कांग्रेस ने इकोनॉमी को 6वें से 11वें नंबर तक गिराया
कम महंगाई, तेज विकास दर भारत की पहचान
युवा आबादी भारत की सबसे बड़ी ताकत
राष्ट्रपति के अभिभाषण में झलका भारत का विजन
अब न रुकना है, न पीछे देखना

कम महंगाई, तेज विकास दर भारत की पहचान

मानक अग्रवाल की चेतावनी राजनीति का गिर रहा है स्तर बीजेपी विधायक के जूते वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मानक अग्रवाल ने कहा प्रीतम लोधी संयम बरतें और तमीज से बात करें। इस तरह की भाषा का प्रयोग करेंगे तो उन्हें भागने की जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि राजनीति का परिदृश्य गिरता जा रहा है और बीजेपी सरकार डॉ. अंबेडकर की सोच को दबाना चाहती है। ग्वालियर में 14 मार्च को होने वाले दलित संगठनों के कूच पर उन्होंने आगाह किया कि यदि शहर में अराजकता फैली तो उसकी जिम्मेदार केवल सरकार होगी।
बीजेपी का बचाव आक्रोश निजी पर बरैया के बोल भी गलत बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने प्रीतम लोधी के बयान को उनका निजी मत बताया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि फूल सिंह बरैया की बातों से प्रदेश का एक-एक व्यक्ति आक्रोशित है। सिसौदिया ने कांग्रेस से अपील की कि वे दलित संगठनों के आंदोलन में बहरूपिया बनकर न घुसें और किसी भी प्रकार का उपद्रव न करें। उन्होंने दावा किया कि जितना सम्मान बीजेपी ने बाबा साहेब को दिया है उतना किसी ने नहीं दिया।
गौमांस मामले पर घिरी सरकार दिग्विजय पर भी वार भोपाल नगर निगम BMC स्लॉटर हाउस गौमांस मामले में भी राजनीति गरमा गई है। मानक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि सरकार खुद गौमांस का निर्यात करा रही है और SIT का गठन सिर्फ मामले को रफा-दफा करने के लिए किया गया है। उन्होंने महापौर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। इसके जवाब में राजपाल सिसौदिया ने कहा कि सरकार गौवंश संरक्षण के लिए संकल्पित है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। दिग्विजय सिंह के दौरों को लेकर भी दोनों दल भिड़ गए। जहाँ मानक अग्रवाल ने उनके एक्टिव होने को कांग्रेस के लिए फायदेमंद बताया वहीं बीजेपी ने उन्हें मिस्टर बंटाढार’ कहते हुए तंज कसा कि उनके सक्रिय होने से बची-कुची कांग्रेस भी खत्म हो जाएगी।

पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण मासूम बच्चों समेत कई लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि पहले 25 बच्चों की मौत हुई, अब 13 और लोगों की जान चली गई, लेकिन आज तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली।
कांग्रेस ने इस मामले की जांच के लिए दो पूर्व मंत्रियों के नेतृत्व में एक टीम गठित की है। पटवारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। कांग्रेस की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों और लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो, पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिले और घायलों को बेहतर व निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए।
इस बीच कांग्रेस के पूर्व सांसद उदित राज ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में गलती मानने की बजाय चोरी और सीनाजोरी की जाती है। हर घटना का ठीकरा विपक्ष या पुराने नेताओं पर फोड़ दिया जाता है। उन्होंने देशभर में बढ़ती हिंसा और कथित घोटालों का जिक्र करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम इंदौर पहुंचे और अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि ऐसी कष्टदायक स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए जाएं। मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
दरअसल, बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जब एक रिपोर्टर ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज खर्च के रिफंड को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने कहा, फोकट सवाल मत पूछो। रिपोर्टर के विरोध करने पर विजयवर्गीय ने आपा खोते हुए अपशब्द कह दिए। हालांकि बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने शब्दों को लेकर खेद भी जताया, लेकिन तब तक यह मामला सियासी और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका था।

