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  • BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी

    BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा के संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने 12 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। इसके साथ ही 9 जिलों में जिला महामंत्रियों की नियुक्ति भी की गई है। नई जिम्मेदारियां ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा भोपाल ग्रामीण धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर में दी गई हैं। इससे पहले जुलाई में भी युवा मोर्चा ने 15 जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। उस सूची में ग्वालियर नगर समेत कई जिलों को नई कमान मिली थी। (peptechtime.com)

    ताजा नियुक्तियों में ग्वालियर ग्रामीण की जिम्मेदारी शिवराज यादव को दी गई है जबकि मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह जिलाध्यक्ष और विवेक तिवारी महामंत्री होंगे। सतना में यश यादव को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है और शुभम परिहार जिला महामंत्री बनाए गए हैं। कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष तथा देवांश श्रीवास्तव को महामंत्री नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने ग्रामीण और संगठनात्मक क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

    पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष बनाया गया है जबकि पंकज बंजारी को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इन दोनों जिलों में फिलहाल जिला महामंत्री के नाम की घोषणा नहीं की गई है।

    बुरहानपुर में भरत रावल को जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले को जिला महामंत्री बनाया गया है। देवास में रजत पाल सिंह को अध्यक्ष तथा मोहित जाट को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। विदिशा में अनुज मित्तल जिलाध्यक्ष होंगे जबकि शिवेंद्र सिंह राजपूत को जिला महामंत्री बनाया गया है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह को जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यहां भी महामंत्री का नाम फिलहाल घोषित नहीं किया गया है।

    बीजेपी युवा मोर्चा में लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जुलाई में प्रदेश के 15 जिलों में अध्यक्षों की पहली बड़ी सूची जारी हुई थी जिसमें सागर ग्रामीण हरदा सीधी टीकमगढ़ खरगोन जबलपुर ग्रामीण बैतूल झाबुआ उज्जैन नगर ग्वालियर नगर रतलाम बड़वानी शहडोल सीहोर और खंडवा शामिल थे। उस सूची में छह जिलों के महामंत्रियों की भी घोषणा की गई थी। (starsamachar.com)

    पार्टी के युवा संगठन में जिला अध्यक्षों की भूमिका अहम मानी जाती है। इन पदाधिकारियों के जरिए बूथ स्तर तक युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन की गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी रहती है। आने वाले समय में प्रदेश के बाकी जिलों में भी नियुक्तियां होने की संभावना है। इससे युवा मोर्चा का संगठनात्मक ढांचा और मजबूत होने के साथ आगामी राजनीतिक गतिविधियों में युवाओं की भूमिका बढ़ सकती है।

    इधर बीजेपी महिला मोर्चा ने भी प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों का ऐलान किया है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना परांजपे राजगढ़े की ओर से जारी सूची में अलग अलग संभागों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। चंबल की जिम्मेदारी ज्योति तोमर को जबकि ग्वालियर की जिम्मेदारी क्रांति जोशी को दी गई है। सागर में शालिनी खरबानी रीवा में आशा गुप्ता शहडोल में डॉ. स्वप्ना वर्मा और जबलपुर में डॉ. सारिका उपाध्याय को जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा छिंदवाड़ा नर्मदापुरम भोपाल इंदौर निमाड़ उज्जैन और मंदसौर संभाग में भी महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    बीजेपी के दोनों मोर्चों में एक साथ संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने से साफ है कि पार्टी जिला स्तर पर अपनी टीम को सक्रिय करने पर जोर दे रही है। युवा और महिला कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां देकर संगठन बूथ और जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • बीजेपी संगठन में जल्द बड़ा बदलाव, नितिन नवीन की नई टीम में युवाओं-महिलाओं को मिल सकती है जगह

    बीजेपी संगठन में जल्द बड़ा बदलाव, नितिन नवीन की नई टीम में युवाओं-महिलाओं को मिल सकती है जगह


