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  • टिकट के बदले 5 करोड़ मांगे गए, TMC छोड़ मनोज तिवारी का बड़ा खुलासा, बंगाल में सियासी भूचाल

    टिकट के बदले 5 करोड़ मांगे गए, TMC छोड़ मनोज तिवारी का बड़ा खुलासा, बंगाल में सियासी भूचाल



    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर और नेता मनोज तिवारी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी पारा और चढ़ा दिया है। तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से नाता तोड़ते हुए पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    मनोज तिवारी, जो कभी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल थे और राज्य सरकार में खेल मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं, अब खुलकर पार्टी के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि विधानसभा चुनाव में टिकट देने के बदले उनसे 5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी।

    तिवारी का कहना है कि यह घटना उनके लिए चौंकाने वाली थी और इसी ने उन्हें पार्टी छोड़ने के फैसले के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में पारदर्शिता और सिद्धांतों की बात करने वाली पार्टी के भीतर इस तरह की मांग बेहद निराशाजनक है।

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि TMC के साथ उनका “चैप्टर खत्म” हो चुका है और अब वे आगे की राजनीतिक राह पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे या नहीं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच बंगाल चुनाव के नतीजों ने पहले ही राज्य की राजनीति की तस्वीर बदल दी है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार राज्य में सत्ता हासिल की है, जबकि लंबे समय से सत्ता में रही ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका लगा है।

    राजनीतिक जानकार मानते हैं कि चुनावी हार के बाद TMC के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और मनोज तिवारी जैसे नेताओं के आरोप इस असंतोष को और हवा दे सकते हैं। ऐसे आरोपों से पार्टी की छवि पर भी असर पड़ सकता है, खासकर तब जब विपक्ष पहले से ही पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर हमलावर रहा है।

    हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक ममता बनर्जी या TMC की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे राजनीतिक अटकलों का दौर और तेज हो गया है।

    इस घटनाक्रम का एक और पहलू यह भी है कि चुनाव के बाद नेताओं का दल-बदल और खुलासे सामने आना आम बात होती है। लेकिन जब कोई बड़ा नाम इस तरह का आरोप लगाता है, तो उसका असर व्यापक होता है और वह सियासी विमर्श का केंद्र बन जाता है।

    कुल मिलाकर, मनोज तिवारी का यह आरोप सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में नए विवाद की शुरुआत साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है।

  • मैं हारी नहीं, हराई गई हूं, ममता का बड़ा हमला इस्तीफा से इनकार, चुनाव आयोग और BJP पर 100 सीट ‘लूटने’ का आरोप

    मैं हारी नहीं, हराई गई हूं, ममता का बड़ा हमला इस्तीफा से इनकार, चुनाव आयोग और BJP पर 100 सीट ‘लूटने’ का आरोप


    नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी साफ कर दिया है कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहा, हम हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है। यह जनादेश नहीं, साजिश है। उन्होंने दो टूक कहा कि वह राजभवन नहीं जाएंगी और इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

    ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग विलेन की तरह काम कर रहा था और भाजपा के साथ मिलकर करीब 100 सीटें “लूटी गईं।” ममता ने दावा किया कि काउंटिंग सेंटरों पर कब्जा किया गया, कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के साथ बदसलूकी हुई और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया गया।

    उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया, छापेमारी की गई और कई आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया। ममता ने आरोप लगाया कि पूरे चुनाव में सत्ता पक्ष ने दबाव और डर का माहौल बनाया। उनका कहना था कि “आधिकारिक तौर पर वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हमने ही चुनाव जीता है।”

    ममता ने अपने राजनीतिक तेवर भी साफ कर दिए। उन्होंने कहा,अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ूंगी, सड़कों पर रहूंगी और शेर की तरह लड़ाई जारी रखूंगी। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए 5 सांसदों समेत 10 सदस्यों की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई जाएगी।

    गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 294 में से 207 सीटें हासिल की हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई। इस नतीजे के साथ ही 15 साल से सत्ता में काबिज ममता सरकार का अंत हो गया।

    इन चुनावों में सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में भी बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। तमिलनाडु में विजय की पार्टी TVK ने चौंकाने वाली जीत दर्ज की, जबकि केरल में कांग्रेस की वापसी हुई और असम-पुडुचेरी में NDA ने सत्ता बरकरार रखी। कुल मिलाकर, ममता बनर्जी के तीखे तेवर और चुनाव नतीजों पर उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और गर्माने वाले हैं।