद उन्हें संसदीय दल का नेता चुना गया और फिर उन्होंने देश की बागडोर संभाली। उस समय राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव की नई शुरुआत मानी गई थी। वर्षों बाद अब जब उनके नेतृत्व का यह सफर 12 साल तक पहुंच गया है, तो उनके शुरुआती दौर के कई पुराने भाषण और बयान एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।

    विशेष रूप से संसदीय दल की बैठक में दिया गया उनका एक भावनात्मक संबोधन फिर से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उस दौरान उन्होंने पार्टी के संघर्ष, समर्पण और कार्यकर्ताओं के योगदान को याद किया था। उन्होंने उन लोगों का भी जिक्र किया था जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद पार्टी के लिए वर्षों तक मेहनत की। अपने संबोधन में उन्होंने भावुक होते हुए कहा था कि जिस प्रकार भारत उनके लिए मां के समान है, उसी तरह उनकी पार्टी भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके इस बयान को उस समय भी काफी भावनात्मक माना गया था और अब एक बार फिर इसकी चर्चा हो रही है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पुराने संघर्षों को भी याद किया था। उन्होंने उन नेताओं के योगदान का उल्लेख किया जिन्होंने संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस दौर के कई राजनीतिक क्षणों को आज भी समर्थक ऐतिहासिक मानते हैं। समय के साथ देश की राजनीति में कई बदलाव आए, लेकिन उस संबोधन को आज भी उनके राजनीतिक सफर के महत्वपूर्ण पड़ावों में गिना जाता है।

    प्रधानमंत्री के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कई नेताओं ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उनके नेतृत्व में देश के विकास, सुशासन और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का भी उल्लेख किया गया। पिछले वर्षों में लागू की गई विभिन्न योजनाओं और नीतियों को लेकर भी चर्चा रही। समर्थकों का मानना है कि इन वर्षों में देश ने कई क्षेत्रों में नई दिशा प्राप्त की है। वहीं राजनीतिक स्तर पर भी यह अवसर सरकार के लंबे कार्यकाल और उसकी उपलब्धियों को लेकर चर्चा का केंद्र बना रहा।

  • सादगी की अपील बनाम वीआईपी कल्चर: 200 वाहनों के काफिले ने रोका शहर का रास्ता

    सादगी की अपील बनाम वीआईपी कल्चर: 200 वाहनों के काफिले ने रोका शहर का रास्ता


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को उस समय ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई जब पाठ्यपुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर उज्जैन से करीब 200 से अधिक वाहनों के काफिले के साथ पदभार ग्रहण करने पहुंचे। इस काफिले के कारण हाईवे से लेकर भोपाल शहर के कई हिस्सों में लंबा जाम लग गया।  काफिले के चलते बोर्ड ऑफिस, डीबी मॉल क्षेत्र और अरेरा हिल्स तक यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। भीषण गर्मी में जाम में फंसे लोग, खासकर बच्चे और बुजुर्ग, काफी परेशान नजर आए।

    भाजपा कार्यालय में हुआ औपचारिक स्वाग
    भोपाल पहुंचने के बाद सौभाग्य सिंह ठाकुर ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी के साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद रही और काफिले की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गईं।

    पीएम मोदी की अपील और जमीनी हकीकत

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश में वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नागरिकों से संयम और सादगी अपनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि-
    अनावश्यक सोने की खरीदारी टाली जाए
    गैर-जरूरी विदेश यात्राएं स्थगित की जाएं
    सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग को बढ़ावा दिया जाए
    ऊर्जा और संसाधनों का संयमित उपयोग किया जाए

    ट्रैफिक व्यवस्था हुई प्रभावित
    काफिले के कारण कई प्रमुख मार्गों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही। वाहनों की लंबी कतारों से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस को यातायात नियंत्रित करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी।

    भोपाल में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है कि जहां एक ओर शीर्ष नेतृत्व सादगी और संयम की बात कर रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर भव्यता और शक्ति प्रदर्शन के दृश्य सामने आ रहे हैं।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने दी मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं विकास कार्यों की सराहना

    प्रधानमंत्री मोदी ने दी मुख्यमंत्री मोहन यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं विकास कार्यों की सराहना


    मध्यप्रदेश । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को उनके जन्मदिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं इस मौके पर प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व और उनके द्वारा प्रदेश में किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना भी की

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है उन्होंने उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल कर रहे हैं जिनका सकारात्मक असर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जनकल्याण और विकास को केंद्र में रखकर किए जा रहे प्रयासों के कारण मध्यप्रदेश नई ऊंचाइयों को छू रहा है उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यों को प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभेच्छाएं भी व्यक्त कीं उनका यह संदेश राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है

    मुख्यमंत्री के जन्मदिवस पर प्रधानमंत्री का यह संदेश न केवल एक औपचारिक शुभकामना है बल्कि यह राज्य और केंद्र के बीच समन्वय और सहयोग का भी प्रतीक माना जा रहा है राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के संदेश नेतृत्व के प्रति विश्वास और समर्थन को भी दर्शाते हैं

    कुल मिलाकर मुख्यमंत्री मोहन यादव के जन्मदिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई शुभकामनाएं उनके कार्यों की सराहना और भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश के रूप में देखी जा रही हैं जो प्रदेश की राजनीति और विकास यात्रा दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती हैं