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संगठनात्मक बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को पार्टी की नई टीम का ऐलान हो सकता है। जनवरी में नितिन नवीन बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे और अब उनके नेतृत्व में संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक नई टीम में एक कोषाध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 9 राष्ट्रीय महामंत्रियों की नियुक्ति हो सकती है। इसके अलावा करीब 15 मंत्री भी बनाए जाने की चर्चा है। बीजेपी के संविधान में संशोधन के बाद संगठन में 33 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। ऐसे में नई टीम में महिलाओं और युवाओं को खास प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। प्रत्येक वर्ग में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से कम से कम तीन पदाधिकारी शामिल किए जा सकते हैं।

    पार्ल्यामेंट्री बोर्ड का भी होगा गठन
    बीजेपी की सबसे बड़ी निर्णायक संस्था पार्ल्यामेंट्री बोर्ड का भी नए सिरे से गठन होना है। इसमें अध्यक्ष समेत अधिकतम 11 सदस्य हो सकते हैं। इसके साथ ही केंद्रीय चुनाव समिति का भी गठन किया जाएगा। फिलहाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महिला मोर्चा की अध्यक्ष वनाती श्रीनिवासन और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव इसके सदस्य हैं।

    राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी बदलाव
    पार्टी की रणनीति और महत्वपूर्ण फैसलों पर विचार करने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना है। इसमें अध्यक्ष के अलावा 120 सदस्य हो सकते हैं। इनमें 40 महिलाओं का होना जरूरी है। वहीं राष्ट्रीय परिषद में राज्य परिषदों के निर्वाचित सदस्य, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष, राज्यों में विधान परिषद और विधानसभा के नेताओं, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा 20 मनोनीत सदस्य शामिल होंगे।

    युवाओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
    नितिन नवीन पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उन्होंने अपनी नई टीम तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि उनकी टीम में युवाओं को ज्यादा जिम्मेदारी दी जा सकती है। संगठन में बदलाव के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    मौजूदा संगठन में कई बड़े चेहरे
    वर्तमान बीजेपी संगठन में चार सदस्यीय मार्गदर्शक मंडल है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हैं। वहीं संसदीय बोर्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा नितिन नवीन, राजनाथ सिंह, अमित शाह, जेपी नड्डा, बीए येदियुरप्पा, सर्वानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और बीएल संतोष शामिल हैं।

    मौजूदा संगठन में 11 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 7 राष्ट्रीय महासचिव, एक संयुक्त महासचिव, 11 राष्ट्रीय सचिव, सात मोर्चा अध्यक्ष, मीडिया प्रभारी, मीडिया सह-प्रभारी, कोषाध्यक्ष और सह-कोषाध्यक्ष समेत कई पद हैं। नई टीम में इन पदों पर बदलाव के साथ बीजेपी संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की तस्वीर साफ हो सकती है।

  • UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संगठन को और सक्रिय करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्र और विभिन्न मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची में छह नेताओं को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिलीप पटेल को अवध क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है।

    पार्टी के फैसले के मुताबिक रामप्रताप सिंह चौहान को पश्चिम, गीता शाक्य को ब्रज, शंकर लोधी को कानपुर, दिलीप पटेल को अवध, रमेश सिंह को काशी और अभिजात मिश्रा को गोरखपुर क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

    मोर्चों की जिम्मेदारी भी तय
    भाजपा ने अलग-अलग मोर्चों के लिए भी प्रभारियों के नाम घोषित किए हैं। सूची के अनुसार राजेश चौधरी को युवा मोर्चा प्रभारी, संजय राय को पिछड़ा मोर्चा प्रभारी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह को अनुसूचित मोर्चा प्रभारी, कामेश्वर सिंह को महिला मोर्चा प्रभारी, डॉ. प्रियंका रावत को अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रभारी, देवेश कोरी को अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी, शंकर गिरी को किसान मोर्चा प्रभारी बनाया है।

    संगठन के अन्य पदों पर भी नियुक्तियां
    पार्टी ने संगठन से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण दायित्व भी तय किए हैं। गोविंद नारायण शुक्ला को मुख्यालय प्रभारी बनाया गया है। वहीं प्रदेश मंत्री नरेंद्र शर्मा को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है।

