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  • खड़गे के बयान से सियासी भूचाल मोदी को बताया ‘आतंकवादी’ भाजपा ने EC से की सख्त कार्रवाई की मांग

    खड़गे के बयान से सियासी भूचाल मोदी को बताया ‘आतंकवादी’ भाजपा ने EC से की सख्त कार्रवाई की मांग


    नई दिल्ली। तमिलनाडु में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान ने देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में तीखी टिप्पणी करते हुए एक शब्द का प्रयोग किया, जिसे लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। इस बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है और मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है।

    भाजपा नेताओं ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि देश के प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल आपत्तिजनक है बल्कि यह राजनीतिक संस्कृति को भी नुकसान पहुंचाता है। भाजपा का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की टिप्पणियां जनता को गुमराह करने और माहौल को बिगाड़ने का काम करती हैं।

    इस मामले को लेकर भाजपा ने औपचारिक रूप से चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की है कि इस बयान का संज्ञान लिया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार के डर से इस तरह की भाषा का सहारा ले रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इस विवाद में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बयान किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं बल्कि सोच समझकर दिया गया राजनीतिक संदेश है। उनके अनुसार विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री और सरकार पर व्यक्तिगत हमले कर रहा है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

    वहीं भाजपा के एक अन्य नेता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह बयान देश की जनता और लोकतंत्र दोनों का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार चुनावी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।

    विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उनके अनुसार उनका आशय किसी व्यक्ति विशेष पर हमला करना नहीं था बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और विपक्ष के प्रति कथित दबाव की राजनीति को उजागर करना था। उन्होंने कहा कि सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों को दबाने का प्रयास कर रही है और यही बात उन्होंने अपने बयान में कही थी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते हैं वैसे वैसे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होती जाती है। उनका कहना है कि इस तरह के विवाद अक्सर चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं और कई बार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाकर व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप को बढ़ावा देते हैं।

    इस पूरे विवाद ने चुनावी चर्चा का केंद्र बदल दिया है और अब राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप लगाने में जुट गए हैं। फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा: पीएम मोदी के खिलाफ नारे, हाथापाई की नौबत

    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा: पीएम मोदी के खिलाफ नारे, हाथापाई की नौबत

    नई दिल्ली शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण भारी हंगामे के साथ शुरू हुआ। सदन का माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब कुछ विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे शुरू कर दी। देखते ही देखते राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप रुख नोकझोंक में बदल गए और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

    नारे से भड़का विवाद

    सत्र की शुरुआत होते ही कांग्रेस के कुछ दलों ने पीएम मोदी के खिलाफ ‘हाय-हाय’ और ‘मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए। इस पर भाजपा दलों ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया और अपनी सीटों से उठकर नाराजगी जाहिर की। इसी दौरान कांग्रेस विधायक इरफान हाफिज लोन और भाजपा विधायक युधवीर सेठी के बीच नारे बहस हो गई। विवाद उस समय और बढ़ गया जब जवाबी प्रतिक्रिया में भाजपा विधायक ने राहुल गांधी पर टिप्पणी कर दी, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

    हाथापाई की स्थिति, मार्शलों ने कार्यभार मोर्चा

    नारेबाजी के बीच माहौल इतना गरमा गया कि विधायक अपनी सीटों से उठकर एक-दूसरे के करीब पहुंच गए। धक्का-मुक्की और हाथापाई जैसी स्थिति बन गई। कुछ सदस्यों ने पार्षदों को हवा में उछाल दिया। स्थिति बिगड़ती देख सदन के मार्शलों और सुरक्षा कर्मियों को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों के पहाड़ों को अलग कर परिस्थितियों को काबू में किया। इस दौरान सदन की कार्रवाई काफी देर तक बाधित रही।

    अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भी गूंजे नारे

    इस हंगामे से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के पहाड़ों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भी सदन में विरोध दर्ज कराया। उन्होंने अली खामेनेई के खिलाफ कथित कार्रवाई और ईरान-इजरायल तनाव को लेकर उठाए। NC, कांग्रेस, CPI(M) और PDP के पहाड़ों ने मिलकर इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेलंगाना और ईरान के समर्थन में आवाज उठाई।

    स्पीकर की अपील भी जमीनी

    विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कई बार सदन में शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था। नतीजतन, प्रश्नकाल पूरी तरह बाधित रहा और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो।

    अलग-अलग मुद्दों पर टकराव

    जहां एक ओर विपक्ष अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर विरोध जता रहा था, वहीं भाजपा विधायक जम्मू में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। दोनों पक्षों के अलग-अलग मुद्दों ने सदन के माहौल को और ज़्यादा गरमा दिया।