केंद्रीय मंत्री ने कहाकांग्रेस का महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है। इनके लिए गांधी का मतलब सिर्फ प्रियंका गांधीराहुल गांधीइंदिरा गांधीराजीव गांधी और संजय गांधी तक सीमित रह गया है। उन्हें उस गांधी से समस्या है जो देश और समाज के लिए खड़ा था। बिट्टू ने दावा किया कि जनता अब उस नाम वाले गांधी को नकार चुकी हैजबकि महात्मा गांधी का सम्मान देश में हमेशा बना रहेगा।राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर बिट्टू ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का नाम रोशन करने के लिए विदेश जाते हैंजबकि राहुल गांधी सैर-सपाटे के लिए विदेश रवाना हो जाते हैं। उन्होंने कहा मैंने अभी राहुल गांधी की तस्वीरें जर्मनी से देखीं। सवाल यह है कि राहुल गांधी हैं कहां? देश के अहम मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिएलेकिन वो विदेश में घूमते नजर आते हैं।
इसके बाद बिट्टू ने राहुल और प्रियंका गांधी के बीच कथित टकराव को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि संसद में हाल के दिनों में दिए गए भाषणों को लेकर दोनों के बीच तुलना होने लगी है। बिट्टू के मुताबिककई लोगों ने प्रियंका गांधी के भाषणों की तुलना राहुल गांधी से कीजिससे राहुल नाराज हो गए। उन्होंने कहादोनों गांधी के बीच बड़ी भारी लड़ाई चल रही है। राहुल गांधी इसी नाराजगी में परिवार और पार्टी से झगड़ा कर विदेश चले गए हैं।केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर गंभीर समस्याएं हैं। उनके अनुसारराहुल गांधी का विदेश जाना केवल व्यक्तिगत दौरा नहींबल्कि पार्टी और परिवार के अंदरूनी तनाव का नतीजा है। हालांकिइन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा नेताओं ने कांग्रेस में अंदरूनी कलह का दावा किया हो। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला भी सोशल मीडिया पर कांग्रेस को लेकर ऐसे ही आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने लिखा था किटीम प्रियंका बनाम टीम राहुल अब खुलकर सामने आ गई है और कांग्रेस की आंतरिक कलह सार्वजनिक हो चुकी है।शहजाद पूनावाला ने ओडिशा से कांग्रेस के पूर्व नेता मोहम्मद मुकीम के पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि पार्टी में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि मुकीम ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मल्लिकार्जुन खरगे को हटाने और प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस समय संगठनात्मक और वैचारिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और आपसी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। दूसरी ओरकांग्रेस की चुप्पी ने इन आरोपों को और हवा दे दी है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इन दावों पर सफाई आ सकती हैलेकिन फिलहाल भाजपा इन बयानों के जरिए विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के रिश्तों को लेकर लगाए गए ये आरोप सियासी बयानबाजी का हिस्सा हैं या वास्तव में पार्टी के भीतर किसी बड़े बदलाव का संकेतयह आने वाला समय ही बताएगा।

पृथ्वीराज चव्हाण ने इसी महीने यह दावा दूसरी बार दोहराया है। इससे पहले सांगली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी उन्होंने इसी तरह की बात कही थी। चव्हाण का कहना है कि वे लंबे समय तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में काम कर चुके हैं और दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों को गहराई से समझते हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया, जिससे उनके बयान पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
अमेरिका की घटनाओं से जोड़ा भारत का राजनीतिक भविष्य
अपने बयान में चव्हाण ने अमेरिका की हालिया राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में एक व्यक्ति द्वारा कई बड़े नेताओं के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन किए गए हैं, जिनके खुलासे जल्द होने वाले हैं। चव्हाण के अनुसार, अमेरिका में प्रस्तावित एक नए कानून के तहत 19 दिसंबर को कई बड़े नाम सार्वजनिक किए जा सकते हैं, जिसका असर वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं पता कि वे नेता कौन हैं, लेकिन इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।
एपस्टीन फाइल्स का हवाला
पृथ्वीराज चव्हाण ने अमेरिका में जेफ्री एपस्टीन फाइल्स का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन फाइल्स के सामने आने से अमेरिका की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा हो गया है और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्थिति भी इससे प्रभावित हुई है। हाल ही में डेमोक्रेटिक समिति द्वारा ट्रंप और एपस्टीन से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद अमेरिका में राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
भाजपा ने दावे को बताया अफवाह
पृथ्वीराज चव्हाण के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका की किसी भी घटना का भारत की सरकार या प्रधानमंत्री से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इस तरह की बातें जानबूझकर फैलाई जा रही अफवाहें हैं।
भाजपा का आरोप है कि मराठी प्रधानमंत्री बनने और सत्ता परिवर्तन के दावे देश में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हैं। पार्टी ने साफ कहा है कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और ऐसे बयानों का कोई आधार नहीं है।
फिलहाल, पृथ्वीराज चव्हाण के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। जहां कांग्रेस समर्थक इसे संभावित बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे निराधार बयानबाजी मान रही है। अब सभी की निगाहें 19 दिसंबर पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि यह दावा महज राजनीतिक बयान था या इसके पीछे कोई बड़ा घटनाक्रम छिपा है।

उल्लेखनीय है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान जहां विपक्ष ने एसआईआर, वोट चोरी और वंदे मातरम के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसी के जवाब के दौरान बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने बीजेपी पर तीखा व्यंग किया।
इससे पहले हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने राहुल गांधी के जर्मनी दौरे को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं उनके (राहुल गांधी) के दौरों की कोई खबर नहीं रखती हूं, न ही उनके बारे में कोई न्यूज पढ़ती हूं। उनकी खबरें हमेशा बेकार ही होती हैं।’ उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के चरित्र में कोई ताकत नहीं है इसलिए मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है।
राहुल गांधी पर्यटन वाले नेता
राहुल गांधी के जर्मनी यात्रा को लेकर भाजपा ने निशाना साधते हुए उन्हें पर्यटन वाला नेता कहा है। एक तरफ जहां, सत्ताधारी बीजेपी ने उन पर बार-बार विदेश यात्राओं के लिए अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। तो वहीं, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं का हवाला दिया है।