    इसके अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रज बहादुर को विस्तारक योजना का संयोजक बनाया गया है। अर्चना मिश्रा को ‘मन की बात’ का संयोजक और राहुल वाल्मीकि को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। भाजपा की इन नियुक्तियों को प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने और अलग-अलग क्षेत्रों व मोर्चों के बीच समन्वय मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन

    दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन


    इंदौर  मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि उपचुनाव का महत्व भले ही आम चुनाव जितना न हो, लेकिन हार को कभी हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस परिणाम की गंभीर समीक्षा करेगी और यह पता लगाएगी कि किन कारणों से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि चुनावी हार हमेशा सीख देने वाली होती है। उन्होंने कहा कि पार्टी का संगठन हर चुनाव के बाद उसकी समीक्षा करता है और दतिया उपचुनाव के परिणामों का भी गहराई से विश्लेषण किया जाएगा। उनका कहना था कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन इस हार पर गंभीरता से विचार करेगा और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    विजयवर्गीय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर चुनाव महत्वपूर्ण होता है। जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, जबकि हार संगठन को आत्मविश्लेषण का अवसर देती है। इसलिए पार्टी इस परिणाम को नजरअंदाज नहीं करेगी, बल्कि सभी पहलुओं पर विचार करते हुए संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर सुधार की दिशा में काम करेगी।

    मीडिया ने जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में आए चुनाव परिणाम को लेकर सवाल किया तो विजयवर्गीय ने कहा कि वे स्वयं चुनाव प्रचार के लिए वहां गए थे। उन्होंने माना कि यह काफी हद तक व्यक्ति आधारित सीट थी और जिस नेता का उस क्षेत्र में व्यक्तिगत प्रभाव था, उनके चुनाव नहीं लड़ने का असर भी परिणामों पर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि कई बार स्थानीय समीकरण और उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता चुनाव परिणामों को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में राजनीतिक परिस्थितियां सामान्य चुनावों से अलग होती हैं।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका, जनसंपर्क अभियान, चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय समीकरणों का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा। भाजपा का प्रयास रहेगा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों और संगठन पहले से अधिक मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरे।

    दतिया उपचुनाव के परिणाम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। कांग्रेस इस जीत को जनता का भाजपा सरकार के खिलाफ संदेश बता रही है, जबकि भाजपा इसे स्थानीय परिस्थितियों और उम्मीदवार आधारित चुनाव मानते हुए आगे की रणनीति बनाने में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि एक उपचुनाव का परिणाम उसके व्यापक जनाधार को प्रभावित नहीं करता, लेकिन इससे मिलने वाले संकेतों को गंभीरता से लेना आवश्यक है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा संगठन अब जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। वहीं कैलाश विजयवर्गीय के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी इस हार को केवल औपचारिक घटना मानकर नहीं छोड़ेगी, बल्कि इसके कारणों की विस्तृत समीक्षा कर संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश करेगी।

  • दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी

    दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी


    दतिया । दतिया विधानसभा उपचुनाव में 6016 वोटों से मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित चुनाव से जुड़े मंत्री, पदाधिकारी और संगठन के प्रमुख नेता शामिल होंगे। इस बैठक में हार के कारणों का विश्लेषण करने के साथ-साथ संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी रणनीति और भीतरघात की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा बैठक में उपचुनाव के प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, राकेश शुक्ला सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में चुनावी प्रबंधन की हर स्तर पर समीक्षा होगी और यह भी देखा जाएगा कि किन कारणों से पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सूत्रों का कहना है कि दतिया शहर में भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन वहां कांग्रेस ने बढ़त बना ली जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला। संगठन की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ पार्षदों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और भीतरघात के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दर्जनभर पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है। समीक्षा बैठक के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    हार के बाद पार्टी के भीतर भी आत्ममंथन की आवाजें तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आत्ममंथन का समय बताते हुए दतिया उपचुनाव का उल्लेख किया। वहीं टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी खुद को शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच वाला बताने लगते हैं तब चुनाव परिणाम प्रभावित होना स्वाभाविक है। उनके इस बयान को भी संगठन के भीतर चल रही चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    भाजपा संगठन जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित कुछ स्थानीय पदाधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों की रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से केंद्रीय संगठन तक भेजी जा सकती है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।

    पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि प्रत्याशी बदलने के बाद संगठन के सभी कार्यकर्ता पूरी मजबूती से एकजुट नहीं हो पाए और इसका असर चुनाव परिणाम पर दिखाई दिया।

    समीक्षा बैठक में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। चुनाव के दौरान वायरल हुए कथित फर्जी पत्रों और भ्रामक पोस्ट की जांच कराई जाएगी। संगठन ऐसे लोगों की सूची भी तैयार कर रहा है जिन्होंने इन पोस्ट को प्रसारित किया था ताकि उनकी भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करती है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी हार की तथ्यपरक समीक्षा करेगी और भविष्य की चुनावी रणनीति को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

  • UP BJP में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल तय, सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष बदलने की तैयारी; शीर्ष नेतृत्व में 50% तक बदलाव संभव

    UP BJP में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल तय, सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष बदलने की तैयारी; शीर्ष नेतृत्व में 50% तक बदलाव संभव



    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यूपी बीजेपी का पुनर्गठन अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसे आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इस बदलाव में राज्य इकाई से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

    संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
    सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की यूपी इकाई में लगभग 50 प्रतिशत तक शीर्ष पदाधिकारियों में बदलाव संभव है। पार्टी का फोकस संगठन को अधिक मजबूत, सक्रिय और चुनावी दृष्टि से प्रभावी बनाने पर है।

    इसके साथ ही सभी क्षेत्रीय इकाइयों के अध्यक्षों को भी बदले जाने की संभावना जताई जा रही है। कुछ मौजूदा पदाधिकारियों को राज्य इकाई में जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि नए चेहरों को क्षेत्रीय नेतृत्व सौंपा जाएगा।

    नई टीम का खाका तैयार
    जानकारी के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक बदलाव को लेकर गहन मंथन किया है। प्रदेश स्तर पर नए पदाधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।

    पार्टी का उद्देश्य ऐसे नेताओं को आगे लाना है जिनका संगठनात्मक अनुभव मजबूत हो और जो बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय करने में सक्षम हों।

    मोर्चों में भी बदलाव संभव
    बीजेपी अपने विभिन्न मोर्चों जैसे युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, एससी मोर्चा, एसटी मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चा में भी नए अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है। इन मोर्चों की भूमिका चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    चुनावी रणनीति के तहत पुनर्गठन
    सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार कर रही है।

    बीजेपी का मानना है कि नए और युवा चेहरों को आगे लाने से संगठन में ऊर्जा आएगी और विपक्ष की रणनीति का बेहतर मुकाबला किया जा सकेगा।

    पहले भी हुए थे जिला स्तर पर बदलाव
    पार्टी पहले ही राज्य के करीब 95 संगठनात्मक जिलों में बड़े बदलाव कर चुकी है। कई जिला अध्यक्षों को हटाकर नए लोगों को जिम्मेदारी दी गई है।

    पार्टी अब उन पदाधिकारियों का मूल्यांकन कर रही है जिन्होंने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने में बेहतर प्रदर्शन किया हैयूपी बीजेपी का यह संभावित फेरबदल आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को नई दिशा देने की कोशिश माना जा रहा है। इससे राज्य में पार्टी की चुनावी रणनीति और अधिक आक्रामक और मजबूत होने की उम्मीद है।

  • संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन

    संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) में परिवर्तन की प्रक्रिया जोरों पर है। दिसंबर 2025 में बिहार के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नितिन नबीन (Nitin Nabin) (45 वर्ष) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (National Executive Chairman) नियुक्त किया गया है। वे भाजपा के इतिहास में सबसे युवा नेता हैं जो इस शीर्ष संगठनात्मक पद तक पहुंचे हैं। नितिन नबीन बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के विधायक हैं और नीतीश कुमार सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे पार्टी के युवा मोर्चा में लंबे समय तक सक्रिय रहे तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर हैं। अब जनवरी 2026 के मध्य तक नितिन नबीन को औपचारिक रूप से भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन के चुनाव को भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अनुमोदित किया जाएगा, जो इस महीने के अंत तक होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद नितिन नबीन द्वारा अपनी नई टीम बनाने के लिए संगठनात्मक फेरबदल किए जाने की उम्मीद है, जो एक ‘समावेशी’ प्रक्रिया होगी। भाजपा के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम भाजपा और संघ परिवार के बीच तालमेल और समन्वय को दर्शाएगी।


    मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद

    एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के संगठनात्मक स्तरों में व्यापक फेरबदल से जुड़ी इस प्रक्रिया के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल हो सकता है। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने यह भी बताया कि जून 2024 में इसके गठन के बाद से इसमें कोई फेरबदल नहीं हुआ है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद है, जिसमें युवा नेतृत्व के साथ-साथ जाट समुदाय के चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। सरकार और संगठन दोनों में जाट समुदाय का घटता प्रतिनिधित्व भी हमारे उच्च कमान के विचार-विमर्श के बिंदुओं में से एक है।


    सरकार और संगठन में आएंगे संघ परिवार से जुड़े लोग

    पार्टी सूत्रों ने कहा कि नबीन ने भाजपा और उसके वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस के बीच संबंधों और समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं, इससे यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे केंद्र सरकार और पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच ‘सक्रिय समन्वय’ सुनिश्चित करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और आरएसएस पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के कामकाज की समीक्षा करने जा रहे हैं और संगठन तथा सरकारी या अर्ध-सरकारी निकायों, जिनमें विभिन्न आयोग भी शामिल हैं, में कई नई नियुक्तियों पर चर्चा करेंगे। एक पार्टी नेता ने कहा कि इससे राज्य के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के लिए केंद्रीय स्तर पर संगठनात्मक या सरकारी भूमिकाएं निभाने का रास्ता खुल जाएगा, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं।

    भाजपा नेता ने कहा कि ऐसे कई नेताओं को समायोजित किए जाने की संभावना है, जिनमें वे नेता भी शामिल हैं जो अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में पार्टी के साथ रहे हैं। ये नेता बिहार जैसे राज्यों के साथ-साथ उन राज्यों से भी होंगे जहां आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और आरएसएस की हालिया समन्वय बैठकों के दौरान, आरएसएस ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे नेताओं की पहचान की जानी चाहिए जो तीन-चार दशकों से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं लेकिन संगठन, सरकार या किसी अन्य सार्वजनिक संस्था में उन्हें स्थान नहीं मिला है। नितिन नबीन उन वरिष्ठ भाजपा नेताओं के समूह में शामिल हैं जो इस प्रक्रिया का समन्वय कर रहे हैं।


    मकर संक्रांति के बाद फेरबदल की संभावना

    भाजपा सूत्रों ने बताया कि हमारा ध्यान उन लोगों को महत्वपूर्ण भूमिकाएं देने पर है जिन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा और संघ के लिए समर्पित कर दिया है। यह प्रक्रिया जारी है, लेकिन घोषणाओं के लिए सीमित अवसर ही उपलब्ध होंगे। सूत्रों ने बताया कि अधिकांश महत्वपूर्ण नियुक्तियां मकर संक्रांति के बाद से लेकर बजट सत्र के प्रारंभ होने तक होने की उम्मीद है, जो फरवरी की शुरुआत से शुरू होगा। इस प्रक्रिया के लिए एक और समयसीमा आगामी राज्य चुनावों की घोषणा से पहले होने की संभावना है।

  • यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी: सैलरी, भत्ते, पेंशन और सुविधाओं का पूरा लेखा-जोखा

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी: सैलरी, भत्ते, पेंशन और सुविधाओं का पूरा लेखा-जोखा


    नई दिल्‍ली । केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी अब उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्वप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाहके करीबी माने जाने वाले पंकज चौधरी का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है।

    राजनीतिक सफर और प्रोफाइल
    ओबीसी वर्ग की कुर्मी जाति से आने वाले पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पार्षद के रूप में की थी। इसके बाद वे गोरखपुर के डिप्टी मेयर बने और वर्ष 1991 में पहली बार लोकसभा पहुंचकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। अब तक वे सात बार सांसद चुने जा चुके हैं और दो बार केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

    पंकज चौधरी की कुल संपत्ति करीब 41 करोड़ रुपये बताई जाती है। वे राहत रूह तेल कंपनी के मालिक हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता 12वीं तक है।

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष को सैलरी मिलती है या नहीं?
    सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कोई सरकारी या संवैधानिक पद नहीं है। यह पूरी तरह पार्टी का संगठनात्मक पद होता है।
    इस कारण इस पद के लिए सरकार की ओर से कोई तय वेतन, पे-स्केल या सैलरी स्लिप नहीं मिलती।

    फिर कमाई कैसे होती है?
    हालांकि औपचारिक सैलरी नहीं होती, लेकिन भाजपा अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों को मानदेय और प्रशासनिक सहयोग देती है।

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये मासिक मानदेय मिलने की चर्चा रही है।

    राज्य अध्यक्षों के लिए कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार यूपी बीजेपी अध्यक्ष को भी करीब 1 से 1.5 लाख रुपये प्रति माह मानदेय मिल सकता है।

    इसके अलावा पार्टी कार्यों के लिए अलग से भत्ते और खर्च की व्यवस्था होती है।

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष को मिलने वाली सुविधाएं
    सैलरी तय न होने के बावजूद सुविधाओं के मामले में यह पद बेहद प्रभावशाली माना जाता है।

    पूरी तरह फर्निश्ड ऑफिस

    पर्सनल सेक्रेटरी, राजनीतिक सलाहकार और सपोर्ट स्टाफ

    आधिकारिक यात्राओं का पूरा खर्च पार्टी वहन करती है

    हवाई, रेल और सड़क यात्रा की सुविधा

    ड्राइवर सहित वाहन, होटल और भोजन का खर्च

    फर्निश्ड आवास की सुविधा

    निजी स्टाफ की सैलरी भी पार्टी फंड से

    मेडिकल सुविधाएं या तो पार्टी के माध्यम से मिलती हैं या फिर उनके मौजूदा सरकारी पद के नियमों के तहत।

    सांसद और मंत्री के तौर पर अलग आय
    पंकज चौधरी फिलहाल लोकसभा सांसद और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री हैं, इसलिए उन्हें इन पदों से मिलने वाली सैलरी और भत्ते अलग से मिलते रहेंगे।

    सांसद के रूप में:
    मासिक वेतन: 1,24,000 रुपये

    निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: 87,000 रुपये

    कार्यालय खर्च: 75,000 रुपये

    दैनिक भत्ता: 2,500 रुपये

    दिल्ली में मुफ्त सरकारी आवास या 2 लाख रुपये HRA

    इसके अलावा:

    150 टेलीफोन कॉल

    50,000 यूनिट बिजली

    24,000 लीटर पानी

    34 हवाई यात्राएं

    एसी ट्रेन यात्रा की सुविधा

    मंत्री पद का लाभ:
    राज्य मंत्री के रूप में उन्हें लगभग 2.30 लाख रुपये प्रतिमाह का वेतन और भत्ता मिलता है।

    पेंशन का क्या नियम है?
    मंत्री पद छोड़ने पर अलग से कोई पेंशन नहीं मिलती

    पेंशन केवल सांसद या विधायक के रूप में किए गए कार्यकाल पर आधारित होती है

    पूर्व सांसदों को वर्तमान में 31,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जो लंबे कार्यकाल के साथ बढ़ती जाती है

    पंकज चौधरी को भविष्य में पेंशन का लाभ उनके लंबे संसदीय अनुभव के आधार पर मिलेगा, न कि मंत्री या पार्टी अध्यक्ष पद के कारण।

    कुल मिलाकर, यूपी बीजेपी अध्यक्ष का पद वेतन से ज्यादा ताकत, प्रभाव और राजनीतिक जिम्मेदारी का होता है। पंकज चौधरी के लिए यह भूमिका न सिर्फ संगठनात्मक रूप से अहम है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की रणनीति में भी निर्णायक मानी जा रही है।